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उत्तर प्रदेश

लोगों को कोरोना से बचाते-बचाते आखिरकार खुद ही जिंदगी की जंग हार गए डॉ. शील कुमार त्रिपाठी

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रवीन्द्र पाण्डेय”रवि”

अयोध्या। जिला क्षय रोग अधिकारी और नगर स्वास्थ्य अधिकारी जैसी अहम और दोहरी जिम्मेदारी निर्वहन कर रहे,हरदिल अजीज युवा चिकित्सक डॉ. शील कुमार त्रिपाठी लोगों को कोरोना से बचाते बचाते आखिरकार खुद ही जिंदगी की जंग हार गए। उनकी मौत की खबर सुनकर सहसा किसी को विश्वास ही नहीं हुआ कि अपने रोगियों,मुलाकातियों और शुभचिंतकों से हंसते हुए मिलने वाले युवा चिकित्सक डॉ एस के त्रिपाठी उन्हें अलविदा कह गए।

एक उच्च श्रेणी के एनेटस्थेटिक और चेस्ट रोग विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने खूब ख्याति अर्जित की थी। अपने चिकित्सा कार्य के अलावा वह हर जानने वाले के सुख दुःख में हमेशा खुले दिल से शिरकत करने के चलते पूरे जिले में वह व्यक्तिगतरूप से भी बहुत लोकप्रिय रहे।

उनकी पारिवारिक मित्र और मेडिकल कॉलेज दर्शन नगर स्थित ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ बागीश मिश्रा ने बताया कि अयोध्या मण्डल के ही पड़ोसी जनपद सुल्तानपुर के मोहल्ले शास्त्री नगर के मूल निवासी 44 वर्षीय डॉ शील कुमार त्रिपाठी जिला अस्पताल के एनेस्थेसिया विशेषज्ञ, छाती रोग विशेषज्ञ, कार्यवाहक जिला क्षय रोग अधिकारी और अयोध्या नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण दायित्व बखूबी निभा रहे थे।विभिन्न ड्यूटियों के दौरान वह कहीं कोरोना संक्रमित हो गए।तथा बीती 15 सितम्बर को होम आइसोलेशन में चले गए।

लेकिन घर पर इलाज के दौरान उनकी तबियत बिगड़ गयी।इसके बाद उन्हें कोविड हॉस्पिटल राजा दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शन नगर भर्ती कराया गया।आराम न मिलने पर फिर उन्हें लखनऊ स्थित निजी अस्पताल चौधरी हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर रखा गया।लेकिन राहत नहीं मिली।तीन दिन पूर्व उन्हें संजय गांधी पीजीआई लखनऊ में भर्ती करवाया गया। जहां 25 सितम्बर को उन्होंने अंतिम सांस ली।दुःखद पहलू यह भी कि उनकी पत्नी भी कोरोना पॉजिटिव हो गयी हैं।तथा उनका भी इलाज चल रहा है। उनके कोरोना संक्रमण से हुए निधन के बाद चिकित्सकर्मियों में भय का वातावरण है। यह जिले के किसी बड़े अधिकारी की कोविड से हुई पहली मौत है।डॉक्टरों के संगठन पीएमएस और आईएमए सहित तमाम राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने डॉ एस के त्रिपाठी के निधन पर गहरा शोक जताया है।

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