Connect with us

हेल्थ

काढ़ा पियें-कोरोना वायरस से बचें, जानिए काढ़ा बनाने की विधि

Published

on

लखनऊ। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी सिस्टम) का मजबूत होना बहुत जरूरी है। इसके लिए हमें अपने खान-पान का विशेष ख्याल रखना होगा। रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा काढ़ा (क्वाथ) पीने की सलाह दी जा रही है । इसके अलावा आयुर्वेदाचार्यों की मानें तो गिलोय का सेवन करके भी हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं। आयुष मंत्रालय द्वारा भी काढ़ा पीने की सलाह दी गयी है ।

लखनऊ के राजकीय आयुर्वेद संस्थान व अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मंदीप जायसवाल का कहना है कि काढ़ा, पूरी तरह से देशी है । कोरोना वायरस के संक्रमण काल के अलावा भी इसके सेवन से फायदा होता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और सर्दी, खांसी जुकाम से बचाने में कारगर होता है।

बुखार के कारण होने वाली शरीर की जकड़न इससे ठीक होती है। वहीं कोरोना से बचाव में यह काढ़ा अहम भूमिका निभा रहा है। वह बताते हैं कि भारतीय चिकित्सा पद्धति विश्व की सबसे प्राचीन पद्धति है । आयुर्वेद ने पूरी दुनिया को चिकित्सा का ज्ञान दिया है । एनर्जी के लिए जो परिवार सॉफ्ट ड्रिंक को वरीयता देते थे आज उन परिवारों सहित युवा पीढ़ी भी आयुर्वेदिक काढ़े को पीना बेहतर समझ रही है।

काढ़ा बनाने की विधि

डॉ. जायसवाल का कहना है कि काढ़ा बनाने के लिए साफ पानी, तुलसी की पत्ती, लौंग, काली मिर्च, छोटी इलायची, अदरक, गुड़ और चायपत्ती की जरूरत होती है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले पानी गर्म होने के लिए रख दें। जब पानी उबलने लगे तब उसमें पीसी हुई लौंग, काली मिर्च, इलायची, अदरक और स्वादानुसार गुड़ ड़ाल दें। थोड़ी देर बाद तुलसी की पत्तियां इसमें डाल दें। उसके बाद चायपत्ती। जब पानी आधा रह जाए तो गैस बंद कर दीजिए। पानी को छान लें। इसे गर्म पीना ही फायदेमंद होता है।

आयुष मंत्रालय के सुझाव

शरीर के इम्यून सिस्टम को दुरूस्त रखने के लिए गुनगुना पानी और आंवला, एलोवेरा, गिलोय, नींबू आदि का जूस पीना चाहिए। इसके अलावा पानी में तुलसी के रस की कुछ बूंदें डालकर अथवा गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पी सकते हैं। तुलसी की 5 पत्तियां, 4 काली मिर्च, 3 लौंग, एक चम्मच अदरक का रस शहद के साथ ले सकते हैं। तुलसी की 10-15 पत्तियां, 5-7 काली मिर्च, थोड़ी दालचीनी और अदरक की चाय भी पी सकते हैं।

हेल्थ

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्‍वीन पर ट्रायल दोबार शुरू होगा,डब्ल्यूएचओ का फैसला

Published

on

By

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्‍वीन दवा पर ट्रायल दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। कार्यकारणी की बैठक में फैसला लिया गया कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्‍वीन दवा पर ट्रायल जारी रहना चाहिए।

डब्ल्यूएचओ के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के महानिदेशक शेखर सी मंडे ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह फैसला जल्दीबाजी में लिया गया था। संगठन को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्‍वीन दवा पर किए जा रहे ट्रायल को अस्थाई रूप से रोकने से पहले इसके प्रारंभिक आंकड़ों की समीक्षा करनी चाहिए।

पहले लगाई गई थी रोक

उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ दिन पहले लैंसेट मैगेजीन में छपे लेख का हवाला देते हुए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्‍वीन (एचसीक्यू) दवा पर चल रहे ट्रायल पर रोक लगा दी थी। लैंसेट के मुताबिक एचसीक्यू का कोरोना पर कोई खास असर नहीं है बल्कि इस दवा का गंभीर साइड इफेक्ट है। इसके बाद आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने कहा था कि जिन लोगों को यह दवा विदेशों में दी जा रही है, उसकी खुराक चार गुना ज्यादा है।आईसीएमआर ने इस दवा को सुरक्षित और असरदार बताया और इसे कोरोना से लड़ रहे सभी योद्धाओं को लेने की सलाह दी है।

Continue Reading

हेल्थ

नाक में डालें गाय का घी, कोरोना संक्रमण को रोकने में मिलेगी मदद

Published

on

आयुर्वेदाचार्य ने कहा, नाक में दो बूंद घी डालने से भीतर जाकर बनाता है जाल, जो वायरस को रोकेगा

लोगों में है भ्रम, घी करेगा गर्म लेकिन यह है पित्त नाशक, कई रोगों से मिलती है मुक्ति

लखनऊ। कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए अभी तक कारगर आयुर्वेद व योगा ही साबित हो रहा है। कहीं काढ़ा तो कहीं प्राणायाम कर लोग इम्यूनिटी को बढ़ा रहे हैं। संक्रमण से बचने के लिए मास्क और ग्लब्स का प्रयोग कर रहे हैं। इसमें एक और कारगर घरेलू दवा है गाय का घी। आयुर्वेदाचार्य के अनुसार इसको नाक में दो बूंद हर रोज डालने से संक्रमण का खतरा न के बराबर रह जाएगा। इसके साथ ही घी का सेवन भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगा।

वाराणसी बीएचयू के पंचकर्म विभाग के विभागध्यक्ष जेपी सिंह का कहना है कि कोरोना का संक्रमण नाक और मुंह से हो रहा है। यदि नाक में दो बूंद घी डालते हैं तो भीतर जाकर यह एक जाल बना लेता है, जिससे वायरस को भीतर जाने से रोकता है। उन्होंने बताया कि घी नाक में डालने पर किसी भी तरह से नाक माध्यम से जाने वाले वायरस को रोकेगा। इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।

घी का सेवन करने से भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि यदि गाय का घी मिले तो ज्यादा बेहतर है। इसके न मिलने पर भैंस का घी भी फायदा पहुंचाएगा। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से विशेष वार्ता में कहा कि लोगों में भ्रम है कि घी गर्म करता है। इस कारण गर्मी में बहुत लोग घी का सेवन करना बंद कर देते हैं लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। घी पित्त नाशक है। गर्मी के मौसम में पित्त धीरे-धीरे बनने की शुरूआत होती है और घी का सेवन करने से यह नहीं बनेगा। इससे कई रोगों से छुटकारा मिलेगा।  यह गर्मी का नाशक भी है।

हल्दी-दूध में काली मिर्च डालने से बढ़ जाती 10 गुना क्षमता

उन्होंने कहा कि दूध हल्दी के साथ लेना चाहिए। इसके साथ ही उसमें काली मिर्च मिलाकर लें। हल्दी व दूध में काली मिर्च मिलाने से उसमें दसगुना ताकत की क्षमता बढ़ जाती है। हल्दी में कुकुमिन पाया जाता है और यह काली मिर्च में पाया जाने वाला कैफरिन के साथ मिलकर एब्जार्सन बढ़ जाता है। इसके साथ ही दूध-हल्दी के साथ पिपली भी डाला जा सकता है। इससे इससे इसका फायदा करने की क्षमता बढ़ती है।

दिनचर्या का भी रखें ख्याल

डाक्टर जेपी सिंह ने कहा कि प्राणायाम, व्यायाम भी इस वक्त करना चाहिए। इससे अंदरूनी ताकत बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह वायरस कमजोर लोगों को ज्यादा प्रताड़ित कर रहा है। इसको ध्यान में रखकर व्यायाम आदि भी जरूरी है। इसके लिए लोगों को व्यायाम करना भी जरूरी है। लोगों को अपनी दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सुबह उठना, समय से सोना आदि पर ध्यान दे तो काफी हद तक शारीरक रोग मुक्त हो सकता है।

Continue Reading

हेल्थ

दावा : अब इस 1 रुपए की दर्द की दवा से ठीक हो सकेगा कोरोना का मरीज!

Published

on

नयी दिल्ली। सब कुछ ठीक रहा तो तो अब कोरोना के मरीज एक बेहद सस्ती दर्द की दवा से भी ठीक हो सकेंगे। इस दवा का नाम Ibuprofen है। इसकी कीमत मात्र एक रुपए है। बिट्रेन के वैज्ञानिकों ने इस दवा का ट्रायल कोरोना के मरीजों पर शुरू कर दिया है। इससे पहले इस दवा का ट्रायल जानवरों पर किया जा चुका है। जिसमें कोरोना मरीजों के बचने की संभावना 80 फीसदी बढ़ सकती है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन के गाइज एंड सेंट थॉमस हॉस्पिटल और किंग्स कॉलेज के डॉक्टरों का मानना है कि इबुप्रोफेन टेबलेट कोरोना मरीजों की सांस लेने की समस्या में सुधार ला सकती है। डाक्टरों को उम्मीद है कि इससे मरीजों को राहत मिलेगी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फिलहाल ट्रायल के दौरान आधे कोरोना मरीजों को सामान्य इलाज के साथ-साथ इबुप्रोफेन दवा दी जा रही है।

किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर मितुल मेहता का कहना है कि हम ट्रायल इसलिए कर रहे हैं ताकि देख सकें कि हम जो उम्मीद कर रहे हैं, वह असल में भी होगा। कुछ वक्त पहले ब्रिटेन के कमिशन ऑन ह्यूमन मेडिसिन ने अपनी स्टडी के बाद कहा था कि इबुप्रोफेन पैरासिटामोल की तरह ही सुरक्षित है।

Continue Reading

Trending