सर्वे: टीकाकरण को लेकर सामने आई बड़ी बात, लोगों पर बनाया जा रहा है दबाव, सरकार ने कहा...

वैक्सीनेशन ड्राइव को लेकर कम्यूनिटी बेस्ट डिजिटली सर्वेक्षण में एक खास बात सामने आई है. सर्वे में शामिल हर 4 में से 1 नागरिक का कहना है स्थानीय प्रशासन और कंपनियों ने कोरोना टीकाकरण अनिवार्य कर दिया है. कई ऐसे दफ्तर भी हैं जहां बिना टीकाकरण के प्रवेश की अनुमति नहीं है. महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में कोरोना के टीकाकरण को पूर्णत: स्वैच्छिक रखा गया है.

 
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सर्वे: टीकाकरण को लेकर सामने आई  बड़ी बात, लोगों पर बनाया जा रहा है दबाव, सरकार ने कहा...
 

नई दिल्ली. वैक्सीनेशन ड्राइव को लेकर कम्यूनिटी बेस्ट डिजिटली सर्वेक्षण में एक खास बात सामने आई है. सर्वे में शामिल हर 4 में से 1 नागरिक का कहना है स्थानीय प्रशासन और कंपनियों ने कोरोना टीकाकरण अनिवार्य कर दिया है. कई ऐसे दफ्तर भी हैं जहां बिना टीकाकरण के प्रवेश की अनुमति नहीं है. महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में कोरोना के टीकाकरण को पूर्णत: स्वैच्छिक रखा गया है.

देश के 328 जिलों में करीब 36 हजार लोगों पर किए गए इस सर्वे में टीकाकरण की अनिवार्यता की बात सामने आई है. सर्वे में शामिल 26 फीसदी लोगों ने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने उनके जिले में सभी निवासियों के लिए वैक्सीन लेना अनिवार्य कर दिया है. कई ऑफिसों ने कर्मचारियों को वैक्सीन की दूसरी डोज के सार्टिफिकेट के साथ ही प्रवेश की अनुमति दी है. इतना ही नहीं राशन और मिलने वाली अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए भी वैक्सीन सार्टिफिकेट की मांग की जा रही है.

सर्वेक्षण में 29% लोगों ने बताया कि उनके क्षेत्र जैसे कॉलोनी/बाजार संघों ने लोगों के लिए वैक्सीन का प्रमाण दिखाना अनिवार्य कर दिया है. 40% लोगों का कहना है कि उनके नियोक्ताओं या दफ्तर ने टीकाकरण अनिवार्य कर दिया है, यहां तक कि बिना प्रमाणपत्र के प्रवेश भी नही दिया जाता. गांव-शहर सभी स्थानों से ही कमोबेश ऐसी ही प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. उदाहरण के लिए औरंगाबाद जिला कलेक्टरेट ने उचित मूल्य की दुकानों, गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर केवल उन लोगों को सुविधाएं देने का नियम बनाया है जिन्होंने वैक्सीन की कम से कम एक खुराक ले ली है.

8 अक्टूबर को बॉम्बे उच्च न्यायालय में दायर एक जवाबी हलफनामे के माध्यम से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि कोविड के लिए टीकाकरण सामाजिक दायित्व का मामला है और इसे सार्वजनिक हित के तौर पर देखना चाहिए. कोरोना संक्रमण की इस लड़ाई में सभी लोगों को एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में टीकाकरण कराना चाहिए. हालांकि इसका किसी भी तरह से यह मतलब नहीं है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध टीका लगाने के लिए मजबूर किया जा सकता है.

वैक्सीनेशन को लेकर केंद्र सरकार के आदेश में इसकी अनिवार्यता जैसा कोई भी जिक्र नहीं है, यानी कि यह व्यक्ति के विवेक पर निर्भर करता है. वहीं कानूनी नजरिए से देखें तो भी संविधान के आर्टिकल 21 में लोगों को राइट टू हेल्थकेयर का विकल्प दिया गया है, जिसके आधार पर वे अपने लिए स्वेच्छा से बेहतर स्वास्थ्य विकल्पों का चयन कर सकते हैं. तो ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कंपनियां, कर्मचारियों से वैक्सीनेशन कराने पर दबाव क्यों डाल रही हैं? कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण आवश्यक है, पर इसका लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष दबाव बनाना कितना सही है.