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नियमित योग से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता, सर्दी-जुकाम को भी कर सकते हैं काबू

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नई दिल्ली। यह हम सब जनते हैं कि योग से निरोग रहा जा सकता है। योग सदियों से चली आ रही एक पुरानी परंपरा है। इसके अलावा भी कई रोगों को खत्म करने के लिए योग काफी अहम माना गया है। योग को नियमित करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कौन-कौन से योग करने से बीमारी दूर होगी।

खुद ही खत्म हो जाती है सर्दी, जुकाम

योग का सहारा लेकर सर्दी, जुकाम पर भी काबू पा सकते हैं। वैसे तो सर्दी, जुकाम एक सप्ताह में खुद ही खत्म हो जाती है। कई बार जरूरी सावधानी न बरतने के कारण यह फ्लू, ब्रोंकाइटिस, ब्रोंकोनिमोनिया आदि का रूप भी धारण कर सकती है। सर्दी-जुकाम होने के प्रमुख कारणों में वायरल इन्फेक्शन, मौसम का बदलना, ठंडी हवा का लगना, अनुपयुक्त आहार, व्यायाम का अभाव, मांसपेशियों का शिथिल पडऩा, कब्ज की शिकायत आदि प्रमुख हैं। योग के नियमित अभ्यास से इस समस्या की चपेट में आने से बचा जा सकता है।

योग का करें अभ्यास

योग शरीर और मन, दोनों को संतुलित, समन्वित तथा क्रियाशील रखता है। इसके नियमित अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिसके कारण सर्दी-जुकाम की समस्याओं का सामना कम करना पड़ता है। सर्दी-जुकाम से पीडि़त लोग कुछ सावधानियां बरतकर और तबियत में कुछ सुधार आने के बाद योग का अभ्यास करके जुकाम से छुटकारा पा सकते हैं।

उपवास है बेहतर विकल्प

सर्दी-जुकाम तथा वायरल इन्फेक्शन आदि की स्थिति में यौगिक क्रियाओं का अभ्यास नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में उपवास सबसे बेहतर विकल्प है। उपवास या आहार नियंत्रण द्वारा इस समस्या को पूरी तरह टाला जा सकता है। जैसे ही रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखें, यदि संभव हो तो दिन भर का या एक समय का भोजन त्याग दें। रोग की तीव्रता तुरंत आधी हो जाएगी। साथ में दिन भर हल्के गर्म पानी का सेवन करते रहें। अदरक, काली मिर्च, दालचीनी तथा मेथी की चाय नियमित अंतराल पर पिएं और आराम करें।

यदि बुखार न हो तो नेति-कुंजल का अभ्यास करने से रोग जल्दी ठीक हो जाता है। केवल एक दिन उपवास, पूर्ण विश्राम तथा योगनिद्रा के अभ्यास से सर्दी-जुकाम को ठीक किया जा सकता है। स्वस्थ होने पर यदि कुछ यौगिक क्रियाओं का अभ्यास किया जाए तो रोग के बाद की कमजोरी व पीड़ा को कम तो किया ही जा सकता है, साथ में भविष्य में होने वाले किसी भी रोग की आशंका को भी टाला जा सकता है।

करें ये योगासन

जुकाम ठीक होने के बाद शुरुआत में हल्के आसन जैसे पवनमुक्तासन, वज्रासन, शशांकासन, मेरुवक्रासन, धनुरासन, भुजंगासन आदि का ही अपनी क्षमता को ध्यान में रखते हुए अभ्यास करें। धीरे-धीरे जैसे शरीर की क्षमता में वृद्धि हो, अभ्यास में जानुशिरासन, सुप्त वज्रासन, ताड़ासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, त्रिकोणासन आदि को जोड़ देना चाहिए। यदि सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास किया जाए तो सर्दी-जुकाम, खांसी आदि के साथ-साथ अन्य रोगों की आशंका भी कम हो जाती है।

प्राणायाम है कारगर

जुकाम, खांसी, बुखार (वायरल) के ठीक होने पर सरल कपालभाति तथा नाड़ीशोधन प्राणायाम का अभ्यास करने से कमजोरी, रोग प्रतिरोधक क्षमता, उत्साह एवं स्वास्थ्य में लाभ मिलता है। नियमित प्राणायाम करने से बंद नाक और कफ से होने वाली समस्या में भी राहत मिलती है। योगासन की शुरुआत कर रहे हैं तो विशेषज्ञ की देख-रेख में ही करें।

नाड़ीशोधन प्राणायाम की अभ्यास विधि

सिद्धासन, पद्मासन या सुखासन में रीढ़, गला व सिर को सीधा कर बैठ जाएं। दाईं नासिका को बंद कर बाईं नासिका से गहरी, धीमी व लंबी सांस अंदर लें। उसके बाद बाईं नासिका को बंद कर दाईं नासिका से लंबी-गहरी तथा धीमी सांस बाहर निकालें। इसके तुरंत बाद इसी नासिका से श्वास लेकर बाईं नासिका से प्रश्वास करें। यह नाड़ीशोधन प्राणायाम की एक आवृत्ति है। शुरुआत में 10 आवृत्तियों का अभ्यास करें। धीरे-धीरे इसकी आवृत्तियों की संख्या बढ़ा कर 24 तक कर लें। https://www.kanvkanv.com

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शोध में खुलासा : बच्चों के पेट के जीवाणु फूड एलर्जी से बचाने में मददगार

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न्यूयॉर्क। स्वस्थ्य बच्चों को खाने से होने वाली एलर्जी को बच्चों की आंतोंं में पाए जाने वाले जीवाणु यानि कि बैक्टीरिया बचा सकते हैं। यह बात हम नहीं बल्कि एक शोध में साबित हुआ है। शोधकर्ताओं ने आठ बच्चों पर परीक्षण किया इसमें से चार स्वस्थ थे और चार ऐसे थे जिन्हें गाय के दूध से एलर्जी थी।

आठ बच्चों पर परीक्षण

स्वस्थ बच्चों की आंतों में पाए जाने वाले जीवाणु (बैक्टीरिया) उनको खाने से होने वाली एलर्जी से बचा सकते हैं। यह बात एक हालिया शोध में सामने आई है। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो, आरगॉन नेशनल लेबोरेटरी और इटली स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ नेपल्स फेडेरिको-2 के शोधकर्ताओं ने हाल ही में किए गए एक शोध में पाया कि आंतों में मिलने वाला बैक्टीरिया खाने-पीने से बच्चों को होने वाली एलर्जी से काफी हद तक बचाता है। आठ बच्चों पर परीक्षण किया गया। इनमें से चार स्वस्थ थे और चार ऐसे थे जिन्हें गाय के दूध से एलर्जी थी।

इन बच्चों के पेट के जीवाणुओं को चूहों के समूहों में मल के नमूने के माध्यम से प्रत्यारोपित किया गया। रोगाणु रहित वातावरण में रखे गए चूहे जिन्हें जीवाणु नहीं दिया गया था उनमें भी गंभीर प्रतिक्रिया पाई गई। पर जिनको स्वस्थ्य जीवाणु दिए गए थे वे सुरक्षित पाए गए और उनमें किसी प्रकार की एलर्जी नहीं पाई गई। https://www.kanvkanv.com

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ऐसा करने से दूर होगी गैस की समस्या, ये हैं उपाय

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नई दिल्ली। आज के समय में खान-पान लोगों का गड़बड़ हो रहा है। आजकल लोगों को गैस की समस्या ज्यादा होने लगी है। इसका सबसे बड़ा कारण है भोजन का ठीक से ना पचना। ऐसे में कई लोगों के पाचन मार्ग में गैस जमा हो जाती है। कई लोगों को तो दिन में कई बार यह समस्या होती है। उम्र बढऩे के साथ शरीर में एंजाइम का स्तर कम हो जाता है, इस कारण भी गैस की समस्या बढ़ जाती है।
गैस प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में बनती है। यह शरीर से बाहर या तो डकार द्वारा या गुदा मार्ग के द्वारा निकलती है। अधिकतर लोगों के शरीर में 1 से 4 पॉइन्ट गैस उत्पन्न होती है और एक दिन में एक सामान्य व्यक्ति कम से कम 14 से 23 बार गैस पास करता है। जिनकी पाचन शक्ति अकसर खराब रहती है और जो प्राय: कब्ज के शिकार रहते हैं, उनमें गैस की समस्या अधिक होती है।

कारण हैं अनेक

वसा और प्रोटीन युक्त भोजन की तुलना में कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन ज्यादा गैस बनाते हैं।
कब्ज से गैस बनती है, क्योंकि जितने लंबे समय तक भोजन बड़ी आंत में रहेगा, उतनी ज्यादा गैस बनेगी।
जल्दी-जल्दी खाने या पीने से ज्यादा हवा अंदर चली जाती है, जो गैस का कारण बनती है।
च्युइंग गम चबाने और धूम्रपान करने से भी हवा की काफी मात्रा पेट में चली जाती है।
उम्र बढऩे के साथ शरीर में एंजाइमों का स्तर कम हो जाना, गैस का कारण बनता है।
शारीरिक निष्क्रियता भी गैस का कारण बनती है।
कैफीन (चाय, कॉफी, कैफीन युक्त ड्रिंक्स आदि) का अधिक मात्रा में सेवन गैस बनाता है।
आवश्यकता से अधिक कैलरी का सेवन।
तले-भुने भोजन का अधिक मात्रा में सेवन।
दो भोजन के बीच लंबा अंतर रखना।
लक्षणों को जानें
पेट में गैस बनने के सबसे आम लक्षण हैं- पेट फूलना, पेट में दर्द होना, डकार आना और गैस पास करना। कारणों को समझकर इसका उपचार किया जा सकता है।
डकार लेना
जो लोग खाने के दौरान या बाद में डकार लेते हैं, वे खाने के दौरान ज्यादा मात्रा में हवा निगल रहे होते हैं। ज्यादा डकार का कारण पाचन तंत्र के ऊपरी भाग में पेप्टिक अल्सर जैसी समस्याएं होना भी हो सकता है।
फ्लैटुलेंस
इसे सामान्य भाषा में गैस पास करना कहते हैं। अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि एक दिन में 14 से 23 बार गैस पास करना सामान्य बात है। अधिक गैस बनना कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण नहीं होने का संकेत है।
पेट फूलना
पेट गैस की वजह से या बड़ी आंत के कैंसर या हर्निया के कारण भी फूल सकता है। ज्यादा वसायुक्त भोजन करने से पेट देर से खाली होता है। इससे भी पेट फूल जाता है और बेचैनी होती है। किसी अंग का आकार बढऩे से भी पेट फूल सकता है।
पेट दर्द
जब आंत में गैस मौजूद होती है, तब कुछ लोगों को पेट दर्द होता है। जब बड़ी आंत की दायीं ओर दर्द होता है, तो इससे हृदय रोग का भ्रम होता है, लेकिन जब दर्द दायीं ओर होता है, तो यह अपेन्डिक्स हो सकता है।
इन्हें खाने से ज्यादा गैस बनती है
सब्जियां जैसे ब्रोकली, पत्तागोभी, फूलगोभी, प्याज।
फल जैसे नाशपाति, सेब, केला और आड़ू।
साबुत अनाज जैसे गेहूं।

सॉफ्ट ड्रिंक्स और फलों का जूस।
दूध और दूध से बने उत्पाद आदि।
मटर, ब्रेड, सलाद, फलियां।

गैस से बचने के उपाय

कार्बोनेटेड ड्रिंक और वाइन न पिएं, क्योंकि ये कार्बन डाई ऑक्साइड रिलीज करते हैं।
पाइप के द्वारा कोई चीज न पिएं, सीधे गिलास से पिएं।
अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन न करें।
तनाव भी गैस बनने का एक प्रमुख कारण है, इसलिए तनाव से दूर रहने की कोशिश करें।
कब्ज भी इसका एक कारण हो सकता है।
खाने को चबाकर खाएं। दिन में तीन बार मेगा मील खाने की बचाय कुछ-कुछ घंटों के अंतराल पर मिनी मील खाएं।
खाने के तुरंत बाद न सोएं। थोड़ी देर टहलें। इससे पाचन भी ठीक होगा और पेट भी नहीं फूलेगा।
अपनी बायोलॉजिकल घड़ी को दुरुस्त रखने के लिए एक निश्चित समय पर खाना खाएं।
जिन लोगों में लैक्टोस से यह समस्या होती है, वह दूध और दूध से बने उत्पाद न लें या कम लें।
मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करें।
अधिक रेशेयुक्त भोजन के साथ अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें।
खाना पकाते समय सरसों, इलाइची, जीरा और हल्दी का उपयोग करें। इससे गैस कम मात्रा में बनती है।
शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।

घर में हैं उपचार

अगर आपको गैस की समस्या है तो आप रोज आधा चम्मच अजवाइन को पानी के साथ ले लें। इसमें थायमोल नामक तत्व होता है, जो पाचक रस उत्पन्न करता है।
जीरे के पानी का सेवन गैस की समस्या का सामान्य उपचार माना जाता है। इसमें अति आवश्यक तेल होते हैं, जो लार ग्रंथियों को उत्तेजित कर पाचन में सहायता करते हैं।
अगर आप लगातार गैस की समस्या से परेशान हैं तो रोजाना खाने के बाद एक चम्मच अदरक के रस में एक चम्मच नीबू का रस मिलाकर ले लें।
गैस के कारण पेट फूल रहा हो तो आधा चम्मच हींग पाउडर को गुनगुने पानी के साथ लें, तुरंत आराम मिलेगा।
आधा चम्मच त्रिफला पाउडर को पानी में डालकर 5 से 10 मिनट उबाल लें। इसे रात में सोने के पहले पी लें, गैस और पेट फूलने से आराम मिलेगा। ध्यान रखें, इसे अधिक मात्रा में न लें, क्योंकि इससे पेट फूलने की समस्या बढ़ सकती है।
लहसुन पाचन की प्रक्रिया को बढ़ाता है और गैस की समस्या को कम करता है। भोजन में इसे जरूर शामिल करें।
दही को अपने डाइट चार्ट में जरूर शामिल करें।
लंबे समय से गैस से पीडि़त हैं तो रोज लहसुन की तीन कलियों और अदरक के कुछ टुकड़ों को खाली पेट खाएं।
पुदीना खाएं। इससे पाचनतंत्र ठीक रहेगा।

गैस की समस्या से बचने के लिए

अपना औसत भार बनाये रखें।
लगातार कई घंटों तक ना बैठें। हर एक घंटे में कुछ मिनट का ब्रेक लें।
लंच करने के बाद थोड़ी देर टहल लें।
लिफ्ट के बजाय सीढिय़ों का प्रयोग करें।
खाना खाने के बाद एक गिलास नीबू पानी पी लें या एक छोटे टिफिन बॉक्स में थोड़ा पपीता काटकर ले जाएं और इसे खाने के बाद खा लें, गैस नहीं बनेगी।
गैस अधिक मात्रा में बन रही हो तो पानी का सेवन अधिक करें।

गैस के कारण पेट फूल रहा है तो एक कप चाय या कॉफी पी लें।

गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत तो नहीं

हालांकि गैस एक अति गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन यह पाचन तंत्र से संबंधित गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकती है।

कब्ज की समस्या।
फूड एलर्जी की समस्या।
अपच की समस्या।
इरीटेबल बॉउल सिंड्रोम (आईबीएस) की समस्या।
किडनी या गॉल ब्लैडर की पथरी की समस्या।
गॉल ब्लैडर की सूजन।
अपेन्डिक्स की समस्या।
कोलन कैंसर की समस्या।

उपरोक्त अधिकतर मामलों में गैस और पेट फूलने के अतिरिक्त अन्य और भी कई लक्षण दिखाई देते हैं। अगर ऐसी कोई समस्या है तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें या विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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मोटापा है सबसे बड़ी समस्या, अब आजमाएं ये तरीका

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नई दिल्ली। दुनिया में मोटापा एक गंभीर समस्या के रूप में फैलता जा रहा है। समय-समय पर इसके लिए जागरुकता लाने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। कार्यक्रम में मोटापे से होने वाली बीमारी, रोकथाम, मोटापे के कारण, पोषण व व्यायाम की जरूरतों के बारे में जानकारी दी जाती है। इस बार कार्यक्रम कर आयोजन नोएडा स्थित जेपी मल्टी सुपर-स्पेशियालिटी हॉस्पिटल ने किया था।

10 मुख्य जोखिमों में से एक मोटापा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मोटापे को स्वास्थ्य के 10 मुख्य जोखिमों में से एक बताया है। 23 फीसदी से अधिक महिलाएं या तो मोटापे की शिकार हैं या उनका वजन सामान्य से कम है। यह दर पुरुषों (20 फीसदी) की तुलना में अधिक है। मोटापे के बारे में बात करते हुए जेपी हॉस्पिटल के जीआई एंड हेपेटोपेन्क्रिएटोबाइलरी सर्जरी विभाग के निदेशक ने कहा, भारत में ओबेसिटी 21वीं सदी में लगभग महामारी का रूप लेती जा रही है। देश की पांच फीसदी आबादी गंभीर मोटापे की शिकार है। भारत में मोटापे की समस्या आज चीन और अमेरिका के आंकड़ों को भी पार कर चुकी है।

यह हैं कारण

मोटापे के सबसे मुख्य कारण हैं खाने-पीने की गलत आदतें, गतिहीन जीवनशैली, नींद की कमी और तनाव आदि। शारीरिक व्यायाम की कमी और सुस्ती के चलते भारत में मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, मोटापे के कारण शरीर में कुछ हॉर्मोन और अतिरिक्त वसा का निर्माण होने लगता है जो डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, डिसलिपिडेमिया, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया, प्राइमरी स्टर्लिटी जैसी कई बीमारियों का कारण हो सकता है।

इन रोगों की संभावना

इनसे दिल की बीमारियों (हार्ट अटैक, स्ट्रोक) और कई प्रकार के कैंसर (स्तन, अंडाशय, गर्भाशय, अग्नाशय) तथा गुर्दा संबंधित रोगों की संभावना बढ़ जाती है। इससे पहले कि मोटापे के कारण कई बीमारियां आपको जकड़ लें, सर्जरी के विकल्प पर विचार करना चाहिए। सेहतमंद आहार के महत्व पर बात करते हुए जेपी हॉस्पिटल की बेरिएट्रिक काउंसलर एवं न्यूट्रीशनिस्ट श्रुति शर्मा ने कहा, मोटापा भारत में एक बड़ी समस्या बन चुका है।

ऐसा करें

कम कैलोरी एवं पोषक पदार्थों से युक्त आहार का सेवन करने से वजन घटाने में मदद मिलती है। सेहतमंद भारतीय आहार में दालें, अनाज, सब्जियां, फल, डेयरी उत्पाद और मसाले शामिल हैं। पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें तथा चीनी से युक्त पेय पदार्थों जैसे फलों के रस और पेय पदार्थो का सेवन सीमित मात्रा में करें।

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