लखीमपुर हिंसा: शॉक और हेमरेज से हुई मौत, गोली लगने की बात नहीं आई सामने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा

यूपी के लखीमपुर खीरी में रविवार हुई घटना में मारे गए लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक  मौत चोट लगने से, शॉक लगने से या फिर हेमरेज के कारण हुई है।  
 
Lakhimpur Violence
लखीमपुर हिंसा-पोस्टमार्टम रिपोर्ट


लखनऊ। यूपी के लखीमपुर खीरी में रविवार हुई घटना में मारे गए लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक  मौत चोट लगने से, शॉक लगने से या फिर हेमरेज के कारण हुई है।  पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गोली लगने की बात नहीं है.

जानिए किसकी मौत की क्या वजह?
4 किसान:

1. लवप्रीत सिंह (किसान)
मौत की वजह- घिसटने से हुई मौत, शरीर पर चोट के निशान मिले, शॉक और हेमरेज मौत की वजह.

2. गुरविंदर सिंह (किसान)
मौत की वजह- दो चोट और घिसटने के निशान मिले. धारदार या नुकीली चीज से आई चोट. शॉक और हेमरेज.

 
3. दलजीत सिंह (किसान)

मौत की वजह- शरीर पर कई जगह घिसटने के निशान, गाड़ी के नीचे आने से बने. यही बनी मौत की वजह.

4. छत्र सिंह (किसान)
मौत की वजह- मौत से पहले शॉक, हेमरेज और कोमा. घिसटने के भी मिले निशान.

हिंसा में मारे गए 4 अन्य लोग:

5. शुभम मिश्रा (बीजेपी नेता)
मौत की वजह- लाठी-डंडो से हुई पिटाई. शरीर पर दर्जनभर से ज्यादा जगहों पर चोट के निशान मिले.

6. हरिओम मिश्रा (अजय मिश्रा का ड्राइवर)
मौत की वजह- लाठी-डंडों से पिटाई. शरीर पर कई जगह चोट के निशान. मौत से पहले शॉक और हेमरेज.

7. श्याम सुंदर (बीजेपी कार्यकर्ता)
मौत की वजह- लाठी-डंडों से पिटाई. घिसटने से दर्जनभर से ज्यादा चोटें आईं.

8. रमन कश्यप (स्थानीय पत्रकार)
मौत की वजह- शरीर पर पिटाई के गंभीर निशान. शॉक और हेमरेज से हुई मौत.

बता दें कि लखीमपुर खीरी में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र पर गाड़ी चढ़ा कर किसानों की हत्या किये जाने का आरोप लगा है। जिसमें चार किसानों की मौत हो गई। कुछ ​मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि गाड़ी चढ़ाने के बाद आशीष ने किसानों पर गोली भी चलाई लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गोली लगने की बात सामने नहीं आई है।

किसानों की मौत के बाद इलाके में लगाता प्रदर्शन हो रहे हैं। इलाके का इंटरनेट भी बंद कर दिया था और धारा 144 लागू कर दी गई थी। तमाम नेताओं को भी घटनास्थल पर जाने से रोका जा रहा था। सोमवार को प्रशासन और किसानों के बीच समझौता हो गया था। जिसमें तय किया गया कि हिंसा में मारे गए चारों किसानों के परिवार को 45-45 लाख रूपये का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी।