देश की आजादी में नेताजी का अप्रतिम योगदान : युद्धवीर सिंह

हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार में शनिवार को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में’ स्वतंत्रता आंदोलन के आधारभूत नायक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ‘ विषयक ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय में नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया।

मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रमुख युद्धवीर ने कहा कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस में बचपन से ही देश भक्ति और समाज सेवा की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। मात्र 48 वर्ष की अवस्था में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और देश को आजाद कराने में जो योगदान दिया, वह अप्रतिम है। उनका जीवन समस्त भारतवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

उन्होंने ने कहा कि नेताजी जी सभी का सम्मान करते थे। उन्होंने कभी भी किसी का तिरस्कार नहीं किया । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डाॅ. हेडगेवार और नेताजी के विचार मिलते थे। नेताजी देश को शीघ्र आजाद कराने के लिए सशस्त्र युद्ध को अपरिहार्य मानते थे। यहां तक कि जरूरत पड़ने पर इससे आगे भी जाने को तैयार थे। देश को आजाद कराने के लिए आजाद हिन्द फौज जैसी सशक्त सेना के साथ ही महिलाओं की झांसी की रानी सेना और बच्चों की बाल सेना तैयार की। उन्होंने कहा कि नेताजी के आदर्शों पर चलकर ही देश को और सशक्त बनाया जा सकता है।

संगोष्ठी के अध्यक्ष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि ‘ कोई चलता पद चिह्नों पर, कोई पद चिह्न बनाता है।’ नेताजी के जीवन में यह दोनों बातें समाहित हैं। उन्होंने कहा कि कि नेताजी के जीवन पर उनकी मां, स्वामी विवेकानंद और स्वामी अरविंद घोष का गहरा असर था। इन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन देश को स्वतंत्र कराने में लगा दिया। वह देश के स्वतंत्रता आंदोलन के आधारभूत नायक और देश के प्रेरणा स्त्रोत हैं। उन्होंने पिता की इच्छा के अनुरूप आईसीएस की परीक्षा पास की। आईसीएस की नौकरी देश को आजाद कराने और देश सेवा के लिए छोड़ दी।

इस दौरान अंग्रेज सरकार ने उन्हें कई बार नजरबंद किया। नेताजी का मानना था कि देश को आजाद कराने के लिए अहिंसा के साथ शिवाजी के रास्ते पर चलना होगा । वह मानते थे कि देश को आजाद कराने के लिए सशस्त्र युद्ध आवश्यक है। उनका एक मात्र उद्देश्य देश को आजाद करना था। इसी अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने आजाद हिंद फौज बनाई। संगोष्ठी के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संगोष्ठी का संचालन विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता डाॅ. लक्ष्मी नारायण जोशी ने किया। इस मौके पर डाॅ. धीरज शुक्ल, डाॅ. अरूण कुमार मिश्र, डाॅ.प्रकाश पंत, श्रीप्रकाश चंदोला सहित विश्वविद्यालय के अध्यापक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।