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हेल्थ

सेहत के लिए फायदेमंद है पालक, आंखो के लिए भी है लाभकारी, जानें इसके और फायदे

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नई दिल्ली। हरी सब्जियां हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। आज हम आपको पालक के बारे में बताने जा रहे हैं। पालक को साग बनाने के अलावा कई तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। यह हमारी शरीर के लिए काफी फायदेमंद है। पालक में शरीर के लिए आवश्यक अमीनो एसिड, विटामिन-ए, फोलिक एसिड, प्रोटीन और लौह तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें बीटा कैरोटिन नामक विटामिन होता है जो आंखो के लिए लाभकारी होता है। इसे सब्जी, सलाद व सूप सभी तरह से बनाकर खाया जा सकता है।

गर्भवती की सेहत

गर्भवती स्त्रियों में फोलिक एसिड की कमी को दूर करने के लिए पालक खाना लाभदायक होता है। इससे हीमोग्लोबिन बढ़ता है। इसमें मौजूद कैल्शियम बढ़ते बच्चों, बुजुर्गों और फीडिंग कराने वाली महिलाओं के लिए फायदेमंद है। इससे याददाश्त भी बढ़ती है।

हृदय रोगों में

पालक में मौजूद फ्लेवेनोएड्स एंटीऑक्सीडेंट का काम करते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर हृदय रोगों से लडऩे में भी मददगार हैं। इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटिन और विटामिन-सी टीबी से बचाता है। यह आर्थराइटिस व ओस्टियोपोरोसिस की आशंका को भी घटाता है।

आंखों के लिए उपयोगी

पालक आंखों के लिए अच्छा होता है। यह त्वचा को रूखा होने से बचाता है। साथ ही बालों को झडऩे से रोकता है। पालक के पेस्ट को चेहरे पर लगाने से झाइयां दूर होती हैं।

डायबिटीज होने पर

एक कटोरी पालक में सात ग्राम कैलोरी होती है जो वजन घटाने में सहायक होती है। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभकारी है। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल व अल्फा लिपोइक एसिड (एंटीऑक्सीडेंट) डायबिटीज के मरीजों में ग्लूकोज की मात्रा कम करने में सहायक है।

खाएं उबला पालक

इसे खाने से शरीर में ‘विटामिन-ए’ की कमी दूर होकर त्वचा व बालों को पोषण मिलता है।

सब्जी

इसमें दाल, प्याज और कम मात्रा में मसाले मिलाकर प्रयोग कर सकते हैं। पनीर मिलाकर सब्जी बनाने से प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है।

सूप

पालक के सूप को आसानी से पचाया जा सकता है। यह पाचनक्रिया को दुरुस्त रखता है। कब्ज के मरीजों के लिए व सर्जरी के बाद पालक खाना लाभकारी होता है।

कब न खाएं

किडनी में पथरी होने पर पालक न खाएं। दरअसल पालक में ऑक्सालेट नामक पदार्थ होता है जो शरीर में मौजूद कैल्शियम के साथ मिलकर कैल्शियम-ऑक्सालेट (किडनी स्टोंस) बनाता है। पालक में प्रोटीन होता है इसलिए ऐसे रोगी जिन्हें ब्लड यूरिया की वजह से घुटनों में दर्द की समस्या हो वे पालक का सेवन न करें। यह वायुकारक होता है इसलिए मानसून में भी खाने से बचें। https://kanvkanv.com

दुनिया

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के ट्रायल पर WHO ने लगाई रोक

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नई दिल्ली। कोरोना महामारी के उपचार के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के ट्रायल पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रोक लगा दी है। WHO के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस कहा कि आमतौर पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोराईक्वीन दवाएं ऑटोइम्यून बीमारियों या मलेरिया के रोगियों के लिए सुरक्षित हैं, लेकिन हार्ट से जुड़ी समस्याओं पर इन दवाओं ने हानिकारक दुष्प्रभाव दिखाए हैं।

हाल में स्वास्थ्य क्षेत्र की मशहूर पत्रिका द लैंसेट में दावा किया गया था कि मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल आने वाली दवा क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का कोविड-19 के मरीजों के इलाज में फायदा मिलने का कोई सबूत नहीं है। उसने रिसर्च का हवाला देते हुए दावा किया था कि मर्कोलाइड के बिना या उसके साथ भी ये दोनों दवाइयों के इस्तेमाल से कोविड-19 मरीजों की मृत्युदर बढ़ जाती है। ये रिसर्च करीब 15 हजार कोविड-19 मरीजों पर किया गया था।

उधर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक रिसर्च में पाया है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन लेने से कोविड-19 से संक्रमण की संभावना कम हो जाती है। इसके बाद भारत सरकार ने कोविड-19 से बचाव के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल को और बढ़ाने का फैसला किया। आईसीएमआर ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल के लिए नई संशोधित गाइडलाइन भी जारी की है।

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कोरोना वैक्सीन: भारत में 6 महीने में शुरू हो जाएगा मानव पर परीक्षण

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नई दिल्ली। कोरोना महामारी से लड़ रहे देश के लोगों के लिए एक अच्छी खबर। भारत में कोरोना की वैक्सीन का मानव पर परीक्षण छह महीने में शुरू हो जाएगा। ये बात रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर के निदेशक और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के प्रमुख डॉ. रजनी कांत ने कही है।

डॉ. रजनी कांत ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि “पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) प्रयोगशाला में वायरस का स्ट्रेन पृथक किया गया है, अब इसका वैक्सीन बनाने में उपयोग किया जाएगा।

इस स्ट्रेन को सफलतापूर्वक भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (बीबीआईएल) में स्थानांतरित कर दिया गया है। उम्मीद है कि कम से कम छह महीनों में वैक्सीन के मानव परीक्षण शुरू हो जाएंगे।”

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रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अपनाएं आयुर्वेद के ये नुस्खे

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फर्रुखाबाद। कोरोना संकट के इस दौर में हलकी-फुल्की खांसी और गले में खराश को लेकर बहुत घबराने की जरूरत नहीं है। मौसम में बदलाव और ठंडा-गर्म खाने-पीने से भी इस तरह की समस्या हो सकती है। इसके लिए अस्पताल जाने की जरुरत नहीं है। इसकी दवा तो आपके किचेन में ही मौजूद है। जरुरत उसे जानने और दूसरों को समझाने की है।  आयुर्वेद के इसी ज्ञान से खुद को सुरक्षित रखने के साथ दूसरों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

पुदीने के पत्ते और काला जीरा से मिलेगा खांसी से निजात

आयुष डाक्टरों का कहना है कि सूखी खांसी व गले में खराश को दूर करने में आयुष का घरेलू उपचार बहुत ही कारगर है। उनका कहना है कि ताजे पुदीने के पत्ते और काला जीरा को पानी में उबालकर दिन में एक बार भाप लेने से इस तरह की समस्या से राहत मिल सकती है।

मिश्री/शहद है फायदेवर

इसके अलावा लौंग के पाउडर को मिश्री/शहद के साथ मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन करने से इस तरह की समस्या दूर हो सकती है । इसके बाद भी दिक्कत ठीक नहीं होती है तभी चिकित्सक की सलाह लें। जानकारी के अभाव में लोग इसके लिए चिकित्सक की सलाह लिए बगैर भी मेडिकल स्टोर से कुछ दवाएं खरीदकर आजमाने लगते हैं। जो बहुत ही नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं

इसके अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के एक से एक नुस्खे आयुर्वेद में मौजूद हैं।जिसको आजमाकर कोरोना ही नहीं अन्य संक्रामक बीमारियों को भी अपने से दूर कर सकते हैं। इसके अलावा इन नुस्खों के कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हैं। भोजन में हल्दी, धनिया जीरा और लहसुन का इस्तेमाल भी इसमें बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके अलावा दूध में हल्दी मिलाकर पीकर, गुनगुना पानी और हर्बल चाय/काढ़ा पीकर भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही योगा, ध्यान और प्राणायाम का भी सहारा लिया जा सकता है।  बदली परिस्थितियों में यही छोटे-छोटे नुस्खे आजमाकर स्वस्थ रह सकते हैं। अभी अस्पताल और चिकित्सक कोविड-19 या कोरोना मरीजों की जांच व देखरेख में व्यस्त हैं। इसलिए अस्पतालों में अनावश्यक दबाव बढ़ाने से बचें और सुरक्षित रहें।
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