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नेपाल और चीन की यारी भारत पर पड़ेगी भारी

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संतोष राज पांडेय

नेपाल की राजनीति में भारी बदलाव हुआ है। नेपाल अब भारत पर निर्भर नही रहना चाहता। यही कारण है कि वह बार बार चीन की तरफ अपना रुख कर रहा है। भारत के लाख घोषणाओं के बावजूद नेपाल भारत पर निर्भर नही रहना चाहता है। पिछले माह अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  नेपाल में आयोजित बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक कोऑपरेशन) सम्मेलन में थे. पीएम मोदी के इस सम्मेलन से लौटने के बाद से यह उम्मीद किया गया था कि नेपाल भारत के रिश्ते बेहतर होंगे पर इस कार्यक्रम से मोदी के लौटने के बाद
नेपाल भारत को कई झटके दे चुका है. इसके एक उदाहरण नही कई उदाहरण है।

भारत के लिए चिंता की बात ज

भारत ने बिम्सटेक देशों के संयुक्त सैन्य अभ्याससे अंतिम समय में नेपाल के अलग होने को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया नहीं देगा। भारत का मानना है कि नेपाल का यह कदम उसकी अंदरूनी राजनीति से ज्यादा जुड़ा है और इस घटनाक्रम से कोई बड़ा अर्थ नहीं निकालना चाहिए। हालांकि नेपाल के रवैये में आए बदलाव और चीन की अति सक्रियता भारत के लिए चिंता की बात जरूर बन गई है।
आपको बता दें कि नेपाल बिम्सटेक देशों के साझे सैन्य अभ्यास से अलग हो गया जबकि चीन के साथ सैन्य अभ्यास करने का फैसला किया है। बिम्सटेक देशों का साझा सैन्य अभ्यास पुणे में चल रहा है। उधर, नेपाल चीन के साथ17 सितंबर से संयुक्त सैन्य अभ्यास करेगा। बिम्सटेक भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाइलैंड, भूटान और नेपाल का एक क्षेत्रीय समूह है।
पहले नेपाल ने बिम्सटेक देशों के पुणे में आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यास में शामिल होने से इनकार कर दिया तो और अब नेपाल 17 से 28 सितंबर तक चीन के साथ 12 दिनों का सैन्य अभ्यास करने जा रहा है. यह कैसी भारत के साथ राजनीति है।  नेपाल ने ऐसा कर भारत के ज़ख़्म पर नमक डाला है. नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल गोकुल भंडारी ने कहा कि यह चीन के साथ इस तरह का दूसरा सैन्य अभ्यास होगा. उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभ्यास का लक्ष्य आतंक विरोधी अभियानों में दक्षता हासिल करना है. नेपाल ने चीन के साथ इस तरह का सैन्य अभ्यास पिछले साल अप्रैल में किया था. भारत के लिए यह चिंता बढ़ाने वाली बात है कि नेपाल और उत्तर के पड़ोसी में सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं.
बिम्सटेक के सैन्य अभ्यास से नेपाल का अचानक अलग होना भारत के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा है कि नेपाल को दुर्भाग्य से अनावश्यक रूप से भारत को उकसाने में संतोष मिलता है.

भारत से अपनी निर्भरता कम करना चाहता है नेपाल

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोमवार को काठमांडू में भारतीय राजदूत मंजीत सिंह पुरी से इस मुद्दे पर बातचीत की है. कहा जा रहा है कि ओली ने बिम्सटेक के सैन्य अभ्यास में शामिल नहीं होने की वजह बताई है.हालांकि मंजीत सिंह ने इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की है. दूसरी तरफ़ भारत की तरफ़ से भी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. नेपाल में कहा जा रहा है कि ऐसा वहां की आंतरिक राजनीति के कारण हुआ है. हालांकि भारत को यह वजह बहुत तार्किक नहीं लग रही है, क्योंकि नेपाल की ओली सरकार दो तिहाई बहुमत वाली मज़बूत सरकार है. सवाल उठाया जा रहा है कि ऐसे में ये सरकार किसी के दबाव में कैसे आ सकती है. इस मामले में नेपाल के दिल्ली स्थिति दूतावास ने कोई टिप्प्णी नहीं की है. प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी चार बार नेपाल जा चुके हैं, लेकिन रिश्तों में भरोसे का अभाव दिख रहा है. इसी बीच चीन और नेपाल के रिश्तों में एक और प्रगति सामने आई है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार नेपाल सरकार ने कहा है कि चीन अपने पोर्ट को इस्तेमाल करने की इजाज़त नेपाल को देगा. नेपाल एक लैंडलॉक्ड देश है और वो भारत से अपनी निर्भरता कम करना चाहता है. 2015 में भारत की तरफ़ से अघोषित नाकाबंदी की गई थी और इस वजह से नेपाल में ज़रूरी सामानों की भारी किल्लत हो गई थी. तब से दोनों देशों के बीच संबंधों में वो भरोसा नहीं लौट पाया है.
भारत नेपाल के नए संविधान से संतुष्ट नहीं था. कहा जा रहा था कि नेपाल ने मधेसियों के साथ नए संविधान में भेदभाव किया है. मधेसी भारतीय मूल के हैं और इनकी जड़ें बिहार और यूपी से हैं. हालांकि नेपाल ने संविधान में कोई बदलाव नहीं किया और भारत को नाकाबंदी बिना कोई कामायाबी के ख़त्म करनी पड़ी थी. नेपाल के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि उसे चीन ने थिंयान्जिन, शेंज़ेन. लिआनीयुगैंग और श्यांजियांग पोर्ट के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है. मंत्रालय ने अपने बयान में ये भी कहा है कि चीन ने नेपाल को लैंड पोर्ट लोंजोऊ, लासा और शिगैट्से के इस्तेमाल पर भी सहमति जता दी है. नेपाल के प्रति चीन के इस रुख़ के बारे में कहा जा रहा है कि नेपाल भारत से अपनी निर्भरता कम करना चाहता है दूसरी तरफ़ चीन भी नेपाल में भारत की तुलना में अपनी मौजूदगी ज़्यादा बढ़ाना चाहता है. केपी शर्मा ओली फ़रवरी 2015 में दूसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे. वो तब से दो बार भारत आ चुके हैं. वो अपने चुनावी अभियान में चीन के साथ सहयोग बढ़ाने और भारत पर निर्भरता कम करने की बात कह चुके हैं.नेपाल के नए संविधान पर भारत के असंतोष पर नेपाल की ओली सरकार कहती रही है कि यह उसका आंतरिक मामला है. भारत और नेपाल के बीच 1950 में हुए पीस एंड फ्रेंडशिप संधि को लेकर ओली सख़्त रहे हैं. उनका कहना है कि संधि नेपाल के हक़ में नहीं है. इस संधि के ख़िलाफ़ ओली नेपाल के चुनावी अभियानों में भी बोल चुके हैं. ओली चाहते हैं कि भारत के साथ यह संधि ख़त्म हो.

सीमा विवाद एक बड़ा मुद्दा

दोनों देशों के बीच सीमा विवाद भी एक बड़ा मुद्दा है. सुस्ता और कलपानी इलाक़े को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है. चार साल पहले दोनों देशों के बीच सुस्ता और कलपानी को लेकर विदेश सचिव के स्तर की बातचीत को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक एक भी बैठक नहीं हुई है. ओली जब भारत आते हैं तो उन पर दबाव होता है कि इन दोनों मुद्दों पर बातचीत करें, लेकिन द्विपक्षीय वार्ताओं में इनका ज़िक्र नहीं होता है. नंवबर 2016 में मोदी सरकार ने अचानक से जब 500 और एक हज़ार के नोटों को चलन से बाहर कर दिया तो नेपाल भी इससे प्रभावित हुआ. नेपाल में भी भारतीय नोट लेन-देन के आम चलन में हैं और जब ये नोट रद्द किए गए तो वहां के लोग और अर्थव्यस्था पर बुरा असर पड़ा. नेपाल ने भारत से पुराने नोटों को बदलने का आग्रह किया और दोनों देशों के बीच बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन अब भी मामला सुलझा नहीं है. इस मामले में कोई आधिकारिक तस्वीर नहीं होने की वजह से भी मामल अटका हुआ है. 6 अप्रैल को ओली ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉ़न्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए कहा था, ”भारतीय निवेशक दुनिया भर के देशों में निवेश कर रहे हैं, लेकिन अपने पास के ही नेपाल में नहीं करते हैं. आख़िर ऐसा क्यों है? हम भौगोलिक रूप से पास में हैं, आना-जाना बिल्कुल आसान है, सांस्कृतिक समानता है और ऐसा सब कुछ है जो दोनों देशों को भाता है फिर भी निवेश क्यों नहीं होता?”
ओली के बारे में कहा जाता है कि वो विदेशी संबंधों में अपने दो बड़े पड़ोसी भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर रखना चाहते हैं. ओली के बारे में कहा जाता है कि वो कभी भारत समर्थक कहे जाते थे. नेपाल की राजनीति में उनका रुख़ भारत के पक्ष में कभी हुआ करता था. 1996 में भारत और नेपाल के बीच हुए ऐतिहासिक महाकाली संधि में ओली की बड़ी भूमिका मानी जाती है. ओली 1990 के दशक में नेपाल में कैबिनेट मंत्री हुआ करते थे. वो 2007 तक नेपाल के विदेश मंत्री भी रहे थे. इस दौरान ओली के भारत से काफ़ी अच्छे ताल्लुकात थे. नेपाल पर भारत का प्रभाव दशकों से रहा है. दोनों देशों के बीच खुली सीमा है, बेशुमार व्यापार है, एक धर्म है और रीति रिवाज़ भी एक जैसे हैं. दोनों देशों के बीच बिगड़ते संबंधों को लेकर जब बात होती है तो चीन का ज़िक्र ज़रूरी रूप से होता है. चीन ने हाल के वर्षों में नेपाल में भारी निवेश किया है. नेपाल में चीन कई प्रोजेक्टों पर काम कर रहा है और इसमें बुनियादी ढांचों सी जुड़ी परियोजनाएं सबसे ज़्यादा हैं. चीन नेपाल में एयरपोर्ट, रोड, हॉस्पिटल, कॉलेज, मॉल्स बना रहा है तो एक रेलवे लाइन पर भी काम कर रहा है. कॉर्नेगी इंडिया के एनलिस्ट कॉन्स्टैन्टिनो ज़ेवियर ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा है, ”नेपाल और चीन की क़रीबी एक बड़ा परिवर्तन है. यह नेपाल के इतिहास में पहली बार है कि चीन नेपाल को भारत का विकल्प मुहैया करा रहा है.”

धार्मिक और कई तरह की बेशुमार समानता

नेपाल मामलों के जानकार आनंदस्वरूप वर्मा कहते हैं, ”जिस तरह भारत में राष्ट्रवाद की बात होती है तो पाकिस्तान विरोध केंद्र में आ जाता है. उसी तरह अब नेपाल में चुनावों के दौरान हो रहा है. ऐसी स्थिति भारत ने ही पैदा की है. भारत 2015 में नाकाबंदी कर वहां के नागरिकों को भी अपने ख़िलाफ़ भावना रखने पर मजबूर किया है. नेपाल भारत का विरोध कर ख़ुद को आगे नहीं बढ़ा सकता है, लेकिन दुर्भाग्य से भारत के साथ ऐसा नहीं है कि वो भी सोच ले कि उसके अलावा नेपाल के पास कोई विकल्प नहीं है. भारत के साथ सांस्कृतिक, धार्मिक और कई तरह की बेशुमार समानता हैं, लेकिन वो इस मौक़े को भुना नहीं पाया. नेपाल में भारत ने ख़ुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है.”
वो कहते हैं, ”भारत सैकडों सालों तक उपनिवेश रहा है, लेकिन नेपाल कभी किसी का उपनिवेश नहीं रहा. भारत में औपनिवेशिक मानसिकता केवल यहां की राजनीति में ही नहीं है बल्कि समाज और बुद्धिजीवियों में भी दिखती है. हमें नेपाल का गार्ड मंजूर है, नौकर मंजूर है पर एक संप्रभु देश मंजूर नहीं है. 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध के बाद 1964 में चीन ने काठमांडू को कोदारी राजमार्ग से जोड़ा था. इसे लेकर भारत की संसद में काफ़ी तीखी बहस हुई थी. कहा जाने लगा कि चीन गोरखपुर तक पहुंच जाएगा. हालांकि ऐसा नहीं हुआ.”
वो कहते हैं, ”आख़िर एक संप्रभु देश दूसरे देश से अपने हित में संबंध क्यों नहीं बना सकता और वो भी तब जब आप उसके हितों का ख़्याल नहीं रख रहे हैं. 1950 में भारत ने जो नेपाल से पीस एंड फ्रेंडशिप संधि की थी उसे लेकर नेपाल में अब आवाज़ उठ रही है. वो संधि तब हुई थी जब नेपाल में राणाशाही थी. अगर लोकतांत्रिक नेपाल आपसे इस संधि पर बातचीत करना चाहता है तो आपको करना होगा.” https://www.kanvkanv.com
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लड़कियों के PG में रात को घुसा लड़का, फिर सो रही लड़की के साथ की ‘गंदी’ हकरत, CCTV में हुआ कैद

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अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद के नवरंगपुरा के सीजी रोड पर मौजूद एक पेईंग गेस्ट (PG) मकान में एक अंजान लड़के ने घुसकर वहीं सो रही एक लड़की के साथ अश्लील हरकतें करनी शुरू कर दी। सीसीटीवी कैमरे में ये सारा मामला कैद हो गयी।

लड़क‍ियों के PG में रात को घुसा लड़का, CCTV में अश्लील हरकतें कैद

घटना 14 जून की है पर लड़की ने बदनामी के चलते पुलिस में शिकायत नहीं की लेकिन यह सीसीटीवी फुटेज वायरल हो गई जिसके बाद खुद गुजरात महिला आयोग ने इस मामले में अहमदाबाद पुल‍िस कम‍िश्नर से र‍िपोर्ट मांगी है। सीसीटीवी सामने आते ही पुल‍िस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

लड़क‍ियों के PG में रात को घुसा लड़का, CCTV में अश्लील हरकतें कैद

वहीं, इस मामले में जो लड़कियां पीजी में रहती हैं वह काफी खौफजदा है। चार मंज‍िल के इस फ्लैट में ग्राउंड फ्लोर पर पर‍िवार के साथ लोग रहते हैं लेक‍िन ऊपर की मंज‍िल पर पूरा पीजी चलता है। जहां एक साथ 19 लड़क‍ियां रहती हैं।

लड़क‍ियों के PG में रात को घुसा लड़का, CCTV में अश्लील हरकतें कैद

जो लड़की बाहर सो रही थी वह इस पीजी की मह‍िला केयर टेकर थी। लड़क‍ियों का कहना है क‍ि मह‍िला केयर टेकर बीमार होने की वजह से दवाई लेकर सो गई थी। जब एक लड़की उठी तो उसने लड़के को घर के अंदर देख ल‍िया। तभी लड़का वहां से भाग गया।

लड़क‍ियों के PG में रात को घुसा लड़का, CCTV में अश्लील हरकतें कैद

इस पीजी में रहने वाली एक लड़की जेनी (बदला हुआ नाम) का कहना है क‍ि यह हादसा हमारी वॉर्डन के साथ हुआ, वह बीमार थी और दवाई लेकर सो रही थी। पीजी माल‍िक सन्नी स‍िंह के मुताब‍िक यहां पर एक स‍िक्योर‍िटी गार्ड काम करता है जो क‍ि वारदात के समय छुट्टी पर गया था।

लड़क‍ियों के PG में रात को घुसा लड़का, CCTV में अश्लील हरकतें कैद

लड़क‍ियों के PG में रात को घुसा लड़का, CCTV में अश्लील हरकतें कैद

पुलिस अब इस मामलें में जांच कर रही है कि यहां दिन में कितने लोग आते-जाते हैं। रात को करीबन 1 बजे हुई इस वारदात को लेकर पुलिस अब आसपास के सीसीटीवी भी खंगाल रही हैं। https://www.kanvkanv.com

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जब अठावले के भाषण पर मोदी-सोनिया व राहुल ने लगाए ठहाके, वीडियो देख आप भी नहीं रोक पाएंगे हंसी

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नई दिल्ली। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेता रामदास अठावले अपनी सरल कविताओं और स्पष्ट बातों से अक्सर सदन के महौल को खुशनुमा कर देते हैं। इसी क्रम में उन्होंने बुधवार को अध्यक्ष चुने जाने पर ओम बिरला को बधाई देते समय भी किया।

केन्द्र में मंत्री और राज्यसभा से सांसद रामदास अठावले ने ओम बिरला के लिए कुछ छंद पढ़े। इसके बाद पूरा सदन हंसने लगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल रहे।

राहुल को जन्मदिन की बधाई दी

अठावले ने इस दौरान राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी और कहा कि वह आज विपक्ष में बैठे, इसके लिए भी उन्हें बधाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बहुत साल तक सत्ता रही। जब कांग्रेस की सत्ता थी तो वह उनके साथ थे। चुनाव से पहले कांग्रेस वाले उन्हें अपनी ओर आने को कह रहे थे, लेकिन उन्हें देश में मोदी की लहर दिखाई दी और वह सरकार के साथ रहे और आज मंत्री हैं।

केंद्रीय मंत्री बोले कि बिल पास करने के लिए विपक्ष की जरूरत है। हमारी सरकार 5 साल तक चलेगी, पांच साल होने के बाद भी पांच साल चलेगी और चलती ही रहेगी। हम अच्छा काम नहीं करेंगे, तो आपकी सरकार आएगी लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। उन्होंने ओम बिड़ला को लेकर कहा कि आप हंसते नहीं हैं, लेकिन मैं आपको हंसाकर रहूंगा। अठावले ने कहा…

‘एक देश का नाम है रोम, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष बन गए हैं बिरला ओम

लोकसभा का आपको चलाना है अच्छी तरह काम, वेल में आने वालों का ब्लेकलिस्ट में डालना है नाम।

नरेंद्र मोदी और आपका दिल है विशाल, राहुल जी आप रहो खुशहाल

हम सब मिलकर एकता की मशाल, भारत को बनाते हैं और भी विशाल

आपका राज्य है राजस्थान, लेकिन लोकसभा की आप बन गए शान

भारत की हमें बढ़ानी है शान, लोकसभा चलाने के लिए आप हैं परफेक्ट हैं मैन’

विपक्ष की जरूरत

इस दौरान उन्होंने कहा कि विधेयक पास करने के लिए विपक्ष की सहायता की जरूरत है। विपक्ष को देश में आए नतीजों का स्वागत कर सरकार चलाने में मदद करनी चाहिए। https://www.kanvkanv.com

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मासूमों की मौत के सवाल पर डिप्टी सीएम ने साधी चुप्पी, पत्रकारों से कहा- जा सकते हैं बाहर

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पटना। मुजफ्फरपुर में एईएस से मासूमों की मौत पर बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कुछ भी जवाब देने से इंकार कर दिया। सुशील मोदी राजधानी में बैंकर्स समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। राजधानी पटना के एक होटल में बुधवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सुशील मोदी ने कहा कि इस  प्रेस कांफ्रेंस में सिर्फ बैंक से जुड़े हुए प्रश्नों का ही हम जवाब देंगे। लेकिन, इसके बाद भी जब पत्रकारों ने मुजफ्फरपुर से जुड़े प्रश्न किये तो सुशील मोदी ने कहा कि जिन्हें बैंक से इतर और कोई प्रश्न करने हैं वे बाहर जा सकते हैं।

अब तक 125  से ज्यादा बच्चों की मौत

अभी हम सिर्फ और सिर्फ बैंक से जुड़े  प्रश्नों का ही जवाब देंगे। पत्रकारों  द्वारा बार -बार पूछे जाने पर भी सुशील मोदी ने मुजफ्फरपुर से जुड़े प्रश्नों का कुछ भी जवाब नहीं दिया। मुजफ्फरपुर में एईएस बीमारी से अब तक 125  से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। 100 से ज्यादा बच्चे अभी भी पीड़ित हैं। मौत का आंकड़ा हर दिन बढ़ता जा रहा है। इस घटना से आक्रोशित लोगों ने मंगलवार को सीएम का मुजफ्फरपुर में विरोध करते हुए मुख्यमंत्री वापस जाओ के नारे भी लगाए थे। सीएम मंगलवार को एईएस से पीड़ित बच्चों को देखने मुजफ्फरपुर गए थे। https://www.kanvkanv.com
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