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हे भारत माता चुल्लू भर पानी चुरा लेने से समंदर नही सूखा करते

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संतोष राज पांडेय

पटना। एक जमाना था जब घुसपैठिये खदेड़ने के काम आते थे। अब तो देखना यह है कि उनमें से कुछ मतदाता न निकल आये। इस नजरिए में नुकसान कम और नफा ज्यादा है।कहा भी है कि राजनीतिक दलों को क्या जाने किस भेष में नारायण मिल जाये ? ठीक भी है, दड़बे में 10 मुर्गियां और आ गयी, तो दड़बा फटेगा थोड़े ही। अंडों का कारोबार ही बढ़ेगा। अंडे न भी दे, तब भी मुर्गियां कुछ कम स्वादिष्ट होती है क्या। भेड़ो के रेवड़ की गिनती करता हुआ एक चालाक गड़ेरिया जब एक भेड़ कम गिनता है, तो वही उसके काम आती है। चुल्लू भर पानी चुरा लेने से समंदर नही सूखा करते। इसी चक्कर मे एक दफा एक वकील की शामत आ गयी और उसने अदालत में सच बोल दिया।मुकदमा तो हारना ही था।हाल तो यह है कि अगर आपने झूठ नही बोला, तो दफ्तर में आपकी छुटी तक मंजूर नही हो सकती। जनता और देश से कई बार झूठ बोलने पर भी वह अपराध नही रहता। सही है,जिनके घर नैतिकता पानी भरने नही आती, वे नहाते नही क्या?

सर्जिकल स्ट्राइक से देश का मनोबल बढ़ा

बात देश की कर ही ले। आजकल नैतिकता और मनोबल दो शब्दों का बड़ा ही जोड़ है। जब से सर्जिकल स्ट्राइक हुई है तमाम लेखों में यह पंक्ति आ जाती है कि देश का मनोबल बढ़ा है। हमारा मनोबल स्ट्राइल से पहले कितना था और स्ट्राइक के बाद कितना बढ़ा है,इसे कोई बर्नियर स्केल पर नहीं माप सकता है। तराजू पर नहीं तौल सकता है। देश का मनोबल क्या होता है, कैसे बनता है, कैसे बढ़ता है, कैसे घटता है। वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार जी के शब्दों में अगर बोले तो स्ट्राइक से पहले बताया जा रहा था कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है,क्या उससे मनोबल नहीं बढ़ा था, विदेशी निवेश के अरबों गिनाये जा रहे थे, क्या उससे मनोबल नहीं बढ़ा था, दुनिया में पहली बार भारत का नाम हुआ था, क्या उससे मनोबल नहीं बढ़ा था, इतने शौचालय बन गए, सस्ते में मंगल ग्रह पहुंच गए, रेल बजट भी समाप्त हो गया, योजना आयोग नीति आयोग बन गया, क्या उससे मनोबल नहीं बढ़ा। मनोबल कितना होता है कि इन सबसे भी पूरा नहीं बढ़ता है। हम कैसे मान लें कि सेना के सर्जिकल स्ट्राइक से मनोबल पूरी तरह बढ़ गया है। अब और बढ़ाने की गुज़ाइश नहीं है। देश का मनोबल एक चीज़ से बढ़ता है या कई चीज़ों से बढ़ता है। एक बार में बढ़ता है या हमेशा बढ़ाते रहने की ज़रूरत होती है। इन सब पर बात होनी चाहिए। मनोबल को लेकर अलबल नहीं होना चाहिए।

सोशल मीडिया का बाल बांका भी नहीं हो रहा

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देश का मनोबल बढ़ा हुआ बताने वाले तमाम लेखकों के ढाई साल पुराने पोस्ट देखिये। उनके जोश और उदंडता से तो नहीं लगेगा कि मनोबल की कोई कमी है। सोशल मीडिया पर गाली देने वालों का कितना मनोबल बढ़ा हुआ है। वो लगातार महिला पत्रकारों को भी तरह तरह से चित्रित कर रहे हैं। उनका कोई बाल बांका नहीं कर पा रहा है। फिर हम कैसे मान लें कि देश का मनोबल बढ़ा हुआ नहीं था। ये देश का मनोबल कहीं किसी दल का मनोबल तो नहीं है। 80 फीसदी गौ रक्षकों को फर्ज़ी बताने के बाद भी मनोबल नहीं घटा। रामलीला में नवाज़ुद्दीन को मारीच बनने से रोकने वालों का मनोबल क्या सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से बढ़ा हुआ है या पहले से ही उनका मनोबल बढ़ा हुआ है। क्या इसलिए मनोबल बढ़ा है कि नवाज़ को रामलीला से निकाल देंगे। हत्या के आरोप में बंद नौजवान की दुखद मौत पर क्या लिखा जाए। लेकिन उसे तिरंगे से लिपटाना क्या ये भी बढ़े हुए मनोबल का प्रमाण है।

सरकार परस्ती करने वाले चैनलों का मनोबल तो पहले से ही बढ़ा हुआ

सरकार परस्ती करने वाले चैनलों का मनोबल तो पहले से ही बढ़ा हुआ था। आपको कब लग रहा था कि उनमें मनोबल की कमी है। कुछ डर गए तो सुरक्षा बल भी प्रदान कर दिया गया। जिनसे सरकार को डर लगता है उन्हें खुला छोड़ दिया गया। क्या किसी मनोबल की कमी के कारण दर्शक पाठक पत्रकारिता के इस पतन को स्वीकार कर रहे है। इतिहास उन्हें कभी न कभी अपराधी ठहरायेगा। वक्त इंसाफ करेगा कि जब पत्रकारिता सरकार की भांड हो रही थी तब इस देश के लोग चुपचाप पसंद कर रहे थे क्योंकि उनका मनोबल इतना बढ़ गया था कि वे अपनी पसंद की सरकार और पत्रकारिता की स्वायत्तता में फर्क नहीं कर सके। वे चैनलों को ही सरकार समझ बैठे थे। कहना मत कि वक्त पर नहीं बताया। इसी कस्बा पर दस साल से लिख रहा हूं। चैनल ग़ुलाम हो गए हैं। हम मिट चुके हैं। हम मिटा दिए गए हैं।

जनता ही साथ नहीं है तो पत्रकार क्या करे

जब जनता ही साथ नहीं है तो पत्रकार क्या करे। बेहतर है अख़बार के उस कागज़ पर जूता रगड़ दिया जाए जिस पर लिखकर हम कमाते हैं। उसे न तो पत्रकारिता की ज़रूरत है न पत्रकार की। एक भांड चाहिए,सो हज़ारों भांड दे दो उसे। ठूंस दो इस देश के दर्शकों के मुंह में भांड। दर्शकों और पाठकों की ऐसी डरपोक बिरादरी हमने नहीं देखी। इन्हें पता नहीं चल रहा है कि हम पत्रकारों की नौकरी की गर्दन दबा कर लाखों करोड़ों को ग़ुलाम बनाया जा रहा है। मेरे देश की जनता ये मत करो। हमारी स्वतंत्रता के लिए आवाज़ तो उठाओ। हमारी कमर तोड़ दी गई है। हमीं कितना तपे आपके लिए। आप रात को भांडगिरी का नाच देखिये और हम नैतिकता का इम्तहान दे। कौन से सवाल वहां होते हैं जो आप रातों को जागकर देखते हैं। सुबह दफ्तर में इस भांडगिरी की बात करते हैं। खुजली है तो जालिम लोशन लगाइये। टीवी के डिबेट से और पत्रकारिता की भांडगिरी से मत ठीक कीजिए। आपके सवालों को ठिकाने लगाकर आपको चुप कराया जा रहा है और आप खुश हैं कि मनोबल बढ़ गया है।

काश जसवंत माल्या होता

फिर कौन कहता है कि मनोबल गिरा हुआ था। फिर कैसे मान ले कि मनोबल बढ़ा हुआ है। जब देश का मनोबल बढ़ा था तब लुधियाना के किसान जसवंत का मनोबल क्यों नहीं बढ़ा। क्यों वह पांच साल के बेटे को बांहों में भर कर नहर में कूद गया। तब तो सर्जिकल स्ट्राइक हो गई थी। क्या फिर भी उसका जीने का मनोबल नहीं बढ़ा। क्या तब भी उसे यकीन नहीं हुआ कि वह भी एक दिन भारत से भाग सकता है। जब भारत की सरकार माल्या को सात महीने से वतन नहीं ला सकी तो दस लाख वाले कर्ज़े के किसान को भारत लाने के लिए करोड़ों खर्च कभी कर सकती है। कभी नहीं करेगी। काश जसवंत माल्या होता। अपने जिगर के टुकड़े को सीने से दबाये नहर में नहीं कूदता। लंदन भाग जाता। जसंवत की मौत पर पंजाब की चुप्पी बताती है कि वाकई उनका मनोबल बढ़ा हुआ है। उन्हें अब जसवंत जैसे किसानों की हालत से फर्क नहीं पड़ता है। लोगों को मनोबल मिल गया है। कोई बताये कि कर्ज़ से दबे किसानों का भी मनोबल बढ़ा होगा क्या। हम इस पंजाब को नहीं जानते। हम इस पंजाबीयत को नहीं जानना चाहते। लंदन कनाडा की चाकरी करते करते, हमारा वो जाबांज़ पंजाब ख़त्म हो गया है। आप कहते हैं देश का मनोबल बढ़ा हुआ है।

मनोबल का हम क्या करने वाले हैं

मान लीजिए मनोबल बढ़ा है। ये भी तो बताइये कि इस बढ़े हुए मनोबल का हम क्या करने वाले हैं। चुनाव में इस्तमाल करेंगे या कुछ निर्यात भी करेंगे। दुनिया के कई देशो में भी मनोबल घटा हुआ होगा। हम मनोबल निर्यात कर उनका हौसला तो बढ़ा सकते हैं। क्या हम मनोबल के सहारे पांच साल में बेरोज़गारी के उच्चतम स्तर पर पहुंचने का कार्यकाल और दस साल बढ़ा सकते हैं। क्या हमारे युवा इस बढ़े हुए मनोबल के सहारे और दस साल घर नहीं बैठ सकते हैं। क्या उत्तराखंड के उस दलित परिवार का भी मनोबल बढ़ा होगा जिसके बेटे की गरदन एक मास्टर ने काट दी। सिर्फ इस बात के लिए कि उसने चक्की छू दी। वो भी ठीक उसी दौरान जब सेना की कार्रवाई के कारण देश का मनोबल बढ़ा हुआ था।

पत्रकार क्यों भांड हो गया

सर्जिकल स्ट्राइक से जब देश का मनोबल बढ़ा हुआ है तब फिर यज्ञ कराने की ज़रूरत क्यों है। क्या देश का मनोबल बढ़ाने वाली सेना का मनोबल घट गया है। क्या सेना को भी यज्ञ की ज़रूरत पड़ गई। हर साल बारिश न होने पर यज्ञ की ख़बरें चलती हैं। टीवी चैनलों पर। किसी मैच से पहले यज्ञ होने लगता है। बारिश नहीं होती है। टीम हार जाती है। ये कौन से यज्ञ हैं जो होते हैं मगर होता कुछ नहीं है। देश का मनोबल बढ़ा है। मनोबल के नाम पर राजनीतिक उत्पात बढ़ा है। पदों पर बैठे लोगों की शालीनता रोज़ धूल चाट रही है। आप बयान में कुछ और सुनते हैं। होते हुए कुछ और देखते हैं।
आप देखेंगे कैसे जब कोई सवाल करेगा तब न। आप पत्रकार से क्यों पूछते हो। उनसे पूछो जिन्हें आप वोट देते हैं। उनसे पूछिये कि आपके राज में प्रेस की स्वतंत्रता क्यों ख़त्म हो गई। पत्रकार क्यों भांड हो गया। क्या पत्रकारों का चैनलों का भांड होना मनोबल का बढ़ना है। मुबारक हो आप सभी को। आपका मनोबल बढ़ चुका है। बलों में इस बल का जश्न मनाइये। हम भी मनाते हैं। एलान कीजिए। बर्तन ख़ाली हैं। गर्दन में फांसी हैं। फ़िक्र नहीं है हमको। हमारा मनोबल बढ़ा हुआ है। हा एक बात और , दलित ,अल्पसंख्यक और गरीबी रेखा। इन तीनो शब्दो के इर्द गिर्द बुनी जाने वाली सियासी चादर किसी को भी बेपनाह करने के लिए काफी है। इनमें से जब कोई एक शब्द हल्का होने लगता है तो आरक्षण और क्रिमीलेयर जैसे शब्दों का उपयोग कर समाज को तोड़ने का प्रयास किया जाता है। सियासी रोटियां सेंकने के लिए भी तो हमारा मनोबल बढ़ा हुआ है। https://www.kanvkanv.com

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यहां छुपा बैठा है नीरव मोदी, विदेशी एजेंसी ने किया CONFIRM, सीबीआई ने दी प्रत्यर्पण की अर्जी

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नई दिल्ली । 13 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा पीएनबी घोटाले के आरोपी नीरव मोदी का आखिरकार पता चल गया है। ब्रिटेन की सरकार ने कहा है कि नीरव मोदी उसके यहां मौजूद है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक CBI ने नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए यूके की सरकार को अर्जी भेज दी है। अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि एजेंसी ने उचित चैनलों के माध्यम से अनुरोध भेजा है। इसे गृह मंत्रालय को भेजा गया है जो विदेश मंत्रालय के माध्यम से इसे ब्रिटेन भेजेगा। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने ब्रिटेन के अधिकारियों से उसे हिरासत में भी लेने का अनुरोध किया है।

मेहुल चौकसी का भी पता चला

पीएनबी घोटाले का दूसरा आरोपी मेहुल चोकसी का भी पता चल गया है। वो अभी एंटिगुआ का नागरिक बन कर वहां रह रहा है। सरकार ने उसके प्रत्यर्पण के लिए भी एंटीगुआ की सरकार के साथ करार किया है। आपको बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में इंटरपोल ने नीरव मोदी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। सीबीआई ने घोटाले में नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी के खिलाफ हाल ही में अलग अलग आरोपपत्र दाखिल किए थे।

12 जून को ट्रेन में था नीरव मोदी

सीबीआई ने दो दिन पहले ही दावा किया था कि आरोपी नीरव मोदी भारतीय पासपोर्ट पर खुलेआम यात्रा कर रहा है. नीरव मोदी के पास छह पासपोर्ट होने की जानकारी मिलने के बाद भारतीय एजेंसियों को एक और बड़ी जानकारी हाथ लगी है. सीबीआई के सूत्रों ने दो दिन पहले ही बताया था कि 12 जून को नीरव ने हाई स्पीड ट्रेन के जरिए लंदन से ब्रसेल्स का सफर तय किया था. सूत्रों ने यह भी बताया कि इस यात्रा के दौरान नीरव ने प्लेन से यात्रा करने के बजाय ट्रेन से जाना ज्यादा मुनासिब समझा.

समन जारी

विशेष अदालत ने हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी को समन जारी किया है. दोनों को नए भगोड़ा कानून के तहत 25 और 26 सितंबर को अदालत में पेश होने को कहा गया है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत से दोनों के खिलाफ 13,400 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में कार्रवाई का आग्रह किया था. बता दें कि नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी के खिलाफ देश में ईडी और सीबीआई जांच कर रही है. दोनों ने पीएनबी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से बैंक को 13400 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया था. घोटाले का खुलासा होते ही दोनों देश छोड़कर फरार हो गए. https://www.kanvkanv.com

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वीडियो : केरल की तबाही में पीड़ितों के लिए फरिश्ते बने जवान, अपनी पीठ को सीढी बना बचाई लोगों की जान

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नयी दिल्ली। केरल में कुदरत के गुस्से ने पूरे राज्य में तबाही मचा दी है. राज्य में हो रही बारिश और उसके बाद आई बाढ़ के कारण लाखों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं. लेकिन इन सभी की मदद के लिए सेना, NDRF समेत कई सुरक्षा एजेंसियां फरिश्ते की तरह सामने आई हैं. सेना और एनडीआरएफ के जवान जगह-जगह लोगों को मदद पहुंचा रहे हैं. जिसमें खाना, पीने का पानी, लोगों को पानी से बचाना, उन्हें मेडिकल सुविधा मुहैया कराना शामिल है.

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इस बीच सोशल मीडिया कई वीडियो सामने आ रहे हैं, जो जवानों की बहादुरी को दिखाते हैं. इन्हीं में से एक वीडियो है जिसमें एनडीआरएफ का जवान खुद को बाढ़ के पानी में झुक कर महिलाओं को नाव में चढ़ने की सहायता कर रहा है. महिलाएं जवान की कमर पर पैर रख नाव में चढ़ रही हैं.

सुरक्षा एजेंसियां अपनी परवाह किए बगैर लोगों को बचा रही है और उन्हें मदद कर रही है. ऐसी कई तस्वीरें हमें बाढ़ प्रभावित इलाकों से देखने को मिल रही हैं.

प्रदेश में बाढ़ की विभीषिका के कारण 7,24,649 लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है. बाढ़ पीड़ितों के लिए 5,645 राहत शिविर बनाए गए हैं. बाढ़ की त्रासदी ने 370 जिंदगियां लील लीं. https://www.kanvkanv.com

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अपराध जगत की लेडी डॉन ‘मम्मी’ गिरफ्तार, 8 बेटों को भी बनाया है अपराधी

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नयी दिल्ली। दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 62 साल की बसीरन को कल संगम विहार से अरेस्ट कर किया है। इस महिला और उसके परिवार पर 113 अपराध के मामले दर्ज हैं। इसके गैंग वाले महिला को ‘मम्मी’ के नाम से बुलाते थे। यहीं नहीं बसीरन के आठ बेटे हैं, जिनमें से एक नाबालिग को छोड़ बाकी सभी का आपराधिक रिकॉर्ड है। अपराधी बेटों के कारण ही लोग बशीरन के खिलाफ आवाज भी उठाने से डरते हैं। बशीरन पर एक्साइज एक्ट, कांट्रैक्ट किलिंग जैसे 9 मामले दर्ज हैं। बशीरन के बेटे शमीम पर मकोका सहित कुल 42 मामले दर्ज हैं और पूरे परिवार पर कुल 113 मामले दर्ज हैं।

कैसे बनी अपराधी

बसीरन मूल रूप से आगरा की रहने वाली है। करीब 40 साल पहले बशीरन ने राजस्थान के धौलपुर निवासी व्यक्ति मलखान से शादी की थी। 80 के दशक में दोनों पति-पत्नि दिल्ली आ गए और पहले गोविंदपुरी के नवजीवन कैंप में रहे और बाद में 90 के दशक में संगम विहार में बस गए। शादी के बाद जैसे-जैसे खर्च बढ़ते गये, बसीरन के अपराध का ग्राफ भी बढ़ता गया। उसने अपने बच्चों को भी अपराधिक गतिविधियों में धकेलने का काम किया।

एेसे हुई गिरफ्तार

डिप्टी पुलिस कमिश्नर रोमिल बानिया ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर बसीरन को गिरफ्तार किया गया, जब वह अपने परिवार से मिलने वहां आई थी। वह एक मामले में पिछले आठ महीनों से फरार थी। उसे कोर्ट द्वारा 25 मई को कुख्यात अपराधी घोषित किया गया और कानूनन उसकी आवासीय संपत्तियों की कुर्की कर ली गई। डीसीपी के मुताबिक, बसीरन ने पुलिस को बताया कि उसने और उसके गैंग के सदस्यों आकाश और विकास ने यूपी के मिराज की हत्या की सुपारी ली थी। ये सुपारी उसकी सौतेली बहन मुन्नी बेगम ने 60 हजार रुपये में दी थी।

मुन्नी ही मिराज को बसीरन के संगम विहार स्थित घर पर सितंबर 2017 को लेकर आई थी। उसके बाद आकाश, विकास, नीरज और एक युवक ने मिराज को शराब के नशे में जंगल ले जाकर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी और बाद में शव को जला दिया। वारदात के एक हफ्ते बाद किसी ने शव के अवशेष जंगल में देखे जाने की सूचना पुलिस दी। पुलिस ने उसके बाद आरोपियों में से एक युवक की गिरफ्तारी की, जिसने वारदात में शामिल अन्य लोगों की जानकारी दी। पुलिस ने बाकी सभी अपराधियों को इस साल जनवरी में गिरफ्तार कर लिया, लेकिन बसीरन तभी से फरार थी।

पुलिस अफसर ने बताया कि इस महिला का संगम विहार के कुछ सरकारी बोरबेल्स पर भी कब्जा था और वह अपने दो बेटों के साथ मिलकर पानी माफिया का अवैध कारोबार भी चलाती थी। उसमें से एक को मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम 1999) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

कुछ इस तरह था खौंफ

स्थानीय निवासी बताते हैं कि बशीरन के आतंक का साया ऐसा था कि रात में आठ बजे के बाद कोई महिला रोड पर चलने से डरती थी. बशीरन का सॉफ्ट टारगेट बच्चे होते थे. वह  8-10-12 साल के बच्चों को अपना शिकार बनाती थी.  बशीरन अपने गैंग में शामिल करने से नाबालिग बच्चों में पहले नशे की आदत डालती (चरस, गांजा खिलाना-पिलाना) जब 6-7 महीने में आदत पड़ जाती है तो फिर उनको यह बदमाश बनाती है. उन्हें चाकू, छुरा, रिवॉल्वर देती  और फिर जुर्म की दुनिया में उसका स्वागत करती. बशरीन के आठ बेटे हैं. यह परिवार में अपराध में ऐसा लिप्त है कि इस परिवार से इलाके के लोग खौफ खाते हैं.

बशीरन का इलाके में दिल्ली की सरकारी पानी की पाइप लाइन पर कब्ज़ा रहा है. वह यहां अपने तरीके से पानी बांटती है और लोगों से घंटे के हिसाब से पैसे वसूलती रही है. खौफ इतना ज्यादा कि क्या मजाल कोई लेडी डॉन के खिलाफ में आवाज बुलंद कर दे.  बशीरन का खौफ इतना कि आसपास के लोग अपने घरों से झांकते तो नज़र आए लेकिन उसके खिलाफ मुंह खोलने वाले कभी न मिले. मगर कहते हैं न कि जुर्म की दीवारें चाहे जितनी भी ऊंची कर लो, एक न एक दिन कानून के हांथ वहां तक पहुंच ही जाते हैं. आखिरकार बशीरन का पाप का घड़ा भरा और कानून ने अपना काम कर दिखाया.  https://www.kanvkanv.com

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