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ग्रीन टी पीने से कम होगा मोटापे का खतरा, जानिए इसके फायदे

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वाशिंगटन। क्या आप भी मोटापे से परेशान हैं। तो आपको जिम जाने की जरूरत नहीं है। हाल ही में किए गए एक शोध में खुलासा हुआ है कि ग्रीन टी पीने से मोटापे का खतरा कम करता है। यही नहीं तबीयत खराब करने वाले अन्य कारकों को भी ग्रीन टी काफी हद तक सहायक है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है। पत्रिका न्यूट्रिशनल बॉयोकेमेस्ट्री में प्रकाशित शोध के अनुसार ग्रीन टी का सेवन करने से वजन कम करने में मदद मिलती है।

ऐसे किया शोध

वैज्ञानिकों ने एक चूहे पर अध्ययन किया। एक चूहे को खाने में दो फीसदी ग्रीन टी दी गई। इस दौरान पाया गया कि ग्रीन टी नहीं लेने वाले चूहों की तुलना में यह चूहा ज्यादा स्वस्थ था और उसके वजन में भी निरंतर रूप से कमी आई। इस शोध के परिणाम से उत्साहित वैज्ञानिक डायबिटीज और हृदय रोगों में ग्रीन टी के फायदों के बारे में पड़ताल करेंगे।

अच्छे बैक्टीरिया बढ़े

शोध के दौरान पाया गया कि ग्रीन टी का सेवन करने वाले चूहों की आंतों में किसी भी तरह की समस्या नहीं हुई। साथ ही उनकी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ी, जो पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। इसके साथ ही आंतों की दीवारों में लीकेज की समस्या भी दूर हुई। अमेरिकी ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता रिचर्ड ब्रूनो ने बताया कि ग्रीन टी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देकर पाचन प्रक्रिया का दुरुस्त करती है जिससे मोटापे के खतरे में कमी आती है।

वजन घटाने में सहायक

ब्रूनो ने बताया, कुछ लोग ग्रीन टी को वजन घटाने में सहायक बताते हैं तो वहीं कुछ वैज्ञानिक इससे सहमत नहीं हैं। हमने इस शोध में यह जानने की कोशिश की कि ग्रीन टी वजन को बढऩे से कैसे रोकती है। ग्रीन टी में केटचिन्स होते हैं, जो सूजन को कम करने, कैंसर को रोकने और हृदय व लीवर संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायक है। https://www.kanvkanv.com

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बारिश में बढ़ जाता है अपेन्डिक्स के दर्द, जानें कारण और उपचार

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नई दिल्ली। अपेन्डिक्स का दर्द काफी असहनीय होता है। गौर करने वाली बात तो यह है कि बारिश के मौसम में यह दर्द और अधिक बढ़ जाता है। इस मौसम में सावधानी की जरूरत रहती है। अपेन्डिक्स लगभग चार-पांच इंच लंबी एक बंद और पतली नली होती है। यह वहां स्थित होती है, जहां छोटी आंत और बड़ी आंत मिलती हैं। सामान्यतया यह पेट के दाएं भाग में नीचे की ओर होती है। अपेन्डिक्स की वैसे हमारे लिए कोई उपयोगिता नहीं है। अपेन्डिक्स का संक्रमण घातक हो सकता है, इसलिए इसे सर्जरी कर निकाल दिया जाता है।

क्या है अपेन्डिसाइटिस

अपेन्डिसाइटिस का अर्थ है अपेन्डिक्स का संक्रमण। ऐसा माना जाता है कि इसकी शुरुआत तब होती है, जब अपेन्डिक्स का दूसरा किनारा अवरुद्ध हो जाता है। यह ब्लॉकेज अपेन्डिक्स में म्युकस के जमाव के कारण हो सकता है या मल के सेकम से अपेन्डिक्स में प्रवेश करने के कारण हो सकता है। म्युकस या मल कड़ा हो जाता है और ओपनिंग को ब्लॉक कर देता है। ब्लॉकेज होने के पश्चात जो बैक्टीरिया सामान्यतया अपेन्डिक्स में होते हैं, वे अपेन्डिक्स की दीवार पर आक्रमण (संक्रमित) करने लगते हैं। इससे अपेन्डिक्स में सूजन आ जाती है। इसी संक्रमण को अपेन्डिसाइटिस कहते हैं। अपेन्डिसाइटिस अकसर 10 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के बीच में होता है। यह समस्या महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक सामान्य होती है, लेकिन बहुत अधिक चिंता की बात नहीं होती।

क्या हैं कारण

अपेन्डिसाइटिस लिम्फोइड फॉलिकल का आकार बढऩे और चोट आदि लगने से भी हो सकता है। जब अपेन्डिक्स में रुकावट आती है, तब बैक्टीरिया इसमें तेजी से बढऩे लगते हैं। इससे पस का निर्माण होने लगता है। दबाव बढऩे से उस स्थान की रक्त नलिकाएं भी दब सकती हैं।

कैसे शुरू होता है दर्द

इसका दर्द पेट में हल्की मरोड़ के साथ शुरू हो सकता है। बहुत कम मामलों में ऐसा देखा जाता है कि इसके लक्षण दिखाई देने के 24 घंटों के भीतर अपेन्डिक्स फट जाए। हालांकि जिन लोगों में लगातार 48 घंटे तक अपेन्डिसाइटिस के लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें से 80 प्रतिशत लोगों में यह फट जाता है। ऐसी स्थिति घातक हो सकती है।

सर्जरी ही है उपचार

अपेन्डिसाइटिस का एकमात्र उपचार सर्जरी है। सर्जरी के पारंपरिक तरीके में एक बड़ा-सा लंबा कट लगाया जाता है। दूसरा तरीका है लैप्रोस्कोपी(इसमें 3-5 मिलीमीटर के छेद किये जाते हैं और शरीर के अंदर देखने के लिए दूरबीन का प्रयोग किया जाता है)। यह एक दिन की प्रक्रिया है।

लक्षणों को जानें

– पेट के निचले भाग में दर्द
– भूख न लगना
– जी मिचलाना
– उल्टी होना
– डायरिया की शिकायत
– कब्ज रहना
– हल्का बुखार रहना।

बढ़ जाता है खतरा

भारत में अपेन्डिक्स के अधिकतर मामले बरसात के मौसम में ही देखे जाते हैं। इन दिनों बारिश होने के कारण वातावरण में अत्यधिक नमी होती है। इस मौसम में बैक्टीरिया और वायरस का संक्रमण बढ़ जाता है, जिस कारण अपेन्डिसाइटिस के मामले भी अधिक होते हैं। इसलिए इस मौसम में ताजा खाना खाएं तथा साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

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ये हैं वो छोटी-छोटी आदतें जिससे कम हो रहा आपका स्पर्म, बढ़ाने के लिए इन असरदार चीजों को खाएं

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हेल्थ डेस्क। आज के समय में भागदौड़ भरी जिंदगी के चलते हम अपनी सेहत का ख्याल नहीं रख पाते हैं। अनियमित जीवनशैली से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मर्दों के लिए एक अहम समस्या है स्पर्म काउंट की। स्पर्म (शुक्राणु) कम और गुणवत्ता ठीक नहीं होने की वजह से फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ रहा है।

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि अगर आप परेशानी से जूझ रहे हैं या फिर आगे भविष्य में बचना चाहते हैं तो जानिए ये 6 आदतों को और कोशिश करें इनको अपने जीवन से न करने की। इसके साथ ही हम आपको कुछ ऐसे फूड्स बताएंगे जो आपके स्पर्म काउंट के लिए बहुत ही लाभकारी है। बताए गए फूड्स को रेग्युलर डायट में शामिल करने पर मर्दों का स्पर्म काउंट बढ़ेगा साथ ही स्पर्म की क्वांटिटी भी अच्छी होगी।

1. कार्बोनेटिड ड्रिंक्स

सबसे पहले कार्बनडाई ऑक्साइड से भरी ड्रिंक्स का ज़रूरत से ज़्यादा सेवन करना बांध करें या उसको तुरंत ही छोड़ दें। ये ड्रिंक्स आपके स्पर्म काउंट को कम कर रही हैं। सिर्फ ये ही नहीं बल्कि बीयर से भी इसकी मात्रा कम होती है। क्योंकि इन ड्रिंक्स में शुगर की मात्रा ज़्यादा होती है जो स्पर्म बनने की कार्यप्रणाली में रुकावट लाती है।

2. फोन को रखने की जगह

ज़्यादातर लोग अपने मोबाइल को अपनी पैंट की जेब में ही रखते हैं, जो सही मायने में नहीं करना चाहिए। क्योंकि फोन से निकलने वाली खतरनाक रेडिएशन शरीर में स्पर्म के प्रजनन को कम करती हैं। रिसर्च बताती हैं कि फोन को पैंट की जेब में रखने से स्पर्म 9 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं।

3. पैरों पे लैपटॉप को रखकर काम करना

एक खबर के मुताबिक ‘टेस्टिकल्स (testical) यानी अंडकोष शरीर के तापमान से लगभग दो डिग्री ठंडे रहने चाहिए। मतलब अगर आप अपनी गोद में लैपटॉप को रखते हैं तो इसकी गर्म हवा से आपके स्पर्म मर सकते हैं। इसीलिए लैपटॉप को टेबल पर रखकर ही काम करें।

4. गरम पानी से नहाना

आमतौर पे सर्दियों में हम सभी गरम पानी से नहाना पसंद करते है पर क्या आपको पता है जिस तरह लैपटॉप से नुकसान पहुँचता है ठीक उसी तरह इससे भी आपके स्पर्म मर सकते हैं और इसका असर आपके जीवन में धीरे-धीरे दिखता है।

5. नींद की कमी

जिस तरह आपके शरीर और दिमाग दोनों को आराम चाहिए, ठीक उसी तरह आपके स्पर्म को भी रेस्ट की ज़रूरत होती है। सात से आठ घंटे की नींद आपके शरीर के स्पर्म काउंट को बढ़ा सकती है। अगर आप किसी भी कारण सात घंटे की नींद ना ले पाएं तो योगा करके जरिए स्पर्म को बढ़ा सकते हैं।

6. टाइट कपडे खासतौर पे पैंट

टाइट पैंट पहनने से ना सिर्फ आपके प्राइवेट पार्ट्स में जलन और खुजली की परेशानी होती है बल्कि ये आपके स्पर्म के लिए भी अच्छा नहीं है। टाइट पैंट से आपके टेस्टिकल्स यानी अंडकोष आपकी टांगों के पास रहते है, जिससे वो पूरे दिन शरीर की गर्मी मिलने से गरम बने रहता है और जिससे उनको गर्मी मिलते है नतीजा होता है स्पर्म का मरना। ये 6 बातों के इलावा बहुत सी चीज़े और है जो स्पर्म कॉउंट काम कर रही हैं, जैसे स्मोकिंग, स्ट्रेस, शराब और अननैचुरल सेक्स से भी स्पर्म की मात्रा कम होती है।

मर्दों के लिए खास : स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खाएं ये असरदार चीजें

इन खाद्य पदार्थों में है विशेष गुण

केले में ब्रोमेलिन एंजाइम, विटामिन सी, ए और बी 1 पाया जाता है। ये पुरुषों में शुक्राणु पैदा करता है। सेक्स हार्मोन्स को नियंत्रित करने में मदद करता है।
टमाटर में मौजूद लाइकोपिन स्पर्म काउंट, क्वालिटी और स्ट्रक्चर को बेहतर करता है। टमाटर को ऑलिव ऑयल में पकाकर खाने से काफी फायदा होता है।
पालक में मौजूद फॉलिक एसिड स्वस्थ शुक्राणु के उत्पादन में मदद करता है। शरीर में फॉलिक एसिड की कमी होने पर अस्वस्थ स्पम्र्स पनपते हैं। जिसके कारण स्पम्र्स को एग्स तक पहुंचने में दिक्कत होती है।

डार्क चॉकलेट्स

डार्क चॉकलेट्स स्पर्म काउंट बढ़ाने में मदद करती है। डार्क चॉकलेट में अमिनो एसिड्स, एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो पुरुषों की फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाले फ्री रेडिकल्स को दूर करने में मददगार होते हैं। लेकिन ज्यादा चॉकलेट नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे वजन बढ़ता है, जिससे शरीर में टेस्टोस्टेरॉन नामक हार्मोन का संतुलन को बिगड़ जाता है, जिससे नतीजतन स्पर्म काउंट कम होता है। दिनभर में एक डार्क चॉकलेट का एक टुकड़ा काफी में अमिनो एसिड्स पाए जाते हैं।

दो लहसुन की कलियां खाना काफी

लहसुन में एलिसिन पाया जाता है, जो पुरुषों के सेक्सुअल ऑर्गन में ब्लड फ्लो को बढ़ाता है। स्पर्म को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। लहसुन में सेलेनियम भी होता है जो शुक्राणुओं की गतिशीलता को बढ़ाता है। प्रतिदिन दो लहसुन की कलियां खाना काफी होगा। डायट में अखरोट भी शामिल कर सकते हैं। इसमे मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड्स मेल ऑर्गन्स में ब्लड फ्लो बढ़ाने में हेल्पफुल है। रोज एक  मुट्ठी अखरोट खाने से स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता बेहतर होती है। https://www.kanvkanv.com

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फ्रोजन शोल्डर से बचने के लिए करें ये व्यायाम, जानें कारण और बचाव

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नई दिल्ली। कंधे और जोड़ों के दर्द से काफी लोग पीडि़त हैं। ऐसी समस्या सूजन और अकडऩ से होती है। यह दर्द लंबे समय तक लोगों को परेशान करती है। ऐसा अक्सर देखा जाता है कि रात में नींद के वक्त ज्यादा दर्द होता है और नींद आने में भी समस्या होती है। सबसे बड़ी बात यह कि फ्रोजन शोल्डर की समस्या ठीक होने में समय लगता है। इस लेख में हम आपको कुछ व्यायाम बताएंगे जो कंधे के दर्द में राहत देता है।

काम करने में भी समस्या

सरल शब्दों में कहें तो फ्रोजन शोल्डर यानी कंधे का जाम हो जाना। इसमें कंधे के जोड़ के चारों ओर के ढीले बैग (कैप्सूल) में सूजन और अकडऩ आ जाती है। कई बार दर्द इतना बढ़ जाता है कि रोज के काम करने में भी समस्या होने लगती है। फ्रोजन शोल्डर के कई कारण हो सकते हैं। प्राइमरी फ्रोजन शोल्डर का सटीक कारण ज्ञात नहीं है। मधुमेह, थाइरॉएड ग्रंथि, पार्किंसन व हृदय रोगों से परेशान लोगों में इसके मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं।

यह भी है कारण

सेकेंडरी फ्रोजन शोल्डर में वो मामले आते हैं, जो कंधे को देर तक एक ही तरह से रखने के कारण होते हैं, जैसे किसी बीमारी (स्ट्रोक या दिल के दौरे की स्थिति में) कंधे का एक ही स्थिति में टिके रहना। कई बार कंधे के हिस्से में चोट लगने या सर्जरी के बाद भी यह समस्या हो जाती है। भारी सामान उठाने या सरकाने के कारण कंधे में हुई तकलीफ भी कई बार बढ़कर फ्रोजन शोल्डर का रूप ले लेती है। पर यह समझना जरूरी है कि कंधे की हर जकडऩ या दर्द फ्रोजन शोल्डर नहीं होते। पुरुषों की तुलना में फ्रोजन शोल्डर के मामले महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलते हैं।

उपचार के तीन चरण

1. इस चरण में तेज दर्द होता है। यह दर्दनाक चरण 2 से 9 महीने तक रह सकता है। दर्द धीरे-धीरे शुरू होता है। शुरुआत में ऊपरी बांह में दर्द होता है और बाद में नीचे तक दर्द आने लगता है। काम करना मुश्किल हो जाता है। दर्द रात में ज्यादा होता है। नींद आने में भी दिक्कत होती है।

2. दर्द में कमी पर अकड़ऩ का बढऩा। यह चरण चार से 12 माह तक रह सकता है। इस चरण में दर्द में कमी आ जाती है, पर अकडऩ बढ़ती जाती है। पीठ या सिर के पीछे हाथ ले जाने में भी दिक्कत होती है। कंधों में कसाव बना रहता है। कंधे का इस्तेमाल कम होने के कारण आसपास की मांसपेशियों में भी अकडऩ रहती है।

3. इसे रिकवरी फेस कहा जाता है। यह पांच से 28 माह तक रह सकता है। इस चरण के दौरान दर्द और कठोरता में सुधार आता है और व्यक्ति हाथ से सामान्य ढंग से काम भी करने लगते हैं। इस तरह कंधों का दर्द पूरी तरह ठीक होने में एक से डेढ़ साल तक का समय लग जाता है।

कंधों के दर्द में करें ये व्यायाम

पेंडुलम स्ट्रेच : जिस कंधे में दर्द है, उससे दूसरे हाथ की हथेली को थोड़ा आगे की ओर झुकते हुए किसी मेज या संदूक पर टिका लें। दर्द वाले कंधे की बाजू को धीरे-धीरे आगे और पीछे ले जाएं। इस व्यायाम को 5 से 10 बार करें।

ट्विस्टिंग आउटवर्ड : कुर्सी पर एक गोल डंडा लेकर सीधे बैठें। कोहनी कंधे की सीध में ही रहें। शरीर को बिना हिलाए, जिस हाथ में दर्द नहीं है, उसे इस तरह साइड की ओर ले जाए, जिससे दर्द वाली बाजू भी उस तरफ जाए। शरीर को न घुमाएं। इसे 5 से 10 बार करें।

आर्म ओवरहेड

1. पीठ के बल सीधे लेटें। जिस कंधे में दर्द है, उस हाथ की कलाई को दूसरे हाथ से पकड़कर सिर के ऊपर की ओर धीरे-धीरे ले जाएं। ऐसा करते हुए पीठ को ना उठाएं। हर रोज 5 से 10 बार करें।

2. पीठ के बल लेटकर घुटने मोड़ लें। हाथों को गर्दन के पीछे और कोहनियां छत की ओर रखें। फिर उन्हें बाहर की ओर फैलाएं। ऐसा 5 से 10 बार करें।

हैंड बिहाइंड बैक : सीधे खड़े होकर दर्द वाली बाजू की कलाई को दूसरे हाथ से पीछे की ओर पकड़ें। धीरे-धीरे बाजू को दूसरी ओर खींचें। कंधे पर स्ट्रेच महसूस होगा। ऐसा करते हुए शरीर को हिलाएं नहीं। आगे इसी व्यायाम को तौलिए के साथ कर सकते हैं। पांच बार दोहराएं।

अपवर्ड स्ट्रेचिंग : इसके लिए ऊपर की ओर रिंग या खूंटी लगानी होगी। दोनों हाथों से रस्सी के एक-एक सिरे को पकड़ लें। सही वाली बाजू से रस्सी को नीचे की ओर खींचते हुए दर्द वाले कंधे को ऊपर की ओर खिंचाव दें। ऐसा 10 बार करें।

फिंगर वॉक : सीधे खड़े होकर दर्द वाले कंधे की बाजू दीवार पर रखें। उंगलियों को चलाते हुए ऊपर ले जाएं। जितना ऊपर की ओर आसानी से ले जा सकते हैं, उतना ले जाएं।

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