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जानें क्या है लीच थेरेपी, क्या हैं इसके फायदे और कैसे करती है ये काम

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नई दिल्ली । जोंक या लीच के बारे में आमतौर पर लोगों को इतना ही पता है कि वो शरीर पर चिपक जाएं तो सारा खून चूस जाते हैं लेकिन इस बात का ज्ञान कम ही लोगों को होगा कि जोंक कई तरह के उपचार में फायदेमंद होते है। लीच थेरेपी से रोगों का इलाज प्राचीन काल से होता आया है। इससे कई ऐसे रोगों का उपचार भी संभव है जिसके इलाज़ में बहुत अधिक पीड़ा होती है या पैसा लगता है।
लीच थेरेपी यानि जोंक चिकित्‍सा को प्राचीन काल से ही इस्‍तेमाल किया जाता है। उन्‍नीसवीं सदी की शुरूआत में यह थेरेपी उच्‍चतम लोकप्रियता पर पहुँच गई थी। लेकिन बींसवी सदी में लोगों के बीच इसका क्रेज नहीं रहा।
आधुनिक विज्ञान ने इसकी ओर ध्‍यान नहीं दिया और तर्क के आधार पर चिकित्‍सा करनी शुरू की दी। लेकिन हाल ही में कुछ शोधकर्ताओं ने पाया यह चिकित्‍सा पद्धति काफी स्‍वास्‍थ्‍यकारी है।
आइये जानें लीच थेरेपी के रोचक तथ्य:-
क्या है लीच थेरेपी?
यह बहुत ही आसान लेकिन प्रभावी थेरेपी है। इसमें जोंक को शरीर पर रख दिया जाता है। जोंक खून चूसना शुरू कर देती है और धीरे-धीरे सारा दूषित खून पी जाती है। इस उपचार में 45 मिनट तक का समय लग सकता है। यह तरीका दाद, कील-मुहांसे, खुजली, गंजापन, डायबिटीज आदि बीमारियों में बहुत ही राहत भरा है। इस थेरेपी के माध्यम से हमारे शरीर का गंदा खून निकल जाता है और हमारे शरीर में ऑक्सीजन वाले खून का संचार होता है।
कब से हो रही उपयोग?
भारत में प्राचीन समय से ही जोंक थेरेपी से इलाज किया जाता रहा है। खून से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए उस जगह को जोंक से चुसवाया जाता है जिसे रक्तमोक्षण की विधि कहा जाता है। रक्तमोक्षण का अर्थ होता है रक्त को शरीर से मुक्त (बाहर) करना अर्थात जिस विधि के द्वारा शरीर से अशुद्ध रक्त को बहार निकाला जाता है वह क्रिया रक्तमोक्षण कहलाती है।
लीच थेरेपी की प्रक्रिया
लीच थेरेपी यह बहुत ही आसान लेकिन प्रभावी थेरेपी है। इसमें जोंक को शरीर पर रख दिया जाता है। जोंक खून चूसना शुरू कर देती है और धीरे-धीरे सारा दूषित खून पी जाती है। इस उपचार में 45 मिनट तक का समय लग सकता है। यह तरीका दाद, कील-मुहांसे, खुजली, गंजापन, डायबिटीज आदि बीमारियों में बहुत ही राहत भरा है। इस थेरेपी के माध्यम से हमारे शरीर का गंदा खून निकल जाता है और हमारे शरीर में ऑक्सीजन वाले खून का संचार होता है।
मिल सकती है गंजेपैन से रहत
गंजेपन से राहत द‍िलाए जोंक थेरेपी रक्तसंचार बेहतर करने के लिए भी जाना जाता है। यही कारण है कि जोंक थैरेपी को सिर पर जहां बाल कम है, जैसे स्थान पर लगाया जाए तो वहां बाल आने की उम्मीद बढ़ जाती है। दरअसल जोंक थैरेपी से शरीर में पौष्टिकता बढ़ती जो बालों के लिए आवश्यक है। यही नहीं यह बालों को जड़ों से मजबूत करते हैं जिससे बालों को उगने में आसानी होती है। जो लोग डैंड्रफ या फंगल संक्रमण के कारण गंजेपन से जूझ रहे हैं, उनके लिए जोंक थैरेपी एक रामबाण इलाज है। जोंक का लार फंगल संक्रमण को खत्म करने में मदद करता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए है लाभदायक:-
जोंक के लार में पाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण तत्व है हिरुडिन। इस वजह से इसे हिरुड‍िन थैरेपी भी कहा जाता है। यह तत्व रक्त में थक्के जमने नहीं देता। जबकि डायबिटीज के मरीजों का रक्त गाढ़ा होता है जिससे रक्त में थक्के जमने की आशंका बढ़ जाती है। अतः हिरुडिन उनके लिए बेहद जरूरी तत्व है। यही नहीं हिरुडिन में रक्त को फीका करने की क्षमता भी होती है मतलब साफ है कि इसके जरिये रक्त के थक्के जमने की आशंका में गिरावट आती है जिससे शरीर में रक्त प्रवाह सहजता से हो पाता है। साथ ही हृदय पर इसका कम प्रभाव पड़ता है।
सावधानी बरतना है आवश्यक:-
लीच थेरेपी को लेने से पहले किसी डॉक्टर की सालाह लेना जरूरी है। कई लोगों को जोंक की लार से एलर्जी होने की शिकायत होती है। वहीं, जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर है, उन लोगों को थेरेपी लेने से बचना चाहिए। इसी तरह अगर बीमारियों के उपचार के लिए पहले से आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं या किसी दवा का कोर्स चला रहे हैं तो एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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दुनिया की सबसे सस्ती कोरोना टेस्टिंग किट ‘कोरोश्योर’ लॉन्च

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नई दिल्ली। दुनिया की सबसे सस्ती आरटी-पीसीआर आधारित कोरोना वायरस टेस्टिंग किट ‘कोरोश्योर’ बुधवार को लॉन्च हो गई। किट को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली ने तैयार किया है। इसे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने मंजूरी दी है।

निशंक बोले- ये ऐतिहासिक अवसर

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस किट को लांच करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने किट विकसित करने के लिए आईआईटी दिल्ली के सभी शोधकर्ताओं को बधाई दी। निशंक ने कहा कोरोना संकट के दौरान देश भर के अनुसंधान करने वाले संस्थानों ने बेहद अनुकरणीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि भारत में जिस प्रकार से अनुसंधान हो रहे हैं उससे सम्पूर्ण विश्व को यह संदेश जा रहा है कि कोरोना के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत कही से भी पीछे नहीं है।

आईआईटी दिल्ली ने न्यूटेक मेडिकल डिवाइसेस संग तैयार की किट

आईआईटी दिल्ली ने कोविड-19 के टेस्ट के लिए किफायती कोरोश्योर टेस्ट किट का उत्पादन दिल्ली की कंपनी न्यूटेक मेडिकल डिवाइसेस के साथ मिलकर तैयार किया है। यह किट अधिकृत कोरोना टेस्टिंग लैब में उपयोग के लिए उपलब्ध होगी। यह किट विकसित करने के साथ ही आईआईटी दिल्ली, कोविड-19 परीक्षण पद्धति विकसित करने वाला पहला शैक्षणिक संस्थान बन गया है।

650 रुपये में हो जाएगा टेस्ट

इस आयोजन के दौरान कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) जतिन गोयल ने कहा कि किट की कुल लागत लगभग 650 रुपये है। यह निश्चित रूप से अन्य देशों से आयात किए जा रहे अन्य जांच परीक्षणों की तुलना में बहुत सस्ती है। उन्होंने कहा कि किट का बेस प्राइस 399 रुपये है और इसमें आरएनए आइसोलेशन और लेबोरेटरी चार्ज जोड़ने के बाद भी इसके द्वारा किया जाने वाला टेस्ट काफी कम लागत अर्थात लगभग 650 रुपये में होगा। कोरोश्योर को आईआईटी दिल्ली से प्रोब फ्री आरटी-पीसीआर आधारित कोविड-19 किफायती टेस्ट किट के लिए नॉन एक्सक्लुसिव लाइसेंस मिला है। बड़े पैमाने पर किट के निर्माण और असेंबलिंग कार्य सैटेलाइट सिटी, फरीदाबाद में कोविड-19 टेस्टिंग किट के लिए स्थापित विशेष यूनिट में किया जाएगा।

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Arogya Setu App : पहचान बताए, जान बचाए

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  • कोरोना रूपी आपदा में इस ऐप के माध्यम से आप बचा सकते हैं खुद को, परिवार को
    • यह ऐप 500 मीटर के दायरे में कोरोना संक्रमित मिलने पर आपको अलर्ट करता है
    • आप हाल में किन कोरोना संक्रमित लोगों से मिले हैं, यह भी बताता है।

लखनऊ। कोरोना वायरस के बढ़ते फैलाव के मद्देनजर आज इंसान, इंसान के प्रति सशंकित दिख रहा है। हर शख्स इसी डर में है कि वह जिससे मिल रहा है या जिसके पड़ोस में रह रहा है वह कोरोना संक्रमित तो नहीं है। आपका यह डर आरोग्य सेतु ऐप (Arogya Setu App) दूर कर सकता है। यह ऐप आपको अलर्ट करता है कि आपके आस-पास कितनी दूरी पर कोरोना संक्रमित है। इस तरह आप खुद को, अपने परिवार और दूसरों को सुरक्षित कर सकते हैं।

कोरोना से लड़ने के लिए आरोग्य सेतु ऐप (Arogya Setu App) को सरकार ने सबसे अहम हथियार बताया है। आरोग्य सेतु ऐप (Arogya Setu App) कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग ऐप है जो बखूबी आपके 500 मीटर से 10 किलोमीटर के बीच किसी संक्रमित के होने के बारे में अलर्ट करता है। यह ऐप आपकी सेहत के बारे में भी बताता है। आप किन लोगों से मिले हैं…उनकी सेहत के बारे में भी अलर्ट करता है।

आरोग्य सेतु ऐप (Arogya Setu App) से आप जरूरत पड़ने पर यह भी जान सकते हैं कि कोरोना का टेस्ट करने वाली लेबारोट्री आपसे कितनी दूर है। इस ऐप के माध्यम से आप कोरोना से बचाव के तरीके के बारे में जागरूक हो सकते हैं। साथ ही देश और सभी प्रदेशों के कोरोना का लेटेस्ट अपडेट भी जान सकते हैं।

अपर मुख्य सचिव- स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद के मुताबिक अब तक इस ऐप के माध्यम से विभाग को तकरीबन दो लाख अलर्ट मिले, जिनपर फोन करके लोगों का हाल पूछा गया और उनमें से कुछ लोग कोरोना लक्षण वाले मिले, जिनका टेस्ट भी कराया गया।

कैसे काम करते हैं कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग ऐप?

कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग ऐप लोकेशन और ब्लूटूथ आधारित होते हैं। ब्लूटूथ आधारित ऐप सोशल डिस्टेंसिंग की जांच करता है, क्योंकि ब्लूटूथ की रेंज 10 मीटर तक होती है और सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग के लिए छह मीटर की दूरी निर्धारित की है, जबकि कई शोध में इसे आठ मीटर भी बताया गया है। 10 मीटर की रेंज में किसी के संपर्क में आने पर ब्लूटूथ आधारित ऐप लोगों को अलर्ट करते हैं। लोकेशन आधारित ऐप्स की बात करें तो यदि आपके फोन में ऐसे ऐप्स हैं और आप किसी कोरोना संक्रमित इलाके में जाते हैं तो ऐप आपको अलर्ट करेगा।

कैसे काम करता है आरोग्य सेतु ऐप?

अब बात करें केन्द्र सरकार के आरोग्य सेतु ऐप की तो इस ऐप को सरकार ने दो अप्रैल को लॉन्च किया था और अब तक इसके यूजर्स की संख्या 14.18 करोड़ के पार पहुंच गई है। यह ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों डिवाइस के लिए उपलब्ध है। आरोग्य सेतु ऐप (Arogya Setu App) लोकेशन आधारित ऐप है। कोई भी स्मार्ट फोन यूसर इस ऐप को अपने मोबाइल में प्ले स्टोर में जाकर डाउनलोड कर सकता है।

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हर रोग की दवा घर में, सही से करें प्रयोग तो कोरोना के साथ इन रोगों से भी ​मिलेगी मुक्ति

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आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, यदि दिनचर्या नियमित कर खानपान पर रखें ध्यान, तो नहीं जाना पड़ेगा अस्पताल

बरसात में पानी में गंदगी की संभावना ज्यादा, इस कारण उबालकर ही पीएं पानी

लखनऊ। यदि सजग ढंग से अपने घर में मिलने वाले खाद्य पदार्थ का ही हम सही ढंग से प्रयोग करें तो कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ ही तमाम रोगों से मुक्ति मिल सकती है। हमें अस्पताल जाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। हर रोग की दवा हमारे घर में उपलब्ध है, बशर्ते उसका उपयोग सही ढंग से और सही समय पर हो। पानी, हल्दी, सोंठ, तुलसी, गिलोय मुलेठी, गाय का घी आदि सब प्रकृति की दी हुई अनमोल रत्न हैं। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार इनका सही प्रयोग करने मात्र से शरीर हमेशा निरोग बना रह सकता है।

आयुर्वेदाचार्य एसके राय का कहना है कि बरसात के मौसम में सबसे अधिक पानी के प्रयोग में हमें ध्यान देना चाहिए। हमारे शरीर में सबसे अधिक पानी ही है और बरसात में यह प्रदूषित होता है। इसके लिए हमें हमेशा गर्म पानी पीने की आदत डालनी होगी। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि पानी ज्यादा पीएं, लेकिन हमेशा गर्म करके। इससे गले की खिच-खिच हमेशा दूर रहेगा। साथ ही आक्सीजन की मात्रा हमेशा संतुलित रहेगी।

नाक में डालें गाय का घी

दूसरा रामबाण औषधी है गाय का घी। डाक्टर एसके राय ने बताया कि गाय का घी खाने में प्रयोग करने के साथ ही नाक में भी हल्का गरम करके डालना चाहिए। इसे डालने से वायरस मर जाते हैं। उन्होंने बताया कि वायरस हमेशा नाक व गले से ही शरीर में प्रवेश करते हैं। इस कारण नाक में घी डालने पर वे भीतर जाने से पहले ही खत्म हो जाते हैं। विशेषकर कोरोना संक्रमण से बचने के लिए यह कारगर उपाय है।

तुलसी में मिलता है कैरोटीन, खांसी व बुखार में रामबाण

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पंचकर्म विभाग के विभागध्यक्ष जेपी सिंह ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि अधिकांश घरों में तुलसी है। तुलसी की पत्ती में एस्कार्बिक एसिड व कैरोटीन होता है। यह खांसी, बुखार सर्दी के लिए रामबाण है। इसका काढ़ा बनाकर पीने से कई रोग दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही यह पुरुषत्व को भी बढ़ाने में बहुत सहायक है।

लहसून बढ़ाता है इम्यूनिटी, कोलेस्ट्राल की मात्रा भी करता है कम

आयुर्वेदाचार्य डाक्टर जेपी सिंह ने बताया कि लहसून शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने के साथ ही बात रोग में बहुत ही फायदेमंद है। इसे दूध में पकाकर लेने से सर्दी जुकाम दूर होने के साथ ही कोलेस्ट्राल की मात्रा कम होती है। यह खून को पतला करता है। इसे हर दिन चार-पांच जवा लिया जाना चाहिए। इससे भूख भी बढ़ती है। इसे घी या तेल में भूनकर लेने पर ज्यादा बेहतर होता है। कच्चा लेने पर कभी-कभी गैस की शिकायत भी होने की संभावना रहती है।

हल्दी कई रोगों से देगी मुक्ति

हल्दी को संस्कृत में हरीद्रा भी कहते हैं। डाक्टर जेपी सिंह ने हिन्दुस्थान समाचार से बताया कि हल्दी गठिया रोग, पेट के तमाम रोगों के साथ ही चोट पर भी लगाया जाता है। यह शरीर में रक्त को साफ रखता है। डाक्टर एसके राय ने कहा कि एंटी एलर्जिक है। एंटी वायरल भी है। इस कारण इससे वायरल रोगों से निजात मिलती है। इसमें कुकरोमिन पाया जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है। इसके साथ ही इसमें पाया जाने वाला बीटा कापे सेल एंटी कैंसरस है। यह महिलाओं में यूटरस को बल देता है।

काली मिर्च बढ़ाती है भूख, जीरा पाचन क्रिया को करता है ठीक

डाक्टर जेपी सिंह ने अदरक और सोंठ के बारे में बताया कि अदरक उष्ण होता है, जबकि सोंठ की तासिर मधुर होती है। सोंठ इम्यूनिटी को बढ़ाता है और यह तुरंत काम करता है। इसको पका कर प्रयोग करना उपयुक्त होगा। वहीं काली मिर्च में एंटी वायरल तैतरीन पाया जाता है। यह भूख को बढ़ाती है। इसी तरह जीरा को खाली पेट लेने पर पाचन क्रिया अच्छी होती है। इसके साथ ही मोटापा को भी कम करता है। अजवाइन गुड के साथ लड्डू बनाकर कृमि नाशक, एलर्जी में अच्छा काम करता है। भाप से नाक ब्लाकेज दूर होता है। मेथी सुगर में, वजन को कम करता है। गर्भाशय को मजबूती प्रदान करता है।

हर दिन पांच ग्राम सोंठ का करें प्रयोग

डाक्टर एसके राय ने बताया कि सोंठ शरीर के अंदर अग्नि को प्रज्ज्वलित करती है। इसमें जिंजबरीन तत्व प्रमुख रुप से मिलता है। इसमें विटामिन ए, बी व सी भी पाये जाते हैं। इससे पाचन क्रिया बढ़ती है। कोरोना काल में दिनभर में पांच ग्राम सोंठ का प्रयोग काफी फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा कि गुड़ का सेवन करने से वात की कमी दूर होती है। इससे ग्लूकोज की मात्रा भी बढ़ाता है।

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