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हेल्थ

सोते समय मन में चल रही हैं ये तीन चीजें तो नहीं आएगी नींद, करें ये उपाय

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नई दिल्ली। अगर आप मानसिक तनाव, दबी हुई इच्छाएं और मन में तीव्र कड़वाहट लिए हुए बिस्तर पर लेटे हैं तो आप अनिद्रा का शिकार हो सकते हैं। उच्च रक्तचाप, कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर, डायबिटीज व अन्य बीमारियों से भी अनिद्रा का सीधा संबंध है।

डाक्टरों के मुताबिक, आयुर्वेद में नींद का वर्णन वात और पित्त दोष के बढ़ने के रूप में मिलता है। इसका सबसे प्रमुख कारण है मानसिक तनाव, दबी हुई इच्छाएं और मन में तीव्र कड़वाहट। इसके अलावा अनिद्रा के अन्य कारणों में कब्ज, अपच, चाय, कॉफी और शराब का अधिक सेवन तथा पर्यावरण में परिवर्तन, यानी अधिक सर्दी, गर्मी या मौसम में बदलाव। ज्यादातर मामलों में ये सिर्फ प्रभाव होते हैं न कि अनिद्रा के कारण। अनिद्रा तीन प्रकार तीव्र, क्षणिक और निरंतर चलने वाली होती है।

अनिद्रा से तात्पर्य है सोने में कठिनाई

अनिद्रा से तात्पर्य है सोने में कठिनाई। इसका एक रूप है, स्लीप-मेंटीनेंस इन्सोम्निया, यानी सोये रहने में कठिनाई, या बहुत जल्दी जाग जाना और दोबारा सोने में मुश्किल। पर्याप्त नींद न मिलने पर चिंता बढ़ जाती है, जिससे नींद में हस्तक्षेप होता है और यह दुष्चक्र चलता रहता है। उच्च रक्तचाप, कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर, डायबिटीज व अन्य बीमारियों से भी अनिद्रा का सीधा संबंध है।

93 प्रतिशत भारतीय अच्छी नींद से वंचित

एक हालिया शोध में पता चला है कि लगभग 93 प्रतिशत भारतीय अच्छी नींद से वंचित हैं। इसके कारक जीवनशैली से जुड़ी आदतों से लेकर स्वास्थ्य की कुछ स्थितियों तक हैं। अनिद्रा को आमतौर पर एक संकेत व एक लक्षण दोनों रूपों में देखा जाता है, जिसके साथ नींद, चिकित्सा और मनोचिकित्सा विकार सामने आ सकते हैं। इस तरह के व्यक्ति को नींद आने में लगातार कठिनाई होती है।

नींद उचट जाए तो घड़ी को अपनी निगाह से दूर कर दें

अगर आप कैफीन के प्रति संवेदनशील हैं तो एक या दो बजे के बाद कैफीनयुक्त पेय पदार्थ लेने से बचें। अल्कोहल की मात्रा सीमित करें और सोने से दो घंटे पहले अल्कोहल न लें। टहलने, जॉगिंग करने या तैराकी करने जैसे नियमित एरोबिक व्यायाम में हिस्सा लें। इसके बाद आपको गहरी नींद आ सकती है और रात के दौरान नींद टूटती भी नहीं है। जितनी देर आप सो नहीं पाते हैं उन मिनटों का हिसाब रखने से दोबारा सोने में परेशानी हो सकती है। नींद उचट जाए तो घड़ी को अपनी निगाह से दूर कर दें।

शाम को जल्दी सोने लगें, तो रोशनी को तीव्र कर दें

एक या दो सप्ताह के लिए अपने नींद के पैटर्न को ट्रैक करें। अगर आपको लगता है कि आप सोने के समय में बिस्तर पर 80 प्रतिशत से कम समय बिना सोये बिता रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि आप बिस्तर पर बहुत अधिक समय बिता रहे हैं। बाद में बिस्तर पर जाने की कोशिश करें और दिन के दौरान झपकी न लें।

यदि आप शाम को जल्दी सोने लगें, तो रोशनी को तीव्र कर दें। अगर आपका दिमाग सोच-विचार में लगा है या आपकी मांसपेशियां तनाव में हैं, तो आपको सोने में मुश्किल हो सकती है। दिमाग को शांत करने और मांसपेशियों को आराम देने के लिए, ध्यान करना, गहरी सांस लेना या मांसपेशियों को आराम देने से लाभ हो सकता है। https://www.kanvkanv.com

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हेल्थ

यूपी में टीबी की चपेट में 14 हजार बच्चे, अगर ये 7 लक्षण दिखे तो समझ लें आप भी हैं शिकार

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लखनऊ। टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार समय-समय पर अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करती है। पीएचसी से लेकर सीएचसी समेत सभी सरकारी अस्पतालों में इसके इलाज की मुफ्त सुविधा भी मिल रही है। लेकिन फिर भी क्षय रोग (टीबी) में कमी नहीं आ रही है। एक सर्वे के अनुसार केवल यूपी में ही 4 लाख 20 हजार टीबी के मरीज हैं जिसमें से 13,941 बच्चे भी शामिल हैं। हालत यह है कि इनमें 15 हजार गंभीर रूप से बीमार हैं।  इन्हें मल्टी ड्रग रेजिडेंट (एमडीआर) ने अपनी चपेट में ले रखा है।

इतना ही नहीं देश के टीबी मरीजों के 20 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में हैं। एमडीआर के मरीजों को बचाने की सबसे ज्यादा चुनौती है। स्टेट टीबी अफसर डॉ. संतोष गुप्ता ने भी इसकी पुष्टि की है। क्षयरोग विभाग के रिकार्ड बता रहे हैं कि पश्चिमी यूपी के जिले मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर जैसे जिलों में टीबी के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। सरकारी महकमा व्यक्तिगत इलाज से इसे कम करने का दावा कर रहा है।

एमडीआर प्रभावित मरीजों को बचाना है चुनौती :

मल्टी ड्रग रेजिडेंट (एमडीआर) के मरीजों को बचाने की चुनौती सबसे ज्यादा है। स्टेट टीबी अफसर डॉ. संतोष गुप्ता ने कहा, “यह मानने में कतई संकोच नहीं है कि एमडीआर मरीज विभाग के लिए चुनौती हैं। इनका कहना है कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज दवा खाने में लापरवाही करते हैं और वे एमडीआर से ग्रसित हो जाते हैं। इन्हें बचाने के लिए दी जाने वाली दवा बेडाकुलीन बाजार में उपलब्ध नहीं है। यह दवा सिर्फ कुछ सरकारी अस्पतालों में ही मिलने की वजह से भी दिक्कतें आ रहीं हैं। मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है।

केजीएमयू एसोसिएट प्रोफेसर वेद प्रकाश ने बताया, “22 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में लगभग 2,60,572 टीबी रोगी सरकारी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। 37,174 मरीज गैर सरकारी संस्थानों में चिकित्सीय सलाह ले रहे हैं। बाल क्षय रोगियों की संख्या भी काफी है। 13,941 बच्चे इसकी चपेट में हैं। प्रदेश में 2,16,041 नए मरीज इस वर्ष पंजीकृत हुए हैं। 44 हजार 531 मरीज पिछले वर्ष से इलाज करवा रहे हैं। भारत में हर साल एक लाख मरीजों में से 211 की मौत हो जाती है। सात मरीजों में एचआईवी पाया जाता है और 11 को एमडीआर हो जाता है।

टीबी के खात्मे को सरकार एक योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। बावजूद इसके अनुकूल सफलता नहीं मिल रही है। हालत यह है कि वर्ष 2025 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य दूर की कौड़ी लगता है। सरकार के तमाम प्रयासों के बाद अभी भी यह औसतन दो प्रतिशत की दर से यह घट रहा है, जबकि लक्ष्य पाने के लिए पांच से 10 प्रतिशत की दर जरूरी है।

महिलाओं में 20 प्रतिशत बढ़ा जननांगों का क्षय रोग

डॉ. वेद प्रकश की मानें तो 90 प्रतिशत जननांगों का क्षय रोग 15 से 40 साल की महिलाओं में पाया जाता है। 60 से 80 प्रतिशत बांझपन के मामलों का कारण भी यही होता है। विगत वर्षो में जननांगों का क्षय रोग 10 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया है। इसे पौष्टिक आहार और नियमित दिनचर्या से खत्म किया जा सकता है।

ये हैं लक्षण

  1. दो सप्ताह से लगातार खांसी
  2. खांसी के साथ बलगम आ रहा हो
  3. कभी-कभी खून आना
  4. भूख कम लगना
  5. वजन घटना
  6. शाम के वक्त बुखार आना
  7. सीने में दर्द होना https://www.kanvkanv.com
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हेल्थ

अदरक-नींबू का जूस पीने से होंगे ये 5 बड़े फायदे, जानकर हैरान रह जाएंगे आप

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नयी दिल्ली। क्या आप भी मोटापे से परेशान हैं। तो आपको जिम जाने की जरूरत नहीं है। इसके लिए अदरक-नींबू का पानी फैट कम करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है। नींबू में पाया जाने वाला विटामिन सी टमी के फैट को कम करने का काम करता है और जब ये अदरक के साथ मिल जाता है तो इसकी फैट लॉस की शक्ति और बढ़ जाती है।

अदरक और नींबू को जब ड्रिंक की तरह लिया जाता है तो इसमें मौजूद न्यूट्रिएंट्स को हमारा शरीर बेहतर तरीके से अब्सोर्ब करता है। नींबू में विटामिन सी, बी6, पॉलीफेनॉल, टेरपीन,नैरिंगिन, हिस्पेरिडिन, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फाइबर तो अदरक में आवश्यक ऑयल, बिसाबोलिन, जिंजरोल जैसे न्यूट्रीएंट पाए जाते हैं। इन न्यूट्रीएंट्स से वेट लॉस के साथ कई और फायदे भी हैं। तो आइए आज अदरक-नींबू के ड्रिंक को बनाने के साथ इसके फायदे भी जाने।

वजन कम करना

अदरक और नींबू दोनों ही वजन घटाने के लिए सबसे बेहतर नेचुरल घरेलू तरीके हैं। एक रिसर्च में पाया गया है कि जो पुरुष नाश्ता खाने के बाद अदरक का पानी पीते हैं उनमें सेटिस्टफेक्शन लेवल अधिक होता है। इससे इससे लोगों को वजन कम करने में मदद मिलता है। वहीं नींबू में पाए जाने वाले पॉलीफेनोल एंटीऑक्सिडेंट मोटापा कम करने का काम करता है।

जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ न्यूट्रीशन में प्रकाशित 2005 में चूहों पर ये प्रयोग सफल पाया गया था। नींबू के रस में विटामिन सी आपके शरीर को अधिक वसा जलाने में मदद कर सकता है। खासकर तब और जब आप एक्सरसाइज भी करते हों। पर्याप्त विटामिन सी प्राप्त करने से वर्कआउट के दौरान शरीर में वसा जलने में 30 प्रतिशत की वृद्धि होती है।

मजबूत होता है इम्यून सिस्टम

अदरक-नींबू पानी इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने का काम करता है। इम्यून सिस्टम हमारे बॉडी को रोगों से लड़ने की शक्ति देता है। ये एक्टिव बनाए रखने भी हेल्पफुल है। अदरक-नींबू पानी में एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होता है और यह बीमारी पैदा करने वाले फ्री रेडिकल और जीवाणुओं से लड़ने में सक्षम होता है।

डाइजेशन और पेट की बीमारियों में कारगर

अगर आपका डाइजेशन गड़बड़ , पेट में दर्द है या मिचली आती है तो अदक-नींबू को कोई तोड़ नहीं। इसका जूस पीना बहुत ही फायदेमंद होता है। साथ ही ये स्किन को हेल्दी का भी काम करता है।

दूर करता है माइग्रेन

अदरक-नींबू पानी पीने से माइग्रेन और सिरदर्द की समस्या दूर होती है। इसे रोज पीना भी बहुत लाभकारी होता है साथ ही जब भी माइग्रेन हो तो इसे जरूर पीना चाहिए।

ब्लड शुगर रहता है बेहतर

अदरक में डायबिटीज से लड़ने के गुण होते हैं। ये टाइप 2 डायबिटीज वाले रोगियों पर बहुत काम करता है। रोज 2 ग्राम अदरक का जूस लेने से बॉडी से ब्लड शुगर का स्तर काम होता है। ये हार्ट के रोगियों के लिए भी बहुत तरीके से लाभदायक होता है। https://www.kanvkanv.com

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पैनक्रियाटिक कैंसर के जानें लक्षण और क्यों मुश्किल है इसकी पहचान

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नई दिल्ली। कैंसर का नाम आते ही लोग परेशान हो जाते हैं। आज हम बात करेंगे पैनक्रियाटिक कैंसर की। इस कैंसर की पहचान शुरूआती दौर में पहचान नहीं हो पाती है। इसकी पहचान मुश्किल से होती है। इसके लक्षण एकदम से नजर नहीं आते हैं। आजकल की बदलती लाइफस्टाइल से ऐसे मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।

इन्हें है अधिक खतरा

पैनक्रियाज यानी अग्नाशय में कैंसर के शुरुआती लक्षण इतने साधारण होते हैं कि इसे कैंसर मान लेना मुश्किल होता है। मगर जब तक इसकी भनक लगती है, तब तक कैंसर अपने विकराल रूप में आ चुका होता है। इसका कारण अनियमित जीवनशैली के अलावा अस्वस्थ खानपान और मिलावट भी है। इसके अलावा धूम्रपान, शराब, रेड मीट व ज्यादा चर्बी वाली चीजें अधिक खाने वालों को इसका खतरा अधिक रहता है।

इसके लक्षण

पेट के ऊपरी भाग में दर्द रहना।
स्किन, आंख और यूरिन का कलर पीला हो जाना।
भूख न लगना, जी मिचलाना और उल्‍टियां होना।
कमजोरी महसूस होना और वजन का घटना।

इसलिए मुश्किल है इसकी पहचान

अग्नाशय शरीर में बहुत अंदर स्थित होता है। बाहर से देखने पर या छूकर इसका पता लगाना संभव नहीं होता है।
पेट के काफी अंदर होने के कारण पैनक्रियाज कई अंगों से ढका रहता है। इसलिए अग्नाशय में कैंसर की गांठ का पता नहीं चल पाता है।
पैनक्रियाज कैंसर में शुरुआत में पेट दर्द की शिकायत रहती है। मगर अक्सर लोग इसे साधारण पेट दर्द मानकर पेनकिलर ले लेते हैं।
पैंक्रियाज कैंसर के कुछ लक्षण अन्य बीमारियों से भी मिलते हैं इसलिए भी इस कैंसर की जांच मुश्किल हो जाती है।
इसके शुरुआती लक्षण पीलिया, हेपेटाइटिस, गॉल स्टोन से भी मेल खाते हैं। इन बीमारियों में भी शरीर में सीरम बिलीरुबिन असामान्य रूप से बढ़ जाता है।
एसिडिटी, कब्ज, पेट दर्द, अपच आदि भी इसकी पहचान होते हैं। मगर यह लक्षण इतने साधारण हैं कि इनके होने पर किसी का ध्यान पैंक्रियाटिक कैंसर की तरफ नहीं जाता है।

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