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उत्तराखंड

सर्व पितृ अमावस्या पर देवभूमि ऋषिकेश में हजारों श्रद्धालुओं ने तर्पण से किया पितरों को तृप्त

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ऋषिकेश। सर्व पितृ अमावस्या पर देवभूमि ऋषिकेश में बड़ी संख्या में देश के विभिन्न प्रांतों से आए हजारों की संख्या में जहां श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर तर्पण किया। वहीं पितरों की विदाई के साथ गुरुवार को श्राद्ध पक्ष का समापन भी हो गया।
देवभूमि ऋषिकेश में आज का दिन पूरी तरह से धार्मिक कर्मकाण्ड के नाम रहा। सुबह से ही पितृ अमावस्या पर गंगा में डुबकी और पितरों के तर्पण के लिए देश के विभिन्न प्रांतों से आए हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गंगा तट त्रिवेणी घाट पर उमड़नी शुरू हो गई थी।

पितृ अमावस्या को दान करने पर पितृजन तृप्त होते हैं

हिन्दू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या कहा जाता है। इस दिन श्राद्ध पक्ष का समापन होता है। पितृ लोक से आए हुए पितृजन अपने लोक लौट जाते हैं। पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन ब्राह्मण भोजन और दान पुण्य का भी महात्म्य बताया गया है।
पंडितों की मानें तो पितृ अमावस्या को दान करने पर पितृजन तृप्त होते हैं। जाते समय अपने पुत्र, पौत्रों और परिवार को आशीर्वाद देकर जाते हैं। यह मोक्ष देने वाले भगवान विष्णु की पूजा का दिन माना जाता है। इस कारण सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का विसर्जन विधि विधान से किया जाना चाहिए।

ये है मान्यता

मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या को उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु अमावस्या को होती है।वहीं जिन लोगों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती है उन लोगों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान सर्वपितृ अमावस्या को किया जाता है।इसीलिए सर्वपितृ अमावस्या को बहुत ही विशेष माना गया है।
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