किशोरावस्था और गर्भावस्था में सबसे अधिक रहती है एनीमिया होने की संभावना

– लौह तत्वयुक्त चीजों और विटामिन ए एवं सी युक्त खाद्य पदार्थ का करें सेवन 
नई दिल्ली । किशोरावस्था और गर्भावस्था में के दौर में एनीमिया का शिकार रहने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। एनीमिया होने का सबसे मुख्य और बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी होना है। इससे बचाव के लिए उचित पोषण का बेहद जरूरी है। आहार में बदलाव ही इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे सरल उपाय है।
यह बीमारी खून में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या होमोग्लोबीन कम होने से होता है। लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराएं और चिकित्सा परामर्श का पालन करें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत खड़ा कर सकती है। इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। ऐसे में समय पर जांच के लिए अस्पताल जाने एवं चिकित्सकों के सलाह का पालन करना चाहिए। जो आगे समस्या उत्पन्न नहीं होने देगी एवं आपके लिए ना सिर्फ फायदेमंद साबित होगा, बल्कि बीमारी से छुटकारा भी दिला सकता है।
आयरनयुक्त भोजन का करें सेवन-
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विरेश्वर प्रसाद ने बताया कि आयरन की कमी के कारण एनीमिया होता है। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आहार बदलने एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करने से बचाव होगा। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही जान पर भारी सकती है।
ये हैं एनीमिया के लक्षण-
एनीमिया बीमारी का शुरूआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द, त्वचा सफेद दिखना आदि कमी होना है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराएं।
प्रोटीनयुक्त खाने का करें सेवन-
एनीमिया के दौरान प्रोटीन युक्त खाने का सेवन करें। जैसे कि पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूंगफली, मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें। जो कि आपके शरीर की कमी को पूरा करता है एवं होमोग्लोबीन जैसी कमी भी दुर होता है। एनीमिया से बचाव के लौह तत्वयुक्त चीजों का सेवन करें। सब्जी भी लोहे की ही कढ़ाई में बनाएं। लोहे के कढ़ाई में सब्जी बनाने से आयरन की मात्रा काफी बढ़ जाती है।
चिकित्सकों के सलाह का करें पालन-
एनीमिया के दौरान आप तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से दिखाएं एवं चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक जांच कराएं। जिसके बाद चिकित्सकों द्वारा दी गई आवश्यक चिकित्सा परामर्श का पालन करें। जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।
गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ख्याल-
यह बीमारी महिलाओं में अधिक पाई जाती है। खासकर गर्भवती महिलाओं को गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए शरीर में रक्त का निर्माण करना पड़ता है। जिसमें कमी होने के कारण एनीमिया होने की प्रबल संभावना हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान लगातार होमोग्लोबीन समेत अन्य आवश्यक जांच चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।