पखवाड़े में पुरुषों ने जिम्मेदारी निभाई, 602 ने नसबंदी अपनाई

परिवार कल्याण कार्यक्रमों को लेकर सूबे के हर वर्ग में जागरूकता की स्पष्ट झलक देखी जा सकती है। पिछले वर्षों के परिवार कल्याण कार्यक्रमों की उपलब्धियों पर नजर डालें या राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) की हाल ही में आई रिपोर्ट को देखें तो यह साफ हो जाता है कि छोटे परिवार के बड़े फायदे की समझ लोगों में बढ़ी है।
 
पखवाड़े में पुरुषों ने जिम्मेदारी निभाई, 602 ने नसबंदी अपनाई
  • पिछले साल के मुकाबले इस बार 33 फीसद अधिक ने नसबंदी को चुना 
  • परिवार कल्याण कार्यक्रमों को लेकर आई जागरूकता : मिशन निदेशक 

लखनऊ। परिवार कल्याण कार्यक्रमों को लेकर सूबे के हर वर्ग में जागरूकता की स्पष्ट झलक देखी जा सकती है। पिछले वर्षों के परिवार कल्याण कार्यक्रमों की उपलब्धियों पर नजर डालें या राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) की हाल ही में आई रिपोर्ट को देखें तो यह साफ हो जाता है कि छोटे परिवार के बड़े फायदे की समझ लोगों में बढ़ी है। परिवार नियोजन के स्थायी साधन नसबंदी को अपनाने को लेकर पुरुष वर्ग भी आगे आया है। इसका नतीजा रहा कि अभी 22 नवंबर से 11 दिसंबर तक चलाए गए पुरुष नसबंदी पखवाड़े के दौरान सूबे के 602 पुरुषों ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए नसबंदी को चुना है।

खुशहाल परिवार की मुहिम को धरातल पर उतारने में जुटीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय के नेतृत्व में प्रदेश में चलाए गए पुरुष नसबंदी पखवाड़े के दौरान इस साल 602 पुरुषों ने नसबंदी को अपनाया।वित्तीय वर्ष 2020-21 में पुरुष नसबंदी पखवाड़े के दौरान 452 और वित्तीय वर्ष 2019-20 में 576 पुरुषों ने नसबंदी को चुना था।

इस प्रकार पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले इस बार पुरुष नसबंदी पखवाड़े के दौरान करीब 33 फीसद अधिक पुरुषों ने परिवार नियोजन के इस स्थायी साधन को चुना। इसमें प्रदेश के पाँच जिलों ने अहम भूमिका निभाई। इनमें प्रयागराज पहले स्थान पर रहा, जहां इस पखवाड़े के दौरान 61 पुरुषों ने नसबंदी की सेवा प्राप्त की। पखवाड़े के दौरान दूसरे स्थान पर रहे मेरठ में 39, तीसरे स्थान पर रहे लखनऊ में 32, चौथे स्थान पर रहे कौशांबी में 29 और पांचवें स्थान पर रहे हापुड़ में 26 पुरुषों ने नसबंदी को चुना। इसी तरह से अन्य जिलों ने भी कार्यक्रम को लेकर सक्रियता दिखाई । 

परिवार कल्याण के अन्य कार्यक्रमों को लेकर भी लोगों में सक्रियता देखी जा सकती है। महिला नसबंदी की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रदेश में जहां 13,683 महिलाओं ने इस स्थायी साधन को चुना वहीं वित्तीय वर्ष 2021-22 में 40292 महिलाओं ने इसको अपनाया। इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस साल करीब 194 फीसद अधिक महिलाओं ने इसके प्रति रुझान दिखाई। इसी प्रकार प्रसव के तुरंत बाद अपनाये जाने वाले अस्थायी साधन पीपीआईयूसीडी को वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रदेश की 16075 महिलाओं ने अपनाया तो वित्तीय वर्ष 2021-22 में 41925 महिलाओं ने इस साधन को चुना। इसमें भी पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले करीब 160 फीसद वृद्धि देखने को मिली।
 
मातृ-शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिहाज से दो बच्चों के जन्म में कम से कम तीन साल का अंतर रखने में बहुउपयोगी त्रैमासिक गर्भ निरोधक इंजेक्शन अंतरा को अपनाने वाली महिलाओं की तादाद में भी पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले करीब 122 फीसद वृद्धि दर्ज की गई। पिछले साल जहां 13,721 महिलाओं ने अंतरा को अपनाया वहीं इस साल अब तक करीब 30527 महिलाओं ने इसका लाभ उठाया है। गर्भ निरोधक गोली माला एन का वितरण वर्ष 2020-21 में जहां 56,187 स्ट्रिप हुआ था, वहीं इस साल अब तक 207756 स्ट्रिप का वितरण किया गया है, इसमे करीब 270 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई है। 

बात करें गर्भ निरोधक गोली छाया की तो इसमें अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई। वर्ष 2020-21 में जहां 23793 स्ट्रिप का वितरण हुआ था वहीं इस साल अब तक 150934 स्ट्रिप का वितरण किया जा चुका है, जो कि इसमें करीब 534 फीसद की वृद्धि को दर्शाता है। इसी तरह परिवार नियोजन के अस्थायी साधन आईयूसीडी को अपनाने वाली महिलाओं की संख्या पिछले साल के मुकाबले इस साल करीब 365 फीसद बढ़ी है। पिछले साल जहां 6255 महिलाओं ने बच्चों के जन्म में अंतर रखने के लिए इसको चुना था वहीं इस बार 29098 महिलाओं ने इसको अपनाया है। 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उप्र की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय का कहना है कि कार्यक्रम को लेकर चल रहे प्रचार-प्रसार और गतिविधियों से लोगों की समझ बढ़ी है और लोग परिवार नियोजन के स्थायी व अस्थायी साधनों को अपनाने को आगे आ रहे हैं।

क्या कहती है एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट :

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) की हाल ही में आई रिपोर्ट से भी यही साबित होता है कि परिवार नियोजन साधनों की पहुँच और मांग भी पिछले तीन-चार वर्षों में बढ़ी है। वर्ष 2015-16 की एनएफएचएस-4 की रिपोर्ट में 15 से 49 वर्ष की 45.5 फीसद महिलाओं ने जहां परिवार नियोजन के किसी न किसी साधन को अपनाया वहीं वर्ष 2019-21 की एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट में यह तादाद बढ़कर 62.4 फीसद पर पहुँच गई। इसी तरह परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों की बात करें तो एनएफएचएस-4 की रिपोर्ट के मुताबिक 31.7 फीसद महिलाओं तक इसकी पहुँच थी, एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट में यह तादाद 44.5 फीसद पर पहुँच गई।