Monday, June 27, 2022
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ज्ञानवापी केस: “विवादित स्थल भगवान की संपति, मुसलमानों का कोई अधिकार नहीं”, हिन्दू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाब

नई दिल्ली। ज्ञानवापी केस में आज दोपहर 3 बजे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले हिन्दू पक्ष ने अदालत में अपना लिखित जवाब दाखिल किया। जिसमें दावा किया गया है कि विवादित जगह मस्जिद नहीं, बल्कि भगवान की संपत्ति है। इस पर मुसलमानों का कोई हक नहीं है।

आदि विश्वेश्वर की संपति

हिंदू पक्ष द्वारा अदालत में दायर एक लिखित जवाब में कहा गया है कि यह संपत्ति भारत में इस्लामी शासन से हजारों साल पहले आदि विश्वेश्वर की थी। भगवान की संपत्ति किसी को नहीं दी जा सकती। यह भी कहा जाता था कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने शासक होने के कारण इस पर जबरन कब्जा कर लिया था। लेकिन यह मुसलमानों को संपत्ति रखने का अधिकार नहीं देता है।

विवादित क्षेत्र में कोई मस्जिद नहीं

ज्ञानवापी मस्जिद के मुद्दे पर हिंदू पक्ष ने अपने जवाब में कहा कि हिंदू अपने धार्मिक संस्कारों का पालन करते हैं और सदियों से एक ही स्थान पर परिक्रमा करते रहे हैं। मुगल शासक औरंगजेब ने वक्फ की स्थापना नहीं की थी। विवादित क्षेत्र में कोई मस्जिद नहीं है। हिंदू पार्टी यह भी दावा करती है कि मुस्लिम पार्टी के पास कभी भी संपत्ति का स्वामित्व नहीं था। एडवोकेट कमिश्नर की सर्वे रिपोर्ट पेश होने के बाद माना जा रहा है कि विवादित ढांचे में हिंदू मंदिर का चरित्र है।

मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई

ज्ञानवापी मामले में मुख्य पक्षकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में तमाम पौराणिक ग्रंथों और इतिहास का हवाला भी दिया गया है। कहा जाता था कि पौराणिक और ऐतिहासिक साक्ष्य यह साबित करते हैं कि मस्जिद का निर्माण वहां के मंदिर को तोड़कर किया गया था।

संपत्ति किसी वक्फ की नहीं

सर्वोच्च अदालत में दाखिल जवाब में कहा गया है कि विचाराधीन संपत्ति किसी वक्फ की नहीं है। यह संपत्ति ब्रिटिश कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से लाखों साल पहले देव आदि विश्वेश्वर को सौंपी गई थी और यह देवता की संपत्ति है। पहले से ही देवता के स्वामित्व वाली भूमि पर कोई वक्फ नहीं बनाया जा सकता है।

मस्जिद कमेटी की याचिका खारिज करने की मांग

हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में मस्जिद कमेटी की याचिका को खारिज करने की मांग की है। उनके उत्तर में कहा गया है कि हिंदू कानून के तहत, एक बार देवता में निहित संपत्ति देवता की संपत्ति बनी रहती है और संपत्ति की प्रकृति को नष्ट होने पर भी बदला नहीं जा सकता है।

विवादित ढांचे में एक हिंदू मंदिर का चरित्र

हिंदू पार्टी यह भी दावा करती है कि मुस्लिम पार्टी के पास कभी भी संपत्ति का स्वामित्व नहीं था। साथ ही, एडवोकेट कमिश्नर द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, यह स्पष्ट है कि विवादित ढांचे में एक हिंदू मंदिर का चरित्र है।

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