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हेल्थ

स्वस्थ जीवन के लिए आर्गेनिक फूड का करें इस्तेमाल

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नई दिल्ली। आजकल के खान-पान से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। बजारों में मिल रही सब्जियां कीटनाशक रसायनों व कई अन्य प्रकार के केमिकल्स से पकाई जा रही हैं। अब ऐसे में आपके लिए स्वस्थ बहुत जरूरी है। हम सबका ध्यान ऑर्गेनिक फूड की तरफ जाता है। आज हम आपको इस लेख में बताएंगे कि कैसे आप ऑर्गेनिक फूड को कैसे अपने खानपान में शामिल कर सकते हैं।

आज हमारी थाली में भोजन के रूप में जो भी चीजें शामिल हो रही हैं, उन्हें तैयार करने में केमिकल और फर्टिलाइजर का खूब इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इन्हें सुरक्षित रखने के लिए कीटनाशक व अन्य रसायनों का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में जागरूक लोग यह सोचने लगे हैं कि जो कीटनाशक रसायन व अन्य रसायन कीटों को मारने की क्षमता रखते हैं, वे इंसान के लिए भी कुछ न कुछ नुकसानदेह होंगे ही।

ऑर्गेनिक फूड क्यों है बेहतर

ऑर्गेनिक फूड का उत्पादन पारंपरिक तरीके से किया जाता है। ऐसे ऑर्गेनिक फूड के उत्पादन में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद व रसायन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें पौष्टिक तत्व, विटामिन, खनिज, प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन 50 प्रतिशत अधिक होता है। इसमें मौजूद तत्व दिल की बीमारी, माइग्रेन, ब्लडप्रेशर, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

प्रतिरोधक क्षमता होती है बेहतर

ऑर्गेनिक फूड शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, त्वचा में निखार लाते हैं, शरीर में चर्बी बढऩे नहीं देते, यानी मोटापे से भी बचाते हैं।

ऑर्गेनिक खेती की खूबियां

ऑर्गेनिक खेती करने से पूर्व लंबे समय के लिए जमीन को खाली छोड़ दिया जाता है, ताकि मिट्टी में मिले पेस्टीसाइड खत्म हो सकें। इस कारण उत्पादों में ज्यादा विटामिन एवं खनिज होते हैं। विशेषज्ञ डॉ. रंजना बताती हैं, ऑर्गेनिक खेती प्राकृतिक तरीके से की जाती है। इसमें खाद की जगह घास पात, गोबर आदि का इस्तेमाल किया जाता है, जो मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं। कई बार घर की रसोई से निकली सामग्री भी खाद के रूप में काम आती है। ऑर्गेनिक फूड में प्राकृतिक चीजों का प्रयोग किया जाता है। इसमें कीटनाशक रसायन या रसायनिक उर्वरक का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

बीमारियों से होता है बचाव

आजकल के खानपान से याददाश्त कमजोर पडऩा, भूख न लगना, मोटापा, डिमेंशिया, अल्जाइमर और कई तरह के कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि हमेशा ऑर्गेनिक फूड का ही इस्तेमाल किया जाए।

किचन गार्डन में खाद की पूर्ति

डॉ. रंजना बताती हैं कि मटर छीलकर उसके छिलकों को काटकर ही आप अपने किचेन गार्डन के लिए खाद बना सकते हैं। इसके लिए घर की अतिरिक्त बची हुई वस्तुओं का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऑर्गेनिक फूड का प्रयोग

डाइटीशियन रश्मि श्रीवास्तव बताती हैं कि ऑर्गेनिक फूड का प्रयोग तो करना ही चाहिए। इसके अलावा दूध, दही, चीज आदि मिल्क मेड आइटम ऑर्गेनिक हो तो ठीक है। दूध और दुग्ध उत्पाद के बारे में रश्मि बताती हैं कि उन गाय-भैंसों का दूध ऑर्गेनिक होगा, जो सिर्फ घास ही खाती हैं। इनका दूध शुद्ध होगा, पर कई जगह गाय-भैसों को ग्रोथ हारमोन्स देते हैं, जिससे वो जल्दी बड़ी हो जाएं और ज्यादा दूध दें। वह ठीक दूध नहीं है। सेहत के लिए पशुओं को एंटीबायोटिक भी देते हैं। ऐसा दूध भी ठीक नहीं होता।

ऑर्गेनिक फूड का चयन

आजकल ज्यादातर स्टोरों में ऑर्गेनिक फूड की पर्ची भी लगी रहती है। खाने की वस्तुओं का पहले ही निरीक्षण कर लें। ऑर्गेनिक फूड के विशेषज्ञ डॉ. विमर्श रैना बताते हैं कि ऑर्गेनिक फूड को बीज से उगाना चाहिए और इसी का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि इससे आप ढेर सारी बीमारियों से बच सकते हैं। https://kanvkanv.com

दुनिया

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के ट्रायल पर WHO ने लगाई रोक

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नई दिल्ली। कोरोना महामारी के उपचार के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के ट्रायल पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रोक लगा दी है। WHO के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस कहा कि आमतौर पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोराईक्वीन दवाएं ऑटोइम्यून बीमारियों या मलेरिया के रोगियों के लिए सुरक्षित हैं, लेकिन हार्ट से जुड़ी समस्याओं पर इन दवाओं ने हानिकारक दुष्प्रभाव दिखाए हैं।

हाल में स्वास्थ्य क्षेत्र की मशहूर पत्रिका द लैंसेट में दावा किया गया था कि मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल आने वाली दवा क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का कोविड-19 के मरीजों के इलाज में फायदा मिलने का कोई सबूत नहीं है। उसने रिसर्च का हवाला देते हुए दावा किया था कि मर्कोलाइड के बिना या उसके साथ भी ये दोनों दवाइयों के इस्तेमाल से कोविड-19 मरीजों की मृत्युदर बढ़ जाती है। ये रिसर्च करीब 15 हजार कोविड-19 मरीजों पर किया गया था।

उधर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक रिसर्च में पाया है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन लेने से कोविड-19 से संक्रमण की संभावना कम हो जाती है। इसके बाद भारत सरकार ने कोविड-19 से बचाव के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल को और बढ़ाने का फैसला किया। आईसीएमआर ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल के लिए नई संशोधित गाइडलाइन भी जारी की है।

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कोरोना वैक्सीन: भारत में 6 महीने में शुरू हो जाएगा मानव पर परीक्षण

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नई दिल्ली। कोरोना महामारी से लड़ रहे देश के लोगों के लिए एक अच्छी खबर। भारत में कोरोना की वैक्सीन का मानव पर परीक्षण छह महीने में शुरू हो जाएगा। ये बात रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर के निदेशक और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के प्रमुख डॉ. रजनी कांत ने कही है।

डॉ. रजनी कांत ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि “पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) प्रयोगशाला में वायरस का स्ट्रेन पृथक किया गया है, अब इसका वैक्सीन बनाने में उपयोग किया जाएगा।

इस स्ट्रेन को सफलतापूर्वक भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (बीबीआईएल) में स्थानांतरित कर दिया गया है। उम्मीद है कि कम से कम छह महीनों में वैक्सीन के मानव परीक्षण शुरू हो जाएंगे।”

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रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अपनाएं आयुर्वेद के ये नुस्खे

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फर्रुखाबाद। कोरोना संकट के इस दौर में हलकी-फुल्की खांसी और गले में खराश को लेकर बहुत घबराने की जरूरत नहीं है। मौसम में बदलाव और ठंडा-गर्म खाने-पीने से भी इस तरह की समस्या हो सकती है। इसके लिए अस्पताल जाने की जरुरत नहीं है। इसकी दवा तो आपके किचेन में ही मौजूद है। जरुरत उसे जानने और दूसरों को समझाने की है।  आयुर्वेद के इसी ज्ञान से खुद को सुरक्षित रखने के साथ दूसरों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

पुदीने के पत्ते और काला जीरा से मिलेगा खांसी से निजात

आयुष डाक्टरों का कहना है कि सूखी खांसी व गले में खराश को दूर करने में आयुष का घरेलू उपचार बहुत ही कारगर है। उनका कहना है कि ताजे पुदीने के पत्ते और काला जीरा को पानी में उबालकर दिन में एक बार भाप लेने से इस तरह की समस्या से राहत मिल सकती है।

मिश्री/शहद है फायदेवर

इसके अलावा लौंग के पाउडर को मिश्री/शहद के साथ मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन करने से इस तरह की समस्या दूर हो सकती है । इसके बाद भी दिक्कत ठीक नहीं होती है तभी चिकित्सक की सलाह लें। जानकारी के अभाव में लोग इसके लिए चिकित्सक की सलाह लिए बगैर भी मेडिकल स्टोर से कुछ दवाएं खरीदकर आजमाने लगते हैं। जो बहुत ही नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं

इसके अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के एक से एक नुस्खे आयुर्वेद में मौजूद हैं।जिसको आजमाकर कोरोना ही नहीं अन्य संक्रामक बीमारियों को भी अपने से दूर कर सकते हैं। इसके अलावा इन नुस्खों के कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हैं। भोजन में हल्दी, धनिया जीरा और लहसुन का इस्तेमाल भी इसमें बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके अलावा दूध में हल्दी मिलाकर पीकर, गुनगुना पानी और हर्बल चाय/काढ़ा पीकर भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही योगा, ध्यान और प्राणायाम का भी सहारा लिया जा सकता है।  बदली परिस्थितियों में यही छोटे-छोटे नुस्खे आजमाकर स्वस्थ रह सकते हैं। अभी अस्पताल और चिकित्सक कोविड-19 या कोरोना मरीजों की जांच व देखरेख में व्यस्त हैं। इसलिए अस्पतालों में अनावश्यक दबाव बढ़ाने से बचें और सुरक्षित रहें।
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