कनाडा से काशी पहुंचीं मां अन्नपूर्णा, सीएम योगी ने की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा, जानिए इसकी खास बातें

 मां अन्नपूर्णा की मूर्ति आखिरकार कनाडा से  काशी विश्वनाथ धाम पहुंच गई। 108 साल पहले यह मूर्ति चोरी हो गई थी और इसे तस्करी कर कनाडा पहुंचा दिया गया था।  
 
 Statue of Mother Annapurna returned from Canada
मां अन्नपूर्णा की मूर्ति

वाराणसी।  मां अन्नपूर्णा की मूर्ति आखिरकार कनाडा से  काशी विश्वनाथ धाम पहुंच गई। 108 साल पहले यह मूर्ति चोरी हो गई थी और इसे तस्करी कर कनाडा पहुंचा दिया गया था।  काशी पहुंचने पर मूर्ति को पालकी पर रखा गया। इस दौरान वहां मौजूद मुख्यमंत्री योगी ने खुद पालकी उठाई और प्रतिमा को स्थापना स्थल तक पहुंचाया। 

मूर्ति को विश्वनाथ मंदिर के ईशान कोण में स्थापित किया गया। सीएम योगी के हाथों प्राण प्रतिष्ठा किया गया। कनाडा से काशी पहुंची माता अन्नपूर्णा की प्राचीन मूर्ति को बाबा विश्वनाथ के विशेष रजत सिंहासन पर विश्वनाथ धाम में प्रवेश कराया गया।  

कनाडा की आर्ट गैलरी में थी मूर्ति

बनारस शैली में उकेरी गई 18वीं सदी की यह मूर्ति कनाडा की यूनिवर्सिटी आफ रेजिना में मैकेंजी आर्ट गैलरी की शोभा बढ़ा रही थी। इस आर्ट गैलरी को 1936 में वकील नार्मन मैकेंजी की वसीयत के अनुसार तैयार किया गया था. वर्ष 2019 में विनिपेग में रहने वाली भारतीय मूल की मूर्तिकार कला विशेषज्ञ दिव्‍या मेहरा को प्रदर्शनी लगाने के लिए आमंत्रित किया गया था. यहां उन्होंने मूर्ति पर गहन अध्‍ययन किया. इसी दौरान उन्हें इस मूर्ति के भारत के होने का पता चला.

कनाडा ने शिष्टाचार भेंट के तौर पर लौटाई मूर्ति

दिव्‍या मेहरा ने पता लगाया कि गुलाम भारत में वाराणसी में गंगा किनारे क्षेत्र से 1913 के आसपास मां अन्नपूर्णा की मूर्ति चोरी हुई थी. चोरी होने के बाद मूर्ति तस्करों द्वारा गुपचुप तरीके से यह मूर्ति कनाडा पहुंच गई और फिर मैकेंजी आर्ट गैलरी में शोभा बढ़ाने लगी. मूर्ति पर अध्ययन करने के बाद दिव्या मेहरा ने भारतीय दूतावास को इसके बारे में सूचित किया. मूर्ति का इतिहास सामने आने के बाद कनाडा सरकार ने इसे भारत सरकार को शिष्‍टाचार भेंट के तौर पर लौटाने की पेशकश की. अब यह मूर्ति नई दिल्‍ली राष्‍ट्रीय संग्रहालय होते हुए वाराणसी पहुंच रही है.

मां अन्नपूर्णा की मूर्ति की खासियत

चुनार के बलुआ पत्‍थर से बनी अन्नपूर्णा की यह मूर्ति बहुत ही खास है. मूर्ति विशेषज्ञों ने इसे 18 वीं सदी का बताया है. करीब तीन सदी पुरानी होने की वजह से यह मूर्ति काफी हद तक अपनी प्रकृति खो चुकी है. हालांकि ​कनाडा की आर्ट गैलरी में इसका रखरखाव काफी बेहतर रहा है. वाराणसी में आज भी इसी काल की कई मूर्तियां हैं, जो काशी के प्रस्‍तर कला की पहचान हैं। इस मूर्ति में मां अन्नपूर्णा के एक हाथ में खीर का कटोरा और दूसरे हाथ में चम्‍मच है. माता का यह स्वरूप आस्था का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि मां अपने हाथों से चम्मच के खीर का प्रसाद भक्तों के बीच बांटकर उन्हें धन-धान्‍य से परिपूर्ण होने का आशीर्वाद दे रही हैं. खासकर काशी में अन्नपूर्णा माता को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां कभी कोई भूखा नहीं रहता.