मध्यप्रदेश : जनजातीय महासम्मेलन में पीएम मोदी बोले- भारत की आज़ादी में जनजातीय समाज का बड़ा योगदान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर आयोजित जनजातीय महासम्मेलन में पहुंच गए हैं। उन्होंने यहां मंच पर जनजातीय जननायक भगवान बिरमा मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।

 
मध्यप्रदेश : जनजातीय महासम्मेलन में पीएम मोदी बोले-  भारत की आज़ादी में जनजातीय समाज का बड़ा योगदान 

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर आयोजित जनजातीय महासम्मेलन में पहुंच गए हैं। उन्होंने यहां मंच पर जनजातीय जननायक भगवान बिरमा मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मौजूद रहे। मंच पर 13 आदिवसी नेताओं के साथ केन्द्रीय और राज्य के मंत्री एवं जनप्रतिनिधि मौजूद हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की आजादी में जनजातीय समाज का बहुत योगदान है, लेकिन उनके इतिहास को अंधेरे में रखा गया। विपक्ष पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा कि जनजातीय समाज के बारे में देश को बताया ही नहीं गया। जानकारी दी भी गई तो बहुत सीमित दायरे में दी गई। ऐसा इसलिए क्योंकि आजादी के बाद दशकों तक जिन्होंने सरकार चलाई, उन्होंने स्वार्थ को प्राथमिकता दी। भारत की आबादी का 10 फीसदी हिस्सा होने के बावजूद सरकार ने उनके योगदान को नजरअंदाज कर दिया। आदिवासियों की परंपरा, उनकी बहादुरी को नजरअंदाज किया गया। क्या जनजातीय समाज के योगदान के बिना स्वतंत्रता संग्राम की कल्पना की जा सकती है।

पीएम ने कहा कि दुनिया के पढ़े लिखे देशों में भी टीकाकरण को लेकर सवाल उठते हैं। लेकिन मेरा आदिवासी भाई अपनी जिम्मेदारी समझता भी है उसे निभाता भी है। इससे बड़ी बात क्या होगी। सबसे बड़ी महामारी से पूरी दुनिया लड़ रही है। इस बीच जनजातीय समाज के भाइयों का वैक्सिनेशन के लिए आगे आना अपने आप में अनोखा है। बाकी लोगों को भारत की जानजाति से सीखना चाहिए।

आज जब मैं आपसे अपनी विरासत संजोने की बात कर रहा हूं तब मैं आपसे बाबासाहेब पुरंदरे की भी बात करुंगा। बाबासाहेब पुरंदरे ने छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को लोगों तक पहुंचाने का जो काम किया, वो अभूतपूर्व है। यह आदर्श हमें निरंतर प्रेरणा देते रहेंगे।

गुलामी के कालखंड में विदेशी शासन के खिलाफ मिजो आंदोलन, रानी कमलापति का बलिदान, देश इन्हें भूल नहीं सकता। वीर महाराणा प्रताप के संघर्ष की कल्पना उन बहादुर भीलों के बिना नहीं की जा सकती, जिन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर राणा प्रताप के साथ युद्ध के मैदान में खुद को बलि चढ़ा दिया। हम इन सभी लोगों के ऋणि हैं। लेकिन अपनी विरासत में उन्हें उचित स्थान देकर अपना दायित्व जरूर निभा सकते हैं।