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उत्तर प्रदेश

विधायक अमनमणि ने रचाई दूसरी शादी, मध्‍य प्रदेश की ओशिन के साथ बंधन में बंधे

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  • पहली पत्नी सारा की हो गई थी संदिग्‍ध हालात मेें मौत

  • विधायक अमनमणि पर लगा सारा की हत्या का आरोप,चल रही है सीबीआई जांच

  • हाल में लॉकडाउन के नियमों को तोड़ कर उत्तराखंड पहुंच गए थे विधायक अमनमणि

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के महराजगंज की नौतनवां सीट से निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी की आज दूसरी शादी हो गई। गोरखपुर के एक निजी होटल में उन्‍‍‍‍‍‍‍‍होंने मध्‍य प्रदेश की ओशिन के साथ सात फेरे लिए। हाल में अमनमणि उस समय चर्चा में आए थे जब वह लॉकडाउन के नियमों को तोड़ कर काफिले के साथ उत्तराखंड पहुंच गए थे।

सारा की हत्‍या का आरोप

( अमनमणि और उनकी पहली पत्नी सारा की फाइल फोटो)

विधायक अमनमणि की पहली पत्नी सारा की जुलाई 2015 में  संदिग्‍ध हालात मेें मौत हो गई थी। घटना उस समय हुई थी जब सारा अमनमणि के साथ  कार से लखनऊ से दिल्ली जा रही थीं । अमनमणि पर सारा की हत्‍या का आरोप लगा। इस मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है।

शादी में पहुंचे बेहद करीबी लोग

अमनमणि की दूसरी पत्नी ओशिन का परिवार मध्‍य प्रदेश के रीवां में रहता है। विधायक की शादी की रस्‍में बेहद करीबियों और परिवार के चंद सदस्‍यों के बीच पूरी की गईं। उनके चाचा अजीत मणि त्रिपाठी ने बताया कि विवाह समारोह में सोशल डिस्‍टेंसिंग का पूरा ख्‍याल रखा गया।

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उत्तर प्रदेश

योगी के मंत्री उपेंद्र तिवारी भी कोरोना पॉजिटिव, लखनऊ में मिले 75 नए केस, सीओ की मौत

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लखनऊ। प्रदेश में अनलॉक के दौरान कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। माननीयों के बीच भी कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। ग्राम्य विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ‘मोती सिंह’, आयुष मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी, सैनिक कल्याण, होमगार्ड्स, प्रान्तीय रक्षक दल व नागरिक सुरक्षा मंत्री चेतन चौहान के बाद अब खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उपेंद्र तिवारी भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

सम्पर्क में आए लोग भी जरूर कराएं जांच-मंत्री

उनकी शनिवार को राजधानी के सिविल अस्पताल में जांच करायी गई थी, जिसकी रिपोर्ट आज पॉजिटिव आ गई है। मंत्री ने इसकी जानकारी देते हुए ट्वीट किया कि आज सुबह मेरी कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है। डॉक्टरों की निगरानी में उपचार चल रहा है। विगत 10 दिनों में मेरे संपर्क में आए लोगों से अनुरोध है कि अपनी कोरोना टेस्टिंग जरूर कराएं।

लखनऊ में मिले 75 नए केस

राजधानी की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शनिवार को जांच किये गए 3,977 नमूनों में 179 की रिपोर्ट रविवार को पॉजिटिव आई। इनमें लखनऊ के 75, संभल के 37, मुरादाबाद के 24, बाराबंकी के 21, शाहजहांपुर के 08, मथुरा के 07, हरदोई के 05 और गाजीपुर व लखीमपुर खीरी का 01-01 रोगी शामिल है। इसके साथ ही कई अन्य प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट में भी कोरोना के नए मामलों की पुष्टि हुई है।

सीओ की मौत

वहीं हरदोई में सीओ हरियावां (सदर) नागेश मिश्रा करीब दस दिन पहले बीमार हो गए थे। निमोनिया होने पर उनका इलाज चल रहा था। इसी बीच जिला अस्पताल में उनका ट्रूनेट कोरोना टेस्ट कराया गया जो कि निगेटिव आया। इसके बाद भी हालत में सुधार न होने पर लखनऊ रेफर कर दिया गया। यहां कोरोना जांच में उनमें संक्रमण की पुष्टि हुई। हालत में सुधार न होता देख शनिवार को उनको केजीएमयू से संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भेजा गया। जहां वह वेंटिलेटर पर थे। रविवार की सुबह उनका निधन हो गया।

परिवार समेत सांसद क्वारंटाइन

लखीमपुर में धौरहरा सांसद रेखा वर्मा के परिवार के एक सदस्य की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। इसके बाद परिवार समेत सांसद क्वारंटाइन यानि एकांतवास में हैं।
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उत्तर प्रदेश

जब SO से भिड़ गया था विकास दुबे तो सिपाही रहे शहीद Co देवेंद्र मिश्र ने जमकर पीटा था

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लखनऊ। गैंगेस्टर विकास दुबे और शहीद सीओ देवेन्द्र मिश्र के बीच 22 साल से दुश्मनी चल रही थी। बात 1998 की है। विकास दुबे को स्मैक की 30 पुडियों के साथ कल्यानपुर थाने की पुलिस पकड़ा था। जब उसे थाने लाया गया तो वह तत्कालीन थानाध्यक्ष हरिमोहन यादव से भिड़ गया। उस समय देवेन्द्र मिश्र कल्यानपुर थान में सिपाही थे। विकास दुबे की बदसलूकी देख उन्होंने लाठी से विकास को जमकर पीटा था फिर हवालात में बंद कर दिया था।जिसके बाद विकास ने मिश्र को देख लेने की धमकी दी थी।

खास बात है कि तब तत्कालीन बीएसपी विधायक भगवती सागर और राजाराम पाल ने थाने में पहुंचकर खुद विकास दुबे की पैरवी की थी। जब पुलिस ने दोनों की बात नहीं मानी तो बसपा नेता थाने में ही धरना देने लगे। इससे साफ है कि विकास की शुरू से राजनीति में अच्छी पकड़ थी।

बांदा के रहने वाले थे मिश्र, दो बार आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला था

दिवंगत सीओ देवेन्द्र मिश्र यूपी के बांदा जिले के रहने वाले थे। वह साल 1981 में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। इसके बाद विभागीय परीक्षा पास की और दरोगा बन गए। साल 2005 में मिश्र को उन्नाव के आसीवन थाने का इंचार्ज बनाया गया। यहां उन्होंने एक शातिर बदमाश का एनकाउंटर किया। जिसकी वजह से उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला। इसके बाद 2016 में गाजियाबाद में तैनाती के दौरान दोबारा आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर पुलिस उपाधीक्षक बने।

इसके बाद कल्यानपुर थाने में सिपाही रहे मिश्र जब बिल्हौर सर्किल के सीओ बनकर आए तो वे विकास दुबे की हर एक गतिविधियों पर नजर रखने लगे। लेकिन चौबेपुर थाने विकास के दबदबे के चलते उन्हें थाना चौबेपुर से सहयोग नहीं मिल रहा था। सीओ अपने स्तर से विकास के किसी भी गलत काम को नहीं होने दे रहे थे। इस बात को लेकर देवेंद्र मिश्र और विकास दुबे के बीच आमने-सामने भी झड़प हो चुकी थी। दोनों के बीच खुन्नस बढ़ती जा रही थी। जबकि चौबेपुर थाने के निलंबित एसओ विनय तिवारी की विकास से दोस्ती गहरी हो चुकी थी। विनय तिवारी सीओ की हर एक गतिविधि की जानकारी विकास दुबे को देते थे। ऐसे में जब सीओ मिश्रा जब अपनी टीम के साथ बिकरू गांव में दबिश देने गए तो विनय ने मुखबिरी कर दी।

विकास दुबे ने कहा था- ‘मेरे खिलाफ सुबूत नहीं जुटा पाओगे’

कानपुर के चौबेपुर थाना के बिकरु गांव में 2 जुलाई की रात गैंगस्टर विकास और उसकी गैंग ने 8 पुलिसवालों की हत्या कर दी थी। इसमें सीओ देवेंद्र मिश्र भी शामिल थे। अगली सुबह से ही यूपी पुलिस विकास गैंग के सफाए में जुट गई। गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर से सरेंडर के अंदाज में विकास की गिरफ्तारी हुई थी। शुक्रवार सुबह कानपुर से 17 किमी पहले भौंती में पुलिस ने विकास को एनकाउंटर में मार गिराया। गिरफ्तारी के बाद विकास दुबे को इस बात का अंदाजा नहीं था कि कानपुर की सीमा में दाखिल होते ही उसका एनकांउटर हो जाएगा। विकास ने पुलिस की टीम से कहा था कि मेरे खिलाफ सुबूत नहीं जुटा पाओगे। दबिश की रात कहां से गोलियां चल रही थी? कौन गोलियां चला रहा था, किसी ने नहीं देखा है? मैं तो कोर्ट में बोल दूंगा कि मैं तो था ही नहीं। मेरे पास कोई लाइसेंसी असलहा भी नहीं है। चार से पांच साल बाद जमानत हो जाएगी।

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उत्तर प्रदेश

यूपी में अब एसटीएफ से नहीं बच सकेंगे माफिया-गुर्गे, रडार पर हैं ये कुख्यात अपराधी

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लखनऊ। कानपुर के कुख्यात विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद अब उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फ़ोर्स अपनी अगली तैयारी में जुट गई है। अगले ऑपरेशन में जेल में बंद माफियाओं के सक्रिय गुर्गों और उनकी गतिविधियों पर लगाम लगाया जायेगा।

25 कुख्यात अपराधी के साथी कर रहे काम

सूत्रों की मानें तो जेल में सजा काट रहे यूपी के 25 कुख्यात अपराधी अपने गुर्गों यानी अपने आका के कहने पर रंगदारी, वसूली, लूट, हत्या, धमकी देना, यूपी पुलिस या अन्य विभागों के अधिकारी की जन्मकुंडली निकालने, राजनीतिक गलियारे में पकड़ बनाये रखने जैसे काम करते हैं। जिससे जेल में रहकर भी माफिया बाहर की दुनिया में अपने हर काम करा लेता है। इन गुर्गो की पढ़े लिखे समाज के साथ व्यवसाय से जुड़े लोगों में दहशत बनी रहती है। ये गुर्गे धनउगाही से लेकर ठेकेदारी लेने-दिलवाने व हत्या करने तक घटनाओं को अंजाम देते हैं।
उत्तर प्रदेश में माफियाओं की वैसे तो संख्या 25 है, लेकिन कुछ सूचीबद्ध माफिया पहले किसी माफिया के गुर्गे ही हुआ करते थे। या किसी माफिया गैंग के सदस्य रहे। जो समय के साथ ठेको और सरकारी काम में दखलअंदाजी करके स्वयं माफिया बन बैठे। पहले पायदान के नामचीन माफिया को छोड़ दिया जाये तो दूसरे पायदान पर लखनऊ के सलीम, सोहराब और रुस्तम भाईयों का नाम इसी तरह माफिया सूची में आ गया।
लखनऊ जेल में बंद खान मुबारक और संजीव माहेश्वरी के नाम भी प्रदेश की माफिया सूची में इसी तरह से शामिल हुए। इसमें अंकित गुर्जर, आकाश जाट, सिंह राज भाटी भी इसी तरह से सूचीबद्ध हुए।

रडार पर ये लोग

एसटीएफ के नेटवर्क की नजर में रहने वाले माफियाओं में मुख्तार अंसारी के गुर्गे, सुंदर और अनिल भाटी के गुर्गे, सुशील मूंछ के गुर्गे आजकल राडार पर हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न जेलों में बंद माफिया जैसे फतेहगढ़ में बंद सुभाष ठाकुर, बरेली जेल में बबलू श्रीवास्तव, गौतमबुद्धनगर जेल में अमित कसाना पर भी एसटीएफ की नजर है।
सूत्रों की मानें तो अगले ऑपरेशन में एसटीएफ प्रदेश के नामचीन अपराधियों की गुर्गो अंकुश लगाने की तैयारी में जुट चुका है। सूबे में कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए एसटीएफ की माफियाओं पर खास नजर है। सूत्र बताते हैं कि अब एसटीएफ से माफियाओं के गुर्गे बच नहीं सकेंगे।
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