किन्नरों से जुड़े कुछ अनसुने रहस्य

लाइफ़स्टाइल |भारत में किन्नरों का इतिहास चार हजार साल से भी पुराना है, इसके बावजूद आज तक उन्हें सोसाइटी में बराबरी का दर्जा नहीं मिल पाया। हम वास्तव में आज तक उनसे जुड़े पहलूओं को ही नहीं जान पाए हैं जो सीधी उनकी जिंदगी से जुड़े है। जैसे उनकी परम्पराएं हिन्दू धर्म की होती है लेकिन उनके गुरु मुस्लिम होते हैं। देखा जाए तो भारत में रहने वाले किन्नरों की ज्यादातर परम्पराएं हिन्दू धर्म के मुताबिक निभाई जाती है, ऐसे तमाम अनजाने पहलू हैं, जिनकी जानकारी काफी कम लोगों को होगी है।

किन्नरों के बारे में ऐसी मान्यता है कि इनके द्वारा दी गई दुआएं सफल होती हैं। कोई भी शुभ काम हो चाहे घर में शादी हो, बच्चा हुआ हो, किन्नर अपनी दुआ देने के लिए हमेशा पहुंच जाते हैं। लेकिन इनके श्राप से भी लोग बहुत डरते हैं। किन्नरों की जिंदगी जन्म से लेकर मृत्यु तक बहुत ही दर्दनाक होती है। किन्नरों की मौत होती है, तो इनका अंतिम संस्कार रात में किया जाता है। मृत किन्नर के शव को जूत-चप्पलों से पीटा जाता है।

किन्नरों की छठी इंद्रीय काफी तेज

सामान्यत् किन्नरों को लोग जानते हैं लेकिन लोग इनके बारे में भी जानना चाहते हैं। किन्नरों से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं, जिन्हें शायद आप नहीं जानते होंगे। कहा जाता है कि किन्नरों की छठी इंद्रीय काफी तेज होती है, इन्हें आगे होने वाली घटनाओं का आभास हो जाता है। बताया जाता है कि किन्नरों को पहले ही पता चल जाता है कि उनकी मौत होने वाली है। इससे जुड़े कई सारे प्रमाण दुनिया भर से सामने आए हैं।

तो जब भी किसी किन्नर की मौत होने वाली है तो वे अजीब सा व्यवहार करना शुरू कर देते हैं। वे कहीं बाहर आना-जाना और खाना बंद कर देते हैं। और इस दौरान वे केवल पानी पीते हैं। इसके साथ ही ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे अगले जन्म में किन्नर न बनें।

दफ़नाने से पहले की प्रक्रिया

बताया जाता है कि किन्नरों के शव को दफनाया जाता है लेकिन उससे पहले आत्‍मा को आजाद करने की प्रक्रिया (Soul Liberation Process) की जाती है। इसके लिए शव को सफेद कपड़े में लपेटा जाता है। साथ ही हर तरह के बंधन से मुक्त करने के लिए उनके शव पर कुछ नहीं बांधा जाता है।

रात में जलाने की परंपरा

खासतौर पर ऐसी कोशिश की जाती है कि मृत किन्नर के शरीर को समुदाय के बाहर का व्यक्ति न देखे। क्योंकि वे मानते हैं कि अगर किन्‍नर के शरीर को किसी आम जन ने देखा तो वो दिवंगत किन्नर फिर से किन्‍नर योनि में ही जन्म लेगा।और यही वजह है कि इनके अंतिम संस्कार के सभी रिवाज रात में ही पूरे किए जाते हैं। वहीं शव यात्रा निकालने से पहले शव को जूते-चप्‍पलों से पीटते हैं जिससे अगले जन्म में वह फिर से किन्नर न बने। वे प्रार्थना करते हैं कि इस जन्म से शव को मुक्ति मिले।