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उत्तर प्रदेश

कानपुर मुठभेड़ : बेटियों से बेहद प्यार करते थे शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा, गांव सहेवा में हर व्यक्ति की आंखें नम

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बांदा। कानपुर में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों में बांदा जनपद के सहेवा गांव का बेटा देवेंद्र मिश्रा भी शामिल है। इनके शहीद होने की खबर आते ही पूरे गांव में मातम छा गया, लेकिन दूसरी ओर गांव के लोग अपने गांव को गौरवान्वित करने वाले देवेंद्र मिश्रा को सैल्यूट भी कर रहे हैं। शहीद हुए सीओ बिल्हौर देवेंद्र कुमार मिश्र मार्च 2020 में सेवानिवृत्त होने वाले थे।

कानपुर रवाना हुआ परिवार

जनपद के गिरवा थाना अंतर्गत ग्राम सहेवा निवासी देवेंद्र मिश्रा इस समय बिल्हौर सीओ के पद पर तैनात थे।आज सवेरे जैसे ही उनके शहीद होने की जानकारी उनके भाइयों को मिली। वैसे ही पूरा परिवार गांव से तड़के ही कानपुर रवाना हो गया। गांव के प्रधान धर्म पाल ने बताया कि गांव में उनके दो भाई राजीव और रामाधीप का परिवार रहता है।आज जब देवेंद्र मिश्रा के शहीद होने की जानकारी मिली तो वह लोग कानपुर रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि देवेंद्र मिश्रा बहुत मिलनसार व्यक्ति थे जब भी गांव आते थे ,लोगों से मिलजुल कर उनका हाल चाल लेते थे और जाते समय बुजुर्गों से आशीर्वाद भी लेते थे।उनके शहीद होने की खबर से गांव का हर व्यक्ति गमजदा है।

बेटियों से बेहद प्यार करते थे

उनके पड़ोसी राजेंद्र त्रिवेदी बताते हैं कि देवेंद्र जी पुलिस की नौकरी में होते हुए भी अपने पैतृक गांव आने के लिए समय निकाल लेते थे। वह अक्सर हर त्यौहार में गांव आते थे और गांव के लोगों से मिलजुल कर उनके साथ त्योहार की खुशियां बांटते थे।उनके शहीद होने से निश्चित ही गांव के लोग दुखी हैं। लेकिन हम इस बात पर भी गौरवान्वित महसूस करते हैं कि हमारे गांव के बेटे ने बहादुरी के साथ लड़ते हुए अपने गांव का नाम रोशन किया है।उनके नाम के साथ हमारे गांव का नाम भी हमेशा जुडा रहेगा ।श्री कांत मिश्रा का कहना है कि शहीद देवेंद्र मिश्रा के कोई पुत्र नहीं था। लेकिन जब भी वह अपनी पत्नी आस्था और दोनों बेटियों वैष्णवी और वैशारदी के साथ गांव आते थे तो कहा करते थे कि यह बेटियां ही मेरी बेटों से कम नहीं है। यह बेटियां ही मेरे नाम को रोशन करेंगी।बड़ी बेटी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही है, वहीं छोटी बेटी 12वीं की छात्रा है। उन्होंने बताया कि देवेंद्र जी तीन भाई थे,भाइयों में वह सबसे बड़े थे।दोनों छोटे भाई गांव में रहकर खेती-बाड़ी करते हैं जबकि वह नौकरी करते थे।उनके गांव में आने पर लोग बहुत खुश होते थे आज जब उनके शहीद होने की खबर गांव में आई तो हर व्यक्ति की आंखें नम हो गई, जिसे देखो सुबह से उनकी ही चर्चा कर रहा है।

हमारे गांव ने एक बेटा खोया- लल्लू शुक्ला

इसी तरह गांव के लल्लू शुक्ला ने कहा कि मुझे जब से यह जानकारी हुई है कि देवेंद्र मिश्रा जी पुलिस मुठभेड़ में शहीद हो गए हैं,पहले तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ लेकिन जब टीवी में देखा तो बहुत दुख हुआ ।हमारे गांव ने एक बेटा खोया है।
इसी तरह गांव के अधिकांश लोग देवेंद्र मिश्रा के शहीद होने की खबर से सन्न रह गए हैं जिसे देखो उनके शहीद होने की खबर से मार्माहत है। वही गांव के लोग इस घटना की सच्चाई जानने के लिए टीवी की खबरों पर नजरें टिकाए हुए हैं। मुठभेड़ से संबंधित पल-पल की खबरों को देखकर देवेंद्र मिश्रा को याद कर रहे हैं।

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