वायरल फीवर घटा रहा सुनने की शक्ति, ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान

 बदलते मौसम के साथ ही वायरल फीवर का संक्रमण तेज हो गया है। वायरस  अब मरीजों के कानों पर भी असर डाल रहा है। 
 
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वायरल फीवर का अब कान पर असर

भागलपुर। बदलते मौसम के साथ ही वायरल फीवर का संक्रमण तेज हो गया है। इसका वायरस खतरनाक हो चुका है। यह शरीर के कई अंगों को अपनी चपेट में ले रहा है। दिल, दिमाग, आंख, लीवर व फेफड़े के बाद वायरल फीवर का वायरस अब कानों में घंटी भी बजा रहा है। 

डॉक्टर का कहना है कि वायरल फीवर के मरीजों के कानों में सीटी बजने जैसी समस्या हो रही है। इसके अलावा लोगों के कानों में दर्द, भारीपन, सनसनाहट, घंटी बजने जैसी आवाज महसूस हो रही है। साथ ही, पोस्ट कोविड मरीजों में भी यह बीमारी नजर आ रही है। सरकारी व निजी अस्पतालों के नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञों के पास बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं।

कानों की नसों पर वार कर रहा है वायरस
मायागंज अस्पताल के सहायक प्राध्यापक डॉ. धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि यह दिक्कत वायरल इंफेक्शन की वजह से होती है। कोरोना भी वायरस है। सामान्य वायरल फीवर में भी वायरस का ही इंफेक्शन होता है। इन दोनों तरह के मामलों में मरीजों में सेंसेरी न्यूरल हियरिंग लॉस के मामले बढ़ रहे हैं। बड़ी संख्या में इसके मरीज आ रहे हैं। मायागंज अस्पताल के ईएनटी ओपीडी में इस तरह के हर रोज पांच से छह से मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इस बीमारी से ग्रसित लोगों के कानों के पर्दे में द्रव जमा हो जाता है, जिसे ओलाइटिस मीडिया कहते हैं।

सनसनाहट, सीटी या घंटी बजने जैसे लक्षण
डॉ. धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक टीनीटस के मरीज भी सनसनाहट, आवाज सुनाई देने, सीटी या घंटी बजने, कान में भारीपन जैसी शिकायत लेकर ओपीडी में आ रहे हैं। इनकी जांच की जा रही है। इन मरीजों में वायरस के संक्रमण के कारण कान की नस सूखती हुई मिलती है। इसके अलावा ओटाइटिस मीडिया के मरीजों में भी इस तरह की समस्या आ रही है। बकौल डॉ. कुमार, वायरल फीवर या फिर कोरोना का वायरस न्यूरोपैथी क्रिएट करता है। इसके संक्रमण से कान की नसों को नुकसान होता है।

60 फीसदी मामलों में यह बीमारी स्वतःठीक हो जाती है। 40 फीसदी मामले में इलाज की जरूरत पड़ती है। इनमें से 20 फीसदी में इस बीमारी का व्यापक असर पड़ता है। ऐसे मरीजों को सुनाई देना कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इसका इलाज शुरू करा दिया जाय तो यह बीमारी काफी हद तक ठीक हो सकती है। इस मामले में मरीज को लापरवाही नहीं करनी चाहिए। आमतौर पर मरीज कान की सनसनाहट या भारीपन को नजरअंदाज करते हैं। यह लापरवाही उन्हें उम्रभर की बीमारी दे सकती है। लक्षण होने पर नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ से तत्काल परामर्श लें।