वट सावित्री व्रत : सु​हागिनों ने वटवृक्ष की पूजा कर पति की लम्बी उम्र की कामना

वट सावित्री व्रत : सु​हागिनों ने वटवृक्ष की पूजा कर पति की लम्बी उम्र की कामना
वट सावित्री व्रत : सु​हागिनों ने वटवृक्ष की पूजा कर पति की लम्बी उम्र की कामना

लखनऊ। प्रदेशभर में पति की लम्बी उम्र के लिए रखा जाने वाला वट सावित्रि व्रत आज सु​हागिनों ने बड़े धूमधाम से मना रही है। सुहाग के जोड़े में पूजा की थाली लेकर वटवृक्ष (बरगद पेड़) के चारों तरफ फेरे लगाकर पूजा कर अपने पति की लम्बी उम्र की कामना की।

कोरोना काल के दौरान इस बार सुहागिनें कोविड नियमों का पालन करते हुए बरगद पेड़ की पूजा कर रही हैं। पूजा स्थलों पर पुलिस, महिला पुलिस की भी तैनाती रही और उन्हें कोविड प्रोटोकॉल के तहत पूजा कराने में अपनी अहम योगदान दिया। कुछ महिलाओं ने तो बरगद के पेड़ की डाल को घर में रखकर ही अपने व्रत को सम्पन्न किया है।

उल्लेखनीय है कि, वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती हैं। वट सावित्री व्रत सौभाग्य प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है। यह व्रत भी एक कथा से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लौटाने के लिए यमराज को भी विवश कर दिया था। इस व्रत के दिन सत्यवान-सावित्री कथा को भी पढ़ा या सुना जाता है।

एक दिन पहले तैयारियों में जुटी महिलाएं

वट सावित्री व्रत की तैयारियों को लेकर एक दिन पहले से ही सुहागिनें तैयारियों में जुट जाती हैं। सुबह उठकर पूजा सामग्री बनाती है। इसके बाद वह सजधज कर बरगज की पूजा करने जाती है। इसके बाद वह घर पर आकर कमरे के मुख्य द्वार की पूजा करती है। इसके बाद जल को ग्रहण करती हैं।

क्यों की जाती है बरगद के वृक्ष की पूजा?

वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में बरगद का वृक्ष पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इस वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा शुभ मानी जाती है।

वट वृक्ष की पूजा कर सुहागिनों ने मांगा अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद

उधर, कानपूर जिले में कोरोना काल में सुहागिनों ने कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए घरों में ही वट वृक्ष की पूजा अर्चना करके मां सावित्री से अपने पति की दीर्घायु का आशीर्वाद मांगा। साथ ही महिलाओं ने अपील भी कि कोरोना काल में सभी लोगों को कोविड नियमों का पालन करते हुए मास्क का प्रयोग अवश्य करें।

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सुहागिन महिला डॉली तिवारी ने बताया कि आज के ही दिन सावित्री देवी ने अपने पति के प्राण यमराज देव से बचाए थे, जिसको लेकर इस पूजा को हर सुहागिन पूजा अर्चना कर मनाती है। वट वृक्ष सावित्री की पूजा करने से पति की दीर्घायु व संतान का सुख मिलता है।

सुहागिन महिला रुचि ने बताया कि वह पिछले 17 वर्षों से वट वृक्ष व सावित्री देवी की पूजा अर्चना कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे मां सावित्री का आशीर्वाद निरंतर मिला है। हरवंश मोहाल निवासी अंजना का कहना है कि कोरोना काल में पड़ रही वट वृक्ष पूजा में उन्होंने घर पर ही रहकर मां सावित्री का ध्यान व पूजा अर्चना कर पति की लम्बी आयु का आशीर्वाद मांगा है।

सुहागिन पुष्पांजलि तिवारी ने बताया कि उन्होंने पहली बार वट सावित्री की पूजा अर्चना कर रही है। विधि-विधान से पूजन करके अपने पति की दीर्घायु का आशीर्वाद मांगा है। उन्होंने बताया कि सावित्री देवी ने अपनी कड़ी तपस्या से अपने पति के प्राण बचाए थे।

विवाहिता अंजलि तिवारी ने बताया कि वट सावित्री का व्रत पूजन बड़ा फलदायी है। उन्होंने पूजा कर पति व बच्चे के साथ परिवार की खुशहाली की कामना की। साथ ही देश से कोविड महामारी के जाने की प्रार्थना की।

आचार्य विशाल द्विवेदी ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन रखा जाता है। इस दिन महिलाएं पति की दीर्घायु और संतान के उज्जवल भविष्य के लिए व्रत रखती हैं। इस साल वट सावित्री का व्रत गुरुवार को मनाया गया है। उनका कहना है कि जो भी विवाहित महिलाएं वट वृक्ष सावित्री की पूजा अर्चना मन से करती है, उन पर प्रभु देव की विशेष रूप से कृपा होती है। वट वृक्ष सावित्री की पूजा हर सुहागिन के लिए एक विशेष महत्व भी रखती हैं।

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