UP Election: बड़ी संख्या में जाति सम्मेलन करेगी भाजपा, जानें क्या है आगे की रणनीति...

यूपी में विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गयी है जिसको लेकर सभी पार्टियां मैदान में उतरने के लिए तैयार है बसपा और भाजपा की ओर से जाति आधारित सम्मेलन बड़ी संख्या में किए जा रहे हैं। बीजेपी की बात करें तो उसने जातिगत समीकरणों को साधने के लिए राज्य में 200 जातीय सम्मेलन करने का फैसला लिया है।

 
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UP Election:  बड़ी संख्या में जाति सम्मेलन करेगी भाजपा, जानें क्या है आगे की रणनीति...

यूपी में विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गयी है जिसको लेकर सभी पार्टियां मैदान में उतरने के लिए तैयार है बसपा और भाजपा की ओर से जाति आधारित सम्मेलन बड़ी संख्या में किए जा रहे हैं। बीजेपी की बात करें तो उसने जातिगत समीकरणों को साधने के लिए राज्य में 200 जातीय सम्मेलन करने का फैसला लिया है।

अमित शाह शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे हैं। निषाद अथवा मल्लाह बिरादरी के वोट यूपी के कुछ जिलों में बड़ी संख्या में हैं और बीजेपी गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों की लामबंदी की रणनीति में इन्हें अहम मानती रही है।

बता दे भाजपा ने 2017 में छोटे दलों के साथ गठबंधन की रणनीति अपनाई थी और इसके तहत उसे बड़ी सफलता मिली थी। लेकिन इस बार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने उसका साथ छोड़ दिया है और ओपी राजभर ने सपा के साथ जाने का फैसला लिया है।

निषाद पार्टी से बीजेपी ने इस बार गठबंधन का ऐलान किया है। इसके अलावा अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल भी भाजपा के साथ हैं, जिसकी यूपी के कई जिलों में अच्छी खासी आबादी है। ऐसे में 2022 में वह फिर से जातीय समीकरणों को साधने के लिए छोटी पार्टियों को साथ लेकर चल रही है। निषाद पार्टी के जरिए भाजपा दलित समुदाय के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश में है, जिनके राज्य में 20 फीसदी के करीब वोट हैं।

मायावती के कोर वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की तैयारी
मायावती ने सेंध की रणनीति अपनाई है। उत्तराखंड की राज्यपाल रहीं बेबी रानी मौर्य को उन्होंने इसके लिए उतारा है। यूपी की दलित बिरादरियों में आधे से ज्यादा वोट जाटव समुदाय के ही हैं। भाजपा के दलित वोटों के पीछे जाने की यह वजह है सवर्णों में ब्राह्मणों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा किसान आंदोलन के बाद से जाटों के भी काफी हद तक भाजपा से छिटकने की बातें की जा रही हैं।