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नाटकीय ढंग से हिरासत में लिए गए कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर, आपे से बाहर हुए समर्थक

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संतोष राज पांडेय

उत्तर प्रदेश में जाने-माने कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह नाटकीय घटना तब हुई जब मंगलवार (11 सितंबर) दोपहर वह आगरा में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के वक्त पुलिस ने उन्हें तब पकड़ा, जब वह कमला नगर स्थित रेस्त्रां में कॉन्फ्रेंस शुरू करने ही वाले थे। पुलिसकर्मी इसके बाद उन्हें एक होटल ले गए, जहां उनसे पूछताछ की गई। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेजा गया। कथावाचक को पकड़ने के बाद उनके कुछ समर्थक भी आपे से बाहर हो गए थे। आनन-फानन में पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। पुलिस का उनपर आरोप था कि  आगरा में उनकी एंट्री बैन होने के बाद भी वह कार्यक्रम में हिस्सा लेने आ आए थे। हालांकि, देर शाम निजी मुचलके पर उन्हें पुलिस लाइंस से छोड़ दिया गया। आपको बता दें कि कथावाचक एससी-एसटी एक्ट में हुए संशोधनों के खिलाफ सवर्णों के आंदोलन की अगुवाई भी कर चुके हैं। कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में वह इस मसले पर विरोध करते नजर आए थे।
पूरे घटनाक्रम के बारे में जो जानकारी मिली उसके अनुसार  देवकीनंदन आगरा में विरोध प्रदर्शन की जिद कर रहे थे. जबकि वहां जिला प्रशासन ने धारा 144 लगा रखी है. आपको बता दे कि देवकीनंदन ठाकुर एससी एसटी एक्ट संशोधन के विरोध को लेकर आजकल काफी चर्चा में हैं. इसी बात का विरोध करने के लिए वो आगरा में प्रदर्शन करना चाहते थे. लेकिन पुलिस ने धारा 144 का हवाला देकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. हालांकि बाद में उन्हें निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया.

अखंड इंडिया मिशन के नाम से बनाया दल

रिहाई के बाद ठाकुर देवकीनन्दन मथुरा के लिये रवाना हो गये. प्रेस कांफ्रेंस में देवकीनंदन ने बताया कि उनको बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. सोशल मीडिया के माध्यम से उनको जान से मारने की भी धमकी दी गई है. ये सब एससी/एसटी एक्ट कानून का विरोध करने पर किया जा रहा है. अगर सरकार इस कानून में बदलाव नहीं करती है तो हम उग्र आन्दोलन करेंगे. सीओ हरीपर्वत अभिषेक सिंह का कहना था कि देवकीनन्दन आगरा के खन्दौली में मीटिंग करने जा रहे थे. उनको मीटिंग की अनुमति नहीं थी. लेकिन वे एक होटल में प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे. उनके पास उसकी भी अनुमति नहीं थी. देवकीनन्दन को धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले जाया गया था. देवकीनंदन एक कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु हैं. SC-ST एक्ट के खिलाफ मुहिम चलाने के लिए ‘अखंड इंडिया मिशन’ नाम का एक दल भी बनाया गया है. इस दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष देवकीनंदन ठाकुर को बनाया गया है. एससी-एसटी एक्ट में किए गए बदलाव को समाज बांटने वाला बताते हुए भागवताचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार अगले दो महीने में इस एक्ट को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार रूप में बदल दे. यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम सब मिलकर देश को जातिगत राजनीति वाले दलों से स्थाई समाधान देंगे.

खूब चर्चा में रहे विवादित बयान

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर हाल ही में अपने एक विवादित बयान को लेकर खूब चर्चा में रहे. उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा था- ‘दो महीने का समय हमने लिया है, अगर हमें हल मिल गया तो हम कुछ नहीं करेंगे. अगर नहीं मिला तो वो करेंगे जो भारत के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं.’ देवकीनंदन ठाकुर का जन्म 12 सितंबर 1978 को उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुआ था. वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा के ओहावा गांव के एक ब्राह्मण परिवार से हैं. उनकी मां श्रीमद्भागवतगीता महापुराण में काफी विश्वास रखती थीं. उनके अलावा उनके 4 भाई और दो बहनें भी हैं. 6 साल की उम्र में वह घर छोड़कर वृंदावन पहुंचे और ब्रज के रासलीला संस्थान में हिस्सा लिया. यहां उन्होंने भगवान कृष्ण और भगवान राम की भूमिकाएं निभाईं. श्रीकृष्ण (ठाकुरजी) की भूमिका निभाने की वजह से घर में उन्हें ‘ठाकुरजी’ कहा जाने लगा. कहा जाता है कि 13 साल की उम्र में उन्होंने श्रीमद्भागवतपुराण कंठस्थ कर लिया. उन्होंने निंबार्क संप्रदाय के अनुयायी के रूप में गुरु-शिष्य की परंपरा के तौर पर दीक्षा ली. 18 साल की उम्र में दिल्ली के शाहदरा में श्रीराममंदिर में श्रीमदभागवत महापुराण के उपदेश लोगों को दिए. इसके बाद उन्होंने कई जगहों पर श्रीकृष्ण और राम कथा का वाचन किया और उनके फॉलोअर्स की संख्या बढ़ने लगी. बता दें कि ट्विटर पर उनके 3 लाख 27 हजार फॉलोअर्स जबकि फेसबुक पर 25 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. https://www.kanvkanv.com

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चला गया बहेड़ी को खास पहचान देने वाला नारायण दत्त तिवारी

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बहेड़ी शुगर मिल में सोशलिस्ट पार्टी का झंडा लेकर शुरू की थी सियासत

….और तब बहेड़ी ने तिवारी को प्रधानमंत्री बनते-बनते रोक दिया था!

प्रसंगवश/शुएब

बरेली। बहेड़ी को अपनी एक पहचान देने वाला रहनुमा चला गया। बहेड़ी की केसर शुगर फैक्ट्री में सोशलिस्ट पार्टी का झंडा उठाकर सियासी मैदान में बैटिंग शुरू कर दो प्रदेशों के मुख्यमंत्री बनने का रिकार्ड बनाने वाले नारायण दत्त तिवारी दुनिया छोड़ गए।
केसर शुगर फैक्ट्री में मज़दूर यूनियन के दफ्तर में मीटिंग के वक़्त दरियां बिछाने जैसा सियासी सफर का पहला पायदान उन्होंने इतनी खूबसूरती से चढ़ा कि फिर सियासत का कोई पायदान चढ़ना उनके लिए मुश्किल नहीं हुआ और वो यू पी के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्र में उद्योग मंत्री की कुर्सी तक पहुंचे और फिर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का पद संभाल कर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जो आगे टूट पायेगा , मुश्किल ही है।
दो प्रदेशों का मुख्यमंत्री तिवारी जी के अलावा अब तक कोई नहीं बना है, लेकिन बहेड़ी ने उनको एक ऐसी टीस भी दी, जो उनको उम्र भर सालती रही।1991 के लोकसभा चुनाव में बहेड़ी विधानसभा से मिली शिकस्त के चलते वो प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे।
दरअसल उस वक़्त बहेड़ी विधानसभा, नैनीताल लोकसभा का हिस्सा हुआ करती थी।तिवारी जी नैनीताल ज़िले की 4 विधानसभाओं से मिले वोटों की गिनती में अपने प्रतिद्वंद्वी बलराज पासी से आगे थे, लेकिन बहेड़ी में उनको इतनी लंबी शिकस्त मिली कि उनकी नैनीताल ज़िले की बढ़त काम नहीं आई और उनको हार का सामना करना पड़ा था।
उस चुनाव के दौरान ही राजीव गांधी की हत्या हो गई थी और फिर नरसिम्हाराव प्रधानमंत्री बने थे। ये बात उस वक़्त हर किसी की ज़बान पर थी कि अगर तिवारी जी चुनाव जीते होते तो वो ही प्रधानमंत्री होते। इस हार की टीस और प्रधानमंत्री न बन पाने की कसक तिवारी जी की ज़बान पर आई भी, और उन्होंने बहेड़ी को उसका ज़िम्मेदार बताया।

एक गहरी साज़िश हुई थी !

तिवारी को उस चुनाव में हराने के लिए कांग्रेस के अंदर भी एक बड़ी साजिश रची गई थी। इस साजिश में बीजेपी के कई कद्दावर भी साथ थे।जिस रोज़ नैनीताल लोकसभा का चुनाव हो रहा था, ठीक उसी रोज़ राजीव गांधी की बरेली में जनसभा लगाई गई थी। नैनीताल लोकसभा यानि बहेड़ी विधान सभा का छेत्र बरेली से सिर्फ 23 किलोमीटर दूर सेमिखेड़ा तक लगता है।
ऐसा नहीं होता कि किसी बड़े नेता के चुनाव छेत्र में जिस रोज़ मतदान हो उस रोज इतने पास किसी बड़े नेता की सभा लगाई जाए। उस जनसभा में जाने वाले कुछ लोग ही उस नेता के चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।और तो और उस रोज राजीव गांधी के साथ त्तिवारी जी को भी बरेली जनसभा में भेज गया। त्तिवारी जी खुद भी एक साजिश का हिस्सा मानते थे।उन्होंने कहा भी था कि अगर मैं उस रोज अपने छेत्र में होता तो कुछ वोट मेरे बढ़ते ही।

छोटी और बड़ी धोती की ‘जंग’ भी थी

पहाड़ पर त्तिवारी छोटी धोती और के सी पंत बड़ी धोती वाले थे। पंत और तिवारी के बीच हमेशा शीत युद्ध रहा। उस चुनाव में तिवारी को हराने के लिए बड़ी धोती भी पूरी तरह सक्रिय रही थी। के सी पंत की पत्नी इला पंत तो बीजेपी में शामिल भी हो गई थीं, और एमपी भी बनीं।

1980 में बहेडी से बना था रिश्ता !

यूँ तो तिवारी जी का बहेड़ी से सियासी रिश्ता 1980 में बना था जब वो लोकसभा का चुनाव जीते थे, लेकिन 1977 में उनकी बहेड़ी के विधायक रफ़ीक़ अहमद खां से ऐसी दोस्ती हुई थी कि बहेड़ी तिवारी जी का घर से हो गया था। दरअसल 1977 में जब जनता पार्टी ने कांग्रेस को देश की सत्ता से बेदखल कर दिया था, उस वक़्त बहेड़ी से कांग्रेस के टिकट पर रफ़ीक़ अहमद खान चुनाव जीते थे और उन्होंने काशीपुर से चुनाव जीते पंडित नारायण दत्त तिवारी का साथ दिया था।
रफ़ीक़ खां का उन बुरे दिनों में मिला साथ तिवारी जी ने हमेशा याद रखा और रफ़ीक़ खां के आगे किसी को उतनी अहमियत नहीं दी।1980 में एमपी बनने के बाद तिवारी जी ने बहेडी में कई नदियों पर पल बनवाए और पूरे इलाके में सड़कों का जाल बिछाया।सेमीखेड़ा की चीनी मिल और बहेडी की कताई मिल उन्होंने बनवाई।

कांग्रेस (तिवारी) बनाई तो बहेड़ी में किया नामांकन

कांग्रेस में उपेक्षा से आहत होकर तिवारी जी ने अर्जुन सिंह के साथ कांग्रेस (तिवारी) के नाम से पार्टी बनाई थी। लोकसभा चुनाव में उस बार उन्होंने बहेड़ी तहसील में नामांकन कराया था। उनकी पार्टी का निशान अनाज उड़ेलती महिला थी। तराई में उस वक़्त आतंकवाद का दौर था और इसी के चलते चुनाव आयोग ने जिला मुख्यालय के साथ साथ बहेडी में भी नामांकन कराने की व्यवस्था की थी। उस चुनाव में तिवारी जीत गए थे। उस वक़्त एमपी रहते तिवारी एक रोज़ बिजली की समस्या को लेकर बिजली सब स्टेशन पर धरना देकर बैठ गए थे।

दोबारा कांग्रेस में आये तो फिर रखा बहेड़ी का ख्याल

तिवारी जी दोबारा जब कांग्रेस में शामिल हुए तो एक बार फिर उनका जलवा क़ायम हुआ। प्रदेश में जब राष्ट्रपति शासन लगा और मोती लाल वोरा राज्यपाल बने तो उन्होंने बहेड़ी को कई तोहफे दिए। बहेड़ी का सुशीला तिवारी कन्या इंटर कॉलेज उसी वक़्त बहड़ी  को मिला था।

बहेड़ी वालों को मिलती थी खास तवज्जो!

तिवारी जी जब प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे तो लखनऊ में उनके दफ्तर में बहेड़ी वालों को खास तवज्जो मिलती थी। बहेड़ी  के तमाम नेताओं को तिवारी नाम से जानते थे। उत्तराखंड का मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने ये रिश्ते बखूबी निभाए।

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यूपी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम एनडी तिवारी का निधन, जन्मदिन के दिन ही ली अंतिम सांस

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नयी दिल्ली। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी 92 साल की उम्र में आज गुरुवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशियेलिटी अस्पताल में वेंटिलेटर पर थे। मालूम हो कि यूपी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और आंधप्रदेश के पूर्व राज्यपाल एनडी तिवारी पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती थे। एनडी के निधन से राजनीति पार्टियों में शोक की लहर दौड़ गई। आपको बता दें कि पिछले साल एक स्ट्रोक की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एनडी तिवारी का निधन उनके जन्मदिन के दिन हुआ है।

नारायण दत्त तिवारी देश के पहले ऐसे राजनीतिज्ञ थे, जिन्हें दो-दो राज्य का मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त हुआ। वह नेहरू-गांधी के दौर के उन चंद दुर्लभ नेताओं में थे, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में सक्रिय योगदान दिया। केंद्र में वित्त, विदेश, उद्योग, श्रम सरीखे अहम मंत्रालयों की कमान संभाल चुके एनडी तिवारी को जब उत्तराखंड सरीखे छोटे राज्य की कमान सौंपी गई तो उत्तराखंड की आंदोलनकारी शक्तियां असहज और स्तब्ध थी। नारायण दत्त तिवारी का जन्म 1925 में नैनीताल जिले के बलूती गांव में हुआ था।

सीएम ने जताया शोक

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एनडी तिवारी के निधन पर शोक जताया है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करता हूं. ईश्वर से उनकी दिवंगत आत्मा की शांति व परिजनों को दुःख सहने की प्रार्थना करता हूं.’

रावत ने कहा, ‘तिवारी का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है. विरोधी दल में होने के बावजूद उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर रहकर सदैव अपना स्नेह बनाए रखा. तिवारी के जाने से भारत की राजनीति में जो शून्य उभरा है, उसकी भरपाई कर पाना मुश्किल है. तिवारी देश के वित्तमंत्री, उद्योग मंत्री और विदेश मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं.’

सीएम रावत ने कहा, ‘उत्तराखंड तिवारी के योगदान को कभी नहीं भुला पाएगा. नवोदित राज्य उत्तराखंड को आर्थिक और औद्योगिक विकास की रफ़्तार से अपने पैरों पर खड़ा करने में तिवारी ने अहम भूमिका निभाई.’ https://www.kanvkanv.com

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कांग्रेस की नीतीश पर जादू की झप्पी, राजद के लगाए गए सीएम के खिलाफ पोस्टर पर हुई आगबबूला

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संतोष राज पांडेय

पटना। राजधानी में राजद का पोस्टर कांग्रेस को रास नहीं आ रहा है। पटना में एक राजद नेता ने बड़ा सा पोस्टर लगाया है जिसमे  तेजस्वी यादव को ‘भगवान श्रीराम’ के रूप में दिखाया है और बिहार के मुख्यमंत्री तथा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को रावण के रूप में। इस पोस्टर के माध्यम से 21 अक्टूबर से शुरू हो रहे ‘संविधान बचाओ यात्रा’ में शामिल होने की अपील भी की गई है।
इस पोस्टर पर जदयू और बीजेपी का बयान भले ही वक्त से नही आया पर कांग्रेस के जादुई वचन बोल पड़े। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदनमोहन झा ने कहा, “यह बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि नीतीश कुमार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं। यह सही तरीका नहीं है। हम ऐसे किसी पोस्टर को कभी स्वीकार नहीं कर सकते हैं।”
वहीं, राज्यसभा सांसद और पार्टी के राज्य अभियान समिति के अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने भी इसपर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, “तेजस्वी राम हो सकते हैं, लेकिन किसी को रावण के रूप में दिखाना सही नहीं है।” वहीं, जदयू ने राजद को याद दिलाते हुए कहा कि वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में 22 से 80 पर पहुंचाने वाला चेहरा नीतीश कुमार का ही था। पार्टी के प्रवक्ता राजीव रंजन कहते हैं, “आप राजद से क्या अपेक्षा कर सकते हैं? शायद वे 2015 के चुनाव को भूल गए जब राम (नीतीश कुमार) के चेहरे की वजह से ही राजद को 80 सीट मिले थे।

कांग्रेस के बयान पर लग रहें कयास

यह सवाल अहम हो गया है कि आखिर क्या कारण है कि राजद नेता का यह कदम गठबंधन में शामिल कांग्रेस को रास नहीं आया। कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई है। बता दें कि वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद, कांग्रेस और जदयू एक साथ महागठबंधन थी, लेकिन बाद में जदयू महागठबंधन से अलग हो एनडीए में शामिल हो गई। वहीं, कांग्रेस और राजद अभी भी एक साथ हैं। यह माना जा रहा है कि कांग्रेस नीतीश पर जादू की झप्पी लगातार दे रही है ताकि बिहार में नीतीश और कांग्रेस का एक नया गठबंधन हो। https://www.kanvkanv.com

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