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कैबिनेट : एथेनॉल की कीमतों में इजाफा, किसानों को होगा लाभ

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  • एथेनॉल की कीमतों में 5 से 8 प्रतिशत का इजाफा
  • नई कीमतों पर आपूर्ति वर्ष 2020-21 के लिए तेल विपणन कंपनियां करेंगी खरीद
  • पिछले सालों में साढ़े पांच गुना बढ़ी एथेनॉल की खरीद

नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के तहत तेल विपणन कंपनियों के द्वारा एथेनॉल खरीद के तंत्र बनाया है। साथ ही वर्ष 2021 के लिए इसकी नई कीमतें तय की हैं। एथेनॉल की कीमतों में पांच से आठ प्रतिशत का इजाफा किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज उक्त आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि शुगर से बनने वाले एथेनॉल की कीमत में सवा तीन रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 62.62 रुपये प्रति लीटर तय किया है। बी हैवी मोलाइसिस से बनने वाले एथेनॉल में 3.35 रुपये और सी हैवी मोलाइसिस से बनने वाले एथेनॉल की कीमतों में 2 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इस क्रमश: 57.61 रुपये प्रति लीटर और 45.69 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है।

यह वह कीमत है जिस पर तेल विपणन कंपनियां एथेनॉल की खरीद करती है। वर्तमान में पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल अनिवार्य रूप से मिलाया जाता है। तेल विपणन कंपनियों को खरीद के साथ इस पर लगने वाले कर और ट्रांसपोर्ट के खर्च को भी उठाना होता है।

जावड़ेकर ने कहा कि पिछले सालों में एथेनॉल खरीद में साढ़े पांच गुना का इजाफा हुआ है। इसकी खरीद 38 करोड़ प्रति लीटर से बढ़ाकर 195 करोड़ लीटर हो गई है। इससे किसानों को उनकी फसल की सही कीमत, मीलों को समय पर पूरा दाम और किसानों को उनकी मीलों पर बनती बकाया राशि समय से मिल जाती है। जावड़ेकर ने कहा कि एथेनॉल को पेट्रोल में मिश्रित करना पर्यावरण अनुकूल है और यह प्रदूषण कम करता है। इसके प्रयोग से तेल आयात में कमी आती है और विदेशी धन बचता है।

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