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उत्तराखंड

उत्तराखंड: आलू के साथ प्याज ने भी पकड़ी रफ्तार,महिलाएं बोलीं- महंगाई डायन खाए जात है

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ऋषिकेश। पिपली लाइव फिल्म के गाने की यह पंक्तियां महंगाई डायन खाए जात है… प्याज और आलू के दामों पर सटीक बैठती हैं क्योंकि महंगाई के सफर पर निकला प्याज भी हम सफर बन गया है। पिछले दो सप्ताह में प्याज के रेट में लगातार तेजी आई हैं।

खुदरा बाजार में पहले बिक रहा 35 रूपये प्रति किलो प्याज अब 50 से 60 रूपये किलो बिक रहा है। वहीं, त्योहार से पहले आलू और टमाटर ने भी भाव खाना शुरू कर दिया है। थोक विक्रेता कीमतें बढ़ने की वजह से मंडियों में आवक कम होना बता रहे हैं। ऐसे में आम आदमी का बजट गड़बड़ा गया है।

बताते हैं कि नासिक, गुजरात में हुई बरसात से प्याज की खेती पर असर पड़ा है। जिसके अंतर्गत निर्यात कम होने से प्याज की कीमतों में उछाल आया है। बढ़ती कीमतों ने रसोई से प्याज को गायब कर दिया है। सब्जियां बिना प्याज के बनाई जा रही है। सलाद में भी प्याज नजर नहीं आता।लॉक डाउन के बाद बाजार में प्याज की कीमत में इजाफा हुआ था। मंडियों में आवक बढ़ी तो भाव कम होने लग गए। पिछले माह के अंत में प्याज की कीमत 30 रूपये थी ,जो अब 50 रूपये हो गई है।

क्या बोलीं घरेलू गृहणियां

लक्ष्मण झूला निवासी कांता रावत ने बताया प्याज के अलावा आलू व टमाटर के दामों में आई तेजी से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। रसोई घर में प्याज लानी बंद कर दी है।
हरिद्वार रोड निवासी मीनू ग्रोवर ने बताया पिछले दो सप्ताह में प्याज के रेट दुगने हो गए हैं। जिससे प्याज के साथ सब्जी बनाना बंद कर दिया है। आलू, टमाटर के के दामों में वृद्धि हो जाने से भी रसोई के बजट में भी गिरावट आ गई है।
गीता नगर निवासी सविता रैवानी ने कहा कि त्योहार चल रहे हैं, ऐसे में प्याज, आलू, टमाटर के दामों में आई तेजी से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। अब प्याज का उपयोग कम कर दिया है।
हरिद्वार रोड निवासी अर्चना पाहवा के अनुसार पहले से ही कोरोना संकट से जूझ रहे हैं। अब सब्जियों के दामों में आई तेजी से। रसोई का खर्च बहुत सोच समझ कर करना पड़ रहा है।

 

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