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बिहारी शब्द सम्मान नहीं आज भी गाली है, सरकार बिहार को नहीं बना सकी आत्मनिर्भर

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संतोष राज पांडेय

अगर बिहारी शब्द गाली नही है तो सम्मान का भी सूचक नही है। नीतीश कुमार ने जब सत्ता संभाली कहा- बिहारी कहलाना गर्व होगा। समय का चक्र है चलता रहा सब कुछ बदला, सुशासन आ गया। राजनीति का चरित्र भी बिहार में बदल गया नहीं बदला तो बिहारी का मतलब। आज भी आप दिल्ली ,मुम्बई, कोलकत्ता और चेन्नई चले जाओ बिहारी शब्द का अर्थ आज भी आपको अहसास करा देगा। मेरा मतलब गुजरात से था।गुजरात भी वही निकला।

पूरे उत्तर भारतीयों के प्रति गलत धारणा

यह समझ से परे है कि कई गैर हिन्दी भाषी राज्यों में बिहारियों के प्रति इतनी नफरत का भाव क्यों घर कर गया है। भारत के संविधान ने जब किसी भी व्यक्ति को, कहीं भी बसने और रोजी−रोटी कमाने की छूट दे रखी हो तो उस पर विवाद क्यों खड़ा किया जाता है। महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के साथ अकसर ही मारपीट और उनके संपत्ति या फिर वाहनों के साथ तोड़फोड़ की खबरें आती रहती थीं, लेकिन गुजरात तो ऐसा नहीं था। गैर हिन्दी शासित राज्यों में कहीं कम तो कहीं ज्यादा तीखे तरीके से उत्तर भारतीयों को किसी न किसी बहाने से अपमानित करना, किसी एक व्यक्ति के अपराध के आधार पर पूरे उत्तर भारतीयों के प्रति गलत धारणा बना लेना, निश्चित तौर पर मानसिक रूप से दिवालियापन का शिकार और सियासी लोगों की सोच का परिणाम हैं। जैसा कि गुजरात में बलात्कार की एक घटना के बाद देखने को मिल रहा है, वहां इस समय उत्तर भारतीयों को निशाना बनाया जा रहा है। परिवार को सुरक्षित रखने और अपने आप को बचाने के लिये उत्तर प्रदेश−बिहार के लोग रोजी−रोटी छोड़कर पलायन को मजबूर हो रहे हैं तो इसके लिये उत्तर भारतीयों से अधिक वह लोग जिम्मेदार हैं जो अपने आप को इन लोगों के बराबर खड़ा नहीं कर पाते हैं। मेहनत से डरते हैं। महाराष्ट्र हो या फिर गुजरात दोनों के विकास में उत्तर भारतीयों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। उत्तर भारतीयों को कभी भाषा के नाम पर तो कभी अपराध के लिये जिम्मेदार ठहराकर प्रताड़ित करना सही नहीं है। कौन भूल सकता है कि राष्ट्रीय भाषा हिन्दी के खिलाफ तमिलनाडु के दिग्गज नेता (अब दिवंगत) करूणानिधि ने लम्बा आंदोलन चलाया था।

सियासी निहितार्थ भी कम नहीं

प्रथम दृष्टया तो यह जरूर लगता है कि एक बिहारी का नाम बलात्कार की एक घटना में सामने आने के बाद पूरा विवाद खड़ा हुआ है, लेकिन इसके पीछे के सियासी निहितार्थ भी कम नहीं हैं। असल में देश के विकास और हिन्दुस्तान की राजनीति में उत्तर भारतीयों के दबदबे को कई गैर हिन्दी राज्यों के नेता बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। इस संदर्भ में करूणानिधि का वो बयान याद किया जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर मैं किसी हिन्दी भाषी राज्य का नेता होता तो कब का प्रधानमंत्री बन चुका होता। शिव सेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे को ही ले लीजिए, जो अपने आप को हिन्दू हृदय सम्राट कहलाने में गौरवांवित होते थे, लेकिन जब उत्तर भारत से जाकर मुम्बई में बसे लोगों की बात होती तो वह विरोध का कोई रास्ता नहीं छोड़ते थे, तब उनकी सोच मराठियों तक सीमित हो जाती थी।

प्रतिक्रिया और सियासत होना स्वाभाविक

अतीत में कई गैर हिन्दी राज्यों के कई बड़े नेता अपनी सियासत को बुलंदियों पर ले जाने के लिये उत्तर भारत में हाथ−पैर मारते देखे जा चुके हैं। बीजेपी के दिग्गज नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र सिंह मोदी की सियासत भी तभी परवान चढ़ पाई जब उन्होंने गुजरात से निकल कर उत्तर भारत के जिले वाराणसी की तरफ रूख किया। वाराणसी से चुनाव जीतने की वजह से ही मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच सके थे। इसी प्रकार चाहे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हों या फिर मराठा क्षत्रप शरद पवार की राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी अथवा ऑल इंडिया मजलिस−ए−इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सांसद असदुद्दीन ओवैसी, तमाम दलों के नेता उत्तर भारत में अपनी जड़ें मजबूत करने को उतावले भी रहते हैं और जब मौका पड़ता है तो यहां के लोगों का सियासी विरोध का कोई मौका भी नहीं छोड़ते हैं। इस पर उत्तर भारत से भी प्रतिक्रिया और सियासत होना स्वाभाविक ही रहता है।

विधायक अल्पेश ठाकोर को पूरे घटनाक्रम के लिए बता दिया जिम्मेदार

तमाम दल और नेता ऐसे मामलों से सियासी फायदा भी लेना चाहते हैं और विरोध करते भी दिख जाते हैं। इसीलिये गुजरात से बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को धमकी देकर भगाए जाने के मामले पर भी सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल युनाइटेट (जेडीयू) ने इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है तो वहीं, कांग्रेस ने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांग लिया। इस बीच, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने कहा जरूर है कि इस मामले में पुलिस कार्रवाई कर रही है, लेकिन वह भी फूंक−फूंक कर कदम रख रहे हैं कि कहीं गुजराती नाराज न हो जायें। बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) ने तो कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी को खुला पत्र लिखकर विधायक अल्पेश ठाकोर को इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार बता दिया। जेडीयू ने पूछा कि कांग्रेसियों को बिहार के लोगों से इतनी नफरत क्यों है ? जबकि बीजेपी कह रही है कि गुजरात हिंसा के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। यह कांग्रेस की सोची−समझी साजिश है। कांग्रेस के लोग पूरे देश को खंडित करने में जुटे हैं। बिहार के भाजपा नेता और मोदी सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह का कहना थ कि सब कुछ अल्पेश की सेना कर रही है। यह वही अल्पेश हैं जो उत्तर प्रदेश में अपनी जड़ें जमाने के लिये पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी सक्रिय भीम सेना प्रमुख चन्द्रशेखर ‘रावण’ की चौखट पर कई बार नाक रगड़ते देखे जा चुके हैं। विवाद बढ़ने पर अल्पेश ठाकोर कह रहे हैं कि उनके लोग हिंसा को बढ़ने से रोक रहे हैं और पिछले 1−2 दिन में काफी शांति आई है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘हम नहीं चाहते कि राज्य में विपदा खड़ी हो और हम ऐसी किसी भी हरकत को बढ़ावा नहीं देंगे।’ हार्दिक पटेल ने घटना की निंदा करते हुए मांग की है कि अपराधियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

पीएम को भी वाराणसी जाना है

कांग्रेस इस मसले पर भी सियासत करने से बाज नहीं आ रही है। कांग्रेस के सहयोग से विधायक बने अल्पेश ने बीते साल 23 अक्टूबर 2017 को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। एक तरफ अल्पेश ठाकोर पर उत्तर भारतीयों के साथ मारपीट करने का आरोप लग रहा है तो दूसरी तफर कांग्रेस के नेता उलटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांग रहे हैं। दस जनपथ के बेहद करीबी और गुजरात से आने वाले कांग्रेस के नेता अहमद पटेल अपना पक्ष रखने की बजाये कह रहे हैं कि गुजरात सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। इसी प्रकार यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर ने गुजरात और केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के नेता संजय निरुपम जो हर समय मोदी विरोध पर उतारू रहते हैं, यहां भी सियासत करने से नहीं चूके। उनका कहना था, ‘पीएम के गृह राज्य (गुजरात) में अगर यूपी, बिहार और एमपी के लोगों को मार−मार कर भगाया जा रहा है तो ये याद रखना चाहिए कि एक दिन पीएम को भी वाराणसी जाना है। वाराणसी के लोगों ने उन्हें गले लगाया और पीएम बनाया था।’

पूरे देश के लोगों के खून−पसीने का नतीजा

कांग्रेस पर उंगली बीजेपी ही नहीं उठा रही है जेडीयू भी कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर रही है। जेडीयू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि एक ओर आप अपने विधायक अल्पेश ठाकोर को बिहार कांग्रेस का सह−प्रभारी निुयक्त करते हैं और दूसरी तरफ उनकी सेना ‘गुजरात क्षत्रिय ठाकोर सेना’ बिहार के लोगों को गुजरात से निकाल रही है। उन्होंने पत्र में कहा है, आज गुजरात में जो विकास दिख रहा है, वह बिहारी ही नहीं पूरे देश के लोगों के खून−पसीने का नतीजा है। गुजरात ही क्यों देश का हर क्षेत्र एक−दूसरे पर आश्रित है। पत्र में जेडीयू ने कांग्रेस के बहाने आरजेडी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आज कांग्रेस को एक ऐसे दल से गठबंधन करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिसके अध्यक्ष सजायाफ्ता हैं। इतना ही नहीं, उनकी विरासत संभालने वाले उनके बेटे भी भ्रष्टाचार के आरोपी हैं।
जेडीयू ने कांग्रेस को निशाना बनाते हुए कहा कि विधायक अल्पेश लगातार उत्तर भारतीयों के खिलाफ जहर उगल रहे हैं, रैलियां कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कांग्रेस अनुशासनात्मक कार्रवाई तक नहीं कर पा रही है। जेडीयू नेता ने पत्र में लिखा है, ‘ठाकुर जैसे संकीर्ण मानसिकता वाले व्यक्ति को बिहार में कांग्रेस पार्टी का सह−प्रभारी बनाकर बिहारियों के प्रति घृणा का अहसास कराया गया है।’

जो चुनावों में जीत नहीं पाए हैं, वह हिंसा फैलाने का काम कर रहे

बता दें कि गुजरात में 14 माह की बच्ची से रेप की घटना के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जिस कारण उत्तर भारत के लोग गुजरात से पलायन कर रहे हैं। यूपी और बिहार से दो जून की रोटी कमाने गुजरात गए 50,000 से ज्यादा लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा है। हालांकि प्रशासन किसी तरह के पलायन से इंकार कर रहा है। उत्तर भारतीयों पर हमलों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की नाराजगी सामने आ रही है तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस संबंध में सीधे गुजरात सीएम विजय रूपाणी से बात की। वहीं, गुजरात बीजेपी के नेताओं का कहना था कुछ लोग जो चुनावों में जीत नहीं पाए हैं, वह हिंसा फैलाने का काम कर रहे हैं।
गुजरात के पुलिस महानिदेशक शिवानंद झा ने पत्रकारों को बताया कि बलात्कार की घटना के बाद एक विशेष समुदाय के लोग गुजरात के बाहर के लोगों को टारगेट कर रहे हैं। बता दें कि पीड़ित परिवार गुजरात के ठाकोर समुदाय से ताल्लुक रखता है। यही वजह है कि हिंसा में ठाकोर समुदाय का नाम सामने आया है। हिंसा फैलाने के आरोप में तीन सौ लोगों से अधिक गिरफ्तार हो चुके हैं। कहानी कुछ भी हो, सबकी राजनीति रंग लाई केवल मुंह बना या कुछ खोना पड़ा तो वह बिहारियों को ही।  आज भी वोट की राजनीति करने वाली बिहार की राजनीतिक पार्टिया मजबूत और धनवान तो हो गयी पर बिहार को आत्म निर्भर नहीं बना सकी। https://www.kanvkanv.com
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पूर्व MLA के दो पूर्व एमएलसी भाईयों के घर NIA का छापा, एके-47 बरामद, उग्रवादियों से रिश्ते होने का शक

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पटना। एनआईए की टीम ने गुरुवार की सुबह लोजपा नेता एवं पूर्व विधायक सुनील पांडेय के दो भाई पूर्व एमएलसी हुलास पांडेय और संतोष पांडेय के घर पर छापामार कर एक एके-47 हथियार बरामद किया है। सूत्रों का दावा है कि एनआईए की टीम को हुलास पांडेय के पटना के पटेल नगर स्थित घर से यह हथियार मिले हैं। हथियार को एनआईए की टीम अपने साथ ले गई है। लेकिन, पुलिस इसपर कुछ भी बोलने से इंकार कर रही है। इधर संतोष पांडेय के रिश्तेदारों का कहना है कि टीम अपने साथ हुलास पांडेय की लाइसेंसी राइफल लेकर गई है।

उग्रवादी संगठनों से रिश्ते होने का शक

एनआईए की टीम ने गुरुवार को पटना,आरा और बक्सर में एक साथ छापेमारी की ।  बक्सर के एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने छापेमारी की पुष्टि की है। सूत्रों का कहना है कि एनआईए टीम को सूचना मिली थी कि सुनील पांडेय के भाइयों के रिश्ते उग्रवादी संगठनों से हैं। संगठन को इनकी ओर से अत्याधुनिक हथियार दिए जा रहे हैं। कुछ वांटेड उग्रवादी इनके घर पर ही पनाह भी लेते हैं। इस सूचना के बाद एनआईए की टीम ने आज सुनील पांडेय के दोनों भाइयों हुलास पांडेय, संतोष पांडेय और उनके रिश्तेदारों के घर पर एक साथ छापेमारी की। पांच घंटे तक चली इस छापेमारी में एनआईए टीम को एक हथियार मिला है। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं।

बाहुबलियों के तौर पर होती है गिनती

सूत्रों का कहना है कि मुंगेर में कुछ माह पूर्व 22 एके-47 हथियार मिले थे। पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था । इसी वर्ष अप्रैल और मई  में एनआईए की टीम ने उनको रिमांड पर लेकर दो दिनों तक पूछताछ की थी। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में गिरफ्तार अपराधियों के बिहार के दो विधायकों के साथ अपने कनेक्शन की बात स्वीकार की थी। सूत्रों की मानें तो आज एनआईए की टीम ने इसी सूचना पर सुनील पांडेय के भाइयों के घर पर छापेमारी की है।
एनआईए की टीम ने सीआरपीएफ के साथ मिलकर आज सुबह 6 बजे बक्सर में चरित्रवन इलाके में इनके आलीशान बंगले, आरा के महाराजा हाता और पटना के पटेलनगर स्थित घर पर छापेमारी की है। सूत्रों का कहना है कि टीम ने सुनील पांडेय के रिश्तेदारों के पीरो, सासाराम, डिहरी में भी छापे मारे। संतोष पांडेय जेडीयू के पूर्व विधायक और लोजपा नेता सुनील पांडेय के भाई हैं। बिहार में हुलास और सुनील पांडेय की गिनती बाहुबलियों के तौर पर होती है।  बिहार की राजनीति में भी सुनील पांडेय चर्चित नाम है। https://www.kanvkanv.com

 

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इधर पूर्व मुख्यमंत्री गए विदेश छुट्टियां मनाने, उधर उनके 4 राज्यसभा सांसद BJP में हुए शामिल

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नई दिल्ली। हाल में मिली चुनावी हार के बाद अब आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू को गुरुवार को एक और जोरदार झटका लगा है।

पार्टी के राज्यसभा में कुल 6 में से 4 सांसदों ने टीडीपी से नाता तोड़ने का ऐलान करते हुए सभापति एम. वेंकैया नायडू से आग्रह किया है कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय करने की मंजूरी प्रदान करें। टीडीपी के इन चार राज्यसभा सांसद भाजपा में उस समय शामिल हुए हैं, जब टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू अपने परिवार के साथ विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं।

ये सांसद हुए भाजपा में शामिल

टीडीपी के टीजी वेंकटेश, वाईएस चौधरी, सीएम रमेश और जीएम राव ने गुरुवार को टीडीपी के इन सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद भाजपा में विलय का फैसला किया है। चारों सांसदों ने सभापति को पत्र सौंपते हुए कहा है कि उनको नए गुट के रूप में मान्यता देते हुए  भाजपा में विलय की मंजूरी प्रदान की जाए। चारों सांसदो ने दल बदल कानून का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने एक अलग गुट बनाया है और सामूहिक रूप से भाजपा में विलय का फैसला किया है।

नहीं लागू होगा दलबदल कानून

उल्लेखनीय है कि दलबदल विरोधी कानून के मुतबिक किसी दल से अलग हुए नए गुट को तभी मान्यता मिल सकती है, जब उसके दो तिहाई सदस्य इस गुट में शामिल हों। फिलहाल, उप सभापति के आवास पर हुई चारों सांसदों की इल मुलाकात के दौरान भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और राज्यसभा में सदन के नेता थावरचंद गहलोत भी उपस्थित रहे।

भाजपा की सदस्यता ली

राज्यसभा के सभापति से मुलाकात के बाद टीडीपी सांसद भाजपा मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली। टीडीपी सांसद वाईएस चौधरी, सीएम रमेश और टीजी वेंकटेश ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। चौथे सांसद जीएम राव अस्वस्थ होने के कारण बाद में भाजपा की सदस्यता लेंगे।

चंद्रबाबू बोले- संकट की कोई बात नहीं

चार राज्यसभा सदस्य के टीडीपी छोड़ने के बाद पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि हमने भाजपा से लड़ाई केवल राज्य को विशेष दर्जा दिलाने और राज्य के हितों के लिए की। हमने टीडीपी को कमजोर करने के लिए भाजपा के प्रयासों की निंदा करते हुए विशेष दर्जे के लिए हमने केंद्रीय मंत्रियों की बलि दी। पार्टी के लिए संकट कोई नई बात नहीं, नेताओं और कैडर के लिए घबराने की कोई बात नहीं है।

राज्यसभा में नहीं भाजपा का बहुमत, मिलेगा सुकून

उल्लेखनीय है कि चार सदस्यों का समर्थन मिलने से राज्यसभा में बहुमत के संकट से जूझ रही भाजपा को सुकून मिलेगा। भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास राज्यसभा में फिलहाल बहुमत नहीं है। टीडीपी के राज्यसभा में छह सदस्य थे। https://www.kanvkanv.com

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300 मीटर गहरी खाई में गिरी बस, 15 लोगों की मौत, 50 यात्री घायल, राहत व बचाव का काम जारी

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कुल्लू। थाना बंजार के अंतर्गत हुए सड़क हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई है जबकि करीब 50 यात्रियों के घायल होने की सूचना है। बस में कुल कितने यात्री सवार थे अभी इस बारे स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। कुल्लू की पुलिस अधीक्षक शालनी अग्निहोत्री ने बताया कि अभी तक 15 शवों को निकाला गया है और राहत एवं बचाव का काम जारी है।  दुर्घटना वीरवार दोपहर के समय हुई जब महावीर बस सर्विस की बस बंजार से खौली, गाड़गुशेनी की तरफ जा रही थी। बस अभी बंजार से मात्र तीन किलो मीटर दूर छेत के समीप ही पहुंची थी कि बस चालक बस से नियंत्रण खो बैठा व बस करीब 300 मीटर गहरी खाई में गिर गई।

राहत कार्य शुरू

दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम स्थानीय लोगों के साथ राहत कार्यों में जुट गई। जिस स्थान से बस खाई में गिरी उस स्थान से राहत कार्यों को अंजाम देना संभव नहीं था इसलिए गाड़ागुशेनी मार्ग के दूसरे किनारे से राहत कार्य शुरू किए गए। वहीं बारिश के कारण भी घायलों को सड़क मार्ग तक पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। एस पी शालिनी ने बताया कि दुर्घटना में घायल हुए लोगों को बाहर निकालने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। बस में कुल कितने लोग सवार थे इस के बारे में स्थिति थोड़ी देर बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। https://www.kanvkanv.com
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