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बिहार की राजनीति में नए समीकरण, नीतीश अगर कांग्रेस के साथ गए तो क्या होगा?

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संतोष राज पांडेय

नीतीश कुमार की एक ख़ासियत यह भी है कि जब सत्ता में होते हैं तो उन्हें अपनी अभिजात्य संस्कृति और सोहबत पसंद आती है. वह इसी तरह की मीडिया और नौकरशाही से घिरे रहने में खुद को सहज महसूस करते हैं लेकिन जब चुनाव आता है तो उन्हें यह एहसास होने में देर नहीं लगती कि यह तबका उन्हें चुनाव नहीं जिता सकता, इसके लिए उन्हें दलितों, अपने सजातीय कुर्मी जनाधार के साथ ही अन्य एवं अति पिछड़ी जातियों और अल्पसंख्यकों और बाहुबलियों का समर्थन आवश्यक नजर आने लगता है।
2019 लोक सभा चुनाव की आहट के साथ ही नीतीश कुमार ने अब अपनी राजनीतिक चालें तेज कर दी है। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर से बिहार को विशेष राज्य की दर्जा देने की मांग कर राजनीतिक गर्माहट ला दिया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि केंद्रीय योजनाओं में बिहार को पूरी राशि मिले।  उन्होंने कहा कि पिछड़े राज्यो में संसाधनों की कमी है। यहां अन्य राज्यो की तरह समानता के आधार पर संसाधनों का वितरण उचित नही है। इससे जो राज्य पिछड़े है वे पिछड़ते ही चले जायेंगे।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरण बनने की आहट मिल रही है. दबाव की राजनीति मानें या भविष्य को लेकर संकट सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई मुद्दों पर भाजपा से अलग राय व्यक्त कर संभावनाओं को हवा दे रहे हैं. मुख्यमंत्री इस वक्त भाजपा के साथ सरकार में है बावजूद उनकी इस विशेष मांग को केंद्र नजरअंदाज करता रहा है। जहां तक भ्रष्टाचार के साथ नीतीश कुमार के कभी समझौता नहीं करने की बात है, शिवानंद तिवारी इसे उनका राजनीतिक ढोंग करार देते हैं. वह सवाल करते हैं कि यह कैसी नैतिकता और ईमानदारी है जो सज़ायाफ्ता लालू प्रसाद के साथ चुनावी गठबंधन को तो जायज ठहराती है और भ्रष्टाचार के पुराने मामले में महज प्राथमिकी दर्ज किए जाने को गठबंधन तोड़ने का आधार बना देती है.

नीतीश कुमार सहज नहीं

इतना ही नहीं रामविलास पासवान की लोजपा व उपेन्द्र कुशवाहा की रालोसपा भी केन्द्र व राज्य में भाजपा के साथ बहुत सहज नहीं हैं. ऐसे में संभव है कि लोकसभा चुनाव के पहले केन्द्र के साथ-साथ बिहार में भी नए समीकरण का आगाज हो.
सूत्रों की मानें महागठबंधन का परित्याग कर भाजपा के साथ हाथ मिलाकर राज्य सत्ता पर काबिज होने के बाबजूद नीतीश कुमार सहज नहीं हैं. उनके पास जातीय समीकरण के हिसाब से अब बहुत कम जातियों का समर्थन बचा हुआ है. अल्पसंख्यकों के लिए लगातार बेहतर नीतियों को बढ़ावा देने के बावजूद वे अभी भी राजद व कांग्रेस के साथ खड़े हैं. इतना ही नहीं दलित व महादलित के बंटवारे के बाद भी दलितों का रूझान बसपा, कांग्रेस व राजद के साथ है. ऐसे में तमाम प्रयास के बावजूद जदयू के पक्ष में जातीय माहौल नहीं बन पा रहा है.
इसके अलावा भाजपा भी जदयू से सिर्फ सत्ता बंटवारे तक का रिश्ता रखे हुए है. उसे अभी भी नीतीश के रूख पर एतबार नहीं है. क्योंकि इस बीच कई मौकों पर नीतीश द्वारा केन्द्र सरकार पर दबाव बनाने के दौरान उन्हें भाजपा का साथ नहीं मिला है. इतना ही नहीं जिस विशेष राज्य के दर्जा को मुद्दा बनाकर आंध्रप्रदेश की सत्ताधारी पार्टी टीडीपी ने केन्द्र से समर्थन वापस ले लिया उसी तरह नीतीश भी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए केन्द्र पर दबाव बनाना आरंभ कर दिए हैं.

महागठबंधन पर जदयू व नीतीश कुमार की पैनी नजर

नोटबंदी का परिणाम व पेट्रोलियम पदार्थों बढ़े दाम पर नीतीश ने खुले तौर पर केन्द्र सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा कर संकेत देना आरंभ कर दिया है. हालांकि भाजपा के कुछ नेता बता रहे हैं कि यह सब लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीट लेने के लिए राजनीतिक दबाव का हिस्सा है. भाजपा के नेता मान रहे हैं कि नीतीश के पास भाजपा के साथ रहने के अलावा सीमित विकल्प है. ऐसे में वे अब आत्मघाती फैसला लेने से परहेज करेंगे.
लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि नीतीश कुमार कांग्रेस के संपर्क में हैं और वे महागठबंधन में आने का सम्मानजनक रास्ता तलाश रहे हैं. यदि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पहल करें तो समीकरण बदल सकता है. हालांकि अभी भी किसी भी खेमे की ओर से औपचारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा रहा है. सूत्र बता रहे हैं कि केन्द्रीय राजनीति में बनने वाले महागठबंधन पर जदयू व नीतीश कुमार की पैनी नजर है.

2014 में 30 उम्मीदवार लड़े थे

यदि बसपा व सपा तथा टीएमसी व वामपंथी एक साथ महागठबंधन का हिस्सा बन गए तो नीतीश भी इसमें आ सकते हैं.बहरहाल लोजपा व रालोसपा राजग के किनारे पर खड़े हैं यदि कांग्रेस की अगुआई में केन्द्रीय स्तर पर महागठबंधन का आगाज़ हुआ तो कई नए समीकरणों का उदय भी होगा. अगर बिहार की राजनीति पर नजर डाले तो दावेदारों की बेचैनी बेवजह नहीं है। 2014 में ऐन वक्त पर दलबदल करने वालों को पूरा फायदा हुआ था। जदयू 38 सीट पर लड़ा था। 18 उम्मीदवार ‘ऑन स्पॉट’ टिकट पा गए थे। अगले चुनाव का सीन अलग है। जदयू की सीटें गठबंधन में फंसी हुई हैं। पिछली बार लड़ाई का मजा ले चुके उम्मीदवार इधर-उधर देख रहे हैं। भाजपा में अलग तरह का तनाव है। 2014 में 30 उम्मीदवार लड़े थे। उम्मीदवारों की किल्ल्त थी। रामकृपाल यादव, छेदी पासवान और सुशील कुमार सिंह जैसे उम्मीदवारों को आयात किया गया था। ताजा हाल यह है कि सीटिंग सांसदों पर भी आफत है। भाजपा के दो सांसद- शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति झा आजाद यूपीए के उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ाए हुए हैं। लोजपा को सात सीटें मिली थी। पांच नए लोगों को अवसर मिल गया। यहां भी सीटिंग पर आफत है। फिर भी नए उम्मीदवार लोजपा की ओर हसरत भरी निगाहों से देखते हैं।

 बढ़ेगा पार्टी का जनाधार

भाजपा और जदयू से निराश उम्मीदवारों को कांग्रेस में भी आशा की किरण नजर आ रही है। पिछले चुनाव में राजद ने कांग्रेस के प्रति उदारता दिखाई थी। उसे दर्जन भर सीटें मिलीं। उम्मीदवारों की खोज हुई तो पता चला कि पार्टी में इतनी सीटों के लिए मजबूत उम्मीदवार तो हैं ही नहीं। खैर, उस मुश्किल दौर में राजद का साथ मिला। राजद ने अपने दो उम्मीदवार भी दे दिए-पूर्णमासी राम और आशीष रंजन सिन्हा।  रालोसपा अगर यूपीए में शामिल नहीं होती है तो कांग्रेस को फिर दर्जन भर सीटें मिल जाएंगी।  एनसीपी से त्यागपत्र दिए तारिक अनवर शामिल होंगे तो पार्टी का जनाधार बढ़ेगा। लिहाजा, कांग्रेस से भी कुछ उम्मीदवारों को तसल्ली मिल रही है। अभी हाल में उपेन्द्र कुशवाहा खीर की राजनीति करते रहे इसी दौरान नीतीश कुमार ने कुशवाहा सम्मेलन कर उनके खीर की मिठास ही गायब कर दी। ये कहना ज्यादा सटीक होगा कि चुनाव को लेकर बिहार में राजनीतिक दलों की जो खीचड़ी पक रही है उससे कोई स्पष्ट तस्वीरें सामने नहीं आ रही है। सोचिए अगर नीतीश NDA का साथ छोड़ दिये तो क्या होगा? https://www.kanvkanv.com

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यूपी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम एनडी तिवारी का निधन, जन्मदिन के दिन ही ली अंतिम सांस

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नयी दिल्ली। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी 92 साल की उम्र में आज गुरुवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशियेलिटी अस्पताल में वेंटिलेटर पर थे। मालूम हो कि यूपी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और आंधप्रदेश के पूर्व राज्यपाल एनडी तिवारी पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती थे। एनडी के निधन से राजनीति पार्टियों में शोक की लहर दौड़ गई। आपको बता दें कि पिछले साल एक स्ट्रोक की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एनडी तिवारी का निधन उनके जन्मदिन के दिन हुआ है।

नारायण दत्त तिवारी देश के पहले ऐसे राजनीतिज्ञ थे, जिन्हें दो-दो राज्य का मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त हुआ। वह नेहरू-गांधी के दौर के उन चंद दुर्लभ नेताओं में थे, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में सक्रिय योगदान दिया। केंद्र में वित्त, विदेश, उद्योग, श्रम सरीखे अहम मंत्रालयों की कमान संभाल चुके एनडी तिवारी को जब उत्तराखंड सरीखे छोटे राज्य की कमान सौंपी गई तो उत्तराखंड की आंदोलनकारी शक्तियां असहज और स्तब्ध थी। नारायण दत्त तिवारी का जन्म 1925 में नैनीताल जिले के बलूती गांव में हुआ था।

सीएम ने जताया शोक

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एनडी तिवारी के निधन पर शोक जताया है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करता हूं. ईश्वर से उनकी दिवंगत आत्मा की शांति व परिजनों को दुःख सहने की प्रार्थना करता हूं.’

रावत ने कहा, ‘तिवारी का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है. विरोधी दल में होने के बावजूद उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर रहकर सदैव अपना स्नेह बनाए रखा. तिवारी के जाने से भारत की राजनीति में जो शून्य उभरा है, उसकी भरपाई कर पाना मुश्किल है. तिवारी देश के वित्तमंत्री, उद्योग मंत्री और विदेश मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं.’

सीएम रावत ने कहा, ‘उत्तराखंड तिवारी के योगदान को कभी नहीं भुला पाएगा. नवोदित राज्य उत्तराखंड को आर्थिक और औद्योगिक विकास की रफ़्तार से अपने पैरों पर खड़ा करने में तिवारी ने अहम भूमिका निभाई.’ https://www.kanvkanv.com

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कांग्रेस की नीतीश पर जादू की झप्पी, राजद के लगाए गए सीएम के खिलाफ पोस्टर पर हुई आगबबूला

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संतोष राज पांडेय

पटना। राजधानी में राजद का पोस्टर कांग्रेस को रास नहीं आ रहा है। पटना में एक राजद नेता ने बड़ा सा पोस्टर लगाया है जिसमे  तेजस्वी यादव को ‘भगवान श्रीराम’ के रूप में दिखाया है और बिहार के मुख्यमंत्री तथा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को रावण के रूप में। इस पोस्टर के माध्यम से 21 अक्टूबर से शुरू हो रहे ‘संविधान बचाओ यात्रा’ में शामिल होने की अपील भी की गई है।
इस पोस्टर पर जदयू और बीजेपी का बयान भले ही वक्त से नही आया पर कांग्रेस के जादुई वचन बोल पड़े। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदनमोहन झा ने कहा, “यह बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि नीतीश कुमार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं। यह सही तरीका नहीं है। हम ऐसे किसी पोस्टर को कभी स्वीकार नहीं कर सकते हैं।”
वहीं, राज्यसभा सांसद और पार्टी के राज्य अभियान समिति के अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने भी इसपर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, “तेजस्वी राम हो सकते हैं, लेकिन किसी को रावण के रूप में दिखाना सही नहीं है।” वहीं, जदयू ने राजद को याद दिलाते हुए कहा कि वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में 22 से 80 पर पहुंचाने वाला चेहरा नीतीश कुमार का ही था। पार्टी के प्रवक्ता राजीव रंजन कहते हैं, “आप राजद से क्या अपेक्षा कर सकते हैं? शायद वे 2015 के चुनाव को भूल गए जब राम (नीतीश कुमार) के चेहरे की वजह से ही राजद को 80 सीट मिले थे।

कांग्रेस के बयान पर लग रहें कयास

यह सवाल अहम हो गया है कि आखिर क्या कारण है कि राजद नेता का यह कदम गठबंधन में शामिल कांग्रेस को रास नहीं आया। कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई है। बता दें कि वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद, कांग्रेस और जदयू एक साथ महागठबंधन थी, लेकिन बाद में जदयू महागठबंधन से अलग हो एनडीए में शामिल हो गई। वहीं, कांग्रेस और राजद अभी भी एक साथ हैं। यह माना जा रहा है कि कांग्रेस नीतीश पर जादू की झप्पी लगातार दे रही है ताकि बिहार में नीतीश और कांग्रेस का एक नया गठबंधन हो। https://www.kanvkanv.com

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पुलिस रिमांड में भेजा गया बसपा के पूर्व सांसद का बेटा, वीडियो जारी कर बताया क्या हुआ था उस रात

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नयी दिल्ली। दिल्ली के 5 स्टार होटल हयात में गुंडागर्दी करने के आरोपी आशीष पांडे ने गुरुवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। पटियायाल हाउस कोर्ट में आत्मसमर्पण के बाद दिल्ली पुलिस ने आशीष की चार दिन की रिमांड के लिए याचिका दायर की और अदालत ने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

जिस कोर्ट में आशीष पांडे ने गुरुवार को सरेंडर किया है, उसके जज धर्मेंद्र सिंह आज छुट्टी पर थे। इसलिए आशीष का मामला किसी अन्य कोर्ट में भेजा गया। आरकेपुरम पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में आशीष को गिरफ्तार किया और कोर्ट से 4 दिनों की रिमांड मांगी थी। हालांकि, कोर्ट ने सिर्फ एक दिन की ही कस्टडी दी है।

आशीष के वकील ने किया विरोध

याचिका दायर करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि वह आशीष की रिमांड चाहते हैं क्योंकि उसे लखनऊ भी ले जाना है। उसके हथियार भी बरामद करने हैं। इस पर आशीष के वकील ने पुलिस के रिमांड लेने वाली याचिका का विरोध किया और कहा कि हम कोर्ट में पिस्तौल के लाइसेंस जमा करा रहे हैं। हम पिस्तौल भी जमा करा सकते हैं। मेरा मुवक्किल सिर्फ इसलिए परेशानी झेल रहा है क्योंकि इस केस को मीडिया का हाइप मिल गया है और क्योंकि उसके पिता सांसद रह चुके हैं। यह मामला राजनीति से प्रेरित है। आशीष पांडे के वकील ने कहा कि FIR होने में देरी हुई, पुलिस की पूछताछ से पहले हमें कोई नोटिस नहीं मिला था।

Ashish Pandey is my neighbor and friend…. he may have appeared angry but he's not a criminal guys… Relax … It's not a crime to be moneyed and be related to politicians! Media only shows u what it wants u to see… Not the whole story… A man does not take out a gun without being provoked or threatened… Where is the video of that,? Also this case has gained so much attention because the opposing parties are pressurising the media to run it over and over again… Just think about it before spoiling his name, and his family's peace !

Posted by Bhaavya Kapur on Wednesday, October 17, 2018

वीडिया जारी कर कही ये बातेें

इससे पहले उसने एक वीडियो भी जारी किया। गुरुवार को आशीष पांडे ने वीडियो जारी कर सरेंडर की जानकारी दी और कहा कि अभी लोगों के सामने आधी सच्चाई ही सामने आई है। आशीष पांडे ने कहा कि मेरे पास पिस्टल की लाइसेंस थी, मैंने अपनी सुरक्षा में पिस्टल निकाली थी। उसने कहा कि राजनीतिक परिवार से होना कोई गुनाह नहीं है, मैं अपना बिजनेस करता हूं। उसने कहा कि अगर सीसीटीवी फुटेज को देखा जाएगा तो दिखेगा कि वो लोग मुझे जान से मारने की धमकी दे रहे थे। पांडे ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों से मेरा मीडिया ट्रायल किया जा रहा है।

पांडे ने कहा कि उसे एक वांछित आतंकवादी के रूप में पेश किया जा रहा है जबकि उसके खिलाफ पुलिस केस का कोई इतिहास नहीं है। आशीष ने कहा- नेता का बेटा होना गुनाह नहीं। मेरे पास लाइसेंसी पिस्टल है। यह मेरे पास 20 सालों से है लेकिन मैंने किसी के साथ कोई अभद्रता आज तक नहीं की। मैं कोर्ट में सरेंडर कर रहा हूं लेकिन मेरी लोगों से अपील है कि पहले सीसीटीवी फुटेज देख ले उसके बाद किसी निर्णय पर पहुंचें। मुझे न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा। आशीष ने वीडियो में कहा कि मामले को पूरा जानने के लिए होटल का सीसीटीवी फुटेज देखना जरूरी। https://www.kanvkanv.com

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