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दिल्ली का जीबी रोड, जिस सड़क का अंत नहीं…, पैसै अच्छे नहीं मिले तो बदल देते हैं कोठे, जानें खौफनाक सच

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रीतू तोमर

नई दिल्ली । दिल्ली की एक सड़क है, जिसका नाम सुनते ही लोगों की भौंहें तन जाती हैं और वे दबी जुबान में फुसफुसाना शुरू कर देते हैं। स्कूल में जब मैंने पहली बार इसके बारे में सुना था, तो कौतूहल था कि आखिर कैसी होगी यह सड़क? फिल्मों में अक्सर देखे गए कोठे याद आने लगते थे। याद आती थी दिल्ली, सेक्स वर्कर्स, कोठे, मालकिन, जीबी रोड, जिस्मफरोशी, अवैध सेक्स धंधा, दिल्ली का जीबी रोडमर्दो को लुभाने वाली सेक्स वर्कर्स, जिस्म की मंडी चलाने वाली कोठे की मालकिन और न जाने क्या-क्या। यही कौतूहल इतने सालों बाद मुझे जी.बी. रोड खींच लाया। बीते रविवार सुबह आठ बजे जब मैं जी.बी.रोड पहुंची, तो यह सड़क दिल्ली की अन्य सड़कों की तरह आम ही लगी। सड़क के दोनों ओर दुकानों के शटर लगे हुए थे। इन दुकानों के बीच से ही सीढ़ी ऊपर की ओर जाती हैं और सीढ़ियों की दीवारों पर लिखे नंबर कोठे की पहचान कराते हैं। कुछ लोग सड़कों पर ही चहलकदमी कर रहे हैं और हमें हैरानी भरी नजरों से घूर रहे हैं। हमने तय किया कि कोठा नंबर 60 में चला जाए।

एनजीओ में काम करने वाले अपने एक मित्र के साथ फटाफट सीढ़ियां चढ़ते हुए मैं ऊपर पहुंची, चारों तरफ सन्नाटा था। शायद सब सो रहे थे, आवाज दी तो पता चला, सब सो ही रहे हैं कि तभी अचरज भरी नजरों से हमें घूरता एक शख्स बाहर निकला। बड़े मान-मनौव्वल के बाद बताने को तैयार हुआ कि वह राजू (बदला हुआ नाम) है, जो बीते नौ सालों से यहां रह रहा है और लड़कियों (सेक्स वर्कर्स) का रेट तय करता है। पहचान उजागर न करने की शर्त के साथ राजू ने एक सेक्स वर्कर सुष्मिता (बदला हुआ नाम) से हमारी मुलाकात कराई, जिसे जगाकर उठाया गया था। मैं सुष्मिता से अकेले में बात करना चाहती थी, लेकिन राजू को शायद डर था कि कहीं वह कुछ ऐसा बता न दे, जो उसे बताने से मना किया गया है।

नौकरी का झांसा देकर सुष्मिता को बेच दिया

सुष्मिता की उम्र 23 साल है और उसे तीन साल पहले नौकरी का झांसा देकर पश्चिम बंगाल से दिल्ली लाकर यहां बेच दिया गया था। सुष्मिता ठीक से हिंदी नहीं बोल पाती, वह कहती है, मैं पश्चिम बंगाल से हूं, मेरा परिवार बहुत गरीब है। एक पड़ोसी का हमारे घर आना-जाना था। उसने कहा, दिल्ली चलो। वहां बहुत नौकरियां हैं तो उसके साथ दिल्ली आ गई। एक दिन तो मुझे किसी कमरे में रखा और अगले दिन यहां ले आया। यह पूछने पर कि क्या वह अपने घर लौटना नहीं चाहती है? काफी देर चुप रहकर वह कहती है, नहीं। घर नहीं जा सकती। बहुत मजबूरियां हैं। यहां खाने को मिलता है, कुछ पैसे भी मिल जाते हैं, जो छिपाकर रखने पड़ते हैं। सुष्मिता बीच में ही कहती है, किसी को बताना मत..। इससे आगे कुछ पूछने की हिम्मत की नहीं हुई। सुष्मिता है तो 23 की, लेकिन उसका शरीर देखकर लगता है कि जैसे 15 या 16 की होगी, दुबली-पतली कुपोषित लगती है।

इमारत की पहली और दूसरी मंजिल पर जिस्मफरोशी का धंधा चलता है

इमारत की पहली और दूसरी मंजिल पर जिस्मफरोशी का धंधा चलता है। इच्छी हुई कि इन कमरों के अंदर देखा जाए कि यहां कैसे रहते हैं? अंदर घुसी की एक अजीब सी गंध ने नाक ढकने को मजबूर कर दिया। इतने छोटे और नमीयुक्त कमरे हैं, सोचती रही कि कोई यहां कैसे रह सकता है। राजू बताता है कि एक कोठे में 13 से 14 सेक्स वर्कर हैं और सभी अपनी मर्जी से धंधा करती हैं लेकिन गीता (बदला हुआ नाम) की बात सुनकर लगा कि ये मर्जी में नहीं मजबूरी में धंधा करती हैं। गीता कहती है, जैसे आप नौकरी करके पैसे कमाती हो। वैसे ही ये हमारी नौकरी है। आप बताइए, हमारी क्या समाज में इज्जत है, कौन हमें नौकरी देगा। जिस्म बेचकर ही हम अपना घर चला रहे हैं। बेटी को पढ़ा रही हूं, ये छोड़ दूंगी तो बेटी का क्या होगा।

अच्छे पैसे नहीं मिलने पर बदलना पड़ता है कोठा

गीता कहती है कि वो एक साल में तीन कोठे बदल चुकी है। वजह पूछने पर कहती है, पैसे अच्छे नहीं मिलेंगे तो कोठा तो बदलना पड़ेगा ना। गीता की ही दोस्त रेशमा (बदला हुआ नाम) कहती है, हम जैसे हैं, खुश हैं। सरकार हमारे लिए क्या कर रही है। हमारे पास ना राशन कार्ड है, ना वोटर कार्ड ना आधार। हमारे पास कोई वोट मांगेन भी नहीं आता। सरकार ने हमारे लिए क्या किया। कुछ नहीं। जेहन में ढेरों सवाल लेकर एक और कोठे पर गई, जहां 15 से लेकर 19 साल की कई सेक्स वर्कर मिली, जो शायद रातभर की थकान के बाद देर सुबह तक सो रही हैं।

जी.बी रोड का पूरा नाम गारस्टिन बास्टियन रोड

जी.बी रोड का पूरा नाम गारस्टिन बास्टियन रोड है, जहां 100 साल पुरानी इमारतें भी हैं। जगह-जगह दलालों के झांसे में नहीं आने और जेबकतरों और गुंडों से सावधान रहने की चेतावनी लिखी हुई है। इसके बारे में राजू कहते हैं, रात आठ बजे के बाद यहां का माहौल बदल जाता है। कोठे पर आने वालों की संख्या बढ़नी शुरू हो जाती है। अकेले आने वाले शख्स को जेबकतरे लूट लेते हैं, चाकूबाजी की भी कई वारदातें हुई हैं। यहां आकर लगता है कि एक शहर के अंदर कोई और शहर है। जिस्मफरोशी के लिए यहां लाई गई या यहां खुद अपनी मर्जी से पहुंचीं औरतों की जिंदगी दोजख से कम कतई नहीं है। अपने साथ कई सवालों के जवाब लिए बिना वापस जा रही हूं, इस उम्मीद में कि जल्द लौटकर जवाब बटोर लूंगी। https://www.kanvkanv.com

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मध्य प्रदेश : कमलनाथ ने ली सीएम पद की शपथ, कुर्सी संभालते ही लिया बड़ा फैसला

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भोपाल। जंबूरी मैदान में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में कमलनाथ ने सोमवार को मध्य प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। कमलनाथ को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मल्लिकार्जुन खडग़े, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कांग्रेस व विपक्ष के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। इस समारोह में निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा के नेता भी मौजूद रहे।

किसानों का कर्ज किया माफ

शपथ ग्रहण के फौरन बाद कमलनाथ भोपाल में नए बने मंत्रालय एनेक्सी के उद्घाटन के लिए पहुंचे और इसके फौरन बाद सीएम आफिस पहुंच गए। सीएम ऑफिस का जायज़ा लेने के बाद कमलनाथ ने सीएम का पदभार ग्रहण किया और कुर्सी पर बैठते ही किसानों के कर्ज माफी से जुड़ी फ़ाइल पर दस्तखत कर दिये।

इस आदेश पर दस्तखत करते ही मध्यप्रदेश के किसानों का 2 लाख तक का कर्जा माफ हो गया है। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा के हस्ताक्षर से सोमवार को जारी आदेश में कहा गया है कि ‘राज्य में स्थित राष्ट्रीयकृत तथा सहकारी बैंकों में अल्पकालीन फसल ऋण के रूप में शासन द्वारा पात्र किसानों के दो लाख रुपये की सीमा तक का 31 मार्च, 2018 की स्थिति में बकाया फसल ऋण को माफ किया जाता है।

बैंकों को दर्द क्यों

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसानों की कर्जमाफी का फैसला लिए जाने के साथ बैंकों की नीति पर सवाल खड़े किए हैं, साथ ही कहा है कि बैंक उद्योगपतियों का तो 40 से 50 प्रतिशत तक कर्ज माफ कर देते हैं, मगर किसानों का कर्ज माफ करने में पेट में दर्द होने लगता है।

मेरे खिलाफ सिख दंगे में कोई केस नहीं

इस दौरान मीडिया से बात करते हुए कमलनाथ ने 1984 के सिख विरोधी दंगे पर कहा, ‘मैंने 1991 में शपथ ली और इसके बाद कई बार, किसी ने कुछ नहीं कहा। मेरे खिलाफ कोई केस, एफआईआर और चार्जशीट नहीं है। आज वे इस मामले को उठा रहे हैं। आप इसके पीछे की राजनीति समझ सकते हैं। https://www.kanvkanv.com

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गहलोत फिर बने राजस्थान के सीएम, पायलट ने भी ली शपथ, ये दिग्गज नेता आए नजर

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नयी दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने सोमवार को राजस्थान के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वहीं, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।राज्यपाल कल्याण सिंह ने उन्हें शपथ दिलाई। इस दौरान वह सचिन पायलट अपने पिता और दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट के चिर-परिचित अंदाज में लाल पगड़ी पहने नजर आए। बता दें कि इसस पहले गहलोत 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और 2008 में दूसरी बार मुख्यमंत्री का पदभार संभाला।

राहुल गांधी की अगवानी करने पहुंचे अशोक गहलोत और सचिन पायलट

राहुल गांधी ने जताया राजस्थानवासियों का आभार

कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेशवासियों का आभार जताया है। राहुल गांधी ने ट्वीटर पर लिखा है, ‘ कांग्रेस पार्टी पर विश्वास करने के लिए राजस्थान वासियों का हृदय से आभार। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं को उनके संघर्ष के सफल होने पर हार्दिक बधाई। राजस्थान की सेवा करना कांग्रेस पार्टी के लिए गौरव की बात है। हम अपनी ज़िम्मेदारी पूरी तरह निभाएंगे।

बस में सवार होकर शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे नेता 

वसुंधरा भी पहुंची

अशोक गहलोत और सचिन पायलट के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी पहुंची थी। इसके बाद जब गहलोत और पायलट मंच पर पहुंचे तो उन्होंने वसुंधरा से हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया। सचिन पायलट ने शीष झुकाकर पूर्व मुख्यमंत्री राजे का आशीर्वाद लिया।

मंच पर विपक्षी एकजुटता

अशोक गहलोत के शपथ ग्रहण समारोह में 2019 आम चुनाव के मद्देनजर विपक्षी एकजुटता की तस्वीर भी नजर आई। इस शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के अलावा तेलुगू देसम पार्टी (TDP) के नेता एन चंद्रबाबू नायडू, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, DMK नेता एमके स्टालिन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एवं जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी, RJD नेता तेजस्वी यादव, नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला और तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी शामिल हुए। इसके अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, भूपेंद्र हुड्डा, सिद्धरमैया, आनंद शर्मा, तरुण गोगोई, नवजोत सिंह सिद्धू, सहित कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेतागण भी शपथ ग्रहण कार्यक्रम में पहुंचे। https://www.kanvkanv.com

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1984 के सिख विरोधी दंगे में सज्जन कुमार को उम्रकैद, ये कांग्रेसी नेता भी लपेटे में

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नई दिल्ली । दिल्ली हाई कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में सुनवाई करते हुए सोमवार को कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी करार दिया और उन्हें आजीवन उम्र कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है साथ ही 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 34 साल के बाद इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सोमवार को निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सज्जन कुमार को दंगे के लिए दोषी माना और उम्रकैद की सजा दे दी।

इससे पहले 2013 में निचली अदालत ने सज्‍जन कुमार को बरी कर दिया था, जबकि 5 अन्‍य को दोषी करार दिया था। इसके बाद निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई। जिस पर अब कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी करार दिया है। हाईकोर्ट ने इससे पहले 29 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इनको भी मिली सजा

जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की बेंच ने सज्जन कुमार के अलावा कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल और पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं, किशन खोखर और पूर्व विधायक महेंदर यादव को 10 साल जेल की सजा हुई है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहाः

सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि “1947 की गर्मियों में विभाजन के दौरान बहुत सारे लोगों का कत्लेआम किया गया था। उसके ठीक 37 साल बाद दिल्ली फिर वैसी ही त्रासदी का गवाह बनी। आरोपी को राजनीतिक लाभ मिला और वह ट्रायल से बचता रहा।
अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि यह एक असाधारण केस था जिसमें सज्जन कुमार के खिलाफ सामान्य परिस्थितियों में कार्यवाही करना बहुत मुश्किल था। इसका कारण ये है कि बड़े पैमाने पर सज्जन कुमार के खिलाफ चल रहे मामलों को रिकॉर्ड में न लेकर इन्हें दबाए जाने का प्रयास किया जाता रहा।

अदालत ने आगे कहा कि, जो केस रजिस्टर भी थे उनकी जांच ठीक से नहीं हुई और जिन मामलों में जांच आगे भी बढ़ती तो उन्हें भी किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचने दिया गया। यहां तक कि बचाव पक्ष भी इस बात से इंकार नहीं करेगा कि जहां तक एफआईआर की बात है क्लोजर रिपोर्ट तैयार कर ली गई थी।
तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या के बाद अविश्वसनीय रूप से 2700 सिखों का कत्लेआम सिर्फ दिल्ली में कर दिया गया। न्याय व्यवस्था निश्चित रूप से धराशायी हुई जिसके बाद लोगों ने कानून अपने हाथ में ले लिया। इसकी टीस आज भी महसूस की जाती है।

अदालत ने कहा कि, 1984 में 1 से 4 नवंबर तक दिल्ली और पूरे देश में सिखों का नरसंहार हुआ जो राजनीतिक अभिनेताओं द्वारा रचा गया था और कानून व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों के सहयोग से हुआ, ये अपने आप में ”मानवता के खिलाफ अपराध” है। इसके बाद अदालत ने कहा कि, सज्जन कुमार अभी से जब तक आत्मसमर्पण नहीं कर देते दिल्ली नहीं छोड़ सकते और उन्हें तुरंत सीबीआई को अपना पता और फोन नंबर देना होगा ताकि उनसे संपर्क किया जा सके।

फांसी की सजा तक लड़ाई जारी रहेगी: सिरसा

कोर्ट के फैसले पर अकाली दल के नेता मंजिदर सिंह सिरसा ने कहा है कि हम कोर्ट का धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने हमें न्याय दिया। हमारी लड़ाई जारी रहेगी जब तक सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर को फांसी की सजा नहीं दी जाती। आपको बता दें कि पिछले महीने पटियाला हाउस कोर्ट में 84 सिख दंगा मामले में गवाह चाम कौर ने सज्जन कुमार को पहचान लिया था। सज्जन कुमार की पहचान करते हुए चाम कौर ने कहा कि ये वही शख्स है जिसने भीड़ को उकसाया था।

दंगे में पिता और बेटे को खोया

कोर्ट में गवाही देने के बाद मीडिया से बात करते हुए चाम कौर ने कहा कि 1984 सिख दंगा मामले में गवाह के तौर पर मैंने सामने खड़े सज्जन कुमार की पहचान की थी। मैंने जज साहब को बोला कि इसी शख्स ने भीड़ को उकसाया था। पार्क में सज्जन कुमार ने बोला था कि हमारी मां का कत्ल सिखों ने किया, इसलिए इन लोगों को नहीं छोड़ना है और बाद में उसी भीड़ ने उकसावे में आकर मेरे बेटे और पिता का कत्ल कर दिया।

चाम कौर ने कोर्ट में सज्जन कुमार के सामने दिए बयान में कहा था कि 1 नवंबर 1984 को सुल्तानपुरी इलाके में भीड़ को सज्जन कुमार ने उकसाया था और उसके बाद भीड़ ने उसके घर को आग के हवाले कर दिया था। चाम कौर ने कोर्ट को दिए अपने बयान में आगे बताया कि उसके पिता और बेटे की हत्या भी उसी भीड़ ने की। इस मामले की जांच सीबीआई भी कर रही है।

ये कांग्रेस नेता भी लपेटे में

सज्जन कुमार के बाद दिल्ली के दूसरे बड़े नेता कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर भी आरोप लगे हैं, उन पर दिल्ली के बुलबंगश इलाके में गुरुद्वारा के सामने 3 सिखों की हत्या करने का आरोप लगा था। हालांकि सीबीआई अभी तक टाइटलर पर लगे आरोपों की पुष्टि नहीं कर सकी। ऐसे में सवाल उठता है कि सज्जन कुमार की सजा के बाद क्या जगदीश टाइटलर की मुश्किलें भी बढ़ेंगी। 2010 में इन दंगों में संलिप्‍तता को लेकर कमलनाथ का भी नाम सामने आया था।

उनका यह नाम दिल्‍ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में हुई हिंसा में सामने आया था। उनके ऊपर ये भी आरोप लगा था कि यदि वह गुरुद्वारे की रक्षा करने पहुंचे थे, तो उन्होंने वहां आग की चपेट में आए सिखों की मदद क्यों नहीं की। वहां पर उनकी मौजूदगी का जिक्र पुलिस रिकॉर्ड में भी किया गया और इन दंगों की जांच को बने नानावती आयोग के सामने एक पीड़ित ने अपने हलफनामे में भी उनका नाम लिया था।

क्या है पूरा मामला?

ये मामला 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में भड़के सिख विरोधी दंगे का है। एक नवंबर 1984 को दंगे में दिल्ली छावनी के राजनगर क्षेत्र में एक ही परिवार के पांच लोगों को मार दिया गया था। इस हत्याकांड में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार भी आरोपी थे। बता दें कि साल 1994 में दिल्ली पुलिस ने इस केस को बंद कर दिया था, लेकिन नानावटी कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 2005 में इस मामले में केस दर्ज किया गया।

मई 2013 में निचली अदालत ने इस मामलें में पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर, गिरधारी लाल और रिटायर्ड नौसेना के अधिकारी कैप्टन भागमल के अलावा 2 लोगों को दोषी करार दिया था लेकिन कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सबूतों की कमी की वजह से बरी कर दिया था। बता दें कि 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों में 3325 लोग मारे गए थे। इनमें से 2733 सिर्फ दिल्ली में मारे गए थे। जबकि बाकी हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मारे गए थे। https://www.kanvkanv.com

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