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पार्किंसंस बीमारी में शरीर खोने लगता है संतुलन, जानें इसके लक्षण

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नई दिल्ली। 11 अप्रैल को विश्व पार्किंसंस डे मनाया जाता है। इस बीमारी में मरीज को चलने-फिरने और दैनिक काम प्रभावित हो जाते हैं। हालांकि इसे सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है। इस लेख में हम आपको इसके कुछ कारणों के बारे में बताएंगे। अगर आपको भी ऐसा कुछ महसूस हो तो आप तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

सटीक कारणों का अब तक पता नहीं

पार्किंसंस की बीमारी तंत्रिका तंत्र से संबंधित बीमारी है। इसे प्रोग्रेसिव डिसऑर्डर कहा जाता है क्योंकि यह धीरे-धीरे बढ़ता है। इस बीमारी के सटीक कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है, मगर कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में इसके लिए आनुवांशिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया गया है। अब तक हुए अध्ययनों में कहा गया है कि पार्किंसंस की बीमारी तब होती है जब दिमाग में न्यूरॉन्स नाम की कुछ नर्व सेल्स धीरे-धीरे कम या मृत होने लगती हैं।

सावधान होने की जरूरत

1. आराम से बैठे-बैठे अचानक हाथों में कंपन्न महसूस होने लगे तो सावधान होने की जरूरत है। यह कंपन्न शुरुआत में धीरे-धीरे होता और समय के साथ बढऩे लगता है।
2. चलते-चलते अचानक झटका लगना और संतुलन खो जाना भी पार्किंसंस बीमारी का लक्षण है। इसमें कई बार संतुलन न रहने से पीडि़त व्यक्ति अचानक गिर भी जाते हैं।
3. सामान्य बातचीत में अचानक आवाज धीमी हो जाना या आवाज कांपने लगना, हकलाना या बोलते-बोलते लडख़ड़ाने लगना भी इसका एक लक्षण है।
4. इसके अन्य लक्षणों में पीडि़त व्यक्ति के मुंह से लार अधिक बहने लगती है। उसे खाना खाने और निगलने में तकलीफ होने लगती है। ऐसे लोगों को पेशाब रुक-रुककर होती है।
5. पार्किंसंस प्रभावित व्यक्ति का चेहरा अचानक से भाव शून्य हो जाता है और उसकी आंखें चौड़ी हो जाती हैं, मानो वह किसी को घूर रहा हो। ऐसे लोगों को पसीना भी बहुत अधिक आने लगता है। https://www.kanvkanv.com
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हेल्थ

एंटीबायोटिक लेने से पहले करें डॉक्टर से संपर्क, नहीं तो हो सकते हैं ये नुकसान

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नई दिल्ली। दर्द निवारक और एंटीबायोटिक्स खाने वाले संभल जाएं। ऐसा करना आपको गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है। ऐसे लोग मुसीबतों को दावत दे रहे हैं। आमतौर पर देखा जाता है कि सर्दी, जुकाम होते ही लोग मेडिकल स्टोर जाकर दवा ले लेते हैं। जल्दी आराम मिल जाए इसके लिए दर्द निवारक और एंटीबायोटिक्स को डोज परोस दिया जाता है। आप इस बात का ध्यान दें कि खांसी, जुकाम, बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

कई मुसीबतों की वजह

इसके अलावा मुर्गियों को बीमारियों से बचाने के लिये एंटीबायोटिक दवाइयों से युक्त दानों का बढ़ता प्रचलन भी आम जीवन के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। चिकन के सेवन से एंटीबायोटिक लोगों के शरीर में अपनी जगह बना रहे है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं। केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) में मेडीसिन विशेषज्ञ डॉ. अरूण कृष्णा ने बताया कि फौरन राहत के लिए एंटीबायोटिक्स दवाओं को धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है जो भविष्य में कई मुसीबतों की वजह बन सकती है।

यह जरूरी बात

उन्होंने कहा कि देश में लचर कानून भी एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक दवाओं के बढ़ते प्रचलन के लिए जिम्मेदार है। दरअसल, कुछ एक दवाओं को छोड़कर मेडिकल स्टोर संचालक दवाइयों की बिक्री बगैर चिकित्सीय परामर्श के नहीं कर सकता है मगर अधिसंख्य शहरों में मेडिकल स्टोर संचालक डॉक्टरों की तरह मरीजों को दवायें दे रहे हैं जिससे ना सिर्फ मरीजों की जान जोखिम में है बल्कि इसकी आड़ में कई जटिल रोगों को बढ़ावा मिल रहा है। https://www.kanvkanv.com

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हेल्थ

दिल को रखना चाहते हैं तंदुरुस्त, तो बचें मोटापे से, करें ये उपाय

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नई दिल्ली। वसायुक्त यकृत (फैटी लिवर) एक ऐसा विकार है जो वसा के बहुत ज्यादा बनने के कारण होता है, जिससे आपके जिगर का क्षय हो सकता है। वर्ष 2019-2018 की तुलना में इस साल गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) के मामलों में वृद्धि हुई है। हालांकि, अभी तक कोई निश्चित आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि वे हर महीने कम से कम 10 से 12 नए मामले देख रहे हैं जो हर आयु वर्ग के हैं।

इसे एक ‘मौन हत्यारे’ के रूप में जाना जाता है

सभी प्रकार के एनएएफएलडी घातक नहीं हैं, लेकिन इनकी अनदेखी आगे चलकर परेशानी का सबब बन सकती है। एक बार पता लगने के बाद, रोगी को यह जानने के लिए आगे के परीक्षणों से गुजरना होता है कि जिगर में जख्म या सूजन तो नहीं है। जिगर की सूजन के लगभग 20 प्रतिशत मामलों में सिरोसिस विकसित होने की संभावना होती है। इसे एक ‘मौन हत्यारे’ के रूप में जाना जाता है। जब तक स्थति में प्रगति न हो, तब तक लक्षणों की स्पष्ट कमी होती है।

स्वस्थ जिगर में कम या बिल्कुल भी वसा नहीं होना चाहिए

डाक्टरों का कहना है कि एनएएफएलडी में यकृत की अनेक दशाओं को शामिल माना जाता है, जो ऐसे लोगों को प्रभावित करती हैं जो शराब नहीं पीते हैं। जैसा कि नाम से पता चलता है, इस स्थिति की मुख्य विशेषता यकृत कोशिकाओं में बहुत अधिक वसा का जमा होना है। एक स्वस्थ जिगर में कम या बिल्कुल भी वसा नहीं होना चाहिए।

सिरोसिस यकृत की चोट की प्रतिक्रिया में होता

डाक्टरों ने कहा, “एनएएफएलडी की मुख्य जटिलता सिरोसिस है, जो यकृत में देर से पड़ने वाले निशान (फाइब्रोसिस) हैं। सिरोसिस यकृत की चोट की प्रतिक्रिया में होता है, जैसे कि नॉनक्लॉजिक स्टीटोहेपेटाइटिस में जिगर सूजन को रोकने की कोशिश करता है, और इसके लिए यह स्कारिंग क्षेत्रों (फाइब्रोसिस) को उत्पन्न करता है। निरंतर सूजन के साथ, फाइब्रोसिस अधिक से अधिक यकृत ऊतक ग्रहण करने के लिए फैलता है।

ये हैं संकेत

डाक्टरों ने कहा कि इस स्थिति के कुछ संकेतों और लक्षणों में बढ़ा हुआ जिगर, थकान और ऊपरी दाएं पेट में दर्द शामिल हैं। जब यह सिरोसिस की ओर बढ़ता है, तो यह जलोदर, बढ़ी हुई वाहिकाओं, तिल्ली, लाल हथेलियों और पीलिया का कारण बन सकता है। एनएएफएलडी वाले लोगों में हृदय रोग विकसित होने की अधिक संभावना रहती है और यह उनमें मृत्यु के सबसे आम कारणों में से एक है। वजन में लगभग 10 प्रतिशत की कमी लाने से वसायुक्त यकृत और सूजन में सुधार हो सकता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, दालचीनी अपने एंटीऑक्सिडेंट और इंसुलिन-सेंसिटाइजर गुणों के कारण लिपिड प्रोफाइल और एनएएफएलडी को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

कुछ सुझाव

  1. फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा से भरपूर वनस्पति आधारित आहार का सेवन करें।
  2. यदि आप अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, तो प्रत्येक दिन खाने वाली कैलोरी की संख्या कम करें और अधिक व्यायाम करें। यदि आपका स्वस्थ वजन है, तो स्वस्थ आहार का चयन करके और व्यायाम करके इसे बनाए रखने के लिए काम करें।
  3. सप्ताह के अधिकांश दिनों में व्यायाम करें। हर दिन कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि करने की कोशिश करें। https://www.kanvkanv.com
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सुबह नाश्ता न करना और देर रात में भोजन हानिकारक, होती हैं ये गंभीर बीमारियां, ऐसे करें बचाव

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नई दिल्ली। जो लोग सुबह के समय नाश्ता नहीं करते और रात का खाना बहुत देर से खाते हैं, उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद बदतर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। एक शोध रिपोर्ट के आधार पर ऐसी चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भोजन संबंधी इन दो आदतों वाले लोगों में दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के 30 दिनों के भीतर चार से पांच बार मौत के करीब चले जाने, एक और दिल का दौरा, या एनजाइना (सीने में दर्द) पाया गया। रिपोर्ट में रात के खाने और सोने के बीच न्यूनतम दो घंटे का अंतराल रखने की भी सलाह दी गई है।

डाक्टरों का कहना है कि भारतीयों में पेट के चारों ओर अधिक वसा एकत्र होने की प्रवृत्ति होती है, जिससे इंसुलिन प्रतिरोध हो सकता है। इसका एक प्रमुख कारण आज की जीवनशैली है। उन्होंने कहा, “ऑन-द-गो और तेज रफ्तार जीवन का मतलब है कि लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं और दिन के शेष समय अस्वास्थ्यकर, क्विक-फिक्स भोजन खाते हैं।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि नियमित रूप से मध्यम तीव्रता के व्यायाम के साथ संयुक्त शरीर के वजन में 5 प्रतिशत की कमी भी टाइप-2 मधुमेह के जोखिम को 50 प्रतिशत से अधिक कम कर सकती है। मधुमेह के बिना या इस स्थिति के विकास के जोखिम के लिए एक स्वस्थ जीवन शैली की ओर स्विच करने और एक आदर्श बीएमआई बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

वजन से मधुमेह

डाक्टरों का कहना है कि आहार एक व्यक्ति के वजन से स्वतंत्र मधुमेह के जोखिम को प्रभावित करता है। टाइप-2 मधुमेह को एक ‘साइलेंट किलर’ के रूप में जाना जाता है। जब तक इसका निदान किया जाता है, तब तक अन्य संबंधित स्वास्थ्य जटिलताएं पहले से मौजूद हो सकती हैं।

मोटे लोग रखें विशेष ध्यान

जो लोग मोटे होते हैं, उन्हें जटिल कार्बोहाइड्रेट के सेवन को सीमित करने का लक्ष्य रखना चाहिए, क्योंकि वे रक्त-शर्करा के स्तर और इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाते हैं। इंसुलिन प्रतिरोध वाले लोगों में, इस वृद्धि से आगे वजन बढ़ सकता है। इसके अलावा, हर दिन लगभग 30 से 45 मिनट शारीरिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखें, सप्ताह में पांच बार।”

कुछ सुझाव

  1. हर दिन व्यायाम करें और स्वस्थ आहार का सेवन करें।
  2. नियमित अंतराल पर अपने रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी करें।
  3. किसी भी रूप में परिष्कृत चीनी का सेवन न करें, क्योंकि यह रक्त प्रवाह में अधिक आसानी से
  4. अवशोषित हो सकता है और आगे की जटिलताओं का कारण बन सकता है।
  5. ध्यान और योग जैसी गतिविधियों के माध्यम से तनाव को कम करें। https://www.kanvkanv.com
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