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गुड़ का सेवन खांसी से अस्थमा तक के लिये है रामबाण, ये होते है फायदे

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हेल्थ डेस्क. गु़ड़ न केवल खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी कोई खज़ाने से कम नही है, सर्दियों में गुड़ पॉवर बूस्टर का कार्य करता है। गुड़ के सेवन से शरीर को उर्जा मिलती है जिसके कारण से इसे सर्दियों में खाने की सलाह दी जाती है। गुड़ न केवल व्यक्ति के शरीर के तापमान को रेगुलेट करता है बल्कि उसे डिटॉक्सिफाई भी करता है। गुड़ में कैलोरी, पानी, सुक्रोज़, चीनी, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, प्रोटीन, विटामिन बी आदि के अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट भी पाया जाता है। जिसके सेवन से हमें अनेक प्रकार की बामारियों से निजात मिलता है। तो आइये जानते है इसके अद्भुद फायदे के बारे में…

1- बहुत अधिक थकान और कमजोरी महसूस करने वाले लोगो को गुड़ बहुत फायदा करता है। गुड़ के सेवन से खाना जल्दी पच जाता है, और इससे शुगर भी नहीं बढ़ता और आपका एनर्जी लेवल भी बढ़ जाता है। जब आपको अधिक थकान महसूस हो तो तुरंत गुड़ का सेवन करें थकान कुछ ही देर में दूर हो जाएगी।

2- अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो गुड़ आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। गुड़ में मौजूद कैल्शियम के साथ फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायता करता है। इसके साथ ही साथ प्रतिदिन गुड़ को अदरक के साथ प्रयोग करने से सर्दियों में जोड़ों के दर्द की समस्‍या नहीं होगी।

3- गुड़ में आयरन बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। जो एनीमिया के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

4- गुड़ में पाचन क्रिया को दुरुस्‍त रखने के साथ ही साथ खून को भी शुद्ध करने के गुण होते हैं। इससे हमारे शरीर के सभी टॉक्सिक पदार्थ आसानी से बाहर निकल जाते हैं। और गैस की समस्या से राहत मिलती है।

5- गुड़ की तासीर गर्म होने के कारण इसके सेवन से जुकाम और खांसी में काफी आराम मिलता है।

6- गुड़ का सेवन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होने वाले पेट दर्द में काफी फायदेमंद होता है। गुड़ आपके पाचन को दुरूस्त रखता है इसलिए पीरियड्स के दौरान गुड़ खाने से दर्द कम होता है और ये आपके शरीर को भी गर्म रखने में सहायता करता है।

7- गुड़ के सेवन से मुहांसे और झुर्रियों की समस्या दूर होती है।

 

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आंखों पर “सुरक्षा कवच” लगा वायरस से लड़ेंगे कोरोना वारियर्स

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नई दिल्ली। कोविड-19 (कोरोना वायरस) से लड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिस, सफाई कर्मचारियों सहित अन्य लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) चंडीगढ़ के शोधकर्ताओं ने सुरक्षात्मक चश्मा बनाया है। इस चश्मे को जिस तकनीक से बनाया गया है जिससे स्वास्थ्यकर्मियों को खतरनाक एरोसॉल के साथ-साथ अन्य निलंबित कणों से बचाया जा सकता है।

पलकों के भीतर आंख की पुतलियों को चिकनाई देने वाली नेत्र श्लेषमला झिल्ली शरीर में एकमात्र आवरण रहित श्लेष्म झिल्ली होती है। आंखें खुलती हैं तो नेत्र श्लेषमला झिल्ली बाहरी वातावरण के संपर्क में आती है जो अनजाने में वायरस के प्रवेश का कारण बन सकती है।

आंखें रहेंगी सुरक्षित

सीएसआईओ के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह सुरक्षात्मक चश्मा इस चुनौती से लड़ने में मदद कर सकता है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला सीएसआईओ द्वारा इस चश्मे के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन के लिए इसकी तकनीक हाल में चंडीगढ़ की कंपनी सार्क इंडस्ट्रीज को सौंपी गई है।

लचीला फ्रेम

इस सुरक्षात्मक चश्मे में लचीला फ्रेम लगाया गया है ताकि यह त्वचा के साथ प्रभावी सीलिंग के रूप में आंखों के ऊपर एक अवरोधक के रूप में कार्य कर सके। आंखों के आसपास की त्वचा को कवर करने में सक्षम इस चश्मे के फ्रेम को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है।

पॉलीकार्बोनेट लेंस

इसमें प्रिस्क्रिप्शन ग्लास भी लगा सकते हैं। इस चश्मे में मजबूत पॉलीकार्बोनेट लेंस और पहनने में आसानी के लिए इलास्टिक पट्टे का उपयोग किया गया है।

डॉ विनोद कराड़ की टीम ने तैयार की तकनीक

सीएसआईओ के ऑप्टिकल डिवाइसेज ऐंड सिस्टम्स विभाग के प्रमुख डॉ विनोद कराड़ के नेतृत्व में संस्थान के शोधकर्ताओं की एक टीम ने मिलकर यह तकनीक विकसित की है। इस चश्मे की तकनीक को विकसित करने के लिए उद्योगों और संबंधित हितधारकों के सुझावों को भी शामिल किया गया है।

आम लोगों को भी होगा उपलब्ध

सार्क इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग पार्टनर अनिल सहली ने कहा है कि कंपनी इस चश्मे की मार्किटिंग विभिन्न वर्गों के उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर करेगी, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों के अलावा पुलिसकर्मी, सार्वजनिक कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी और आम लोग शामिल हैं।

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थूक का इस्तेमाल रोकिए, संक्रमण से बचिए

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सावधानी ही सुरक्षा
– नोट गिनते व लिफाफे पर टिकट चिपकाते वक्त थूक का प्रयोग न करें
– छोटी-बड़ी हर सावधानी से ही कोरोना के संक्रमण से बचाव संभव
– सार्वजानिक स्थलों पर इसी के चलते थूकने पर लगा पूर्ण प्रतिबन्ध

लखनऊ। कोविड-19 (कोरोना वायरस) के संक्रमण से बचने के लिए हर छोटी-बड़ी सावधानी बरतने में ही खुद के साथ घर-परिवार और समुदाय की भलाई है । इसी के चलते सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को इन सभी बिन्दुओं पर समय-समय पर जागरूक भी किया जाता रहा है ।

इसी कड़ी में इस बारे में भी जागरूक किया जा रहा है कि अब पहले जैसा वक्त नहीं रहा कि नोट गिनते, लिफ़ाफ़े पर टिकट चिपकाते, टिकट बेचते या खेलते समय गेंद पर थूक का इस्तेमाल किया जाए । कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए इन आदतों को इस समय छोड़ने में ही सभी की भलाई है । यह छोटी-छोटी सलाह हो सकता है सुनने में अटपटी लगें लेकिन संक्रमण से बचाने में यह सब लाख टके की हैं ।

सावधानी बरतने की जरूरत

​बैंक या बाजार में रुपयों के लेनदेन से जुड़े लोगों को इस कोरोना काल में नोटों को गिनते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है । नोटों को गिनते समय थूक का कतई इस्तेमाल न करें क्योंकि वह नोट न जाने कितने हाथों से होते आप तक पहुंचे हों । ऐसे में कोरोना के संक्रमण का खतरा बहुत ही बढ़ जाता है ।

नोट गिनने के बाद साबुन से धोएं हाथ

इसके लिए पानी का इस्तेमाल करना ही ठीक रहेगा । इसके अलावा नोटों को गिनने के बाद हाथों को साबुन-पानी या सेनेटाइजर से अच्छी तरह से अवश्य साफ़ करें । बैंककर्मी इसीलिए अधिकतर नोट गिनने की मशीन का इस्तेमाल करते हैं और जहाँ हाथों से गिनने की बात आती है तो ग्लब्स का इस्तेमाल करते हैं और हर लेनदेन के बाद हाथों को सेनेटाइज भी करते हैं । इसके अलावा इन्हीं खतरों को भांपते हुए डिजिटल भुगतान पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है ।

टिकट चिपकाते समय न करे थूक का इस्तेमाल

​लिफ़ाफ़े पर टिकट चिपकाते समय और अखबार या किताब के पन्ने पलटते वक्त भी आप भूलकर भी थूक का इस्तेमाल न करें । कोरोना के संक्रमण का सांस की नली तक पहुँचने का यह बहुत बड़ा कारण बन सकता है ।

बदलें पुरानी आदत

इसी तरह टिकट बेचने वाले चाहे वह बस कंडक्टर हों या सिनेमा हाल के टिकट काउंटर पर बैठे लोग या पार्किंग का टिकट देने वाले, उनको भी अपनी इस पुरानी आदत को बदले वक्त में छोड़ना बहुत ही जरूरी हो गया है ।

खिलाड़ी भी रखें ध्यान

इसके अलावा खेल के मैदान में गेंदबाजी कर रहे खिलाड़ी को गेंद में थूक लगाते हुए आपने अवश्य देखा होगा, गेंद की पकड़ को मजबूत करने के लिए उनकी यह आदत मुसीबत में डाल सकती है । गेंद भी कई खिलाडियों के हाथों से होते हुए और सतह को छूते हुए गेंदबाज के हाथों में आती है और ऐसे में उसमें बार-बार थूक का इस्तेमाल करना संक्रमण का कारण बन सकता है ।

सार्वजनिक स्थलों पर थूकना दंडनीय अपराध

​कोरोना वायरस का संक्रमण खांसते-छींकते या थूकते समय निकलीं छोटी-छोटी बूंदों के संपर्क में आने से एक-दूसरे को प्रभावित करता है । इसी को देखते हुए सरकार ने सार्वजनिक स्थलों पर थूकने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा रखी है । ऐसा करना अब दंडनीय अपराध की श्रेणी में माना जाएगा । इसलिए संक्रमण से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि पुरानी आदतों को बदलें और सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही हर छोटी-बड़ी सलाह को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करें।

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बारिश के मौसम कोरोना का ज्यादा खतरा, मॉनसून डाइट में शामिल करें इम्यूनिटी को बूस्ट करने वाली ये 5 चीजें

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हेल्थ डेस्क। इस कोरोना महामारी के दौर में हर कोई अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता और ताकत को बढ़ाने के लिए तरह-तरह की कैप्सूल और खाद्य पदार्थों का प्रयोग कर रहा है। इसके लिए घरों में लोग इम्यूनिटी बढ़ाने वाले फल एवं भोज्य पदार्थों को लाकर रखे रह रहे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में मानसून ने दस्तक दे दी है। इस मौसम में संक्रमण के फैलने का खतरा और भी ज्यादा होता है। ऐसे में आपको अपनी मॉनसून डाइट में इम्यून को बूस्ट करने वाली चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए।

ये चीजें शामिल करें

  • लेमन ग्रास के औषधीय पौधे के बारे में आपने शायद ही पहले कभी सुना होगा. इस पौधे का तेल इम्यून सिस्टम के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. वायरल फीवर (मौसमी बुखार) और खांसी, सर्दी, जुकाम में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. पेट, आतों और यूरीनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन से यह तुरंत राहत दिलाता है.
  • इम्यून को बूस्ट करने में अदरक भी किसी चमत्कारी औषधि से कम नहीं है. इसमें मौजूद एंटी माइक्रोबियल और एंटी फंगल तत्व बॉडी के इम्यून सिस्टम के लिए बेहतरीन है. आप सब्जियों के अलावा जूस, सूप और चटनी में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • हल्दी में एंटी आक्सिडेंट गुण इम्यून को दुरुस्त रखने में कारगर है. एक चम्मच काली मिर्च का चूर्ण, एक छोटी चम्मच हल्दी का चूर्ण और एक चम्मच सौंठ यानी अदरक के पाउडर को एक कप पानी में डालकर गर्म कर लें. जब यह पानी उबलने के बाद आधा रह जाए तो इसे ठंडा करके पिएं.
  • तुलसी में एंटीबॉयोटिक गुण होते हैं जो इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग कर शरीर को वायरस से लड़ने की ताकत देते हैं. एक चम्मच लौंग के चूर्ण और दस से पंद्रह तुलसी के ताजे पत्तों को एक लीटर पानी में डालकर इतना उबालें जब तक यह सूखकर आधा न रह जाए. इसके बाद इसे छानें और ठंडा करके हर एक घंटे में पिएं. आपको वायरल से जल्द ही आराम मिलेगा.
  • धनिया सेहत का धनी होता है इसलिए यह वायरल बुखार जैसे कई रोगों को खत्म करता है. वायरल के बुखार को खत्म करने के लिए धनिया की चाय बहुत ही असरदार औषधि का काम करती है. मॉनसून के मौसम में इसकी चाय आपको रोज सुबह शाम पीनी चाहिए.
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