वीरता का सम्मान: गलवान में चीन के छक्के छुड़ाने वाले शहीद कर्नल संतोष बाबू को महावीर चक्र

लद्दाख सेक्टर की गलवान घाटी में बीते साल चीन के सैनिकों के छक्के छुड़ाने वाले शहीद कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से उनकी मां और पत्नी ने महावीर चक्र प्राप्त किया।
 
Mahavir Chakra to Martyr Colonel Santosh Babu
शहीद कर्नल संतोष बाबू को महावीर चक्र

नई दिल्ली। लद्दाख सेक्टर की गलवान घाटी में बीते साल चीन के सैनिकों के छक्के छुड़ाने वाले शहीद कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से उनकी मां और पत्नी ने महावीर चक्र प्राप्त किया।

वहीं, उनके साथ आपरेशन स्नो लेपर्ड का हिस्सा रहे वीरगति को प्राप्त चार अन्य सैनिकों को भी वीर चक्र से सम्मानित किया गया। नायब सूबेदार नूडूराम सोरेन, हवलदार के पिलानी, नायक दीपक सिंह और सिपाही गुरतेज सिंह भी इस आपरेशन का हिस्सा थे। इससे पहले सोमवार को हुए अलंकरण समारोह में ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्तमान को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

 कर्नल संतोष बाबू के बलिदान की पूरी कहानी 

बीते साल 15 जून की रात को कर्नल संतोष बाबू गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से झड़प के दौरान शहीद हो गए थे। वह गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की थी, जिसका भारतीय सैनिकों की ओर से विरोध किया गया। 

इस दौरान कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों ने चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी का विरोध किया और कहा कि वे अपने इलाके में चले जाएं। पूरी विनम्रता के साथ कर्नल संतोष बाबू ने चीनी सैनिकों को समझाया, लेकिन अपनी जमीन से एक इंच पीछे नहीं हटे। इसी दौरान चीनी सैनिकों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी, लेकिन उसके आगे भी कर्नल संतोष डटे रहे। कर्नल संतोष की टुकड़ी ने चीनी सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर दिया था। इस घटना में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। कई मीडिया रिपोर्ट्स में चीन के भी करीब 40 सैनिकों के मारे जाने की बात सामने आई थी। हालांकि चीन ने 4 से 5 सैनिकों के ही मारे जाने की पुष्टि की थी।

इसी साल जून में गलवान घाटी में हुई झड़प के एक साल पूरा होने के मौके पर तेलंगाना सरकार ने उनके नाम पर स्मारक बनवाने का भी ऐलान किया था। वह तेलंगाना के ही सूर्यपेट के रहने वाले थे, जो राजधानी हैदराबाद से 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 

कर्नल बाबू गलवान घाटी में तैनात 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस रेजिमेंट के 20 जवानों ने गलवान घाटी में सीमा की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। तेलंगाना सरकार की ओर से कर्नल संतोष बाबू के परिजनों को 5 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई थी। इसके अलावा उनकी पत्नी को ग्रुप 1 की सरकारी नौकरी का भी ऐलान किया गया था।