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पुलिसवालों ने बाप-बेटे के प्राइवेट पार्ट में डाली लाठी, फिर यातनाएं देकर थाने में मार डाला

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नयी दिल्ली। तमिलनाडु में पुलिस का बर्बरता भरा आचरण सामने आया है। यहां पुलिस ने एक बाप-बेटे के प्राइवेट पार्ट में लाठी डाल दी फिर यातनाएं देकर थाने में ही मार डाला। इस घटना के बाद से ही राज्य भर में आक्रोश फैल गया है। कई जगह प्रदर्शन हुए हैं और मानवाधिकार आयोग ने पुलिस को नोटिस भेजा है। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री के. पलनीसामी ने कहा है कि इस मामले की जाँच सीबीआई करेगी।

यह है घटना

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 19-20 जून की है। शक्तिशाली नाडर व्यापारी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पी जयराज तूतीकोरिन ज़िले (थुतुकुड़ी) के सतानकुलम के निवासी थे।  सतानकुलम में उनके बेटे बेनिक्स की एपीजे मोबाइल्स नाम से एक मोबाइल की छोटी दुकान है। सात बजे के बाद भी दुकान खुले रखने को लेकर पुलिसवालों से बहस हो गई। कोरोना महामारी के मद्देनजर ऐसा निर्देश था कि शहर में सात बजे के बाद सभी दुकानें बंद कर दी जाएंगी। इसी बात पर बहस के बाद पुलिसवालों ने जयराज और उनके बेटे को थाने ले आई थी। हिरासत में लिए जाने के दो ही दिन बाद दोनों की कस्टडी में ही मौत हो गई।

पुलिस ने पार की अमानवीयता की हद

जानकारी के मुताबिक, 19-20 की रात पुलिसवालों ने हिरासत में बाप-बेटे की जमकर पिटाई की थी। इस दौरान उन्होंने अमानवीयता की सारी हद पार कर दी थी। दोनों के प्राइवेट पार्ट्स में लाठी डाल दी गई थी।

रिश्तेदार ने बताया बर्बरता की कहानी

एक रिश्तेदार जोसेफ ने बताया कि जब जयराज और बेनिक्स देर तक घर नहीं पहुंचे तो थाने गए और दोनों से मिलने की इच्छा जताई तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। अगले दिन यानी 20 जून को जब रिश्तेदार दोबारा थाने गए तो पुलिसकर्मियों ने उनसे जयराज और बेनिक्स को अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी और नए कपड़ों का इंतजाम करने को कहा। परिवार ने कपड़ों और गाड़ी का इंतजाम कर दिया था।

बोल नहीं पा रहे थे जयराज- जोसेफ

इसके बाद पुलिसवाले दोनों को लेकर अस्पताल पहुंचे। जोसेफ और उनकी पत्नी ने देखा कि अस्पताल में जाते समय दोनों बुरी तरह घायल थे और उनके कपड़े खून से सने हुए थे। जोसेफ ने बताया, “पुलिसवालों ने उन्हें घरे रखा था। जयराज की बहन मिन्नतें करने के बाद उनसे मिल पाई। वो बोल नहीं पा रहे थे और लगातार खून में सने अपने कपड़े दिखा रहे थे। कमर से नीचे उनके कपड़े खून से पूरी तरह लथपथ हो गए थे।”

पुलिस पर रातभर पिटाई का आरोप

जोसेफ ने आगे बताया, “बेनिक्स की कमर से भी खून बह रहा था। जयराज ने बड़ी मुश्किल से अपनी बहन को बताया कि उन दोनों को पुलिस वालों ने रात में 100-200 बार पीटा है।”

पुलिसकर्मियों ने बेनिक्स को खून से लथपथ अपना ट्राउजर बदलने की इजाजत दे दी। जब बेनिक्स ने उसकी जगह लुंगी पहनी तो यह भी खून से सन गई। फिर एक और लुंगी लाई गई तो यह भी उसी तरह खून से लथपथ हो गई।

खून बहने से रोकने के लिए दो घंटे अस्पताल में रखे गए दोनों

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दोनों को दो घंटे तक अस्पताल में रखा गया था। यहां पूरी कोशिश की जा रही थी कि ब्लीडिंग को किसी तरह रोका जाए। उन्हें कई बार कपड़े बदलने के लिए दिए गए लेकिन लगातार बहते खून के कारण कपड़े खून से सन जाते थे। अधिकारी ने बताया कि उन्हें दवाएं दी गई। उन्होंने लगभग छह बार कपड़े बदले थे और हर बार ये खून से लथपथ हो जाते थे। बेनिक्स के ज्यादा खून बह रहा था। 20 जून को लगभग 12 बजे उन्हें रिमांड के लिए मेजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।

परिवार को नहीं लेने दिए गए दोनों के कपड़े

परिवार वालों ने बताया कि पुलिस उन्हें केवल दिखावे के लिए अस्पताल लेकर आई थी और उन्हें एक पल भी अकेला नहीं छोड़ा। साथ ही पुलिस उनके कपड़े भी किसी को छूने नहीं दे रही थी।

दोनों के मलाशय में डंडा डाला गया था- शुरुआती जांच

पुलिस जांच में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि उन्हें कपड़े उतारकर 19-20 जून की पूरी रात पीटा गया था। उनके मलाशय में डंडा डाला गया था। जब बेनिक्स अपने पिता को पीटने से बचाने की कोशिश कर रहे थे तब पुलिसवाले उनके ऊपर बैठ गए थे। चोट के कारण बेनिक्स का ज्यादा खून बह रहा था। वहीं पुलिस का कहना है कि दोनों की मौत न्यायिक हिरासत में हुई है।

परिवार को मुवाअजा

इसी बीच तमिलनाडु सरकार ने मृतकों को दस लाख रुपये और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान कर दिया है। डीएमके ने एक परिवार के लिए 25 लाख रुपये का मुआवज़ा घोषित किया है। इसके बाद एआईएडीएमके ने भी पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की है।

सीएम बोले

इसी बीच मुख्यमंत्री ई. पलानीसामी ने कहा है, “जयराज और उनके बेटे बेनिक्स जेल में बंद थे। इसके बाद उनकी मौत अस्पताल में हुई। सरकार मद्रास हाई कोर्ट की ओर से आए हर आदेश का पालन करेगी। मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि उन्होंने पुलिस को कड़े शब्दों में निर्देश दिए हैं कि पुलिस को दुकानदारों और आम जनता के साथ ठीक ढंग से पेश आना है और इस कठिन दौर में उनका भरोसा हासिल करना है। वहीं बता दें कि इस घटना के बाद दो उपनिरीक्षकों सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

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‘गिड़गिड़ा रहा था विकास दुबे, कह रहा था मुझे यूपी पुलिस के हवाले मत करो’

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भोपाल। मध्य प्रदेश के उज्जैन में तैनात एक पुलिस के जवान ने एक स्थानीय अखबार से बातचीत में विकास दुबे को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। जवान ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद जब हमारी पुलिस टीम विकास को यूपी पुलिस के हवाले करने जा रही थी तो विकास रास्ते में गिड़गिड़ा रहा था कि मुझे यूपी पुलिस के हवाले मत करो।

जवान के मुताबिक, विकास को पता था कि कानपुर कांड के बाद यूपी में लगातार उसके साथियों का एनकाउंटर हो रहा है। ऐसे में विकास दुबे के मन में भी यह डर बैठा गया था कि उज्जैन पुलिस की टीम जब उसे यूपी एसटीएफ के हवाले करेगी तो उसे छोड़ेगी नहीं। इसीलिए वह ऐसा करने से मना कर रहा था।

उज्जैन जेल में ही रहने दो

जवान के मुताबिक, विकास को यूपी पुलिस के हवाले करने 16 जवानों की टीम गई थी। वह लगातार पुलिस की टीम से कहा रहा था कि मुझे उज्जैन जेल में ही डाल दो। एक जवान ने बताया कि वह उज्जैन में ही रखे जाने को लेकर रास्ते भर गिड़गिड़ा रहा था। एक बार तो पुलिसकर्मियों ने उसे सख्ती दिखाते हुए चुप रहने को कहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उज्जैन में पुलिस की पूछताछ के दौरान विकास दुबे कई बार रोया भी था। उसने उज्जैन में अधिकारियों से भी गुहार लगाई थी कि मुझे कोर्ट में पेशी को बाद उज्जैन जेल में ही भिजवा दो। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही कोर्ट में उसकी पेश हुई। उसके बाद उज्जैन पुलिस ने गुना बॉर्डर पर ले जाकर उसे यूपी पुलिस के हवाले कर दिया।

एक दिन पहले ही आ गया था इंदौर

उज्जैन के एसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया है कि वह गिरफ्तारी से एक दिन पहले ही उज्जैन पहुंच गया था। उन्होंने बताया कि अलवर से राजस्थान परिवहन निगम की बस से वह झालावाड़ पहुंचा था। झालावाड़ से वह बस के जरिए उज्जैन पहुंचा। वह सुबह 4 बजे के करीब देवास गेट बस स्टैंड पर उतरा था। वहां से ऑटो लेकर रामघाट गया। वहां स्नान ध्यान करने के बाद मंदिर में गया।

एसपी ने कहा है कि उज्जैन में अभी तक किसी भी व्यक्ति के द्वारा उसे संरक्षण देने की बात सामने नहीं आई है। उसके खुलासे पर हम जांचे करेंगे, उसके बाद ही कुछ कह पाएंगे। उज्जैन वह दर्शन करने के लिए ही आया था। हम लगातार यूपी पुलिस को इनपुट्स शेयर कर रहे हैं। जानकारी सामने आने के बाद मीडिया से भी शेयर करूंगा।

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सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक आतंकवादी ढेर

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श्रीनगर। सोपोर के रेबन इलाके में रविवार सुबह सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में एक आतंकवादी को मार गिराया। माना जा रहा है कि अभी और आतंकी सुरक्षाबलों के घेरे में फंसे हुए हैं। समाचार लिखे जाने तक मुठभेड़ जारी थी।
इलाके की घेराबंदी कर शुरू की तलाशी 
सुरक्षाबलों को रेबन इलाके में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सेना, पुलिस व सीआरपीएफ के जवानों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी  शुरू की।इस दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों को पास आता देख गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। इस मुठभेड़ में अभी तक सुरक्षाबलों ने एक आतंकवादी को मार गिराया है।
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अलगाववाद पर चोट : तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन मोहम्मद अशरफ सेहराई गिरफ्तार

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श्रीनगर। श्रीनगर पुलिस ने तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन मोहम्मद अशरफ सेहराई को उनके कुछ साथियों के साथ रविवार सुबह हिरासत में लिया है। पुलिस ने सेहराई को उनके निवास स्थान से हिरासत में लिया। मोहम्मद अशरफ सेहराई कश्मीरी अलगाववादी नेता और तहरीक-ए-हुर्रियत के अध्यक्ष हैं।

कार्रवाई क्यों की गई, पता नहीं

पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार मोहम्मद अशरफ सेहराई को रविवार सुबह उनके निवास स्थान से हिरासत में लिया गया है। अभी तक इस बात का पता नहीं चल पाया है कि सेहराई पर यह कार्रवाई किस मामले में की गई है।

आतंकी था बेटा, पुलिस ने मुठभेड़ में किया था ढेर

बता दें कि मोहम्मद अशरफ सेहराई को 19 मार्च 2018 में तहरीक-ए-हुर्रियत की मजलिस-ए-शोरा द्वारा कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। मोहम्मद अशरफ सेहराई 1959 में सैयद अली शाह गिलानी के साथी बने। सेहराई का बेटा जुनैद एमबीए की पढ़ाई करने के बाद हिजबुल का आतंकी बन गया था और श्रीनगर में हाल ही में हुई एक मुठभेड़ में मारा गया था।
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