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वार्षिक भूख सूचकांक : राहुल का केंद्र पर हमला, कहा- कुछ खास मित्रों की जेब भरने में लगी है सरकार

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नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था, कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन जैसे विषय को लेकर कांग्रेस पार्टी लगातार केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर है। ऐसे में अब पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने वार्षिक भूख सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स- जीएचआई) 2020 के ताजा आंकड़े को लेकर सरकार पर निशाने पर लिया है। इस सूचकांक में भुखमरी के मामले में 107 मुल्कों में भारत को 94वें स्थान पर रखा गया है। राहुल गांधी ने इसे लेकर सरकार पर खास ‘मित्रों’ की जेब भरने का आरोप लगाया है।

राहुल गांधी ने शनिवार को ट्वीट कर लिखा “भारत का ग़रीब भूखा है क्योंकि सरकार सिर्फ़ अपने कुछ ख़ास ‘मित्रों’ की जेबें भरने में लगी है।” दरअसल, जहां तक भुखमरी और कुपोषण का सवाल है, हिन्दुस्तान अपने कदरन छोटे पड़ोसी मुल्कों नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी पिछड़ा हुआ है। 107 मुल्कों की इस सूची में भारत 94वें स्थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत भुखमरी के ऐसे स्तर से जूझ रहा है, जिसे गंभीर माना जाता है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में वार्षिक भूख सूचकांक में भारत 55वें स्थान पर था। वहीं 2019 में भारत 102वें स्थान पर पहुंच गया। हालांकि सूची में दर्ज देशों की संख्या प्रतिवर्ष घटती-बढ़ती रहती है। ऐसे में वर्ष 2014 में भारत 76 देशों की सूची में 55वें स्थान पर था। फिर वर्ष 2017 में 119 देशों की लिस्ट में भारत का स्थान 100वां था। वहीं 2018 में 119 देशों की सूची में भारत 103वें स्थान पर रहा था।

क्यों चिंताजनक है भारत रैंकिंग

भारत गरीबी और भूखमरी को दूर कर विकासशील से विकसित देशों की कतार में शामिल होने के लिए जोर-शोर से प्रयास कर रहा है. सरकार का दावा है कि इसके लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं. नीतियां बनाई जा रही हैं और उसी के अनुरूप विकास कार्य किये जा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की ‘2018 बहुआयामी वैश्विक गरीबी सूचकांक’ की मानें तो वित्त वर्ष 2005-06 से 2015-16 के बीच एक दशक में भारत में 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल गए हैं. पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके लिए भारत की तारीफों के पुल भी बांधे. लाखों लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने के उन्होंने सरकार की पीठ थपथपाई, लेकिन ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने तमाम दावों और आंकड़ों पर सवाल खड़े कर दिये हैं.

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