मंत्रोच्चारों के बीच महंत नरेंद्र गिरि को दी गई भू -समाधि, पढ़िए क्यों और कैसे दी जाती है भू- समाधि

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को बाघंबरी मठ में भू समाधि दे दी गई। मंत्रोच्चारों के बीच उनके शिष्य बलबीर गिरि ने अंतिम क्रिया पूरी की । इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे।
 
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महंत नरेंद्र गिरि दी गई भू समाधि

प्रयागराज। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को बाघंबरी मठ में भू समाधि दे दी गई। मंत्रोच्चारों के बीच उनके शिष्य बलबीर गिरि ने अंतिम क्रिया पूरी की । इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे।

इससे पहले पहले उनके पार्थिव शरीर का स्वरूप रानी नेहरू हॉस्पिटल में 5 डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीएम को बंद लिफाफे में भेजी जाएगी। बाघंमरी मठ के भीतर समाधि स्थल को फूलों से सजाया गया है।

महंत के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ को देखते हुए प्रयागराज में शहरी क्षेत्र के 12वीं तक के सभी स्कूल-कॉलेज में छुट्‌टी कर दी गई है।

कैसे देते हैं भू-समाधि
भू-समाधि में पद्मासन या सिद्धिसन की मुद्रा में बिठाकर जमीन में दफना दिया जाता है। महंत नरेंद्र गिरि को भी इसी तरह से भू-समाधि दी जा रही है। शैव, नाथ, दशनामी, अघोर और शाक्त परंपरा के साधु-संतों को भू-समाधि देते हैं। गिरि शैव पंथ के दसनामी संप्रदाय से संबंध रखते हैं। अक्सर गुरु की समाधि के बगल में ही शिष्य को भू-समाधि दी जाती है। नरेंद्र गिरि को भी प्रयागराज में उनके मठ के अंदर अपने गुरु की समाधि के बगल में भू-समाधि दी जा रही है। समाधि मठ में या किसी खास जगह पर दी जाती है।

क्यों दी जाती है भू-समाधि

सनातन धर्म में देहांत के बाद दाह संस्कार किया जाता है जबकि बच्चे को दफनाया जाता है और साधुओं को समाधि दी जाती है। इसके पीछे भी कई तर्क हैं। माना जाता है कि साधु और बच्चों का तन और मन निर्मल रहता है। साधु और बच्चों में आसक्ति नहीं होती है।