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ऐसे बनाएं कटहल के लज़ीज कबाब, यहां जानें पूरी रेसिपी

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कटहल की सब्जी अक्सर लोगों को बहुत पसंद आती है। यदि मसालेदार कटहल की सब्जी मिल जाए तो क्या कहना। लेकिन आज हम आपको कटहल के कबाब बनाने के बारे में बताने जा रहे हैं। जो बनाने में भी आसान है और इसका स्वाद भी आपको बेहद लजीज लगेगा।

रेसिपी-सामग्री

  • कटहल-बारीक टुकड़े
  • बेसन- आधी कटोरी
  • पुदीने के पत्ते- बारीक कटा हुआ
  • हरा धनिया- 2 चम्मच
  • तेल- एक छोटा चम्मच

बनाने की विधि: सबसे पहले कटहल को उबाल लें और ठंडा होने के बाद उसका पानी अच्छे से निचोड़ लें। बेसन का घोल बनाएं और इसे बेसन के घोल में लगाकर कढ़ाही में फ्राई कर लें। इसके बाद इसमें मसाले जैसे मिर्च, हरा धनिया, नमक, अमचूर और पुदीने की पत्ती मिलाकर भूनें। ठंडा होने पर इसके हाथों से कबाब बनाएं और हल्का फ्राई कर लें। प्याज और हरी चटनी के साथ सर्व करें। https://www.kanvkanv.com

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सर्दी में आप ऐसे रखें अपने गले का ख्याल, इन चीजों को अपनाने से दूर होगी दिक्कत

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नई दिल्ली। सर्दी में अक्सर लोगों को गले में समस्या रहती है। जैसे कि गले में खराश का होना, दर्द करना। अगर आपको भी ऐसा है तो खाने-पीने में समस्या होती है। आप इससे बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपना सकते हैं। सबसे पहले तो सर्द में आप अपने गले को बचाकर रखें। ठंड लगने से गला खराब हो सकता है। आप ठंडी चीजों से भी परहेज करें। यहां तक कि ठंडे पानी का सेवन भी ना करें। अपने आपको सर्दी से बचाने के लिए स्कार्फ, मफलर या स्टोल का इस्तेमाल जरूर करें।

जूठा खाने से करें परहेज

ईएनटी विशेषज्ञ का कहना है कि आमतौर पर हम सर्दियों में गले में होने वाली किसी भी समस्या को मौसम से जोड़कर ही देखते हैं लेकिन ठंड के अलावा संक्रमण भी गले की सेहत खराब करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गले में होने वाले संक्रमण की वजह वैक्टीरिया हैं। अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति का जूठा खाते हैं जो गले के संक्रमण से पीडि़त है तो आपको संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए यह जरूरी है कि आप किसी का भी जूठा खाने-पीने से परहेज करें। बहुत ज्यादा ठंडी और गरम चीजों का सेवन भी संक्रमण का कारण बन सकता है।

टूथब्रश रखें साफ

नियमित तौर पर दिन में दो बार ब्रश करें। इसके अलावा अपने ब्रश को साफ भी रखें। सुबह ब्रश करने से पहले अपने ब्रश को नमक मिले गरम पानी में डुबोकर साफ करने के बाद ही ब्रश करें। इससे आपके दांतों के साथ-साथ आपके गले की सेहत भी दुरुस्त रहेगी। हर तीन महीने में अपने टूथब्रश को बदल दें। अगर आपका ब्रश खराब हो गया है तो तीन महीने से पहले भी इसे बदल सकते हैं। ब्रश को नमी वाले स्थान पर ना रखें, क्योंकि ऐसी जगहों पर रखने की वजह से इस पर हजारों की संख्या में संक्रमण फैलाने वाले वैक्टीरिया जमा हो जाते हैं।

नमक पानी से करें गरारा

रात को सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक मिलाकर गरारा करने से गले को आराम मिलता है। सर्दियों के दौरान नियमित गरारा करने को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें। नमक मिला गरम पानी गले में इंफेक्शन की वजह से आयी सूजन को कम कर आराम पहुंचाता है।
जल्दी आराम पाने के लिए बेहतर होगा कि आप हर तीन घंटे में गरारा करें। गरारा करने के तुरन्त बाद किसी ठंडे पदार्थ का सेवन न करें। गुनगुने पानी में सिरका मिलाकर गरारा करने से आपको गले के रोग में आराम मिलता है। अगर गले में दर्द हो रहा है और आवाज नहीं निकल रही है तो अजवाइन और मुलैठी वाले पानी से भाप लेंए इससे आपके गले का दर्द भी खत्म होगा और आपकी आवाज भी खुल जाएगी।

शहद और अदरक हैं कारगर

सर्दियों में गले की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए नियमित तौर पर अदरक और शहद का सेवन करना लाभदायक होता है। सुबह ब्रश करने के बाद एक चम्मच अदरक के रस में एक छोटा चम्मच शहद मिलाकर पीने से पूरे दिन आपके गले को सुरक्षा मिलती है।

जब हो जाएं टॉन्सिल्स

एक डॉक्टर के अनुसार, टॉन्सिल बदलते मौसम में होने वाली बहुत सारी बीमारियों का सूचक है। अगर आपको खराश और गले में दर्द के साथ सूजन की शिकायत हो जाए तो इसका मतलब यह है कि आपको टॉन्सिल हो गया है। गले में होने वाली किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

हल्दी है काम की

अगर आपको सर्दियों के मौसम में अकसर टॉन्सिल और गले के संक्रमण की शिकायत होती है तो कच्ची हल्दी लाकर उसे सुखा कर पाउडर बना लें। इस पाउडर को नियमित तौर पर सूखे ही अपने गले के नीचे रखें और पानी ना पिएं। मुंह की लार के साथ यह गले से होते हुए पेट में चली जायेगी। जैसे-जैसे हल्दी गले में जाएगी, वैसे-वैसे टॉन्सिल खत्म होना शुरू हो जाएगा।

इन उपायों को भी आजमाएं

  1. एक चम्मच शहद में एक छोटा चम्मच नीबू का रस अच्छी तरह से मिलाकर इसका दिन में दो तीन बार सेवन करने से गले का दर्द ठीक हो जाता है।
  2. सूखा साबुत धनिया चबाते हुए चूसने से गले के दर्द में आराम मिलता है।
  3. एक चौथाई चम्मच अजवाइन में थोड़ा सा नमक और एक लौंग मिलाकर चबाते और चूसते रहने से गले का दर्द ठीक हो जाता है।
  4. गले की समस्या के समाधान के लिए लौंग, तुलसी, अदरक और काली मिर्च को पानी में डालकर उबालें, इसके बाद इसमें चायपत्ती डालकर चाय बनायें। इस चाय को पीने से गले को आराम मिलता है।
  5. अदरक में एंटीवैक्टीरियल गुण होते हैं, जो गले के संक्रमण और दर्द को ठीक करने में मददगार साबित होते हैं। एक कप पानी में अदरक डालकर उबालें। हल्का गुनगुना करके इसमें शहद मिलाएं और दिन में दो बार पिएं।
  6. कई बार गला सूखने के कारण भी गले में संक्रमण की शिकायत हो जाती है। इससे बचने के लिए किसी बड़े बर्तन में पानी गरम कर तौलिये से मुंह ढंककर भाप लेंए गले के दर्द में काफी आराम मिलेगा।
  7. लहसुन संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं को मार देता है। इसलिए गले की खराश में लहसुन का सेवन करने से लाभ होता है। लहसुन जीवाणुओं को मारने के साथ ही गले की सूजन और दर्द को भी कम करता है।
  8. गले की खराश के लिए मुलेठी रामबाण औषधि है। सोते समय मुलेठी का एक छोटा सा टुकड़ा मुंह में रखकर कुछ देर तक चबाएं, सुबह तक गला साफ हो जाएगा। अगर मुलहठी को पान के पत्ते के साथ रखकर चबाया जाए तो यह और भी लाभदायक होती है। इसका सेवन करने से गले का दर्द और सूजन खत्म होती है। इससे बहुत जल्दी आराम होता है।
  9. अंजीर बहुत स्वादिष्ट और लाभदायक फल है। इसमें पाया जाने वाला सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, तांबा, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, सल्फर, फाइबर सेहत के लिए फायदेमंद हैं। पानी में 5 अंजीर को डालकर उबाल लें और इसे छानकर पिएं। इस पानी को सुबह शाम गरमागरम पीने से गले के दर्द और खराश से राहत मिलती है।
  10. अगर आपको अकसर गले में खराश या फिर एलर्जी के कारण दर्द बना रहता है तो सुबह-शाम चार-पांच मुनक्का के बीजों को खूब चबाकर खा लें। दस दिन तक ऐसा करने से आपको गले के दर्द से आराम मिलेगा। एक बात का ध्यान रखें, मुनक्का के बीजों को चबाने के बाद पानी ना पिएं। https://www.kanvkanv.com

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कमाख्या से चलकर थावे पहुंची थीं मां भवानी

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संतोष राज पांडेय

वैसे तो बिहार में धार्मिक यात्राओं पर आने वाले या छुट्टियां मनाने आने वाले लोगों के लिए यहां कई धार्मिक और पौराणिक स्थल हैं, लेकिन यहां आने वाले लोग गोपालगंज जिले में स्थित थावे मंदिर में जाकर सिंहासिनी भवानी मां के दरबार का दर्शन कर उनका आर्शीवाद लेना नहीं भूलते. मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मां सभी मनोकामनाएं पूरा करती हैं.

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है

गोपालगंज जिला मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर सिवान जाने वाले मार्ग पर थावे नाम का एक स्थान है, जहां मां थावेवाली का एक प्राचीन मंदिर है.
‘मां थावेवाली’ को सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी और रहषु भवानी के नाम से भी भक्तजन पुकारते हैं. ऐसे तो साल भर यहा मां के भक्त आते हैं, परंतु शारदीय नवरात्र और चैत्र नवारात्र के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है.
मान्यता है कि यहां मां अपने भक्त रहषु के बुलावे पर असम के कमाख्या स्थान से चलकर यहां पहुंची थीं. कहा जाता है कि मां कमाख्या से चलकर कोलकाता (काली के रूप में दक्षिणेश्वर में प्रतिष्ठित), पटना (यहां मां पटन देवी के नाम से जानी गई), आमी (छपरा जिला में मां दुर्गा का एक प्रसिद्ध स्थान) होते हुए थावे पहुंची थीं और रहषु के मस्तक को विभाजित करते हुए साक्षात दर्शन दिए थे. देश की 52 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के पीछे एक प्राचीन कहानी है.

लोगों को अन्न मिलने लगा

जनश्रुतियों के मुताबिक राजा मनन सिंह हथुआ के राजा थे. वे अपने आपको मां दुर्गा का सबसे बड़ा भक्त मानते थे. गर्व होने के कारण अपने सामने वे किसी को भी मां का भक्त नहीं मानते थे. इसी क्रम में राज्य में अकाल पड़ गया और लोग खाने को तरसने लगे. थावे में कमाख्या देवी मां का एक सच्चा भक्त रहषु रहता था. कथा के अनुसार रहषु मां की कृपा से दिन में घास काटता और रात को उसी से अन्न निकल जाता था, जिस कारण वहां के लोगों को अन्न मिलने लगा, परंतु राजा को विश्वास नहीं हुआ.
राजा ने रहषु को ढोंगी बताते हुए मां को बुलाने को कहा. रहषु ने कई बार राजा से प्रार्थना की कि अगर मां यहां आएंगी तो राज्य बर्बाद हो जाएगा, परंतु राजा नहीं माने. रहषु की प्रार्थना पर मां कोलकता, पटना और आमी होते हुए यहां पहुंची राजा के सभी भवन गिर गए और राजा की मौत हो गई.
मां ने जहां दर्शन दिए, वहां एक भव्य मंदिर है तथा कुछ ही दूरी पर रहषु भगत का भी मंदिर है. मान्यता है कि जो लोग मां के दर्शन के लिए आते हैं वे रहषु भगत के मंदिर में भी जरूर जाते हैं नहीं तो उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है. इसी मंदिर के पास आज भी मनन सिंह के भवनों का खंडहर भी मौजूद है.

प्यार और पवित्रता की जरूरत

मंदिर के आसपास के लोगों के अनुसार यहां के लोग किसी भी शुभ कार्य के पूर्व और उसके पूर्ण हो जाने के बाद यहां आना नहीं भूलते. यहां मां के भक्त प्रसाद के रूप में नारियल, पेड़ा और चुनरी चढ़ाते हैं.
थावे के बुजुर्ग और मां के परमभक्त मुनेश्वर तिवारी कहते हैं कि मां के आर्शीवाद को पाने के लिए कोई महंगी चीज की आवश्यकता नहीं. मां केवल मनुष्य की भक्ति और श्रद्धा देखती हैं. केवल उन्हें प्यार और पवित्रता की जरूरत है. वे कहते हैं कि मां की भक्ति के अनुभवों को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता यह तो अमूल्य अनुभव है.
मंदिर का गर्भ गृह काफी पुराना है. तीन तरफ से जंगलों से घिरे इस मंदिर में आज तक कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. नवरात्र के सप्तमी को मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन मंदिर में भक्त भारी संख्या में पहुंचते हैं.
इस मंदिर की दूरी गोपालगंज से जहां छह किलोमीटर है. राष्ट्रीय राजमार्ग 85 के किनारे स्थित मंदिर सीवान जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर है. सीवान और थावे से यहां कई सवारी गाड़ियां आती हैं.! https://www.kanvkanv.com

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सर्दियों के इस मौसम में ऐसे बनायें सरसों का साग और मक्के की रोटी, स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी है लाभदायक

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सर्दियों के मौसम में एक डिश ऐसा है जो सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस डिश का नाम है ’सरसो का साग और मक्के की रोटी’। यह जाड़े के समय में बेहद लोकप्रिय भी होता है। यह खाने में भी बेहद स्वादिष्ट होता है। सरसों का साग स्‍वास्‍थ्‍य के नजरिए से भी बेहद फायदेमंद होता है। अगर आप भी इस डिश को अपने घर में बनाना चाहते हैं तो हम आपको इसकी विधि बारीकी से बताएंगे। आइए जानते हैं कैसे बनाए जाते हैं ’सरसो का साग और मक्के की रोटी’।

सरसों का साग बनाने के लिए सामग्री :

  1. सरसों का साग- 500 ग्राम,
  2. पालक– 150 ग्राम,
  3. बथुआ– 100 ग्राम,
  4. टमाटर– 250 ग्राम,
  5. प्याज– 01 (बारीक कटी हुई),
  6. लहसुन– 05 कलियां (बारीक कटी हुई),
  7. हरी मिर्च– 02 नग,
  8. अदरक– 01 बड़ा टुकड़ा,
  9. सरसों का तेल– 02 बड़े चम्मच,
  10. बटर/घी– 02 बड़े चम्मच,
  11. हींग– 02 चुटकी,
  12. जीरा– 1/2 छोटा चम्मच,
  13. हल्दी पाउडर – 1/4 छोटा चम्मच,
  14. मक्के का आटा– 1/4 कप,
  15. लाल मिर्च पाउडर– 1/4 छोटा चम्मच,
  16. नमक– स्वादानुसार।

सरसों का साग बनाने की विधि

सरसों का साग बनाने के लिए सबसे पहले सरसों, पालक और बथुआ को अच्छी तरह से साफ करके धो लें। इन्हें छलनी में रख दें, जिससे पानी निथर जाए। इसके बाद इन्हें मोटा-मोटा काट लें और कुकर में एक कप पानी के साथ डालें और मध्यम आंच पर एक सीटी आने तक उबाल लें। इसके बाद कुकर को उतार कर रख दें और उसकी सीटी निकलने तक प्रतीक्षा करें।

अब टमाटर और अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और फिर उसे हरी मिर्च के साथ मिक्सी में डाल कर बारीक पीस लें। कढ़ाई में एक चम्मच तेल डालें और गरम करें। तेल गरम होने पर उसमें मक्के का आटा डालें और हल्का ब्राउन होने तक भून लें। आटे को एक प्याली में निकालने के बाद कढ़ाई में बचा हुआ तेल डालें और उसे गरम करके उसमें हींग और जीरा डाल दें और दस सेकेंड तक भून लें। उसके बाद प्याज और लहसुन डालें और हल्का गुलाबी होने तक भून लें।

उसके बाद हल्दी पाउडर, टमाटर का पेस्ट और लाल मिर्च डालें और मसाले को तब तक भूनें, जब तक कि वह तेल न छोड़ने लगे। मसाले के भुनने के दौरान कुकर से साग निकाल लें और उन्हें ठंडा करके मिक्सी में दरदरा पीस लें। अब भुने हुए मसाले में पिसा साग डाल दें। साथ ही आवश्यकतानुसार पानी, मक्के का आटा और नमक भी डालें और अच्छी तरह से चला दें। इसके बाद इसे मध्यम आंच पर पकाएं और उबाल आने के पांच-छ: मिनट बाद तक पकाने के बाद गैस बंद कर दें।

मक्के की रोटी के लिए 

मक्‍की की रोटी और सरसों का साग वैसे तो लोकप्रिय पंजाबी जायका है। मगर अब असका स्वाद हर किसी की जुबान पर चढ़ गया है। मक्का या भुट्टा में कार्बोहाइड्रेट, फोलिक एसिड, कैरोटीन, मिनरल्स, विटामिन और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे यह कई रोगों से लड़ने में सहायक होता है और शरीर को हष्ट-पुष्ट बनाता है। इसीलिए ठंड के मौसम में मक्‍के की रोटी और सरसों का साग खाया जाता है। तो चलिए बनाते हैं मक्के की रोटी

सामग्री :

  1. मक्की का आटा– 400 ग्राम,
  2. मक्खन– 02 बड़े चम्मच,
  3. गरम पानी– आवश्यकतानुसार,
  4. नमक– स्वादानुसार।

मक्के की रोटी बनाने की विधि :

मक्‍का रोटी बनाने के लिए सबसे पहले मक्के/मक्की के आटा को एक बर्तन में निकाल कर छान लें। इसके बाद आटा में स्वादानुसार नमक मिला लें और फिर गुनगुने पानी की सहायता से आटा को गूंथ लें। इसके बाद आटे को ढक कर 15-20 मिनट के लिए रख दें। इससे आटा फूल कर सेट हो जायेगा और रोटियां बेहद स्वादिष्ट बनेंगीं।

मक्के की रोटियां बनाने के पहले इसे एक बार हथेलियों की सहायता से खूब अच्छी तरह से मसल लें, जिससे यह बेहद मुलायम हो जाए। जब आटा अच्छी तरह से मुलायम हो जाए, तब उसमें से लोई बनाने भर का आटा लें और उसे हथेली से दबा कर बड़ा कर लें। इसके बाद हाथों में थोड़ा पानी लगाएं और लोई को उंगलियों की सहायता से दबा कर 5-6 इंच व्यास की रोटी बना लें।

अब रोटी को गरम तवा पर डालें। जब एक तरफ की रोटी सिक जाए, तो उसे पलट दें और दूसरी तरफ से भी सेक लें। इसके बाद रोटी को गैस की आंच पर साधारण रोटी की तरह घुमा-घुमाकर सेक लें। आपकी मक्‍का की रोटी तैयार है। इसपर मक्खन या देशी घी लगाएं और गर्मा-गरम सरसों के साग के साथ आनंद लें। https://www.kanvkanv.com

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