हर तीन साल में उत्तराखंड के पर्यावरण की रिपोर्ट बनवाएं मुख्य सचिव : हाईकोर्ट नैनीताल

उच्च न्यायालय ने देहरादून के सहस्रधारा, आमवाला व राऊ नदी क्षेत्र में नदी की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने मुख्य सचिव को हर तीन वर्ष में उत्तराखंड के पर्यावरण संरक्षण की जमीनी हकीकत बयान करती एक विस्तृत रिपोर्ट सर्वे ऑफ इंडिया से बनवाने के निर्देश दिए हैं।
 
हर तीन साल में उत्तराखंड के पर्यावरण की रिपोर्ट बनाएं मुख्य सचिव : हाईकोर्ट नैनीताल

देहरादून। उच्च न्यायालय ने देहरादून के सहस्रधारा, आमवाला व राऊ नदी क्षेत्र में नदी की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने मुख्य सचिव को हर तीन वर्ष में उत्तराखंड के पर्यावरण संरक्षण की जमीनी हकीकत बयान करती एक विस्तृत रिपोर्ट सर्वे ऑफ इंडिया से बनवाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि रिपोर्ट में जल, जंगल जमीन के साथ-साथ वायु की स्थिति और पूरे पर्यावरण का लेखाजोखा होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा है कि देहरादून, नैनीताल सहित सभी शहरों की ऐसी रिपोर्ट अलग से हर दो वर्ष में तैयार की जाए ताकि अनियंत्रित शहरी विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित किया जा सके। इसमें जल, जंगल, जमीन के साथ साथ वायु की स्थिति और पूरे पर्यावरण की जानकारी हो। 

न्यायालय ने यह भी कहा है कि देहरादून, नैनीताल समेत सभी शहरों की भी ऐसी रिपोर्ट प्रत्येक दो वर्ष में तैयार की जाए, जिससे अनियंत्रित शहरी विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित किया जा सके। वहीं डीएम देहरादून 14 दिसंबर तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करें, जिसमें बताएं कि एक वर्ष में अतिक्रमण संबंधी कितनी शिकायतें कार्यालय में मिली हैं और क्या कार्रवाई की गई। सुनवाई के लिए 15 दिसंबर की तिथि नियत की गई है। 

मामले की सुनवाई में बुधवार को शहरी विकास सचिव, जिलाधिकारी देहरादून, उपाध्यक्ष एमडीडीए और मुख्य नगर आयुक्त कोर्ट में पेश हुए। शहरी विकास सचिव ने कोर्ट को बताया कि देहरादून व हरिद्वार में मास्टर प्लान के अनुसार कार्य किया जा रहा है। शेष जिलों में सरकार इसे लागू करने के लिए प्रयासरत है। इस पर कोर्ट ने कहा कि इसे शीघ्र लागू किया जाए।

मास्टर प्लान भविष्य के नियोजन को लेकर किया जाए, जिसमें अस्पताल, कार्यालय, स्कूल, आवासीय क्षेत्र, व्यावसायिक जोन विभाजित हों। सचिव ने कहा कि उत्तराखंड का 1964 से सर्वे नहीं हुआ है, जबकि इसे हर पांच साल में किया जाना होता है। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ में हुई। दून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अजय नारायण शर्मा ने जनहित याचिका दायर की है।