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लाइफ स्टाइल

पितृ पक्ष पर क्या करें?, जानें इसका महत्व और विधि 

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राधेश्याम मिश्र

सनातन वैदिक धर्म की पावनता का परिचय यह पितृ पक्ष है इस पक्ष मे हम अपने पूर्वजो पितरो को विशेष रुप से स्मरण करते है यह पर्व प्रति वर्ष आश्विन कृष्ण पक्ष मे आता है इस वर्ष 26 सितम्बर बुधवार 2018 से पितृ पर्व प्रारम्भ हुआ है 30 सितम्बर को षष्ठी तिथि का क्षय होने के कारण यह पक्ष 14 दिन का ही है 26 सितम्बर को प्रातः 8 बजकर 24 तक ही प्रतिपदा तिथि रही है अतः प्रथम दिन की श्राद्ध  प्रातः काल करने वाले परिवार को शुभ रहा है जबकि 25 सितम्बर को ही प्रातः8 वजे के वाद करना अधिक उपयुक्त रहा होगा। जो लोग मातामही (नानी) की श्राद्ध करते है उनको 24 सितम्बर सोमवार पूर्णिमा को करना उचित रहना चाहिए ।

नित्य नैमित्तिक सभी कर्म प्रतिदिन की तरह करना चाहिए

द्वितीया की श्राद्ध मध्यान्ह मे 26 सितम्बर को ही करना श्रेष्ठ होगा था प्रायःमध्यान्ह व्यापिनी तिथि मे ही श्राद्ध करना चाहिए इससे पूर्वजो को आत्मसन्तुष्टि होती है, क्योकि हमारे माता पिता हमारे पितर पृथ्वीलोक के प्रत्यक्ष देवता है वैसे  देव ऋषि पितृ तर्पण नित्य कर्म है यह तर्पण प्रतिदिन करना चाहिए यदि इस भाग दौड के जिन्दगी मे प्रतिदिन न कर सके तो इस पक्ष मे अवश्य करना चाहिए। कहीं-कहीं ग्रामीण क्षेत्र मे पंचक मे तर्पण न करने के लिए कहते है यह शास्त्र सम्मत नही है पंचक (पचखा) मे भी पानी देना चाहिए क्या हम लोग पचखा मे पानी नही पीते।प्रायः ग्रामीणजन इस पक्ष को (मरपक्ख )कहकर कोई भी शुभ कर्म नही करते है यहा तक कि नवीन वस्त्र न खरीदना व्रत न करना कभी कभी लोग पूछते है पूजा पाठ क  या न करै  जबकि गया यात्रा इस पक्ष मे ही लोग करते है यह पक्ष इतना अशुभ होता तो यह तीर्थ यात्रा कैसे होती इसलिए मै अति विनम्र होकर समस्त सनातन धर्मावलम्बियों से कहता हू कि यह पितृ पक्ष पवित्र पर्व है शास्त्रीय दृष्टि से कुछ भी निषेध नही है नित्य नैमित्तिक सभी कर्म प्रतिदिन की तरह करना चाहिए।

प्रार्थना पूर्वजों के श्री चरणों में करना शुभ दायक

विशेषतःपितरो का स्मरण उनके पुण्य तिथि पर विप्रार्चन सुपात्र व्राह्मणो को भोजन दक्षिणा आदि देकर उनका आशीर्वाद ग्रहण करना पितरो की प्रसन्नता के लिए अत्युत्तम प्रयोग है। एक प्रश्न प्रायः लोग करते है कि गया श्राद्ध करने के वाद पितृ तर्पण और श्राद्ध नही करना चाहिए इसका भी स्पष्टीकरण शास्त्रीय आज्ञा के अनुसार यावत जीवन पितृ तर्पण करना चाहिए श्राद्ध भी करना चाहिए  पौराणिक प्रमाणानुसार व्रह्मकपाली (वद्रीनाथ) मे पिण्डदान श्राद्ध करने के वाद वार्षिकी श्राद्ध करना अनिवार्य नही है किन्तु यदि पूर्वजो के प्रति श्रद्धा हो तो श्राद्ध कर सकते है वस्तुतः श्राद्ध के व्याज से अपने पूर्वजो के प्रति श्रद्धा ही है ऐसै पावन पितृपक्ष मे हम सभी सनातनी अपने अपने पितरो के प्रति अपनी श्रद्धा सेवा समर्पित करके लोक परलोक मे यश एवं पुण्य के भागी वनै यही प्रार्थना पूर्वजो के श्री चरणो मे करना शुभ दायक है |

तर्पण विधि – (देव, ऋषि और पितृ तर्पण विधि )

आईये आज आपको पितर पक्ष में की जाने वाली तर्पण के बारे में समस्त जानकारियों से अवगत कराते है। पूर्व दिशा की और मुँह कर,दाहिना घुटना जमीन पर लगाकर,सव्य होकर(जनेऊ व् अंगोछे को बांया कंधे पर रखना) गायत्री मंत्र से शिखा बांध कर, तिलक लगाकर, दोनों हाथ की अनामिका अँगुली में कुशों का  पवित्री (पैंती) धारण करें । फिर हाथ में त्रिकुशा ,जौ, अक्षत और जल लेकर संकल्प पढें:
ॐ विष्णवे नम: ३। हरि: ॐ तत्सदद्यैतस्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे आर्यावर्तैकदेशे अमुकसंवत्सरे अमुकमासे अमुकपक्षे अमुकतिथौ अमुकवासरे अमुकगोत्रोत्पन्न: अमुकशर्मा (वर्मा, गुप्त:) अहं श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं देवर्पिमनुष्यपितृतर्पणं करिष्ये ।

तीन कुश ग्रहण कर निम्न मंत्र को तीन बार कहें

ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमोनमः।
इसके साथ एक ताँवे अथवा चाँदी के पात्र में श्वेत चन्दन, जौ, तिल, चावल, सुगन्धित पुष्प और तुलसीदल रखें, फिर उस पात्र में तर्पण के लिये जल भर दें । फिर उसमें रखे हुए त्रिकुशा को तुलसी सहित सम्पुटाकार दायें हाथ में लेकर बायें हाथ से उसे ढँक लें और  देवताओं का आवाहन करें ।
आवाहन मंत्र : ॐ विश्वेदेवास ऽआगत श्रृणुता म ऽइम, हवम् । एदं वर्हिनिषीदत ॥
‘हे विश्वेदेवगण  ! आप लोग यहाँ पदार्पण करें, हमारे प्रेमपूर्वक किये हुए इस आवाहन को सुनें और इस कुश के आसन पर विराजे ।
इस प्रकार आवाहन कर कुश का आसन दें और त्रिकुशा द्वारा दायें हाथ की समस्त अङ्गुलियों के अग्रभाग अर्थात् देवतीर्थ से ब्रह्मादि देवताओं के लिये पूर्वोक्त पात्र में से एक-एक अञ्जलि तिल चावल-मिश्रित जल लेकर दूसरे पात्र में गिरावें और निम्नाङ्कित रूप से उन-उन देवताओं के नाममन्त्र पढते रहें. देवतर्पण:|ॐ ब्रह्मास्तृप्यताम् ,ॐ विष्णुस्तृप्यताम् ,ॐ रुद्रस्तृप्यताम् |ॐ प्रजापतिस्तृप्यताम् |ॐ देवास्तृप्यन्ताम् ।ॐ छन्दांसि तृप्यन्ताम् ।ॐ वेदास्तृप्यन्ताम् ।ॐ ऋषयस्तृप्यन्ताम् ।ॐ पुराणाचार्यास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ गन्धर्वास्तृप्यन्ताम् ।ॐ इतराचार्यास्तृप्यन्ताम् ।ॐ संवत्सररू सावयवस्तृप्यताम् ।ॐ देव्यस्तृप्यन्ताम् ।ॐ अप्सरसस्तृप्यन्ताम् ।ॐ देवानुगास्तृप्यन्ताम् ।ॐ नागास्तृप्यन्ताम् ।ॐ सागरास्तृप्यन्ताम् ।ॐ पर्वतास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ सरितस्तृप्यन्ताम् ।ॐ मनुष्यास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ यक्षास्तृप्यन्ताम् ।ॐ रक्षांसि तृप्यन्ताम् ।
ॐ पिशाचास्तृप्यन्ताम् ।ॐ सुपर्णास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ भूतानि तृप्यन्ताम् ।ॐ पशवस्तृप्यन्ताम् ।
ॐ वनस्पतयस्तृप्यन्ताम् ।ॐओषधयस्तृप्यन्ताम् ।ॐ भूतग्रामश्चतुर्विधस्तृप्यताम् ।
.ऋषितर्पण:इसी प्रकार निम्नाङ्कित मन्त्रवाक्यों से मरीचि आदि ऋषियों को भी एक-एक अञ्जलि जल दें:ॐ मरीचिस्तृप्यताम् ।ॐ अत्रिस्तृप्यताम् ।ॐ अङ्गिरास्तृप्यताम् ।
ॐ पुलस्त्यस्तृप्यताम् ।ॐ पुलहस्तृप्यताम् ।
ॐ क्रतुस्तृप्यताम् ।ॐ वसिष्ठस्तृप्यताम् ।
ॐ प्रचेतास्तृप्यताम् ।ॐ भृगुस्तृप्यताम् ।
ॐ नारदस्तृप्यताम् ॥
.दिव्यमनुष्यतर्पण:उत्तर दिशा की ओर मुँह कर, जनेऊ व् गमछे को माला की भाँति गले में धारण कर, सीधा बैठ कर  निम्नाङ्कित मन्त्रों को दो-दो बार पढते हुए दिव्य मनुष्यों के लिये प्रत्येक को दो-दो अञ्जलि जौ सहित जल प्राजापत्यतीर्थ (कनिष्ठिका के मूला-भाग) से अर्पण करें:ॐ सनकस्तृप्यताम् |ॐ सनन्दनस्तृप्यताम्|ॐ सनातनस्तृप्यताम् |ॐ कपिलस्तृप्यताम् -2|ॐ आसुरिस्तृप्यताम् -2
ॐ वोढुस्तृप्यताम् -2,ॐ पञ्चशिखस्तृप्यताम् -2
.दिव्यपितृतर्पण :दोनों हाथ के अनामिका में धारण किये पवित्री व त्रिकुशा को निकाल कर रख दे ,अब दोनों हाथ की तर्जनी अंगुली में नया पवित्री धारण कर मोटक नाम के कुशा के मूल और अग्रभाग को दक्षिण की ओर करके  अंगूठे और तर्जनी के बीच में रखे, स्वयं दक्षिण की ओर मुँह करे, बायें घुटने को जमीन पर लगाकर अपसव्यभाव से (जनेऊ को दायें कंधेपर रखकर बाँये हाथ जे नीचे ले जायें ) पात्रस्थ जल में काला तिल मिलाकर पितृतीर्थ से (अंगुठा और तर्जनी के मध्यभाग से ) दिव्य पितरों के लिये निम्नाङ्कित मन्त्र-वाक्यों को पढते हुए तीन-तीन अञ्जलि जल देंॐ कव्यवाडनलस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3,ॐ सोमस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3|ॐ यमस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3|ॐ अर्यमा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3|ॐ अग्निष्वात्ता: पितरस्तृप्यन्ताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तेभ्य: स्वधा नम: – 3|ॐ सोमपा: पितरस्तृप्यन्ताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तेभ्य: स्वधा नम: – 3|ॐ बर्हिषद: पितरस्तृप्यन्ताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तेभ्य: स्वधा नम: – 3|5.यमतर्पण :इसी प्रकार निम्नलिखित मन्त्रो को पढते हुए चौदह यमों के लिये भी पितृतीर्थ से ही तीन-तीन अञ्जलि तिल सहित जल दें—ॐ यमाय नम: – 3|ॐ धर्मराजाय नम: – 3|ॐ मृत्यवे नम: – 3
|ॐ अन्तकाय नम: – 3|ॐ वैवस्वताय नमः – _3|ॐ कालाय नम: – 3|ॐ सर्वभूतक्षयाय नम: _3|ॐ औदुम्बराय नम: – 3|ॐ दध्नाय नम:  3|ॐ नीलाय नम: – 3|ॐ परमेष्ठिने नम: – 3|ऊं वृकोदराय नम: – 3ॐ चित्राय नम: – 3|ॐ चित्रगुप्ताय नम: – 3|6.मनुष्यपितृतर्पण
इसके पश्चात् निम्नाङ्कित मन्त्र से पितरों का आवाहन करेंगे अग्ने ! तुम्हारे यजन की कामना करते हुए हम तुम्हें स्थापित करते हैं । यजन की ही इच्छा रखते हुए तुम्हें प्रज्वलित करते हैं । हविष्य की इच्छा रखते हुए तुम भी तृप्ति की कामनावाले हमारे पितरों को हविष्य भोजन करने के लिये बुलाओ ।’तदनन्तर अपने पितृगणों का नाम-गोत्र आदि उच्चारण करते हुए प्रत्येक के लिये पूर्वोक्त विधि से ही तीन-तीन अञ्जलि तिल-सहित जल इस प्रकार दें—
अस्मत्पिता अमुकशर्मा  वसुरूपस्तृप्यतांम् इदं सतिलं जलं (गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3 |अस्मत्पितामह: (दादा) अमुकशर्मा रुद्ररूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं (गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3|अस्मत्प्रपितामह: (परदादा) अमुकशर्मा आदित्यरूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं (गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3|अस्मन्माता अमुकी देवी वसुरूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नम: – 3|अस्मत्पितामही (दादी) अमुकी देवी  रुद्ररूपा तृप्यताम् इदं

सतिलं जलं तस्यै स्वधा नम: – 3

अस्मत्प्रपितामही परदादी अमुकी देवी आदित्यरूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जल तस्यै स्वधा नम: – 3|इसके बाद नौ बार पितृतीर्थ से जल छोड़े।इसके बाद सव्य होकर पूर्वाभिमुख हो नीचे लिखे श्लोकों को पढते हुए जल गिरावे|देवासुरास्तथा यक्षा नागा गन्धर्वराक्षसा: ।  पिशाचा गुह्यका: सिद्धा: कूष्माण्डास्तरव: खगा:|जलेचरा भूमिचराः वाय्वाधाराश्च जन्तव: । प्रीतिमेते प्रयान्त्वाशु मद्दत्तेनाम्बुनाखिला: ॥
नरकेषु समस्तेपु यातनासु च ये स्थिता: । तेषामाप्ययनायैतद्दीयते सलिलं मया येऽबान्धवा बान्धवा वा येऽन्यजन्मनि बान्धवा: । ते सर्वे तृप्तिमायान्तु ये चास्मत्तोयकाङ्क्षिण: ॥
अर्थ : ‘देवता, असुर , यक्ष, नाग, गन्धर्व, राक्षस, पिशाच, गुह्मक, सिद्ध, कूष्माण्ड, वृक्षवर्ग, पक्षी, जलचर जीव और वायु के आधार पर रहनेवाले जन्तु-ये सभी मेरे दिये हुए जल से भीघ्र तृप्त हों । जो समस्त नरकों तथा वहाँ की यातनाओं में पङेपडे दुरूख भोग रहे हैं, उनको पुष्ट तथा शान्त करने की इच्छा से मैं यह जल देता हूँ । जो मेरे बान्धव न रहे हों, जो इस जन्म में बान्धव रहे हों, अथवा किसी दूसरे जन्म में मेरे बान्धव रहे हों, वे सब तथा इनके अतिरिक्त भी जो मुम्कसे जल पाने की इच्छा रखते हों, वे भी मेरे दिये हुए जल से तृप्त हों ।’
ॐ आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं देवषिंपितृमानवा: । तृप्यन्तु पितर: सर्वे मातृमातामहादय: ॥
अतीतकुलकोटीनां सप्तद्वीपनिवासिनाम् । आ ब्रह्मभुवनाल्लोकादिदमस्तु  तिलोदकम् ॥
येऽबान्धवा बान्धवा वा येऽन्यजन्मनि बान्धवा: ।ते सर्वे तृप्तिमायान्तु मया दत्तेन वारिणा ॥
अर्थ : ‘ब्रह्माजी  से लेकर कीटों तक जितने जीव हैं, वे तथा देवता, ऋषि, पितर, मनुष्य और माता, नाना आदि पितृगण-ये सभी तृप्त हों मेरे कुल की बीती हुई करोडों पीढियों में उत्पन्न हुए जो-जो पितर ब्रह्मलोकपर्यम्त सात द्वीपों के भीतर कहीं भी निवास करते हों, उनकी तृप्ति के लिये मेरा दिया हुआ यह तिलमिश्रित जल उन्हें प्राप्त हो जो मेरे बान्धव न रहे हों, जो इस जन्म में या किसी दूसरे जन्म में मेरे बान्धव रहे हों, वे सभी मेरे दिये हुए जल से तृप्त हो जायँ ।
वस्त्र-निष्पीडन करे तत्पश्चात् वस्त्र को चार आवृत्ति लपेटकर जल में डुबावे और बाहर ले आकर निम्नाङ्कित मन्त्र : “ये के चास्मत्कुले जाता अपुत्रा गोत्रिणो मृतारू । ते गृह्णन्तु मया दत्तं वस्त्रनिष्पीडनोदकम् ” को पढते हुए अपसव्य होकर अपने बाएँ भाग में भूमिपर उस वस्त्र को निचोड़े । पवित्रक को तर्पण किये हुए जल मे छोड दे । यदि घर में किसी मृत पुरुष का वार्षिक श्राद्ध आदि कर्म हो तो वस्त्र-निष्पीडन नहीं करना चाहिये ।
भीष्मतर्पण :इसके बाद दक्षिणाभिमुख हो पितृतर्पण के समान ही अनेऊ अपसव्य करके हाथ में कुश धारण किये हुए ही बालब्रह्मचारी भक्तप्रवर भीष्म के लिये पितृतीर्थ से तिलमिश्रित जल के द्वारा तर्पण करे । उनके लिये तर्पण का मन्त्र निम्नाङ्कित श्लोक है–
‘वैयाघ्रपदगोत्राय साङ्कृतिप्रवराय च । गङ्गापुत्राय भीष्माय प्रदास्येऽहं तिलोदकम् । अपुत्राय ददाम्येतत्सलिलं भीष्मवर्मणे ॥”
अर्घ्य दान:फिर शुद्ध जल से आचमन करके प्राणायाम करे । तदनन्तर यज्ञोपवीत सव्य कर एक पात्र में शुद्ध जल भरकर उसमे श्वेत चन्दन, अक्षत, पुष्प तथा तुलसीदल छोड दे । फिर दूसरे पात्र में चन्दन् से षडदल-कमल बनाकर उसमें पूर्वादि दिशा के क्रम से ब्रह्मादि देवताओं का आवाहन-पूजन करे तथा पहले पात्र के जल से उन पूजित देवताओं के लिये अर्ध्य अर्पण करे ।अर्ध्यदान के मन्त्र निम्नाङ्कित हैं—ॐ ब्रह्म जज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्वि सीमत: सुरुचो व्वेन ऽआव:। स बुध्न्या ऽउपमा ऽअस्य व्विष्ठा: सतश्च योनिमसतश्व व्विव:॥ ॐ ब्रह्मणे नम:। ब्रह्माणं पूजयामि ॥ॐ इदं विष्णुर्विचक्रमे त्रेधा निदधे पदम् । समूढमस्यपा, सुरे स्वाहा ॥ ॐ विष्णवे नम: । विष्णुं पूजयामि ॥ॐ नमस्ते रुद्र मन्यव ऽउतो त ऽइषवे नम: । वाहुब्यामुत ते नम: ॥ ॐ रुद्राय नम: । रुद्रं पूजयामि ॥ॐ तत्सवितुर्व रेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो न: प्रचोदयात् ॥ ॐ सवित्रे नम: । सवितारं पूजयामि ॥ॐ मित्रस्य चर्षणीधृतोऽवो देवस्य सानसि । द्युम्नं चित्रश्रवस्तमम् ॥ ॐ मित्राय नम:। मित्रं पूजयामि ॥ॐ इमं मे व्वरूण श्रुधी हवमद्या च मृडय ।   त्वामवस्युराचके ॥ ॐ वरुणाय नम: । वरूणं पूजयामि ॥

फिर भगवान सूर्य को अघ्र्य दें:

एहि सूर्य सहस्त्राशों तेजो राशिं जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणाघ्र्य दिवाकरः।

हाथों को उपर कर उपस्थाप मंत्र पढ़ें :

चित्रं देवाना मुदगादनीकं चक्षुर्मित्रस्य वरूणस्याग्नेः। आप्राद्यावा पृथ्वी अन्तरिक्ष सूर्यआत्माजगतस्तस्थुशश्च। फिर परिक्रमा करते हुए दशों दिशाओं को नमस्कार करें।
ॐ प्राच्यै इन्द्राय नमः। ॐ आग्नयै अग्नयै नमः। ॐ दक्षिणायै यमाय नमः। ॐ नैऋत्यै नैऋतये नमः। ॐ पश्चिमायै वरूणाय नमः। ॐ वायव्यै वायवे नमः। ॐ उदीच्यै कुवेराय नमः। ॐ ऐशान्यै ईशानाय नमः। ॐ ऊध्र्वायै ब्रह्मणै नमः। ॐ अवाच्यै अनन्ताय नमः।
इस तरह दिशाओं और देवताओं को नमस्कार कर बैठकर नीचे लिखे मन्त्र से पुनः देवतीर्थ से तर्पण करें।
ॐ ब्रह्मणै नमः। ॐ अग्नयै नमः। ॐ पृथिव्यै नमः। ॐ औषधिभ्यो नमः। ॐ वाचे नमः। ॐ वाचस्पतये नमः। ॐ महद्भ्यो नमः। ॐ विष्णवे नमः। ॐ अद्भ्यो नमः। ॐ अपांपतये नमः। ॐ वरूणाय नमः।
फिर तर्पण के जल को मुख पर लगायें और तीन बार ॐ अच्युताय नमः मंत्र का जप करें।
समर्पण- उपरोक्त समस्त तर्पण कर्म भगवान को समर्पित करें।
ॐ तत्सद् कृष्णार्पण मस्तु।
पूर्वजों की याद के लिए ये दिन रखे गए है , उनका मज़ाक़ मत होने दीजिये| जो पितृपक्ष को दिखावा कहते हैं उनके लिए।

हमारे पितर और हम:

एक दिन की बात है मैं अपने ऑफिस में बैठा हुआ था कि हमारे इंजीनियर साहब चहकते हुए आए और एक ‘व्हाट्सएप’ कहानी सुनाए-
एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से पानी गिराकर जाप करने लगे, ” मेरी प्यासी गाय को पानी मिले।” पंडितजी के पूछने पर बोले जब आपके चढाये जल भोग आपके पुरखों को मिल जाते हैं तो मेरी गाय को भी मिल जाएगा। पंडितजी बहुत लज्जित हुए।”
कहानी सुनाकर इंजीनियर साहब जोर से ठठाकर हँसने लगे। सब ढोंग है पांडेय जी!!
न मैं बहुत पुजा पाठ करने वाला हूँ न हिं इंजीनियर साहब कोई विधर्मी।
पर शायद मैं कुछ ज्यादा हिं सहिष्णु हूँ इसलिए लोग मुझसे ऐसे कुतर्क करने से पहले ज्यादा सोचते नहीं।
खैर मैने कुछ कहा नहीं बस सामने मेज पर से ‘कैलकुलेटर’ उठाकर एक नंबर डायल किया और कान से लगा लिया। बात न हो सकी तो इंजीनियर साहब से शिकायत की। वो भड़क गए ।
बोले- ” ये क्या मज़ाक है?? ‘कैलकुलेटर ‘ में मोबाइल का फंक्शन कैसे काम करेगा। ”
तब मैंने कहा , ठीक वैसे हिं स्थूल शरीर छोड़ चुके लोगों के लिए बनी व्यवस्था जीवित प्राणियों पर कैसे काम करेगी।
साहब झेंप मिटाते हुए कहने लगे- ” ये सब पाखण्ड है , अगर नहीं है तो सिद्ध करके दिखाइए।”
मैने कहा ये सब छोड़िए, ये बताइए न्युक्लीअर पर न्युट्रान के बम्बारमेण्ट करने से क्या ऊर्जा निकलती है ?वो बोले – ” बिल्कुल! इट्स कॉल्ड एटॉमिक एनर्जी।”फिर मैने उन्हें एक चॉक और पेपरवेट देकर कहा , अब आपके हाथ में बहुत सारे न्युक्लीयर्स भी हैं और न्युट्रांस भी।
एनर्जी निकाल के दिखाइए। साहब समझ गए और तनिक लजा भी गए और बोले ” मिश्रा जी , एक काम याद आ गया; बाद में बात करते हैं। ”
दोस्तों हम किसी विषय/तथ्य को यदि प्रत्यक्षतः सिद्ध नहीं कर सकते तो इसका अर्थ है कि हमारे पास समुचित ज्ञान,संसाधन वा अनुकूल परिस्थितियाँ नहीं है , यह नहीं कि वह तथ्य हिं गलत है।हमारे द्वारा श्रद्धा से किए गए सभी कर्म दान आदि आध्यात्मिक ऊर्जा के रूप में हमारे पितरों तक अवश्य पहुँचते हैं। कुतर्को मे फँसकर अपने धर्म व संस्कार के प्रति कुण्ठा न पालें। http://www.kanvknav.com

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राशिफल : कठिन परिश्रम से अपने कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम मिलने के बन रहे योग

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युगाब्ध-5121, विक्रम संवत 2076, राष्ट्रीय शक संवत-1941, सूर्योदय 05.32, सूर्यास्त 07.02, ऋतु- ग्रीष्म

आषाढ़ कृष्ण पक्ष अष्टमी, मंगलवार, 25 जून, 2019 का दिन आपके लिए कैसा रहेगा। आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।

मेष राशि:-

आज का दिन मिला-जुला रहेगा। आत्मविश्वास में कमी आएगी। ऑफिस में काम की अधिकता रहेगी। मन में अशांति रहेगी। वाणी में मधुरता से नए संबंध बनेंगे। खर्चों की अधिकता से परेशान रहेंगे। किसी पुरानी बात को लेकर तनाव में रहेंगे। कार्यों में किसी मित्र का सहारा ले सकते हैं। अपनों का साथ सही दिशा में ले जाएगा। विद्यार्थियों का पढ़ाई लिखाई में मन नहीं लगेगा। परिवार के सदस्यों की तरफ से मिलने वाले सुख में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

वृषभ राशि:-

आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। कारोबार में आर्थिक लाभ मिलेगा। धन प्राप्ति के योग हैं। कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। पारिवारिक जीवन में भी खुशियों का माहौल बना रहेगा। प्रिय मित्र से मिलने का योग बन सकता है। सेहत का ध्यान रखें। मन प्रसन्न रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। नए स्रोतों से धन की प्राप्ति हो सकती है। वाणी पर संयम और गुस्से पर नियंत्रण रखें। बुजुर्गों की सेवा करना शुभ फल देगा। पिता के साथ तालमेल से लाभ प्राप्त होगा।

मिथुन राशि:-

आज का दिन सामान्य रहेगा। कारोबार में सभी कार्य आसानी से पूरे होंगे और धनलाभ की स्थिति रहेगी। शिक्षा के क्षेत्र में परेशानियां होगी। विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। पिता से लाभ मिल सकता है। गुस्से पर काबू रखें। यात्रा पर जाने के योग हैं। गृहस्थ जीवन में मधुरता रहेगी। ऑफिस या व्यावसायिक स्थल पर कार्य भार अधिक रहेगा। धन अधिक खर्च होगा। संतान सुख में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य को लेकर असमंजय बना रहेगा। खान-पान का ध्यान रखें।

कर्क राशि:-

आज का दिन अच्छा रहेगा। धन लाभ होने के योग बने हुये हैं। नए कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं। दोस्तों से लाभ मिल सकता है। किसी यात्रा पर जा सकते हैं। वाद-विवाद से दूर रहें। वाणी पर संयम रखें। परिवारजनों के साथ किसी समारोह में जाने की संभावना बन रही है। खरीददारी में अधिक खर्च हो सकता है। कार्य क्षेत्र मे सफलता मिलेगी। परिवार के साथ भी तालमेल अच्छा बना रहेगा। मित्रों से मतभेद होने की संभावना बनी हुई है। मानसिक तनाव रहेगा।

सिंह राशि:-

आज का दिन शुभ रहेगा। कारोबार में आर्थिक लाभ होगा। बेरोजगार लोगों को आज रोजगार मिलने की संभावना है। पति-पत्नी के बीच तालमेल बना रहेगा। मित्रों के पीछे धन खर्च हो सकता है। अपने गुस्से पर काबू रखें। खुद पर विश्वास रखना बेहद जरूरी है। जीवनसाथी के साथ कहीं बाहर घूमने जाने का योग बन सकता है। परिवार के साथ अच्छा समय व्यातीत होगा। मन में नकारात्मक विचार न आने दें। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है।

कन्या राशि:-

आज का दिन सामान्य रहेगा। कारोबार में आर्थिक लाभ होने की संभावनाएं हैं। मन में नए विचार आएंगे। किसी अच्छी कंपनी से नौकरी का ऑफर मिल सकता है। परिवार में भी मतभेद रहेगा। अनावश्यक खर्च बढऩे से चिंता से घिरे रहेंगे और शारीरिक स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं रहेगा। किसी रुके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है। कार्यक्षेत्र में परिश्रम की अधिकता रहेगी। कुछ नये लोगों से संबंध बनेंगे। स्वभाव पर नियंत्रण और स्वास्थ्य का ध्यान का ध्यान रखें।

तुला राशि:-

आज का दिन मिला-जुला रहेगा। किसी धार्मिक स्थान की यात्रा पर जाना हो सकता है। मित्रों से मुलाकात हो सकती है। शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, लेकिन अनावश्यक खर्च से तनाव बढ़ेगा। आत्मविश्वास में कमी आएगी। अधिकतर समय गरीब और कम सुविधा प्राप्त बच्चों को शिक्षा में लगाने से खुशी मिलेगी। कुछ ऐसे लोगों से मुलाकात हो सकती है, जो भविष्य में मददगार होंगे। कार्यक्षेत्र और परिवार के बीच संतुलन रहेगा। परिवार से सहयोग देखने को मिलेगा।

वृश्चिक राशि:-

आज का दिन शुभ रहेगा। धन लाभ के योग बनेंगे और भाग्य प्रबल रहेगा। आय में वृद्धि होगी। कार्यों में सफलता मिलेगी। नौकरी में तरक्की मिल सकती है। छोटे प्रवास पर जा सकते हैं। विदेश से अच्छी खबर मिल सकती है। संतानों की ओर से भी लाभ मिलेगा। परिवारजनों तथा मित्रों के साथ आनंदपूर्वक पलों को मनाएंगे। अपनी पसंद के कार्य कर सकेंगे। जो छात्र सरकारी एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं, वे सफल रहेंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें, यात्रा पर जाने से बचें।

धनु राशि:-

आज का दिन मिला-जुला रहेगा। व्यवसाय में बढ़ोतरी की संभावनाएं हैं। ऑफिस या व्यावसायिक स्थल पर कार्य भार अधिक रहेगा। गृहस्थ जीवन में मधुरता छाई रहेगी। विदेश जाने के अवसर मिलेंगे। किसी बड़ी कंपनी से डील हो सकती है। खेल-कूद में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए दिन अच्छा रहेगा। किसी परिचित व्यक्ति से लम्बे समय बाद मिलने की सम्भावना रहेगी। अपनी योग्यता से अपनी हर मुश्किल को आसान कर लेंगे। स्वास्थ्य को प्रति सचेत रहें।

मकर राशि:-

 आज का दिन अच्छा रहेगा। माता-पिता और बुजुर्गों के आशीर्वाद से सारे काम आसानी से हो जाऐंगे। शारीरिक रूप से नई ऊर्जा का अनुभव करेंगे। कारोबार में आर्थिक लाभ होगा। आज आप नए काम शुरू कर सकते हैं। रहन-सहन में असहज महसूस करेंगे। विदेश से अच्छी खबर मिल सकती है। खुद पर संयम रखें। परिवार की समस्याएं परेशान कर सकती हैं। वस्त्र-आभूषणों के प्रति रुझान बढ़ेगा। कोई नजदीकी रिश्तदार आ सकता है।

कुंभ राशि:-

आज का दिन सामान्य रहेगा। कार्य क्षेत्र में बाधाएं आ सकती हैं। वाहन के रखरखाव पर खर्च बढ़ सकते हैं। दांपत्य जीवन के सुख अनुभव कर सकेंगे। घर के किसी बुजुर्ग से धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं। घूमने जा सकते हैं। योग और ध्यान से मानसिक शांति प्राप्त कर सकेंगे। नए लोगों से परिचय हो सकता है। दफ्तर में बचा हुआ कार्य पूरा होने की वजह से मन का बोझ हल्का होगा। किसी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत कर सकते है। जीवनसाथी से मतभेद दूर होंगे।

मीन राशि:-

आज का दिन शुभ रहेगा। कठिन परिश्रम से अपने कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम मिलने के योग रहेंगे। कारोबारी व्यापार में वृद्धि कर सकेंगे। ऑफिस में सहयोग मिलेगा। परिवारजनों और मित्रों से लाभ प्राप्त होगा। सामाजिक रूप से सफलता मिलेगी। दांपत्य जीवन आनंददायी रहेगा। परिवार के लोगों के साथ अच्छा समय व्यतीत होगा। विद्यार्थियों का भी शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा मन लगेगा। सोच-विचार कर ही कोई भी फैसला करें। खान-पान का ध्यान रखें और यात्रा पर जाने से बचें। https://www.kanvkanv.com
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लाइफ स्टाइल

समुद्र में तैरना पड़ेगा भारी, बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा, कुछ यूं किया गया है शोध

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सैन फ्रांसिस्को। समुद्र में तैरने से त्वचा माइक्रोबायोम में बदल जाती है, जिससे कान और त्वचा पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।  शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला है। अमेरिकन सोसाइटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी के वार्षिक सम्मेलन ‘एएसएम माइक्रोब-2019’ में प्रस्तुत शोध निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया कि माइक्रोबायोम में बदलाव संक्रमण के प्रति अतिसंवेदनशील हो सकते हैं।

इन बीमारियों की चपेट में आते हैं लोग

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में पीएचडी छात्रा मारिसा चैटमैन नील्सन ने कहा, “हमारे डेटा ने पहली बार प्रदर्शित किया कि समुद्र के पानी के संपर्क में मानव त्वचा की विविधता और संरचना में बदलाव हो सकता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य, स्थानीयकृत और प्रणालीगत रोगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि समुद्र के पानी के संपर्क में आने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल व श्वसन संबंधी बीमारी, कान में संक्रमण और त्वचा में संक्रमण हो सकता है।

नौ व्यक्तियों के किया गया अध्ययन में शामिल

अध्ययन के लिए नौ व्यक्तियों की जांच की गई, जिन्हें 12 घंटों तक स्नान नहीं करने दिया गया। इसके अलावा उन्हें सनस्क्रीन के उपयोग की मनाही की गई। साथ ही इस बात का ध्यान रखा गया कि उन्होंने पिछले छह महीनों के दौरान कोई एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन न किया हो। https://www.kanvkanv.com

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लाइफ स्टाइल

राशिफल : वृषभ राशि वालों के लिए आज अच्छा रहेगा का दिन, धन लाभ की है संभावना

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युगाब्ध-5121, विक्रम संवत 2076, राष्ट्रीय शक संवत-1941, सूर्योदय 05.32, सूर्यास्त 07.02, ऋतु- ग्रीष्म

आषाढ़ कृष्ण पक्ष षष्ठी, रविवार, 23 जून, 2019 का दिन आपके लिए कैसा रहेगा। आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।

मेष राशि :-

आज का दिन मिला-जुला रहेगा। कारोबार मध्यम रहेगा। कार्यक्षेत्र में काम की अधिकता रहेगी, लेकिन कठिन परिश्रम से कार्यों में सफलता मिलेगी। अनावश्यक खर्च अधिक होंगे, जिससे आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। धार्मिक कार्यों के प्रति रुझान बढ़ेगा। सामाजिक कार्यों में भाग लेंगे, जिससे समाज में सम्मान बढ़ेगा। परिवार में कलह होने की संभावना रहेगी। इसलिए वाणी पर संयम रखें।

वृषभ राशि :-

आज का दिन अच्छा रहेगा। व्यापार-धंधा अच्छा चलेगा और धन लाभ की संभावना रहेगी। कार्यभार की अधिकता रहेगी और दिन भागदौड़ में बीतेगा। शारीरिक एवं मानसिक रूप से थकान का अनुभव कर सकते हैं। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। परिजनों-मित्रों का भरपूर सहयोग मिलेगा और कार्य सफल होंगे। अनावश्यक खर्चों से बचना होगा। क्रोध पर नियंत्रण रखें और सेहत का ध्यान रखें।

मिथुन राशि :-

आज का दिन सामान्य रहेगा। व्यावसायिक गतिविधियां अच्छी चलेगीं और कार्यों में भी सफलता मिलेगी, लेकिन कार्यक्षेत्र में काम की अधिकता रहेगी और कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। पूरा दिन भागदौड़ में बीतेगा, जिससे थकान का अनुभव होगा। क्रोध पर नियंत्रण एवं वाणी पर संयम रखें, अन्यथा विवाद होने की संभावना रहेगी। परिजनों से भी कलह हो सकती है। सेहत को लेकर चिंतित रहेंगे।

कर्क राशि :-

आज का दिन अच्छा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपके अनुकूल वातावरण रहेगा। हालांकि, कार्यभार की अधिकता रहेगी, लेकिन कार्यों में सफलता मिलने से धनलाभ की स्थिति रहेगी। नौकरी में तरक्की के योग रहेंगे। पैसों के लेन-देन से बचें। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा और परिजनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य को लेकर परेशानी हो सकती है। इसलिए खान-पान का ध्यान रखें।

सिंह राशि :-

आज का दिन मिला-जुला रहेगा। व्यावसायिक गतिविधियां मध्यम रहेंगी और छोटी-छोटी परेशानियां आएंगी, लेकिन कठिन परिश्रम से कार्य सफल होंगे और धनलाभ की स्थिति रहेगी, जिससे मन प्रसन्न रहेगा। दिन भागदौड़ में बीतेगा। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा और जीवन साथी का सहयोग आपको एक नई ऊर्जा देगा। सेहत का ध्यान रखें। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें।

कन्या राशि :-

आज का दिन सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में काम की अधिकता रहेगी और कठिन परिश्रम करना पड़ेगा। शारीरिक और मानसिक रूप से तनाव का अनुभव करेंगे। क्रोध पर नियंत्रण एवं वाणी पर संयम रखें, अन्यथा विवाद की स्थिति बन सकती है। परिवार का माहौल आपके अनुकूल रहेंगे, लेकिन ध्यान रहे कि आपकी बातों से किसी को ठेस न पहुंचे। सेहत अच्छी बनी रहेगी।

तुला राशि :-

आज का दिन शुभ फलदायी रहेगी। कारोबार अच्छा चलेगा और कार्यों में सफलता मिलने से धनलाभ की स्थिति रहेगी। आकस्मिक धनलाभ की संभावना रहेगी। काम की अधिकता रहेगी, जिससे थकान का अनुभव हो सकता है। परिवार का माहौल आपके अनुकूल होगा और दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहेगा। स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। व्यापार से संबंधित किसी यात्रा पर जा सकते हैं।

वृश्चिक राशि :-

आज का दिन अच्छा रहेगा। व्यावसायिक क्षेत्र में धनलाभ की स्थिति रहेगी। कार्य आसानी से सफल होंगे। कारोबार विस्तार की योजनाएं बना सकते हैं। पैसों के लेन-देन से बचें। प्रॉपर्टी में निवेश लाभदायक सिद्ध होगा। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा और परिजनों के साथ आनंदपूर्वक समय व्यतीत होगा। कोर्ट-कचहरी के कार्यों से बचें और सेहत का ध्यान रखें। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें।

धनु राशि :-

आज का दिन मिला-जुला रहेगा। व्यावसायिक क्षेत्र में छोटी-छोटी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन अपने प्रयासों से कार्यों में सफलता मिलेगी और धनलाभ की स्थिति रहेगी। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। वाणी पर संयम रखें, अन्यथा विवाद होने की संभावना रहेगी। परिजनों का साथ पिकनिक पर जा सकते हैं। कार्यक्षेत्र में उच्चाधिकारी से सहयोग मिलेगा। सेहत का ध्यान रखें।

मकर राशि :-

आज का दिन सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में परेशानियां आएंगी और कार्यभार की अधिकता रहेगी। हालांकि, कड़ी मेहनत से कार्यों में सफलता मिलेगी, लेकिन पूरा दिन भागदौड़ में बीतेगी, जिससे थकान का अनुभव होगा। अनावश्यक खर्च की अधिक होगा, जिससे आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। परिवार में कलह होने की संभावना रहेगी। क्रोध पर नियंत्रण रखें और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

कुंभ राशि :-

आज का दिन अच्छा रहेगा। कारोबार अच्छा चलेगा और धनलाभ की स्थिति रहेगी। ग्रहों की स्थिति आपके अनुकूल रहने से आय में वृद्धि के योग रहेंगे। नौकरी में स्थान परिवर्तन की संभावना रहेगी। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा और परिजनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। मित्रों के साथ किसी यात्रा का आयोजन हो सकता है। दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहेगा। सेहत को लेकर सावधान रहें।

मीन राशि :-

आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी और कारोबार विस्तार की योजना बनाएंगे। प्रॉपर्टी में निवेश कर सकते हैं, जो कि भविष्य के लिए लाभदायक रहेगा। परिवार का माहौल खुशनुमा रहेगा और परिजनों के साथ दिन आनंदपूर्वक व्यतीत होगा। पुराने मित्रों से मुलाकात हो सकती है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। परिजनों के साथ पिकनिक या धार्मिक यात्रा का आयोजन हो सकता है। https://www.kanvkanv.com
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