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उत्तर प्रदेश

कोरोना महामारी में यूपी सरकार बरत रही घोर लापरवाही- प्रमोद तिवारी

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लालगंज (प्रतापगढ़)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने प्रदेश के नोएडा गौतमबुद्धनगर मे कोरोना महामारी को लेकर पैतीस लोगों को लापरवाहीपूर्वक संक्रमित घोषित किये जाने को बडी लापरवाही करार दिया है।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि पहले पैतीस लोगों को पाजिटिव घोषित किया गया और इन्हें तीन दिनों तक कोविड-19 के अस्पताल मे रखा भी गया। प्रमोद तिवारी के मुताबिक तीन दिनो बाद यह पता चला कि इन सभी की पाजिटिव रिर्पोट पूरी तरह गलत थी।

उन्होने सरकार पर कटाक्ष किया कि पैतीस-पैतीस लोगों को कोविड अस्पताल मे रखकर इनके जीवन को खतरे मे डालने से यह स्पष्ट है कि यूपी सरकार कोरोना महामारी को गैर जिम्मेदाराना से लेते हुए इस जंग मे कतई गंभीर नही है।

उन्होने इसे प्रदेश की जनता के लिए भयावह चिंता ठहराते हुए सरकार से लापरवाही की उच्चस्तरीय जांच कराये जाने को भी कहा है। वहीं प्रमोद तिवारी ने कहा कि इस समय गैर भाजपा शासित राज्यों मे भी कोरोना महामारी से लड़ने की जगह बीजेपी की केन्द्रीय सत्ता सरकारो को गिराने मे खरीद फरोख्त मे जुटी है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान के हालिया इंदौर के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होने यह स्वीकार भी किया है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और एक अन्य मंत्री तुलसी सिलवट सिर्फ मंत्री पद की ही तो मांग कर रहे थे न कि यह लोग कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद चाहते थे।

वहीं राजस्थान मे कांग्रेस विधानमण्डल दल के मुख्य सचेतक की बुधवार को वहां दर्ज कराई गई एक रिर्पोट मे भी राज्यसभा चुनाव और राजस्थान की पूर्ण बहुमत की निर्वाचित सरकार गिराए जाने के लिए विधायको पर भारी धनराशि दिये जाने के प्रस्ताव का दबाव बनाया जा रहा है।

प्रमोद तिवारी ने दावा किया है कि इस प्रकरण को भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने भी संज्ञान मे लिया है। पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि नोएडा तथा राजस्थान व मध्य प्रदेश के हालिया घटनाचक्र ने यह भी साबित किया है कि भारत मे कोरोना संक्रमण के अत्यन्त खतरनाक स्थिति होने के बावजूद भाजपा राजनीति की रोटी सेंक रही है और वह गैर जिम्मेदारानापन से देश की जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ भी कर रही है।

 

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उत्तर प्रदेश

कानपुर मुठभेड़ के शहीदों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये देने का ऐलान

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  • कानपुर पहुंच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि
  • शहीदों के परिजनों को असाधारण पेंशन भी दी जाएगी, एक सदस्य को मिलेगी नौकरी

कानपुर। उत्तर प्रदेश कानपुर नगर जनपद में बदमाशों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए आठ पुलिस कर्मियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि सभी शहीदों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये दिया जाएगा।

इस कांड के अपराध को जिंदा या मुर्दा पकड़ें

इसके अलावा असाधारण पेंशन की भी व्यवस्था की जाएगी। यही नहीं सभी शहीदों के एक-एक परिजन को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। उन्होंने सख्त लहजे में पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस काण्ड के अपराधी जिंदा या मुर्दा पकड़े जाएं।

पुलिस लाइन पहुंच दी श्रद्धांजलि

चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरु गांव में गुरुवार की देर रात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गयी पुलिस टीम पर हिस्ट्रीशीटर व उसके साथियों ने गोली बरसा दी। अंधाधुंध फायरिंग में सीओ बिल्हौर देवेन्द्र मिश्रा, थानाध्यक्ष शिवराजपुर महेश चन्द्र यादव समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गये। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को कानपुर पुलिस लाइन पहुंचे और शहीदों के पार्थिव शरीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

एक एक करोड़ देने का ऐलान

इस दौरान मुख्यमंत्री ने एनकाउंटर में शहीद हुए आठ पुलिसकर्मियों के परिजनों के लिए एक-एक करोड़ रुपये देने का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक परिवार से एक-एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाएगी। साथ ही साथ असाधारण पेंशन की व्यवस्था भी की जाएगी।

व्यर्थ नहीं जाएगी शहादत

उन्होंने कहा कि पुलिस के जवानों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। पत्रकार वर्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दिनभर की ड्यूटी के बाद अपराधियों और माफिया के खिलाफ जारी पुलिस के अभियान के तहत ही पुलिस टीम छापा मारने गई थी। जिन लोगों ने घटना को अंजाम दिया है, उन्हें कानून के दायरे में कठोर से कठोर सजा दी जाएगी।

अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा

योगी ने कहा कि किसी भी कीमत पर अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि घटना को अंजाम देने वालों को पकड़ने के लिए टीमें बनाई गईं हैं, जो छापेमारी कर रही है। पुलिस मुठभेड़ में दो अपराधी मारे गए हैं और हमारे जवानों से छीने गए असलहों में से कुछ बरामद हो गए हैं।

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उत्तर प्रदेश

कानपुर एनकाउंटर : बचपन में ही चल बसी थीं शहीद सुल्तान सिंह की मां, दादा ने बनाया था काबिल

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झांसी। उत्तर प्रदेश के कानपुर में बीती रात मुठभेड़ में शहीद हुए आठ पुलिस कर्मियों ने आरक्षी सुल्तान सिंह मऊरानीपुर में ही पले बढ़े थे। सुल्तान का ख्वाव अपनी सात साल की बेटी को अच्छा डाॅक्टर बनाने का था। कानपुर में मुठभेड़ के दौरान सुल्तान के शहीद होने की खबर के बाद से उनके ननिहाल में मातम पसरा हुआ है। वही, पुलिस महकमे में राजकीय सम्मान के साथ उनके अन्तिम संस्कार की तैयारी चल रही है। हालांकि अभी उनके पार्थिव शरीर के आने का स्थान तय नहीं हुआ है।

ननिहाल में हुई पढ़ाई

झांसी जिले के सदर तहसील स्थित गांव भोजला निवासी शहीद सुल्तान सिंह के पिता हर प्रसाद बेटे की मौत की खबर सुनकर कानपुर रवाना हो गए। बेटा सुल्तान बचपन से ही तहसील व कस्बा मऊरानीपुर के चैक दमेला स्थित अपनी ननिहाल के इसी घर में पला बड़ा है। उसकी शिक्षा-दीक्षा यहीं से हुई है। मां भी यही रहती थी, पिता भी यही रहते थे। कानपुर में अचानक शहीद हुए सुल्तान की खबर जैसे ही यहां आई। घर में मातम पसर गया। सुल्तान का ख्वाब था कि उसकी बेटी चेरी एक बहुत बड़ी डॉक्टर बने।

छोटे भाई की भी हो गई थी मौत

सुल्तान के ममेरे भाई अशोक ने बताया कि सुल्तान तीन भाई थे। बब्लू सबसे बड़े भाई हैं। जो भोजला में आटा चक्की चलाते हैं। उनसे छोटे सुल्तान थे। और सबसे छोटे भाई सोनू थे। जिसकी पांच वर्ष पहले मौत हो गई थी। सुल्तान की नौकरी आठ वर्ष पूर्व मऊरानीपुर में अपने ननिहाल में रहते हुए ही लगी थी। सुल्तान की पहली पोस्टिंग जालौन के उरई थाने में थी। सुल्तान अपने पीछे पत्नी ऊर्मिला वर्मा व सात वर्ष की मासूम बेटी चेरी को अपने पीछे छोड़ गए हैं।

मां भी नहीं, दादा ने पाला

वहीं सुल्तान सिंह के चचेरे भाई अभय कुमार ने बताया कि वे पांच साल के थे तब से यहां आकर पढ़ रहे हैं। इनकी मां बचपन में ही चल बसी थी। उनकी एक सात साल की लड़की है। हम तो सरकार से ये कहेंगे कि उनकी लड़की की पढ़ाई की जिम्मेदारी ले। मृतक सिपाही के दादा रामदास ने बताया कि उसकी पोस्टिंग कानपुर हो गई थी। उनकी मां बचपन में ही गुजर गई थी इसलिए उसकी परवरिश यहीं हुई। 2012 में उसका पुलिस में सेलेक्शन हुआ था। अब देखें योगी जी क्या कर रहे हैं और क्या नतीजा निकलता है।

 

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उत्तर प्रदेश

कानपुर एनकाउंटर : शहीद थानाध्यक्ष महेश की मां बोली, बेटे ने क्या बिगाड़ा था किसी का   

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रायबरेली। कानपुर में देर रात हुई मुठभेड़ में शहीद आठ पुलिस कर्मियों में रायबरेली का भी एक लाल है। शुक्रवार को जैसे ही यह सूचना मिली कि उनका बेटा शहीद हो गया है तो पूरे गांव में मातम पसर गया। हर जुबां में शहीद की दिलेरी की चर्चा है।

बेटे ने क्या बिगाड़ा था किसी का

सरेनी थाना क्षेत्र के वनपुरवा निवासी देव नारायण यादव के पुत्र महेश प्रताप यादव यूपी पुलिस में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात हैं। वह वर्तमान में कानपुर देहात के शिवराजपुर थाना में थानाध्यक्ष है। महेश दो भाई थे और वह इस समय लखनऊ में रहते थे। पति के शहीद होने की खबर मिलते ही पत्नी संध्या बार-बार चीखते चिल्लाते हुए बेहोश हो जा रही है। महेश की मां का भी यही हाल है। वह तो रोते-रोते यह कह रही है कि उनके बेटे ने किसी का क्या बिगाड़ा था जो उसकी जान चली गयी। इस ख़बर से गांव में भी शोक की लहर है। महेश का पूरा परिवार काफी सादगी वाला है। महेश का स्वाभाव मिलानसार था।

बेटे की फोन पर हुई थी बात

मेडिकल की पढाई कर रहा महेश का बड़ा बेटा विवेक का कहना है कि देर रात को पिता से फोन बार आखिरी बार बात हुई थी। फोन उठाते हुए उन्होंने कहा था कि वह एक मुठभेड़ में है बात में बात करते हैं। इस पर बात की जानकारी होने पर विवेक का मन पहले से घबराने लगा था। शुक्रवार को जैसे ही उसके पिता के शहीद होने की खबर मिली तो परिवार में रोना-पीटना मच गया।  
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