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हाईकोर्ट का यूपी सरकार को निर्देश, हरियाणा की तर्ज पर वकीलों को जारी करे ई-पास

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यूपी के निवासी वकीलों को दिल्ली आने-जाने के लिए गुरुवार सुबह दस बजे तक सुविधा शुरू करे सरकार   

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वो यूपी में रहनेवाले वकीलों को दिल्ली से आने-जाने के लिए हरियाणा की तर्ज पर ई-पास देने की सुविधा शुरु करे। जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की बेंच ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई सुनवाई के बाद यूपी सरकार को कल यानि 21 मई की सुबह दस बजे तक ये सुविधा शुरु करने का निर्देश दिया।
दरअसल पिछले 18 मई को हाईकोर्ट को हरियाणा सरकार ने बताया था कि वो लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में वकीलों को आने-जाने की अनुमति देगा। उसके बाद कोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिया था कि वे भी यूपी में रहनेवाले वकीलों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति दें। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने कहा था कि उसने वकीलों को भी दिल्ली से आने और जाने के लिए मूवमेंट पास जारी करने का फैसला किया है।
हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया था कि www.saralharyana.gov.in पर आवेदन देने के तीस मिनट के अंदर मूवमेंट पास जारी कर दिया जाएगा। उस ई-पास को मोबाइल पर दिखाना ही काफी होगा, उसके लिए प्रिंट लेना जरुरी नहीं होगा। ये मूवमेंट पास एक हफ्ते के लिए जारी किया जाएगा। उसके बाद कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा था कि आप भी यूपी में रहनेवाले वकीलों के लिए ऐसी ही योजना लेकर आइए।

याचिका दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दायर किया था

याचिका दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दायर किया था। याचिका में मांग की गई थी कि दिल्ली के बाहर रहनेवाले वकीलों को दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति देने के लिए दिशानिर्देश जारी करें। याचिका में कहा गया था कि दिल्ली में प्रैक्टिस करनेवाले बड़ी संख्या में वकील नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव इत्यादि शहरों में रहते हैं।याचिका में कहा था कि लॉकडाउन के दौरान वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के लिए वकीलों को कानून की पुस्तकों की जरुरत होती है जो उनके आवास पर उपलब्ध नहीं होते हैं। वकीलों को उनके केसों से संबंधित फाईल्स और रिकार्ड इत्यादि उनके दफ्तरों में ही हैं। याचिका में कहा गया था कि दिल्ली पुलिस के कई लोग जो दिल्ली से बाहर रहते हैं उन्हें दिल्ली में प्रवेश करने की सुविधा दी गई है।

याचिका में कही गई थी ये बात

याचिका में कहा गया था कि लोगों को न्याय दिलाने के लिए ये जरुरी है कि दिल्ली के बाहर रहनेवाले वकीलों को दिल्ली में आने और जाने की अनुमति मिले। याचिका में कहा गया था कि दिल्ली पुलिस वकीलों से बार काउंसिल या बार एसोसिएशन का पहचान पत्र मांगकर उन्हें प्रवेश करने की अमुमति दे। याचिका में कहा गया था कि दिल्ली पुलिस को ये निर्देश दिया जाए कि वे यूपी और हरियाणा पुलिस से इस मसले पर बात करें और तत्परता दिखाए।

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तबलीगी जमात से जुड़े 2200 विदेशियों की भारत यात्रा पर 10 साल का बैन

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज के तबलीगी जमात में शामिल होने वाले 2200 विदेशी नागरिकों को काली सूची में डाल दिया है। साथ ही इनके अगले दस वर्षों तक भारत आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस और अन्य राज्यों के पुलिस प्रमुखों को विदेशी कानून और आपदा प्रबंधन कानून के तहत इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को कहा था।

राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में मार्च में तबलीगी जमात ने एक बड़े धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जो बाद में देश में कोरोना वायरस का एक केंद्र बनकर सामने आया। इसमें भाग लेने वाले कुछ लोग बाद में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए और उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में अपने गृह नगरों की यात्रा की थी।

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ऑस्ट्रेलिया-भारत साइबर और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी की नई साझेदारी पर सहमत

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नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने साइबर मामलों और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आपसी सहयोग की एक नई व्यवस्था की शुरुआत पर सहमति जताई है जिसके इनसे जुड़े मुद्दों पर द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत ऑस्ट्रेलिया और भारत एक खुले, मुक्त और सुरक्षित इंटरनेट को बढ़ावा देने और उसे संरक्षित करने, डिजिटल व्यापार को बढ़ाने, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के अवसरों का दोहन करने और साइबर सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए मिलकर काम करेंगे।

ऑस्ट्रेलिया-भारत के नेताओं के बीच वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से हुए शिखर सम्मेलन में गुरुवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और उनकी समकक्ष मारिज पायने ने ऑस्ट्रेलिया-भारत फ्रेमवर्क व्यवस्था पर साइबर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज सहयोग पर हुए समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग और रोबोटिक्स जैसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां लोगों, व्यवसायों और व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं। इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों द्वारा संचालित किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे सुरक्षा या समृद्धि के लिए जोखिम पेश नहीं करें।

व्यवस्था के तहत ऑस्ट्रेलिया-भारत साइबर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप में चार साल के दौरान 1.27 करोड़ डॉलर खर्च करेंगे। यह साझेदारी भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई व्यवसायों और शोधकर्ताओं के लिए एक अनुसंधान और विकास निधि बनाएगी और अन्य देशों को अपने साइबर व्यवस्था में सुधार करने के लिए सहयोग करेगी। साथ में, ये उपाय एक वैश्विक प्रौद्योगिकी वातावरण को आकार देने में मदद करेंगे जो खुले, मुक्त, नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को पूरा करते हैं।

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लॉकडाउन में अपनी नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाता रहा पिता, ऐसे हुआ खुलासा

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नयी दिल्ली। तमिलनाडु में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली वारदात सामने आई है। जहां एक पिता लॉकडाउन के दौरान अपनी नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाता रहा। इसका खुलासा तब हुआ जब लड़की की अचानक तबियत खराब हुई और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डाक्टर को जांच के दौरान उसके प्रेग्नेंट होना का पता चला। फिलहाल पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

शर्मसार कर देने वाला मामला माइलादुत्रयी के नागपट्टिनम का है। जहां पर एक कलयुगी पिता अपनी 14 साल की नाबालिग बेटी को लॉकडाउन के दौरान अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। लड़की के प्रेग्‍नेंट होने के बाद इस बात का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की शिकायत उसकी पत्नी ने ही पुलिस से की थी।

ऐसा खुला रेप का मामला

मामले का खुलासा तब हुआ जब अचानक लड़की की तबीयत खराब हो गई। फिर वो अपनी मां के साथ अस्पताल गई। डॉक्टर ने जांच के दौरान बताया कि लड़की प्रेग्‍नेंट है।

पुलिस ने पाॅक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया

इसके बाद लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही पाॅक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

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