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काशी के बालक ‘अक्षत’ को श्रीमद्भगवतगीता, 9 उपनिषद कंठस्थ

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वाराणसी। कहते हैं प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। किसी भी उम्र में कोई भी अपने प्रतिभा का परचम लहरा सकता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है चौबेपुर कैथी के निवासी 11 वर्षीय बालक अक्षत पाण्डेय ने। अक्षत को श्रीमद भगवतगीता, 9 उपनिषद और पांच दर्शन पूरी तरह कंठस्थ है। इस समय अक्षत वेद तथा अष्टाध्यायी (पण विकृत) को कंठस्थ करने में जुटे हुए हैं। पौराणिक ग्रंथों को कंठस्थ करने के साथ अक्षत को योग और प्राणायाम में भी महारथ हासिल है।
    योग और प्राणायाम में भी महारत हासिल,गूगल ब्याय कौटिल्य से हो रही तुलना
मंगलवार को अक्षत के पिता अरुण पांडेय और माता साधना पाण्डेय ने बताया कि अक्षत योगगुरु स्वामी रामदेव द्वारा संचालित पतंजलि गुरूकुलम हरिद्वार में कक्षा 6 के छात्र है।  इस संस्थान में उसका प्रवेश 25 मार्च 2019 को हुआ है। मात्र 14 माह के अध्ययन में अनेक ग्रंथों को कंठस्थ कर लेने की क्षमता के कारण अक्षत को कुरुकुलम के सभी आचार्य मानते हैं। हम लोग चाहते है कि अक्षत वेद अध्ययन के क्षेत्र में एक विशेष पहचान बनाये। जिस प्रकार गणना के अद्भुत ज्ञान के लिए गूगल ब्वाय कौटिल्य की ख्याति है। उसी प्रकार अक्षत भी वेद अध्ययन के क्षेत्र में एक विशेष पहचान बना सके।
 राजन पांडेय ने बताया कि स्वयं स्वामी रामदेव ने कुछ दिन पहले एक चैनल में अपने कार्यक्रम के दौरान अक्षत को अपने बगल में बैठा कर उसकी इस प्रतिभा को परखा। इसके बाद योगगुरू ने बताया कि मात्र 19 घंटे में अक्षत ने पांच दर्शन कंठस्थ किये जो एक कीर्तिमान है।
राजन पांडेय ने बताया कि बेटे की पहचान गूगल ब्याय की तरह बढ़ रही है। इससे काफी खुश है। उनका पैतृक गांव गंगा गोमती संगम तट पर मार्कंडेय महादेव तीर्थ स्थल में है। महादेव की कृपा से बेटे की वजह से गांव में और आसपास सम्मान बढ़ रहा है। गांव के लोग भी अक्षत को दुलार करते है।
 उन्होंने बताया कि खुद स्नातक हैं और गांव में ही जन सुविधा केंद्र का संचालन करते हैं। पत्नी साधना भी स्नातक हैं। बड़ा बेटा अक्षत का बड़ा भाई देव मिहिर पाण्डेय दसवीं कक्षा का छात्र है। मेरे पिताजी अक्षत के दादा चिंता हरण पाण्डेय सेना से अवकाश प्राप्त हैं। हमारा पूरा परिवार आध्यात्मिक प्रवृत्ति का है। जिसका असर बचपन से ही अक्षत पर पड़ा। वह एक बार भी जो पढ़ लेता है। वह पाठ्य सामग्री कंठस्थ हो जाती है। बेटे की इसी क्षमता को देख उसे गुरूकुलम में शिक्षा के लिए भेजा है।
 संस्था के नियम के अनुसार प्रवेश के बाद अक्षत कक्षा 8 उत्तीर्ण करने के बाद ही घर वापस लौट पायेगा। हम लोग वर्ष में एक बार गुरूकुलम जाकर उससे मिल लेते है। प्रतिभाशाली बच्चों को स्वामी रामदेव विशेष रूप से प्रोत्साहित करते रहते हैं।

 

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