Tuesday, August 16, 2022
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भगवान शिव को अतिप्रिय है रुद्राक्ष, जानिए इसको धारण करने के नियम

धर्म डेस्क। भगवान भोलेनाथ को रुद्राक्ष अतिप्रिय है। रुद्राक्ष का अर्थ है, रुद्र की धुरी, ऐसी मान्यता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। रुद्राक्ष का उपयोग प्राचीन काल से ही ग्रह शांति और आध्यात्मिक लाभ के लिए किया जाता रहा है। कुल मिलाकर 17 प्रकार के रुद्राक्ष मुख्य रूप से पाए जाते हैं लेकिन 11 प्रकार के रुद्राक्ष विशेष रूप से उपयोग में लाये जाते हैं। रुद्राक्ष के लाभ अद्भुत हैं और इसका प्रभाव स्पष्ट है लेकिन यह तभी संभव है जब रुद्राक्ष को सावधानी से और नियमों का पालन करते हुए पहना जाए। बिना नियमों को जाने गलत तरीके से रुद्राक्ष धारण करना आप को नुकसान पहुंचा सकता है।

रुद्राक्ष पहनने के फायदे

रुद्राक्ष शिवजी का प्रिय आभूषण है और इसे धारण करने से मानसिक शांत‍ि मिलती है और शरीर के कई रोग दूर होते हैंए हार्ट से लेकर हाई बीपी के मरीजों को रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती हैण् रुद्राक्ष पहनने वाला दीर्घायु होता हैण् ये जातक में तेज और ओज की वृद्धि कराता है।

रुद्राक्ष धारण करने का नियम

  • रुद्राक्ष को लाल साफ कपड़े में रखकर पूजा स्‍थान पर रखें. 
  • रुद्राक्ष को पहले पंचामृत डुबोना होता है फिर गंगाजल से धुलना चाहिए.
  • इसे धारण करने से पहले इसे शिवलिंग चढ़ाएं और शिव मंत्र या ओम नम:‍ शिवाय का जाप करें.
  • हाथ में थोड़ा सा गंगाजल लेकर संकल्प लें और फिर जल को नीचे छोड़ दें. इसके बाद ही रुद्राक्ष धारण करें.
  • रुद्राक्ष गले में या हाथों में धारण कर सकते हैं और इसे हमेशा लाल धागे में पहनें.
  • कलाई में रुद्राक्ष धारण कर रहे हैं तो इसमें रुद्राक्ष के 12 दाने, गले में धारण कर रहे हैं तो 36 दाने और यदि आप हृदय में रुद्राक्ष धारण कर रहे हैं तो 108 रुद्राक्ष के दाने होने चाहिए. 
  • रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को सात्विक भोजन और सात्विक जीवन शैली का पालन करना चाहिए।
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