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मॉस्को के रेड स्क्वॉयर पर भारतीय सेना ने दिखाया दम

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नई दिल्ली। चीन से तनातनी के बीच रूस में बुधवार को विजय दिवस परेड में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। अब तक इस परेड में सिर्फ भारत की थल सेना जाती थी लेकिन इस बार भारतीय सशस्त्र बल की तीनों सेनाओं की टुकड़ियां भी मॉस्को के रेड स्क्वायर की विजय परेड में भाग ले रही हैं। रक्षा मंत्री ने ट्वीट कर कहा कि 1941-1945 के युद्ध में सोवियत सेना की विजय की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिए मॉस्को में रेड स्क्वॉयर पर विजय दिवस परेड में शामिल हुआ हूं। मुझे गर्व है कि भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों सेना की टुकड़ी भी इस परेड में भाग ले रही हैं।

इससे पहले राजनाथ सिंह ने रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी गोरीसोव से बातचीत करने के बाद मंगलवार को बताया था कि रूसी नेता के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक और लाभप्रद रही। उन्होंने कहा कि रूस के उपप्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान हमने रक्षा सहयोग की समीक्षा की और इन्हें व्यापक बनाने के उपायों पर विचार किया। रक्षा संबंध इस रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ हैं।

रक्षा मंत्री तीन दिवसीय रूस दौरे पर सोमवार को रूस पहुंचे थे। मॉस्को यात्रा पर गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को रूस ने भरोसा दिलाया है कि वह भारत के साथ किए गए रक्षा खरीद समझौतों को जारी ही नहीं रखेगा बल्कि कम से कम समय में आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।

क्यों होती है विजय दिवस परेड

रूस यह विजय दिवस परेड दूसरे विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी के खिलाफ जीत की याद के तौर पर मनाता है। द्वितीय विश्व युद्ध में 87 हज़ार से अधिक भारतीय सैनिकों ने शहादत दी थी जबकि 34,354 घायल हुए थे। ब्रिटिश भारतीय सेना ने न केवल सभी मोर्चों पर लड़ाई लड़ी, बल्कि दक्षिणी, ट्रांस-ईरानी लेंड-लीज मार्ग के साथ लॉजिस्टिक समर्थन भी सुनिश्चित किया। भारतीय सैनिकों की वीरता को चार हज़ार से अधिक अलंकरणों से सम्मानित किया गया, जिसमें 18 विक्टोरिया और जॉर्ज क्रॉस के पुरस्कार भी शामिल थे। तत्कालीन सोवियत संघ ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता की सराहना की और सोवियत संघ की सर्वोच्‍च संस्‍था प्रेसीडियम द्वारा 23 मई 1944 को पारित एक सरकारी आदेश के जरिए रॉयल इंडियन आर्मी सर्विस कोर के भारतीय सैनिक सूबेदार नारायण राव निक्कम और हवलदार गजेंद्र सिंह चंद को रेड स्टार के प्रतिष्ठित अंलकरण से सम्मानित किया गया। इस सरकारी आदेश पर मिखाइल कलिनिन और अलेक्‍जेंडर गार्किन ने हस्‍ताक्षर किए थे।

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