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उत्तर प्रदेश

कोरोना नियंत्रण मे राज्यों के साथ समन्वय के अभाव मे मोदी सरकार का उजागर हुआ असंवेदनशील चेहरा- प्रमोद तिवारी

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प्रतापगढ़। यूपी कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना व वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोरोना मरीजो के प्रति केंद्र एवं दिल्ली सहित कई प्रदेशों की सरकारों द्वारा बरती जा रही लापरवाही का स्वतः संज्ञान लेने का स्वागत किया है।

शनिवार को जारी संयुक्त बयान मे प्रमोद तिवारी एवं मोना ने देश मे अब कोरोना महामारी की दिनोंदिन भयावह स्थिति को लेकर गहरी चिन्ता जतायी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी एवं सीएलपी नेता मोना ने कहा कि जो चिन्ता अब तक देश व्यक्त कर रहा था उसे सर्वोच्च संवैधानिक संस्था ने स्वयं संज्ञान मे लेकर यह स्पष्ट कर दिया है कि इस भयंकर महामारी से छिड़ी जंग मे मोदी सरकार लगातार आ रहे विपरीत परिणामों के बावजूद अपने संवैधानिक कर्तव्य निर्वहन के प्रति कतई गंभीर नही है।

उन्होनें कहा कि सुप्रीम कोर्ट की जतायी गई चिन्ता से यह भी स्पष्ट हो गया है कि कोरोना तक मे मोदी सरकार का राज्यों के साथ बेहतर समन्वय भी नही है।उन्होनें सर्वोच्च अदालत के द्वारा कोरोना मरीजों को लेकर अस्पतालों मे भयावह हालात के तहत इन्हें दयनीय दशा मे छोड़ दिये जाने को गंभीर चिन्ताजनक कहा है।

प्रमोद तिवारी ने यह भी कहा कि कोरोना से पीड़ित मरीजों के शवों को अमानवीय तरीके से लॉबी तथा वेटिंग हॉल और यहां तक कि कचरे मे लावारिस फेंक देने से न केवल सरकार का असंवेदनशील चेहरा उजागर हुआ है बल्कि सबसे कष्टप्रद यह है कि संक्रमण के कारण हुई मौतों से सरकार द्वारा सूचना के अभाव मे भी अपने परिजनों के शव भी प्राप्त न कर पाने की स्थिति मे ऐसे दुःखी परिवारों की पीड़ा सरकार के कुप्रबन्धन से और बढ़ती जा रही है।

उन्होनें कोरोना के चलते मौतों को लेकर शवों को कोरोना मरीजों के आस-पास ही छोड़ देने की सुप्रीम कोर्ट द्वारा जताई गई चिन्ता को अति गंभीर ठहराते हुए कहा कि इससे तो अन्य मरीजों को भी सीधे मौत के मुंह मे धकेला जा रहा है।

विधायक मोना एवं प्रमोद तिवारी ने बुन्देलखण्ड मे प्रवासी मजदूरो सहित चार लोगों द्वारा आत्महत्या किये जाने को दुखद ठहराते हुए इसे सरकार की कथनी और करनी मे इस हद तक का फर्क बताया कि लोग भूख प्यास व बेरोजगारी से आत्महत्या तक कर रहे है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद व पार्टी की विधायक दल की नेता ने कहा कि हालात इस कदर बिगड़ गये है कि सर्वोच्च अदालत तक को देश मे कोरोना जांच (टैस्टिंग) की धीमी गति को लेकर खुली चिन्ता व्यक्त करनी पडी है।

उन्होनें कहा कि संक्रमण के क्षेत्र मे नये मरीजों की लगातार बढ़ रही स्थिति से भी सरकार बेफिक्र है और देश मे वह कोरोना जांच का ग्राफ नहीं बढ़ा पा रही है। श्री प्रमोद तिवारी ने कहा कि ब्रिटेन तथा इटली और अमेरिका मे जांच (टैस्टिंग) का जो आंकडा है उसे देखते हुए भारत मे कोरोना जांच का ग्राफ जब महज एक फीसदी है तो यह खतरनाक तस्वीर सामने दिख रही है।

उन्होनें बलपूर्वक कहा कि देश को नमस्ते ट्रंप की वजह से ही आज कोरोना के इस खतरनाक मोड़ पर अनावश्यक पीड़ा सहन करनी पड़ रही है। केन्द्र सरकार ने नमस्ते ट्रम्प के प्रति जिस तरह से भारत मे आने वाले विदेशियों के प्रति स्वास्थ्य जांच समेत अनेक प्रोटोकॉल के निर्वहन मे लापरवाही बरती और तीस जनवरी को ही केरला मे कोरोना को राज्य आपदा घोषित करने के बाद भी सरकार जिम्मेदारियों के प्रति नही चेती उसी से कोरोना की स्थिति भारत मे खतरनाक रूप ले बैठी।

मोना व प्रमोद तिवारी ने सरकार को आडे हाथों लेते हुए कहा कि जनवरी 2020 मे विदेशी उडानों को न बंद करना एक भयंकर भूल थी। क्योकि कोरोना विदेशी उडानों से विदेश से आने वाले नागरिको के साथ भारत आया था।

नेताद्वय ने कहा कि केन्द्र सरकार से कहा कि वह अस्पतालों मे इस महामारी के प्रति इलाज का सीधे स्वयं नियंत्रण करने का बंदोबस्त करे और हर कीमत पर देश मे कोविड जांच का प्रतिशत बढ़ाया जाना चाहिये।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस गंभीरता के साथ कोरोना महामारी के प्रबन्धों को लेकर चिन्ता व्यक्त की है और केन्द्र सरकार की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की, सर्वोच्च अदालत के इस दिशा निर्देशन से सरकार भले ही न चेत सके लेकिन कोविड नियंत्रण मे देश भर मे असफलता का कलंक ढो रही सरकार की इस लापरवाही ने भारत की मानवीय संवेदना के प्रति अर्न्तराष्ट्रीय साख को भी बट्टा लगाया है।

प्रमोद तिवारी एवं विधायक मोना ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय इन विषम स्थितियों मे कोरोना नियंत्रण के लिए केंद्र एवं प्रदेश सरकारो की कोशिशो की लगातार मॉनीटरिंग करता रहे और वैज्ञानिक सोच के साथ समस्या का समाधान करे। प्रमोद तिवारी एवं एमएलए मोना ने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश मे सामजस्य के लिए भी सुप्रीम कोर्ट की मॉनीटरिंग जरूरी है जिससे कोई भी राजनैतिक दल इसमे राजनीति न कर सके।

नेताद्वय की ओर से मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने यहां बयान जारी किया है।

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कानपुर मुठभेड़ के शहीदों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये देने का ऐलान

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  • कानपुर पहुंच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि
  • शहीदों के परिजनों को असाधारण पेंशन भी दी जाएगी, एक सदस्य को मिलेगी नौकरी

कानपुर। उत्तर प्रदेश कानपुर नगर जनपद में बदमाशों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए आठ पुलिस कर्मियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि सभी शहीदों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये दिया जाएगा।

इस कांड के अपराध को जिंदा या मुर्दा पकड़ें

इसके अलावा असाधारण पेंशन की भी व्यवस्था की जाएगी। यही नहीं सभी शहीदों के एक-एक परिजन को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। उन्होंने सख्त लहजे में पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस काण्ड के अपराधी जिंदा या मुर्दा पकड़े जाएं।

पुलिस लाइन पहुंच दी श्रद्धांजलि

चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरु गांव में गुरुवार की देर रात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गयी पुलिस टीम पर हिस्ट्रीशीटर व उसके साथियों ने गोली बरसा दी। अंधाधुंध फायरिंग में सीओ बिल्हौर देवेन्द्र मिश्रा, थानाध्यक्ष शिवराजपुर महेश चन्द्र यादव समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गये। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को कानपुर पुलिस लाइन पहुंचे और शहीदों के पार्थिव शरीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

एक एक करोड़ देने का ऐलान

इस दौरान मुख्यमंत्री ने एनकाउंटर में शहीद हुए आठ पुलिसकर्मियों के परिजनों के लिए एक-एक करोड़ रुपये देने का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक परिवार से एक-एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाएगी। साथ ही साथ असाधारण पेंशन की व्यवस्था भी की जाएगी।

व्यर्थ नहीं जाएगी शहादत

उन्होंने कहा कि पुलिस के जवानों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। पत्रकार वर्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दिनभर की ड्यूटी के बाद अपराधियों और माफिया के खिलाफ जारी पुलिस के अभियान के तहत ही पुलिस टीम छापा मारने गई थी। जिन लोगों ने घटना को अंजाम दिया है, उन्हें कानून के दायरे में कठोर से कठोर सजा दी जाएगी।

अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा

योगी ने कहा कि किसी भी कीमत पर अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि घटना को अंजाम देने वालों को पकड़ने के लिए टीमें बनाई गईं हैं, जो छापेमारी कर रही है। पुलिस मुठभेड़ में दो अपराधी मारे गए हैं और हमारे जवानों से छीने गए असलहों में से कुछ बरामद हो गए हैं।

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कानपुर एनकाउंटर : बचपन में ही चल बसी थीं शहीद सुल्तान सिंह की मां, दादा ने बनाया था काबिल

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झांसी। उत्तर प्रदेश के कानपुर में बीती रात मुठभेड़ में शहीद हुए आठ पुलिस कर्मियों ने आरक्षी सुल्तान सिंह मऊरानीपुर में ही पले बढ़े थे। सुल्तान का ख्वाव अपनी सात साल की बेटी को अच्छा डाॅक्टर बनाने का था। कानपुर में मुठभेड़ के दौरान सुल्तान के शहीद होने की खबर के बाद से उनके ननिहाल में मातम पसरा हुआ है। वही, पुलिस महकमे में राजकीय सम्मान के साथ उनके अन्तिम संस्कार की तैयारी चल रही है। हालांकि अभी उनके पार्थिव शरीर के आने का स्थान तय नहीं हुआ है।

ननिहाल में हुई पढ़ाई

झांसी जिले के सदर तहसील स्थित गांव भोजला निवासी शहीद सुल्तान सिंह के पिता हर प्रसाद बेटे की मौत की खबर सुनकर कानपुर रवाना हो गए। बेटा सुल्तान बचपन से ही तहसील व कस्बा मऊरानीपुर के चैक दमेला स्थित अपनी ननिहाल के इसी घर में पला बड़ा है। उसकी शिक्षा-दीक्षा यहीं से हुई है। मां भी यही रहती थी, पिता भी यही रहते थे। कानपुर में अचानक शहीद हुए सुल्तान की खबर जैसे ही यहां आई। घर में मातम पसर गया। सुल्तान का ख्वाब था कि उसकी बेटी चेरी एक बहुत बड़ी डॉक्टर बने।

छोटे भाई की भी हो गई थी मौत

सुल्तान के ममेरे भाई अशोक ने बताया कि सुल्तान तीन भाई थे। बब्लू सबसे बड़े भाई हैं। जो भोजला में आटा चक्की चलाते हैं। उनसे छोटे सुल्तान थे। और सबसे छोटे भाई सोनू थे। जिसकी पांच वर्ष पहले मौत हो गई थी। सुल्तान की नौकरी आठ वर्ष पूर्व मऊरानीपुर में अपने ननिहाल में रहते हुए ही लगी थी। सुल्तान की पहली पोस्टिंग जालौन के उरई थाने में थी। सुल्तान अपने पीछे पत्नी ऊर्मिला वर्मा व सात वर्ष की मासूम बेटी चेरी को अपने पीछे छोड़ गए हैं।

मां भी नहीं, दादा ने पाला

वहीं सुल्तान सिंह के चचेरे भाई अभय कुमार ने बताया कि वे पांच साल के थे तब से यहां आकर पढ़ रहे हैं। इनकी मां बचपन में ही चल बसी थी। उनकी एक सात साल की लड़की है। हम तो सरकार से ये कहेंगे कि उनकी लड़की की पढ़ाई की जिम्मेदारी ले। मृतक सिपाही के दादा रामदास ने बताया कि उसकी पोस्टिंग कानपुर हो गई थी। उनकी मां बचपन में ही गुजर गई थी इसलिए उसकी परवरिश यहीं हुई। 2012 में उसका पुलिस में सेलेक्शन हुआ था। अब देखें योगी जी क्या कर रहे हैं और क्या नतीजा निकलता है।

 

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कानपुर एनकाउंटर : शहीद थानाध्यक्ष महेश की मां बोली, बेटे ने क्या बिगाड़ा था किसी का   

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रायबरेली। कानपुर में देर रात हुई मुठभेड़ में शहीद आठ पुलिस कर्मियों में रायबरेली का भी एक लाल है। शुक्रवार को जैसे ही यह सूचना मिली कि उनका बेटा शहीद हो गया है तो पूरे गांव में मातम पसर गया। हर जुबां में शहीद की दिलेरी की चर्चा है।

बेटे ने क्या बिगाड़ा था किसी का

सरेनी थाना क्षेत्र के वनपुरवा निवासी देव नारायण यादव के पुत्र महेश प्रताप यादव यूपी पुलिस में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात हैं। वह वर्तमान में कानपुर देहात के शिवराजपुर थाना में थानाध्यक्ष है। महेश दो भाई थे और वह इस समय लखनऊ में रहते थे। पति के शहीद होने की खबर मिलते ही पत्नी संध्या बार-बार चीखते चिल्लाते हुए बेहोश हो जा रही है। महेश की मां का भी यही हाल है। वह तो रोते-रोते यह कह रही है कि उनके बेटे ने किसी का क्या बिगाड़ा था जो उसकी जान चली गयी। इस ख़बर से गांव में भी शोक की लहर है। महेश का पूरा परिवार काफी सादगी वाला है। महेश का स्वाभाव मिलानसार था।

बेटे की फोन पर हुई थी बात

मेडिकल की पढाई कर रहा महेश का बड़ा बेटा विवेक का कहना है कि देर रात को पिता से फोन बार आखिरी बार बात हुई थी। फोन उठाते हुए उन्होंने कहा था कि वह एक मुठभेड़ में है बात में बात करते हैं। इस पर बात की जानकारी होने पर विवेक का मन पहले से घबराने लगा था। शुक्रवार को जैसे ही उसके पिता के शहीद होने की खबर मिली तो परिवार में रोना-पीटना मच गया।  
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