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मध्य प्रदेश

चुनाव आयोग को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगायी रोक

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नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राजीनीतिक दलों और चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी हे। सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर हाईकोर्ट के उस फैसले पर स्टे दे दिया है, जिसमें रैलियों और सभाओं पर रोक लगाई गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ चुनाव आयेाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने भी सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी।

कोविड-19 की गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ करे करवाई

ग्वालियर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ लगाई गई याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग नियम तोड़ने वालों और कोविड-19 की गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ करवाई करे।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने अपने आदेश में राजनीतिक दलों को भौतिक सभाएं करने से रोक दिया था, जब तक कि उन्हें जिलाधिकारियों और चुनाव आयोग से यह प्रमाणित नहीं किया गया हो कि वर्चु्अल चुनाव अभियान संभव नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अगर भौतिक सभा करने की इजाजत मिल भी जाए तो, राजनीतिक दल को इसके लिए धन राशि जमा कराने की आवश्यकता होगी।

चुनाव आयोग ने भी खटखटाया था उच्चतम न्यायलय का दरवाजा

उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग ने बीते गुरुवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। चुनाव आयोग ने तर्क दिया था कि उच्च न्यायालय का 20 अक्तूबर का आदेश शीर्ष अदालत द्वारा लगातार दिए गए आदेशों की अवहेलना करता है। आयोग ने कहा सर्वोच्च अदालत अपने आदेशों में यह कहता रहा है कि चुनाव आयोग चुनाव प्रक्रिया के संचालन और पर्यवेक्षण के लिए एकमात्र प्राधिकरण है और बहु-स्तरीय चुनाव प्रक्रिया में अदालतों को हस्तक्षेप करने से रोकता है।

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