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उत्तर प्रदेश

डीजल व पेट्रोल के दामों मे बेतहासा मूल्य वृद्धि देश की जनता के साथ विश्वासघात- प्रमोद तिवारी

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लालगंज, प्रतापगढ़। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने रविवार को पेट्रोल और डीजल के दामों मे बेतहासा वृद्धि को लेकर मोदी सरकार की जबरदस्त घेरेबंदी करते हुए कहा कि डीजल व पेट्रोल पर मोदी सरकार अब तो जजिया टैक्स लगा रही है।

वहीं प्रमोद तिवारी ने राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के आंकडे की आंड मे बेरोजगारी पर भी पीएम मोदी को आड़े हाथो लेते नौजवानो को रोजगार देने के केंद्र सरकार के दावे पर श्वेतपत्र जारी किये जाने को कहा है।

नगर स्थित क्षेत्रीय विधायक आराधना मिश्रा मोना के कैम्प कार्यालय पर दोपहर पत्रकारों से रूबरू हुए पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि देश मे डीजल व पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे है।

प्रमोद तिवारी के मुताबिक यह दाम अस्सी रूपये प्रति लीटर पार कर गये है। इससे यह साफ है कि केंद्र की मोदी सरकार आखिर यह जानते हुए भी कि डीजल का उपयोग सिंचाई के इंजन, ट्रैक्टर, ट्रकों व बसों मे करते हुए आम जनता को दाम कम रखते हुए सुविधा का अहम बिंदु हुआ करता है तो इस प्रकार से किसान तथा मध्यम वर्ग पर डीजल की मंहगाई क्यों थोपी जा रही है।\

प्रमोद तिवारी ने कहा कि कोरोना महामारी मे आम जनता पर डीजल और पेट्रोल खासकर डीजल पर दस गुना टैक्स लगाया गया है। उन्होनें सरकार के प्रबन्धन पर तंज कसा कि ऐसा टैक्स तो मुगल और अंग्रेज शासक ही बर्बर तरीके से लगाया करते थे। पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रमोद ने कहा कि यह कोरोना की मार झेल रही जनता पर जुल्म और खुली लूट तथा कुछ चुनिंदा पूंजीपतियो की तिजोरी भरने के साथ आम जनता से अभूतपूर्व विश्वासघात और धोखा है।

प्रमोद तिवारी ने आगे कहा कि डीजल की कीमत बढ़ने से माल भाडे की ढुलाई भी बढेगी। जिससे सामानो की कीमत तो बढ़ ही जाएगी, किसी कार्य की लागत भी बेतहाशा बढेगी। उन्होनें पीएम मोदी की नीतिगत सरकार के कुप्रबंधन का आरोप मढ़ते हुए चुटकी भी ली कि कुछ लोगों के तो अच्छे दिन आ गये किंतु देश की जनता के बुरे दिन जरूर आ गये है।

वार्ता के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की डीजल को लेकर दाम सदैव जनता के हित मे कम रखने की पालिसी का जिक्र करते हुए कहा कि इस नीति का तो पूर्व प्रधानमंत्रियो लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी बाजपेयी और डा. मनमोहन सिंह सहित सभी प्रधानमंत्रियों ने किया भी था।

उन्होने सवाल उठाया कि इसके बावजूद फिरक्यों केंद्र की मोदी सरकार दुनिया के बाजार मे कच्चे तेल की कीमत लगभग अठारह रूपये होने के बावजूद देश मे इनकी कीमतें आसमान छूती जा रही है।

प्रेसवार्ता मे कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने नौजवानो की बेरोजगारी पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि एक तरफ पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी करोड़ो मे रोजगार देने का दावा करते है। श्री तिवारी के मुताबिक राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग का आंकड़ा कुछ और ही बयान करता है। ऐसे मे उन्होने सरकार के दावे को फर्जी घोषणा ठहराते हुए कहा कि यह भी देश के नौजवानो के साथ धोखा है।

उन्होने केंद्र सरकार से कहा है कि देश मे बेरोजगार नौजवानो की तादात के साथ सरकारी स्तर पर कितने नौजवानो को रोजगार मुहैया कराया गया है इस पर केन्द्र श्वेत पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट करे। कोरोना संक्रमितो की भी रोज बढ़ रही संख्या को चिंताजनक ठहराते हुए प्रमोद तिवारी ने कहा कि आज देश मे पांच लाख से अधिक मरीज कोरोना संक्रमित है। ऐसे मे सरकार इस महामारी के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए कारगर कदम तेज करे ।

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उत्तर प्रदेश

यूपी में अब एसटीएफ से नहीं बच सकेंगे माफिया-गुर्गे, रडार पर हैं ये कुख्यात अपराधी

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लखनऊ। कानपुर के कुख्यात विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद अब उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फ़ोर्स अपनी अगली तैयारी में जुट गई है। अगले ऑपरेशन में जेल में बंद माफियाओं के सक्रिय गुर्गों और उनकी गतिविधियों पर लगाम लगाया जायेगा।

25 कुख्यात अपराधी के साथी कर रहे काम

सूत्रों की मानें तो जेल में सजा काट रहे यूपी के 25 कुख्यात अपराधी अपने गुर्गों यानी अपने आका के कहने पर रंगदारी, वसूली, लूट, हत्या, धमकी देना, यूपी पुलिस या अन्य विभागों के अधिकारी की जन्मकुंडली निकालने, राजनीतिक गलियारे में पकड़ बनाये रखने जैसे काम करते हैं। जिससे जेल में रहकर भी माफिया बाहर की दुनिया में अपने हर काम करा लेता है। इन गुर्गो की पढ़े लिखे समाज के साथ व्यवसाय से जुड़े लोगों में दहशत बनी रहती है। ये गुर्गे धनउगाही से लेकर ठेकेदारी लेने-दिलवाने व हत्या करने तक घटनाओं को अंजाम देते हैं।
उत्तर प्रदेश में माफियाओं की वैसे तो संख्या 25 है, लेकिन कुछ सूचीबद्ध माफिया पहले किसी माफिया के गुर्गे ही हुआ करते थे। या किसी माफिया गैंग के सदस्य रहे। जो समय के साथ ठेको और सरकारी काम में दखलअंदाजी करके स्वयं माफिया बन बैठे। पहले पायदान के नामचीन माफिया को छोड़ दिया जाये तो दूसरे पायदान पर लखनऊ के सलीम, सोहराब और रुस्तम भाईयों का नाम इसी तरह माफिया सूची में आ गया।
लखनऊ जेल में बंद खान मुबारक और संजीव माहेश्वरी के नाम भी प्रदेश की माफिया सूची में इसी तरह से शामिल हुए। इसमें अंकित गुर्जर, आकाश जाट, सिंह राज भाटी भी इसी तरह से सूचीबद्ध हुए।

रडार पर ये लोग

एसटीएफ के नेटवर्क की नजर में रहने वाले माफियाओं में मुख्तार अंसारी के गुर्गे, सुंदर और अनिल भाटी के गुर्गे, सुशील मूंछ के गुर्गे आजकल राडार पर हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न जेलों में बंद माफिया जैसे फतेहगढ़ में बंद सुभाष ठाकुर, बरेली जेल में बबलू श्रीवास्तव, गौतमबुद्धनगर जेल में अमित कसाना पर भी एसटीएफ की नजर है।
सूत्रों की मानें तो अगले ऑपरेशन में एसटीएफ प्रदेश के नामचीन अपराधियों की गुर्गो अंकुश लगाने की तैयारी में जुट चुका है। सूबे में कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए एसटीएफ की माफियाओं पर खास नजर है। सूत्र बताते हैं कि अब एसटीएफ से माफियाओं के गुर्गे बच नहीं सकेंगे।
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उत्तर प्रदेश

फिरोजाबाद: कांच कारखाने शुरू होने से मिला रोजगार, मजदूरों के चेहरे पर लौटी खुशियां

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फिरोजाबाद। सुहागनगरी में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण बंद हुये कांच कारखाने अब धीरे-धीरे शुरू होने लगे हैं। कुछ कारखाने शुरू भी हो गये हैं। जिससे चूड़ी कारोबार से जुडे़ सैकड़ों लोगों को पुनः रोगजार मिला है और उनके चेहरों पर खुशियां लौट आयी हैं।
फिरोजाबाद की काॅच की चूड़ियां हैं विश्व विख्यात 
फिरोजाबाद की काॅच की चूड़ियां देश-विदेश में विख्यात है, इसीलिए फिरोजाबाद को सुहागनगरी के नाम से जाना जाता है। सुहाग की प्रतीक काॅच की चूड़ियां तैयार करने वाली सैकड़ों फैक्ट्रयां कोविड 19 के चलते लाॅक डाउन के कारण पिछले साढ़े तीन महीने से बन्द हो गयी थी। इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले हजारों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या पैदा हो गयी थी। लेकिन अनलाॅक के बाद अब सरकार की अनुमति से चूड़ी कारखानों को शुरू किया जा रहा है और कुछ कारखाने चालू हो गये हैं। इन चूड़ी कारखानों में सरकार की गाइड लाइन का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है।
कारखानों में लगाये गये ओटोमेटिक सेनीटाइजर सिस्टम
 कारखानों के गेट के अन्दर प्रवेश करने पर थर्मल चैकिंग, साबुन से हाथ धोना, सेनीटाइजर व मास्क का प्रयोग किया जा रहा है। कुछ कारखानों में ओटोमेटिक सेनीटाइजर सिस्टम लगाये गये हैं। चूड़ी कारखानों के चालू होने से सैकड़ों लोगों को पुनः रोजगार मिलने लगा है। जिससे इस कारोबार से जुडे लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी है। कारीगरों व मजदूरों के चेहरों पर पुनः रौनक आने लगी है।
घरों तक में होता है काम
फिरोजाबाद के चूड़ी कारोबार से सिर्फ कारखानों के कारीगरों को ही रोजगार नहीं मिलता है बल्कि पल्लेदार, ठेले वाले, कुशल व अकुशल कारीगर, महिलाऐं भी रोजगार पाते हैं और घरों तक में काम होता है।
चूड़ी कारखाना स्वामी अनिल कुमार माहेश्वरी ने कहा 
चूड़ी कारखाना स्वामी अनिल कुमार माहेश्वरी का कहना है कि कारखाने में दो गज की दूरी के साथ-साथ सरकार की गाइड लाइन का पूरा पालन किया जा रहा है। फैक्ट्री को प्रतिदिन सुबह व शाम सैनेटाइज कराया जाता है। मजदूरों को थर्मल स्क्रीनिंग से जांच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है।
पिछले साढ़े तीन माह से काम बंद होने से परेशां थीं कुसमा देवी
चूड़ी कारखाने की महिला मजदूर कुसमा देवी का कहना है कि पिछले साढ़े तीन माह से काम बंद था। बहुत परेशान हो गये थे। पैसे की तंगी थी। अब काम चालू गया है तो मजदूरी कर बच्चों का अच्छे से भरण पोषण करेंगी और उन्हें पढ़ायेंगी।
लाॅकडाउन की वजह से फैक्ट्रियां हो गयी थी बंद
चूड़ी कारखाना मजदूर सलीम का कहना है कि लाॅकडाउन की वजह से फैक्ट्रियां बंद हो गयी थी। अब फैक्ट्रियां चालू होने से बहुत राहत मिली है। मजदूरी मिलने से बच्चों का भरण पोषण अच्छे से हो रहा है।
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कानपुर शूटआउट में यूपी पुलिस का यूटर्न : विकास गैंग के गुड्डन-सोनू को दी क्लीनचिट, अखिलेश के साथ हैं फोटो

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लखनऊ। कानपुर के दुर्दांत अपराधी विकास दुबे के साथी अरविंद राम विलास त्रिवेदी उर्फ गुड्डन व उसके वाहन चालक सोनू तिवारी को शनिवार काे महाराष्ट्र के ठाणे में महाराष्ट्र एटीएस ने पकड़ा था, उन दोनों को लेकर अब यूपी पुलिस ने यूटर्न ले लिया है। शनिवार को एक प्रेस नोट जारी कर यूपी पुलिस कहा कि यह दोनों लोग चौबेपुर केस में नामित और वांछित नहीं हैं। जबकि पुलिस ने 3 जुलाई को गुड्‌डन को वांछित बताकर उस पर 25 हजार का इनाम रखा था। अब पुलिस कह रही है कि वह चौबेपुर शूटआउट में शामिल ही नहीं था।

बता दें कि शूटआउट के बाद पुलिस ने विकास दुबे गैंग के 15 गुर्गों की सूची जारी की थी। इसमें गुड्डन त्रिवेदी की फोटो 8वें स्थान पर थी। साथ ही इन पर 25-25 हजार रुपए का इनाम भी रखा था। इस लिस्ट में गुड्डन का नाम भी शामिल था। अब यूपी पुलिस का कहना है कि गुड्‌डन विकास गैंग का पुराना साथी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कानपुर पुलिस ने हड़बड़ी में वांटेड की लिस्ट जारी कर दी थी?

बताया जा रहा है कि सुशील कुमार उर्फ सोनू तिवारी गुड्‌डन का ड्राइवर है। कानपुर पुलिस का कहना है कि दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है। अब पुलिस गुड्डन और सोनू तिवारी को लेने के लिए मुंबई जाएगी या नहीं, अभी यह भी साफ नहीं हो सका है।

मोस्ट वांटेड की लिस्ट में था गुड्डन

कानपुर पुलिस ने 3 जुलाई को शूटआउट कांड के वांटेड की फोटो जारी की थी। 

बिकरु गांव में 2 जुलाई की रात 8 पुलिसवालों की हत्या के बाद पुलिस ने 15 मोस्ट वांटेड की फोटोयुक्त सूची जारी की थी। इसमें गुड्डन त्रिवेदी की फोटो 8वें स्थान पर थी। उस पर पुलिस ने  25 हजार का इनाम भी घोषित किया था। यूपी एसटीएफ ने उसके रूरा स्थित घर पर दो बार दबिश भी दी थी। लेकिन शूटआउट के बाद से ही वह परिवार समेत फरार हो गया था। हालांकि, उसका नाम पुलिस की एफआईआर में शामिल नहीं था। लेकिन यूपी पुलिस के अलर्ट के बाद ही महाराष्ट्र एटीएस ने दबोचा।

शूटआउट के बाद सपा अध्यक्ष के साथ सामने आई थी तस्वीर

विकास के शूटर गुड्डन त्रिवेदी अखिलेश यादव के साथ

कानपुर देहात के कुढ़वा रूरा का रहने वाला गुड्डन रूरा से जिला पंचायत सदस्य है। उसकी पत्नी कंचन कुढ़वा गांव की प्रधान है। साल 1998 में वह विकास के संपर्क में आया था। 2001 तक वह विकास के बॉडीगार्ड के तौर दिखता था। कहा जाता है कि गैंगस्टर विकास के रसूख के बल पर ही उसने क्षेत्र में अपनी पैठ बनाई और जिला पंचायत सदस्य बन गया। यह भी कहा जाता है विकास के राजनीतिक कनेक्शन की पूरी जानकारी गुड्डन को है। हाल ही में उसने एक दुकान का उद्घाटन भी विकास से कराया था।

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