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स्वाइन फ्लू : जानें इसके लक्षण, ऐसे करें बचाव

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नई दिल्ली। स्वाइन फ्लू तेजी से पांव पसार रहा है। बदलते मौसम के चलते लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। स्वाइन फ्लू के नए-नए मरीज लगातार सामने आ रहे हैं। एक आकड़े पर नजर डाली जाए तो दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू पीडि़तों की संख्या 1 जनवरी से अब तक 900 हो चुकी है। वहीं पिछले साल मरीजों की संख्या सिर्फ 205 ही थे। वहीं डॉक्टरों का यह भी मानना है कि बीमारी के फैलने के पीछे प्रदूषण और कम तापमान हो।

फ्लू के कई मामले सामने आ रहे

मौसम में आए बदलाव के साथ स्वाइन फ्लू फिर से दस्तक दे चुका है। दिन पे दिन स्वाइन फ्लू के कई मामले सामने आ रहे हैं। पूरे भारत में ये तेजी से फैल रहा है। दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू पीडि़तों की संख्या 1 जनवरी से अब तक 900 हो चुकी है, जबकि पिछले साल सिर्फ 205 मामले सामने आए थे। एम्स, सफदरजंग और गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने संभावना जताई है कि हो सकता है इस बीमारी के फैलने के पीछे प्रदूषण और कम तापमान हो।

राजस्थान में स्वाइन फ्लू से इस वर्ष अब तक 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, दो हजार से अधिक इसके मरीज सामने आ चुके हैं। इस बीमारी से सबसे ज्यादा मौत जोधपुर में हुई है।

कैसे फैलता है

स्वाइन फ्लू एक सांस से जुड़ी बीमारी वाला वायरस है जो छीकने या इसके वायरस के संपर्क में आने से फैलती है। किसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू की पहचान करना बेहद जरूरी होता है। क्योंकी इसकी सही समय पर पहचान ना होने पर उसे गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही उसके संपर्क में आकर अन्य व्यक्तियों में भी यह संक्रमण फैल सकता है। स्वाइन फ्लू का उपचार सामान्य फ्लू के जैसे ही किया जाता है, बुखार, कफ, और ठंड के बचाव के लिये दवाए दी जाती हैं, कुछ लोगों को शायद विषाणुरोधक दवाए (एंटीवायरल) या उपचार की ज़रुरत पड सकती है। चलिये जाने कैसे होता है स्वाइन फ्लू का उपचार।

जितनी जल्दी ये दवाईयां शुरू होंगी उतना ही लाभ

स्वाइन फ्लू होने पर डॉक्टर आपको बुखार व कफ के लिए टेमीफ्लु या च्रेलेंजा जैसी एंटीवायरस दवाईयां दे सकता है। इन दवाईयों को रोग शुरू होने के 2 दिन के अंदर ही ले लेना चाहिए क्योंकि जितनी जल्दी ये दवाईयां शुरू होंगी उतना ही लाभ होगा। आमतौर पर ये दवाईयां 5 दिनों के लिए दी जाती हैं। वैसे ये दवाईयां फ्लू को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं लेकिन ये बीमारी की अवधि व लक्षणों को कम करने के अलावा न्यूमोनिया जैसी बीमारी के खतरे को भी कम करती हैं।

पेरासिटामोल

स्वाइन फ्लु के अधिकतर मरीज़ सही इलाज से ठीक हो जाते हैं। उपचार के अंतर्गत पर्याप्त आराम, बुखार और ठंड को ठीक करने के लिए पेरासिटामोल दिया जाता है। कभी कभी बच्चों को अतिरिक्त उपचार भी दिया जाता है। लेकिन यहां पर यह सलाह दी जाती है कि कोई भी उपचार शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह ले लें ।16 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐस्पिरिन से जुडे हुए दवा उपचार का प्रयोग न करें।

विषाणुरोधक दवाएं (एंटीवायरल)

वायरल संक्रमण से बचाव के लिए दो दवाईयां ओसेल्टामविर (टेमीफ्लु) और जऩामिविर (रेलेंज़ा) का उपयोग स्वाइन फ्लु को ठीक करने के लिए दवा उपचार के तौर पर किया जाता है ! विषाणु रोधक दवाएं फ्लु को पूर्ण रूप से ठीक नहीं करती हैं, लेकिन कुछ लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं। जैसे –

  • लक्षणों और बीमारी की अवधि को एक दिन तक कम करने में सहायता करते हैं।
  • कुछ लक्षणों को कम करते हैं।
  • न्युमोनिया के जैसी गम्भीर बीमारी की जटिलता के खतरे को कम करते हैं।

अति गम्भीर बीमारी से ग्रस्त मरीज़ों में जैसे ही स्वाइन फ्लु के लक्षण दिखाई देते हैं, वैसे ही जितनी जल्दी सम्भव हो, विषाणु रोधक दवाएं तुरंत शुरू कर देना चाहिए। इस समूह के अंतर्गत निम्नलिखित लोग आते हैं।

  • दीर्घकालिक फेफडों या श्वाश प्रश्वाश सम्बन्धी बीमारी
  • दीर्घकालिक दिल की बीमारी (जन्मजात या जन्म के बाद)
  • दीर्घकालिक गुर्दे की की बीमारी (जैसे कि गुर्दा खराब होना)
  • दीर्घकालिक लीवर की बीमारी (सिरोसिस, हेपाटेटिस)
  • दीर्घकालिक दिमाग की बीमारी (जैसे कि पार्किंसन)
  • ईम्यूनोलस्प्रेशन (या तो किसी एक बीमारी के कारण, दवा के कारण, या फिर कोई उपचार के कारण)
  • मधुमेह की बीमारी (टाईप 1 या 2)
  • प्रतिजैविक (ऐन्टिबाइआटिक)

किसी भी प्रकार के फ्लू से पैदा होने वाली सबसे साधारण गंभीर स्थिति श्वास प्रश्वास क्षेत्र का दूसरे दर्जे का जीवाणु संक्रमण है, जैसे कि ब्रांगकाइटस (वायुमार्ग का संक्रमण) या न्यूमोनिया । ये संक्रमण अधिकतर लोगों में प्रतिजैविक (ऐन्टिबाइआटिक) द्वारा पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कभी कभी ये संक्रमण जानलेवा भी बन सकते हैं। https://www.kanvkanv.com

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योग : अपनी दिनचर्या में शामिल करें ये तीन आसन, मोटापा से मिलेगी मुक्ति

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नई दिल्ली। मोटापा आज के समय में सबसे बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही है। मोटापा कम करने के लिए लोग लाख जतन करते हैं। पेट, कमर और जांघ पर जमी फैट से लोग अक्सर परेशान रहते हैं। अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। योग के कुछ आसन से आप मोटापा से मुक्ति पा सकते हैं। बस योग के तीन आसन आपको करने होंगे। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कौन-कौन से आसन हैं। ये अद्र्धहलासन, पाद वृत्तासन और द्विचक्रिकासन हैं।

अर्धहलासन

इस आसन को करने के लिए पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। हथेलियां जमीन की ओर रहेंगी और जांधों के बगल में रहेंगी। ध्‍यान रखें उन्हें पैरों के नीचे न दबाएं।
पैरों को आपस में मिला लें और धीरे-धीरे उठाते हुए नब्बे डिग्री तक ले आएं। सांस की गति सामान्‍य रखें और इसी तरह से कुछ देर तक ठहरने का अभ्यास करें। इसे बढ़ाकर तीन मिनट तक ले जा सकते हैं।
हाथों से ताकत न लें कमर और पेट की ताकत का इस्तेमाल करें। ‍यान रहे सांस की गति सामान्‍य रहेगी क्‍योंकि अगर आप बीच-बीच में सांस रोकते रहेंगे तो आपके पैर डगमगाने लगेंगे।

अर्ध हलासन के फायदे

मोटापा कम करने के अलावा इस आसन के नियमित अभ्यास से पुरानी कब्ज की समस्या ठीक होती है। गैस की दिक्कत में भी आराम मिलता है। नाभि खिसकने की अवस्था में 2-3 मिनट तक इस आसन को करने चाहिए, नाभि अपनी जगह बैठ जाती है। इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी और भीतर की मसल्स ताकतवर बनती हैं।

पाद वृतासन

कमर के बल सीधे लेट जाएं, दोनों पैर आपस में मिले हुए व हथेलियों को जंघाओं के नीचे जमीन पर रख लें। धीरे से बाएं पैर को ऊपर की तरफ उठाएं व पैर को अधिक से अधिक गोलाकार चक्र में घुमाएं अर्थात पैर से बड़े से बड़ा वृत्त बनाने का प्रयास करें। पैरों को एक बार क्लॉक वाइस और एंटी क्लॉक वाइस 8-10 बार घुमाएं।

कुछ देर रुककर आराम करें, फिर दाएं पैर से उतनी ही बार इस आसन को करें। पैर घुमाने के बाद पैर को नीचे ले आएं और आराम करें। दोनों पैरों से तीन-तीन बार इसका अभ्यास कर लें।

पाद वृतासन के फायदे

पाद वृतासन मोटापा कम करने में काफी अहम रोल होता है। इससे जंघा, नितम्ब, पेट व कमर की मांशपेशियों पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे की अनावश्यक चर्बी दूर होने लगती है। यह आसन शरीर को सुडौल बनाने में मदद करता है, पैरों में दर्द, थकान, कमजोरी व वैरिकोज वेन्स से जुड़ी शिकायत को दूर करने वाला है। हृदय व फेफड़ों को भी इस आसन से बहुत ही बल मिलता है।

द्विचक्रिकासन

पीठ के बल लेट कर हाथेलियों को नितंब के नीचे रखें, सांस रोककर एक पैर को पूरा ऊपर उठाकर साइकल चलाने की तरह घुमाएं। इस आसान को 10 की संख्या तक करने से शुरुआत करें। धीरे-धीरे इसे बढाकर यथा शक्ति करे।
इसी प्रकार दूसरे पैर से इस क्रिया को करें। थक जाने पर विश्राम करें। इसी अभ्यास को अगली स्थिति में दोनों पैरों को निरंतर साइकिल की तरह चलाएं। सांस भरकर पैर उसी तरह चलाएं जैसे साईकिल पर बैठकर चलाते हैं। इस आसन में पैरों को सभी स्थितियों में क्लॉक वाइस और एंटी क्लॉक वाइस साईकिल की तरह चलाएं।

द्विचक्रिकासन के फायदे

मोटापा घटने के लिए यह सर्वोत्तम अभ्यास है। इसका नियमित 5-10 मिनिट अभ्यास करने से बढ़े पेट सुडोल बनता है। इसे करने से कब्ज, मंदाग्नि, अम्लपित्त की निवृति करता है। कमर दर्द हो तो इस आसन को एक-एक पैर से ही करने पर कमर दर्द में लाभ मिलता है। https://www.kanvkanv.com

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इनसे रहें दूर, ये 7 खाद्य पदार्थ बन सकते हैं एसिडिटी का कारण

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हम सभी हैवी डाइट लेने के बाद बहुत अच्छा महसूस करते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि हैवी डाइट लेने के बाद कई बार सीने में जलन का अनुभव भी होने लगता है, खट्टी डकार आने लगती है. नई दिल्ली। क्या आपको भी एसिडिटी के चलते अक्सर दिक्कत महसूस हेती है। अक्सर ही लोग ऐसा करते हैं कि हैवी डाइट ले लेते हैं और अच्छा महसूस करते हैं। ऐसा करने के बाद अक्सर सीने में जलन जैसा महसूस होता है। यही नहीं खट्टी डकार भी आनी शुरू हो जाती है।

जड़ तक पहुंचने की कोशिश करें

कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी हैं जिसका सेवन करने के बाद आपको एसिडिटी होती है। यह कुछ अत्यधिक अम्लीय खाद्य पदार्थों के कारण होता है, जिन्हें हमारा शरीर आसानी से डाइजेस्ट नहीं कर पाता। इसके परिणाम स्वरूप एसिडिटी बनने लगती है। यदि आप बार-बार एसिड रिफ्लक्स का अनुभव कर रहे हैं, तो यही समय है कि आप इसकी जड़ तक पहुंचने की कोशिश करें। इसके बजाय कुछ आसानी से हजम होने वाले खाद्य पदार्थ चुनें जो आपके पेट में एसिड को कंट्रोल करते हैं। कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो एसिडिटी का कारण बन सकते हैं, आइए इनके बारे में जानते हैं।

1. चॉकलेट

चॉकलेट का टेस्ट शायद ही किसी को न पसंद हो, लेकिन यह आपके पेट के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकती है. वास्तव में, तीन कारण हैं जो चॉकलेट को उन लोगों के लिए एक बुरा विकल्प बनाते हैं जो अक्सर एसिड से परेशान रहते हैं. सबसे पहले, इसमें कैफीन और थियोब्रोमाइन जैसे अन्य पदार्थ होते हैं, जो एसिड का कारण बनते हैं. दूसरा, इसमें काफी फैट होता है, जो एसिड का कारण भी बनता है और तीसरा इसकी अतिरिक्त कोको सामग्री है, जो रिफ्लक्‍स को बढ़ावा देने के लिए भी जिम्मेदार होती है. हम आपको चॉकलेट खाना बंद करने के लिए नहीं कह रहे हैं, लेकिन इन परेशानियों से बचने के लिए इसकी सीमित मात्रा लेने की सलाह जरूर दे रहे हैं।

2. सोडा

पेट में एसिड पैदा करने के सोडा और अन्य कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जिम्मेदार हैं. कार्बोनेशन के बुलबुले पेट के अंदर फैलते हैं. बढ़ते दबाव के कारण जलन होने लगती है. वास्तव में, सोडे में कैफीन भी होता है, जो एसिड बनाने में योगदान देता है।

3. अल्कोहल

बीयर और वाइन जैसे विभिन्न मादक पेय न केवल पेट में गैस्ट्रिक एसिड को बढ़ाते हैं, बल्कि शरीर को डिहाइड्रेट कर एसिड बनाते हैं. इसके अलावा, यहां तक कि अगर आप अल्‍कोहल ले रहे हैं, तो इसे सोडा या कार्बोनेटेड पेय के साथ न मिलाएं।

4. कैफीन

एक दिन में एक कप कॉफी या चाय पीना ठीक है, इसका अधिक सेवन आपको एसिडिटी का शिकार बना सकता है, क्योंकि इनमें कैफीन की मात्रा अधिक होती है. कैफीन के सेवन से पेट में गैस्ट्रिक एसिड का स्राव होता है, जिससे एसिडिटी होती है. कभी भी खाली पेट चाय या कॉफी न पिएं.

5. मसालेदार खाना

मसालेदार खाने का अधिक सेवन हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है. मिर्च, गर्म-मसाला और काली मिर्च सभी नेचुरल रूप से एसिडिक होते हैं। इन्हें खाने से एसिड बनने लगता है. ये हेल्दी हो सकते हैं, अगर आप इनका सेवन सीमित मात्रा में करते हैं।

6. फैटी फूड

फैटी फूड्स अत्यधिक अम्लीय होते हैं और वे पेट में लंबे समय तक रहते हैं, जिससे एसिडिटी होने की संभावना बढ़ जाती है. बहुत अधिक फ्राईड फूड, मीट खाने से बचें, इन्हें डाइजेस्ट होने में काफी टाइम लगता है। इसके बजाय, लीन मीट और बेक्ड फूड्स का रूख करें, ये ज्यादा हेल्दी होते हैं।

7. खट्टे फल

निस्संदेह फ्रूट्स हेल्दी होते हैं, हालांकि, कुछ खट्टे फल अगर खाली पेट खाए जाएं। तो यह एसिडिटी का कारण बन सकते हैं। संतरा, नींबू, टमाटर, जामुन जैसे खट्टे फल अत्यधिक अम्लीय होते हैं और हार्ट बर्न का कारण बन सकते हैं। कभी भी खाली पेट इन फलों का सेवन न करें। https://www.kanvkanv.com

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वजन पर रखना चाहते हैं नियंत्रण तो रोज पीना चाहिए इतना पानी

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नई दिल्ली। अगर आप भी बढ़ते वजन से परेशान हैं तो पानी पीना आपके लिए बहुत जरूरी है। पानी वैसे भी शरीर के लिए फायदेमंद है। मोटापा देश की बड़ी समस्याओं में से एक है। इसे नियंत्रित रखने के लिए इस लेख में हम आपको पानी से वजन नियंत्रित करने के बारे में बताएंगे। मोटापा का संबंध आपको लगने वाली भूख और मेटाबॉलिज्म यानी चयापचय (एक ऐसी रासायनिक और शारीरिक प्रतिक्रिया है, जो किसी भी जीव या प्राणी को अपने जीवन को स्वस्थ बनाये रखने में सहायता करती है) से है। यह कार्डियोवस्कुलर गड़बडिय़ों, टाइप 2 डायबिटीज, आर्थाइटिस, कुछ किस्म के कैंसर से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए मोटापा बेहद नुकसानदेह हो सकता है।

पानी से मोटापे पर काबू

पानी के फायदों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वजन कम करने में पानी पीना काफी मददगार होता है। हालांकि उपचार शुरू करने से पहले आपको इसके लिए उपयुक्त लक्ष्य तय करना चाहिए। न्यूट्रीशनल थेरेपी, व्यवहार संबंधी अध्ययन और शारीरिक गतिविधियां प्रभावी ढंग से वजन कम करने के तरीके हैं।

खुद को रखें हाइड्रेटिड

पानी पीने से शरीर में मौजूद नुकसानदेह चीजें पानी के साथ बहकर निकल जाती हैं और पाचन प्रणाली तथा मांसपेशियों का कामकाज बेहतर होता है। इसलिए पानी पीकर अपने शरीर से नुकसानदेह चीजों को बाहर कर दें। इसके लिए रोज 10 गिलास तक पानी पीने की आदत डालें। भले ही कुछ लोगों के लिए शुरू में यह मुश्किल होगा, पर यह एक अच्छी आदत है और इसे व्यवहार में लाना चाहिए। आप घर में हों, दफ्तर में या कहीं निकल रहे हों, पानी की बोतल साथ रखें।

चुन सकते हैं पानी का सही विकल्प

ज्यादा कैलरी वाले पेय की खपत कम करने के लिए पानी पिएं। इससे आपका वजन नहीं बढ़ेगा। शीतल पेय में मीठा और अन्य नुकसानदेह पदार्थ होते हैं, जो प्यास बुझाने की आड़ में आपके शरीर का वजन बढ़ा देते हैं। अगर आपको सादा पानी हमेशा पसंद नहीं आता है तो आप कैलरी मुक्त फ्लेवर्ड पानी आजमा सकते हैं, नारियल पानी पी सकते हैं।

खाने से पहले पानी

खाने से पहले पानी पीने से मनुष्य भोजन से जो ऊर्जा प्राप्त करता है, उसमें भारी कमी आती है। इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन द्वारा विकसित एडिक्वेट इनटेक (एआई) के मुताबिक, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और खाद्य पदार्थों में पानी होने से वजन कम करने के प्रयास में सफलता मिलती है। यह संभव है, क्योंकि पानी से कुल एनर्जी इनटेक कम होता है। इससे मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा मिलता है। पानी पीना याद दिलाने के लिए अलार्म लगाएं।

पानी से भरपूर फल व सब्जियां खाएं

पीने के पानी में वृद्धि का संबंध समय के साथ शरीर के वजन में अच्छी-खासी कमी से रहा है। एक अध्ययन में पाया गया कि शारीरिक गतिविधियों और फल व सब्जियों का सेवन वजन कम करने का प्रभावी तरीका है। इसके लिए अपने वजन पर नियमित रूप से नजर रखें। पानी की मात्रा बढ़ाने पर भी अगर रोज नजर रखी जाए, तो अतिरिक्त लाभ हो सकता है।

भूख कम करने के लिए पानी पिएं

भूख और प्यास की व्यवस्था अलग-अलग होती है और इनके नियंत्रण की व्यवस्था भी अलग है। पर अकसर पानी भूख को कम करने का काम प्राकृतिक तौर पर करता है और पानी पीने के बाद आपको भूख कम महसूस होती है। पानी पीने से आपका मन भर जाता है और भूख कम होती है। इससे आप भोजन कम करते हैं, जिसका असर वजन पर दिखता है।

गर्म पानी की जरूरत

वजन कम करने के लिए पीने के पानी के तापमान का अध्ययन किया जा चुका है। सुबह में एक गिलास गुनगुना पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है और मेटाबॉलिक रेट को रफ्तार मिलती है। इससे ज्यादा कैलरी जलती है।

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पिएं

गुनगुना पानी वजन कम करने की गति बढ़ाने में सहायता कर सकता है। इसका कारण यह है कि हमारा शरीर गुनगुने पानी का तापमान कम करके उसे शरीर के तापमान के बराबर करने के लिए काम करता है। इस प्रक्रिया में कुछ कैलरी खर्च हो सकती है। https://www.kanvkanv.com

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