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पांच करोड़ से ज्यादा लोग मिर्गी के शिकार, प्राकृतिक तरीके से पाएं उपचार

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नई दिल्ली। आज हम एक ऐसी बीमारी के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिसे लोग दैवीय आपदा मानते हैं। ऐसे बीमारी से ग्रसित लोगों को समाज में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि ऐसे लोग ठीक नहीं हो सकते हैं बिल्कुल ठीक हो सकते हैं और अन्य लोगों की तरह ही जीवन व्यतीत कर कसते हैं।

प्राकृतिक उपाय

मिर्गी रोग दिमाग में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी यानी विद्युत प्रवाह की गड़बड़ी के कारण होता है। यदि किसी व्यक्ति का मस्तिष्क ठीक ढंग से कार्य न कर पा रहा हो, तो व्यक्ति को मिर्गी का रोग हो सकता है। कई प्राकृतिक उपायों द्वारा इस पर काबू पाया जा सकता है। दुनिया भर में पांच करोड़ से ज्यादा लोग मिर्गी के शिकार हैं और यह समस्या लगातार बढ़ रही है। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में मिर्गी की बीमारी आम है।

न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है कारण

मिर्गी न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर के कारण होता है। मिर्गी का रोग व्यक्ति के द्वारा अत्यधिक नशीले पदार्थों का सेवन करने, मस्तिष्क में गहरी चोट लगने या मानसिक सदमा लगने के कारण भी हो सकता है। ये बीमारी मस्तिष्क के विकार के कारण होती है। मिर्गी का दौरा पडऩे पर शरीर अकड़ जाता है, जिसे अंग्रेजी में सीजर डिसॉर्डर भी कहते हैं।

व्याप्त हैं भ्रांतियां

अपोलो हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मुकुल वर्मा कहते हैं कि इस बीमारी को लेकर लोगों के मन में कई गलत धारणाएं हैं जिस कारण इसका सही तरह से इलाज नहीं हो पाता। लोग मिर्गी के मरीज को पागल ही समझ लेते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो लोग इस बीमारी को भूत-प्रेत का साया समझते हैं। सबसे जरूरी है इन भ्रांतियों को दूर करना।

खानपान पर हो नियंत्रण

रोगी की जीवनशैली में बदलाव करने से इस रोग पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। एक शोध के अनुसार, मिर्गी के रोगी को ज्यादा फैट वाला और कम कार्बोहाइड्रेड वाला खाना लेना चाहिए। इससे सीजर पडऩे के अंतराल में कमी आती है। शांत और आरामदेह वातावरण में रहते हुए नियंत्रित भोजन व्यवस्था अपनाना बहुत जरूरी है। भोजन भर पेट लेने से बचना चाहिए। थोड़ा-थोड़ा भोजन कई बार ले सकते हैं। रोगी को सप्ताह में एक दिन सिर्फ फलों का आहार करना चाहिए। थोड़ा व्यायाम करना भी जीवनशैली का भाग होना चाहिए।

बहुपयोगी है तुलसी

तुलसी के पत्तों को पीसकर शरीर पर मलने से मिर्गी के रोगी को लाभ होता है। तुलसी की पत्तियों के साथ कपूर सुंघाने से मिर्गी के रोगी को होश आ जाता है। रोजाना तुलसी के 20 पत्ते चबाकर खाने से रोग की गंभीरता में गिरावट देखी जाती है।

असरकारी नीबू

मिर्गी की बीमारी से राहत पाने के लिए एक नीबू पर थोड़ा-सा हींग का पाउडर छिड़ककर इसे चूसें। नीबू में हींग पाउडर या गोरखमुंडी मिलाकर रोजाना चूसने से कुछ ही दिनों में मिर्गी के दौरे आने बंद हो जाएंगे।

इन उपायों को भी आजमाएं

अंगूर का रस प्रात: काल खाली पेट लेना चाहिए। यह उपचार करीब छह माह करने से सुखद परिणाम मिलते हैं।
एप्सम साल्ट (मैग्नीशियम सल्फेट) मिश्रित पानी से रोगी को स्नान करना चाहिए।
गीली मिट्टी को रोगी के पूरे शरीर पर लगाना अत्यंत लाभकारी उपचार है।
मिर्गी रोगी को 250 ग्राम बकरी के दूध में 50 ग्राम मेहंदी के पत्तों का रस मिलाकर दो सप्ताह तक सुबह के समय पीने से दौरे बंद हो जाते हैं।
पेठे का जूस नियमित पीने से ज्यादा लाभ होता है। रस में शक्कर और मुलहटी का पाउडर भी मिलाया जा सकता है।
गाय के दूध से बनाया हुआ मक्खन मिर्गी में फायदा पहुंचाता है।
राई पीसकर चूर्ण बना लें। जब रोगी को दौरा पड़े, तो सुंघा दें, बेहोशी दूर हो जाएगी।
सेब का जूस पीने से भी लाभ होता है।

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हीट स्ट्रोक से जुड़े मिथक और हकीकत को जानें, शरीर देता है ये संकेत

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नई दिल्ली। भीषण गर्मी में हीट स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में आपका शरीर कई संकेत भी देता है। समाज में ऐसे कई मिथक हैं जो आपके शरीर में हीट स्ट्रोक के लिए कठिनाइयां खड़ी कर कते हैं। इस लेख में हम आपको समाज में फैले हुए मिथक और उससे निजात पाने की जानकारी देंगे।

साइलेंट किलर होता है हीट स्ट्रोक

मिथक : हीट स्ट्रोक के पहले हमेशा चेतावनी वाले संकेत दिखाई देते हैं।
हकीकत : 80 प्रतिशत मामलों में हीट स्ट्रोक के स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे जी मिचलाना, शरीर के तापमान में अत्यधिक बढ़ोतरी, उल्टी होना, थकान, सिरदर्द आदि। लेकिन 20 प्रतिशत मामलों में हीट स्ट्रोक साइलेंट किलर होता है। कई लोगों में कुछ न्यूरोटिक लक्षण भी दिखाई देते हैं, जैसे मानसिक संतुलन गड़बड़ा जाना, भ्रम आदि। अधिकतर लोगों में डीहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है, लेकिन सबको ऐसा हो, बिल्कुल जरूरी नहीं है।

घातक कदम

मिथक : अगर आपको ऐसा लगे कि तपती गर्मी में आप बेहोश हो जाएंगे, तो पूल में छलांग लगा लें।
हकीकत : झुलसा देने वाली गर्मी से बचने के लिए पूल में कूद जाना या ठंडे पानी से भरी हुई पूरी बाल्टी को अपने ऊपर डाल लेना किसी को भी लुभा सकता है, लेकिन यह एक घातक कदम हो सकता है। इससे हीट स्ट्रोक की आशंका बढ़ सकती है। तेज गर्मी से आने के बाद तुरंत न नहाएं। पहले अपना पसीना पोंछे और थोड़ी देर खुद को पंखे में ठंडा करें, उसके बाद ही नहाएं।

बरतने की जरूरत होती है विशेष सावधानी

मिथक : सभी उम्र के लोगों को हीट स्ट्रोक का खतरा समान होता है।
हकीकत : नहीं, सभी लोगों को हीट स्ट्रोक का खतरा समान नहीं होता। 12 साल से छोटे बच्चों और 60 साल से बड़े बुजुर्गों में इसकी चपेट में आने की आशंका अधिक होती है। इसलिए इन्हें हीट स्ट्रोक से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

सूर्य की तेज किरणें अधिक प्रभावित करती हैं

हकीकत : कुछ मामलों में यह सही है, लेकिन कई लोग काफी देर तक लगातार धूप में काम करने के बाद भी हीट स्ट्रोक की चपेट में नहीं आते। हीट के प्रति आपका शरीर कितना प्रतिरोध (रेजिस्टेंट) दिखाता है, यह अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अलग-अलग हो सकता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सूर्य की तेज किरणें अधिक प्रभावित करती हैं। इसके अलावा जो लोग डायबिटीज, हृदय और फेफड़ों के रोगों से पीडि़त होते हैं, उनके भी इसकी चपेट में आने का खतरा अधिक होता है। जो लोग एसी में अधिक समय बिताते हैं, उनके अचानक हीट स्ट्रोक की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है। इस बात का भी ध्यान रखें कि एसी से धूप में न निकलें और धूप से तुरंत एसी में न जाएं।

बाहरी कारणों से शरीर में गर्मी बढ़ती है

मिथक : हीट स्ट्रोक और बुखार समान ही है।
हकीकत : हीट स्ट्रोक और बुखार दो अलग-अलग चिकित्सकीय स्थितियां हैं, क्योंकि हीट स्ट्रोक में बाहरी कारणों से शरीर में गर्मी बढ़ती है, जबकि बुखार में संक्रमण से लडऩे के कारण शरीर का ताप बढ़ जाता है। https://www.kanvkanv.com

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पर्याप्त पोषण के लिए करें इन चीजों का सेवन, होता है सबसे ज्यादा प्रोटीन, ऐसे रखें अपने शरीर को फिट

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नई दिल्ली। हर उम्र में लोगों को पोषणा की जरूरत होती है और जब शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो उसमें तमाम तरह के विकार आने लगते हैं, जो शारीरिक व मानसिक परेशानियों का कारण बनते हैं।

पोषक तत्वों से न सिर्फ हमारा शरीर मजबूत होता है, बल्कि इससे बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है। इसके लिए जरूरी है कि इस बात का आकलन किया जाए कि सही और पर्याप्त भोजन ले रहे हैं या नहीं।

पोषण की कमी का खामियाजा सबसे अधिक बच्चे भुगतते हैं

नेशनल सेंटर फार बायोटेक्नॉलॉजी इंफोर्मेशन (एनसीबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, पोषण की कमी का खामियाजा सबसे अधिक बच्चे भुगतते हैं, क्योंकि अपर्याप्त पोषण के कारण विकासशील देशों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में से 45 फीसदी की मौत हो जाती है।

एक आम आदमी के लिए इस बात का आकलन काफी कठिन होता है कि उसे क्या खाना है और कितना खाना है। ऐसे कई साधन हैं, जिनके माध्यम से कोई भी यह जान सकता है कि उसे कब, क्या और कितना खाना है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, पोषण की कमी के कारण शरीर कमजोर होता है और इस कारण बीमारियों का हमला होता है और ऐसे में दुनियाभर में हर साल करीब 60 लाख बच्चों की मौत हो जाती है।

दूध और अंडे में ज्यादा प्रोटीन

आपको अपने शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए दैनिक आधार पर कुछ तय चीजें खानी होंगी। प्रोटीन हमारे प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत रखते हैं। दुग्ध उत्पादों और अंडों में प्रोटीन होता है। इन्हें अपने भोजन में हर हाल में शामिल करना चाहिए।

बीमारी फैलाने वाले कारकों से बचने के लिए विटामिन सी, ई और बेटा-कारोटीन की हमें जरूरत होती है और इसी कारण इन्हें अपने भोजन में शामिल करना जरूरी है। उन्होंने कहा, “एंटीआक्सीडेंट्स एक तरह के माइक्रोन्यूट्रीएंट्स होते हैं और ये हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। वे खाद्य पदार्थो को विशेष रूप से ऑक्सीकरण और खराब होने से रोकते हैं। इनके अलावा कुछ अन्य खाद्य पदार्थ भी हैं, जिनका सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए।

सप्ताह में 5 दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए, पानी भी पीएं

हर व्यक्ति को रोजाना 4-5 लीटर पानी पीना चाहए। ऊर्जा के लिए किलोजूल (विशेष रूप से काबोर्हाइड्रेट), जैतून के तेल, मछली, नट्स, एवोकैडो और फैटी एसिड युक्त भोजन लेना चाहिए। वसा में घुलनशील और पानी में घुलनशील विटामिन, आवश्यक खनिज जैसे लोहा, कैल्शियम, और जस्ता, पौधों से प्राप्त फाइटोकेमिकल्स (वे हृदय रोगों, मधुमेह, कैंसर, गठिया, और ऑस्टियोपोरोसिस से सुरक्षा प्रदान करते हैं) और फल, सब्जियों का एक विविध आहार समावेशी अनाज, फलियां, और दुबला मांस अनिवार्य है।

जब हम जीवन के विभिन्न चरणों (शिशु से युवाओं को गर्भावस्था से लेकर रजोनिवृत्ति तक) में जाते हैं तो हमारे शरीर की पोषण संबंधी आवश्यकताएं बदल जाती हैं।  उन्होंने कहा, “हमारे आहार में उम्र और अवस्था की परवाह किए बिना बहुत सारे पोषण-सघन खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए। एनसीबीआई के अनुसार, जिन लोगों का आहार अलग-अलग होता है, उनकी प्रतिरक्षा क्षमता संतुलित आहार लेने वाले लोगों से 5 से 10 प्रतिशत तक कमजोर होती है। इसके अलावा, व्यायाम करना कभी न भूलें। सक्रिय होना चाहिए और सप्ताह में 5 दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए। https://www.kanvkanv.com

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बैली फैट को कम करने में अंडा है बेहद कारगर, अपनाएं ये रेसिपी

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नई दिल्ली। प्रोटीन की जरूरत को पूरा करने के लिए सबसे अच्छा स्रोत है अण्डा। प्रोटीन शरीर का वजन घटने के लिए जरूरी माना जाता है। शरीर का मेटाबॉलिज्म भी प्रोटीन से ठीक रहता है। इसके अलावा ये बैली फैट भी कम करता है। अण्डे में कई मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। अंडा खाने से आप आसानी से वजन घटा सकते हैं।

अंडा नें कम मात्रा में कैलोरी पाई जाती है साथ ही इसे खाने से काफी समय तक पेट भरा रहता है। अंडे में प्रोटीन, आइरन, फ्रॉसफोरस और कई विटामिन पाए जाते हैं। वेट लॉस डाइट में अंडा खाने का मतलब है आप बिना अपने शरीर को कमजोर करे वजन भी घटा रहे है और आपके शरीर को जरूरी न्यूट्रिएंट भी मिल रहे हैं। यहां हम आपको कुछ ऐसे ही हेल्दी अंडा रेसिपी बता रहे हैं जिससे आपका बेली फैट जल्द घटेगा

स्क्रैम्बल्ड एग

स्क्रैम्बल्ड एग बनाने में बहुत आसान है ये वजन घटाने के साथ आपको हेल्दी भी रखता है। साथ ही इस आप फ्रूट्स, कच्ची सब्जियां किसी के साथ भी खा सकते हैं।

ऑमलेट

ऑमलेट अंडे की सबसे फेमस रेसिपी है। इसे आप अपने हिसाब से बना सकते हैं।

एग बिद बीन्स

बीन्स प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत है। इसे आप अंडे के साथ बना सकते हैं। इसे साथ में बनाएं और खाएं। इसे खाने से काफी समय तक भूख नहीं लगती।

अंकुरित सलाद के साथ एग

अंकुरित सलाद के साथ एग आपकी सेहत का भी ख्याल रखता है और साथ ही आपको वजन घटाने में भी मदद करता है। ये खाने में टेस्टी और कैलोरी फ्री भी होता है। इस आलेख में दी गई जानकारी का हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य व सटीक है तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। https://www.kanvkanv.com

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